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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 111270 (ALL)

RAJESH GAUR v. STATE OF U.P.

BAIL/45857/2024 · 2025-08-07

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:134721 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 45857 of 2024 Applicant :- Rajesh Gaur Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Sheshmani Vishwakarma Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज प्रत्ययत्तर शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाय। 2. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सयनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक रद्वाजवेश गगौड ककी ओर सवे मय०अ०सवं० 167/2022, अवंतगरत धिद्वारद्वा 392, 411 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा सयररयद्वावद्वावं, धजलद्वा भदकोहली मम जमद्वानत पर मयक करनवे हवेतय प्रस्तयत वकयद्वा गयद्वा हहै। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तयत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरर मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक प्रथम सझूचनद्वा ररपकोरर मम नद्वावमत नहहीं हहै, दगौरद्वान ववववेचनद्वा आववेदक कद्वा नद्वाम प्रकद्वाश मम आयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान घरनद्वा सवे सवंबवंधधित वकसली भली सवंवदग्धि वस्तय ककी बरद्वामदगली दवशरत नहहीं ककी गयली, जको भली बरद्वामदगली दवशरत ककी गयली हहै , वह पझूररतत फजर्जी हहै तथद्वा उक बरद्वामदगली कद्वा ककोई स्वतवंत्र सद्वाकली नहहीं हहै। आववेदक घरनद्वास्थल पर मगौकवे सवे वगरफ्तद्वार नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे जको भली बरद्वामदगली दवशरत ककी गयली हहै , उसककी वशनद्वाख्त वद्वावदनली/वद्वावदनली ककी पयत्रली सवे नहहीं करद्वायली गयली हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पझूवर कवे 29 आपरद्वाधधिक इवतहद्वाससों कको आज प्रस्तयत प्रत्ययत्तर शपथपत्र कवे प्रस्तर सवं० 6 मम स्पष्ट वकयद्वा गयद्वा हहै। पयनत उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानझून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे अदद्वालत कवे समक खियद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतरवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली। आववेदक वनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम वद० 15.08.2022 सवे कद्वारद्वागद्वार मम वनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तयत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोडद्वा जद्वाय। 6. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पत्रद्वावलली पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यसों एववं पररणस्थवतयसों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबझूतसों ककी प्रकक वत और वकसली भली ठकोस ववरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रली ककी अनयपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रली सवे छवेडछद्वाड ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखितवे हहए मवेरली रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मयक करनवे कद्वा उपययक आधिद्वार हहै। 7. अतत वद्वाद कवे गयर-दकोष पर वबनद्वा ककोई वरप्परली वकए हहए आववेदक कको उपरकोक ववररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतयवष्ट पर व्यवकगत बवंधि -पत्र एववं अधधिक धिनरद्वावश कवे ककोई भली दको प्रवतभझू प्रस्तयत करनवे पर वनम्नधलधखित शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड वदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परलीकर कवे दगौरद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यसों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेगद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयसों व पलीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेगद्वा/धिमकद्वायवेगद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशसों कद्वा पद्वालन करवेगद्वा , वह परलीकर कवे दगौरद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए वनयत वतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोगद्वा तथद्वा परलीकर मम ईमद्वानदद्वारली सवे सहयकोग करवेगद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंत्रतद्वा कद्वा दयरूपयकोग नहली करवेगद्वा और वकसली भली अपरद्वाधधिक गवतववधधि मम धलप्त नहहीं हकोगद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेगद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यसों सवे पररवचत वकसली भली व्यवक यद्वा पयधलस अधधिकद्वाररयसों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेगद्वा न हली उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेगद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यसों कको उजद्वागर करनवे सवे ववरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 8. उपरकोक शतरवं मम सवे वकसली कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परलीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानयसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत्र हहै। Order Date :- 8.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad