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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 10943 (CHH)

STATE OF CHHATTISGARH v. SMT. PHULMANI BAI

ACQA/77/2021 · 2025-09-22

Shri Sanjay Agrawal, Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 4 {Acq. A. No.-77 of 2021} 2025:CGHC:48703-DB अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल क्रमु!क -77 /2021  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-सन्ना, लि/ल-/शपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा1/रज्या तिवेरूद्घ 1. श्री मु फु लमुना ई पुति-स्वेग1या मुहावे र रमु, उम्र-लगभग 47 वेष<, /ति-नागलिसया, तिनावेस -चचर हार, पुलिलस थाना-सन्ना, लि/ल-/शपुर, छत्ती सगढ़ । -----उत्तीरवेदो /अतिभया अपु लथा1/रज्या द्वार : श्री आर०एना० पुस्टी , शसकCया अलिDवे । उत्तीरवेदो /अतिभया द्वार : सEचना नाहाF । यागल पु ठःH मुनाना या न्यायामुEति< श्री स!/या अग्रवेल , न्यायाD श मुनाना या न्यायामुEति< श्री स!/या क मुर /यासवेल , न्यायाD श !! तिनार्ण<या पु ठः पुर पुरिर !! द्वार स!/या क मुर /यासवेल , न्यायाD श 23/09/2025 1. प्रर!तिभक स्र पुर सना गया । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.09.24 10:19:13 +0530 2 / 4 {Acq. A. No.-77 of 2021} 2. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिहा, 1973 कC Dर-378 (1) क हा दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुV तिवेचरर्ण न्यायालया-सत्र न्यायाD श, /शपुर, लि/ल-/शपुर, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमु!क-46/2018 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ श्री मु फुE लमुना ई” मुV पुरिर तिनार्ण<या तिदोना!क-15/02/2019 कC वे[D क चना\ दो गई हा[ । लि/सक हा अतिभया/ना क मुमुल प्रमुतिर्ण ना पु हा]ए अतिभया क स!दोहा क लभ दो हा]ए Dर-302 भर या दोण्ड स!तिहा, 1860 क अपुरD स दोषमु तिकया गया हा[ । 3. याहा थ्या तिनातिवे<वेतिदो हा[ तिक मु_क मुहावे र, अतिभया श्री मु फुE लमुना क पुति रहा । 4. अतिभया/ना क मुमुल स!क्षेपु मुV इस प्रकर हा[ तिक तिदोना!क 13/05/2018 क उभयापुक्षे क पुत्र प्रथा1 रूपुसया (अ.स.-1) अपुना पुत्ना फु लमु ई क सथा शदो समुरहा स वेपुस घर ल\टी और दोपुहार लगभग 02:00 / भ/ना कर रहा था । उस समुया उसकC ना वेष1या पुत्र सEर/मुना /र-/र स र हा]ए "" कहाकर तिचल्लाई । इस पुर प्रथा1 एवे! उसकC पुत्ना त्कल हार आए दोखा तिक मु_क मुहावे र (प्रथा1 क तिपु) ढेकC क पुस आ!गना मुV तिगर पुड़ा हा[, उसक लिसर क पु छ भग स रस्रावे हा रहा था और अतिभया फुE लमुना ई (प्रथा1 कC मु एवे! मु_क कC पुत्ना ) वेहाF पुर खाड़ा था । प्रथा1 द्वार पुEछछ करना पुर अतिभया ना या तिक उसक एवे! मु_क मुहावे र क च तिवेवेदो हा]आ था, मु_क ना उस थाप्पुड़ा मुर था टी!ग क टी स गदो<ना मुV चटी पुहा]lचई । इस स क्षेब्D हाकर अतिभया ना मु_क स टी!ग छ नाकर उसक लिसर क पु छ भग मुV प्रहार तिकया, लि/सस उसकC मु_त्या हा गई । प्रथा1 रूपुसया कC सEचना पुर तिदोना!क 13/05/2018 क मुग< था अपुरD क्रमु!क 40/2018 क प्रथामु सEचना पुत्र पु!/ द्ध तिकया गया । शवे पुर क्षेर्ण करया गया था तिवेसर क रसयातिनाक पुर क्षेर्ण हा भ/ गया, सतिक्षेयाo क याना लिलए गए था मु\क-नाक्श [यार तिकया गया । स!पुEर्ण< तिवेवेचना उपुर! अतिभयाग-पुत्र 3 / 4 {Acq. A. No.-77 of 2021} प्रस् तिकया गया । तिवेचरर्ण पुश्च अतिभया क दोषमु तिकया गया । लि/स इस अपु ल मुV चना\ दो गई हा[ । 5. पुस् सक्ष्या क अनासर तिचतिकत्सक सना ल क मुर लकड़ा (अ.स.-11) ना शवे क पुर क्षेर्ण प्रतिवेदोना क प्रमुतिर्ण कर लिसर क तिपुछल तिहास्स (ऑक्स पु टील क्षेत्र) मुV चटी या हा[ लि/समुV हाड्डी क टीकड़ा हा गए था । प्रतिपुर क्षेर्ण मुV उसना स्वे कर तिकया हा[ तिक यातिदो कई व्याति शर क नाश मुV हा और टी!ग पुकड़ा हा]ए ढेकC क तिकनार पुर पु छ स तिगर /ए, उ चटी आना स!भवे हा[ । मु_क क शर क नाश मुV हाना सतिक्षेयाo द्वार या गया हा[ । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार स्पुष्ट रूपु स याहा तिनाष्कतिष< नाहाF हा[ तिक मुहावे र कC मु_त्या मुनावेघ था । 6. अतिभया क तिवेरूद्घ अतिभया/ना क मुमुल प्रत्याक्षे सक्ष्या पुर आDरिर रहा हा[ और याहा थ्या अतिवेवेतिदो रहा हा[ तिक मु_क, अतिभया क पुति हा[ । उसक स!ना रूपुसया (अ.स.-1) था उसकC पुत्ना फुलमुई ई (अ.स.-5) क प्रत्याक्षे सक्षे या गया हा[, तिक! या दोनाo हा सक्षे न्यायालया ना याना मुV पुक्षेद्रोहा रहा हाy । उल्लाखाना या थ्या हा[ तिक या सक्षे भ उस मुकना मुV तिनावेसर था /हा! मु_क क शवे पुया गया हा[ । घटीना कC /नाकर तिमुलना क लि/ना सतिक्षेयाo क प्रमुखा या गया हा[ उसमुV Dना रमु (अ.स.-3), मु_क क भई घरना रमु (अ.स.-4) और मुl क मुटी ई (अ.स.-6) प्रमुखा हाy लि/न्हाoना भ स्पुष्ट \र पुर अतिभया क तिवेरूद्घ अतिभया/ना मुमुल क समुथा<ना नाहाF तिकया । वे सना सनाई क सक्षे हाy । इसलिलए भ उनाक कथाना मुहात्वेपुEर्ण< नाहाF रहा हा[ । 7. अतिभया क याना क मुमुरण्डमु क आDर पुर / टी!ग कC /ब् तिवेवेचक ना या हा[ उसकC स्वे!त्र सक्ष्या द्वार पुतिष्ट नाहाF हा]ई हा[ । प्रयागशल कC /!च रिरपुटी< प्रदोश< पु -24 क 4 / 4 {Acq. A. No.-77 of 2021} अनासर उस टी!ग मुV ' ' समुEहा क मुनावे र पुया गया हा[ तिक! याहा थ्या स!दोहा स पुर स्थातिपु नाहाF हा]आ हा[ तिक मु_क क मुनावे र भ ' ’ समुEहा क रहा हा । मुमुरण्डमु याना क आDर पुर हालिथायार कC /ब् एक समुथा<नाकर सक्ष्या हा[ लि/स समुथा<नाकर सक्ष्या पुर दोषलिसतिद्ध क आDरिर नाहाF तिकया / सक । 8. इस प्रकर, उपुर सक्ष्या तिवेवेचना क फुलस्वेरूपु याहा न्यायालया पु हा[ तिक अतिभलखा मुV उपुलब्D थ्या और सक्ष्या क दृतिष्टग रखा हा]ए तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार / दोषमुति क तिनार्ण<या पुरिर तिकया गया हा[ उसमुV कई अवे[D या अशद्घ नाहाF हा[ । इसलिलए उसमुV तिकस हास्क्षेपु कC आवेश्याक नाहाF पुया / । 9. अH दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याहा अपु ल स्वे कर याग्या ना हाना स प्रर!तिभक स्र पुर हा खारिर/ कC / हा[ । 10. तिनार्ण<या कC प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलखा श घ्रपुEवे<क वेपुस प्रतिष हा । सहा /- (स!/या अग्रवेल) न्यायाD श सहा /- (स!/या क मुर /यासवेल) न्यायाD श पुमुना