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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 108950 (ALL)
MOHIT BAJPAI v. STATE OF U.P.
NABAIL/11529/2024 · 2025-07-16
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 108950 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:115919 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 11529 of 2024 Applicant :- Mohit Bajpai Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Deepak Singh,Sr. Advocate Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज प्रत्ययत्तर शपथपत्र प्रस्तयत वकयद्वा गयद्वा , धजसवे पत्रद्वावलली पर रखद्वा जद्वाए।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक Mohit Bajpai ककी ओर सवे मय०अ०स० 157/2024, अन्तगरत धिद्वारद्वा 191(2), 127(2), 324(4), 310(2), 61(2), 352, 351(2), 308(5), 329(3), 74, 3(5), 238(Kha), 111(2)(Kha), 111(3), 317(3) बली.एन.एस., थद्वानद्वा ककोतवद्वालली, धजलद्वा कद्वानपयर नगर मम अवग्रिम जमद्वानत पर मयक करनवे हवेतय प्रस्तयत वकयद्वा गयद्वा हहै।
3. आववेदक कवे ववदद्वान वररष्ठ अधधिवकद्वा , पररवद्वादली कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा शली चवंदन धसवंह कको सयनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तयत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हहै , उसवे उपरकोक धिद्वारद्वाओवं मम दवेषवश तवंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप्त वकयद्वा गयद्वा हहै , उसवे आशवंकद्वा हहै वक उसवे उपरकोक ववररत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै , जबवक उसकवे ववरूद्ध ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम उलवेधखत हहै। आववेदक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद कको कद्वाररत करनवे कद्वा न तको ककोई हवेतयक हहै, न हली ककोई सरकोकद्वार हहै। उभयपक्ष कवे मध्य एक दलीवद्वानली प्रकक वत कद्वा वद्वाद लणमबत हहै। उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आववेदक कवे ववरूद्ध अभली तक ककोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै एववं आववेदक ककी ओर सवे यह भली आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वाननून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्ष खयद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोवं कको स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली।
5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा यह तकर प्रस्तयत वकयद्वा गयद्वा वक अवभययक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि गवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै तथद्वा आववेदक कवे ववरुद्ध पयद्वारप्त सद्वाक्ष्य कवे आधिद्वार पर
पयधलस दद्वारद्वा आववेदक कवे ववरुद्ध सवंबवंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम आरकोपपत्र प्रवेवषत वकयद्वा गयद्वा हहै। इसधलए आववेदक कको अवग्रिम जमद्वानत पर मयक वकयवे जद्वानवे कद्वा ककोई औवचत्य प्रतलीत नहहीं हकोतद्वा हहै। अततः अवभययक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वाय।
6.
यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नवे मद्वानद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत पर वनररय करतवे समय न्यद्वायद्वालय कको आरकोप ककी प्रकक वत और गवंभलीरतद्वा, अवभययक कद्वा पनूवरवकत्त, अवभययक कवे न्यद्वाय सवे भद्वागनवे ककी सवंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए तथद्वा न्यद्वायद्वालय कको अवभययक कवे ववरुद्ध उपलब्धि सवंपनूरर सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानलीपनूवरक मनूल्यद्वावंकन करनद्वा चद्वावहए तथद्वा अवभययक ककी सटलीक भनूवमकद्वा कको भली ध्यद्वान मम रखनद्वा चद्वावहए।
7. वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत सवंबवंधिली ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वावंततों कको ध्यद्वान मम रखतवे हहए और पक्षकद्वारतों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओवं कवे कथनतों , आरकोपतों ककी प्रकक वत , आववेदक ककी भनूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यतों एववं पररणस्थवतयतों कको ध्यद्वान मम रखतवे हहए चनूवंवक सवंबवंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम आववेदक कवे ववरुद्ध सद्वाक्ष्य पद्वायवे जद्वानवे कवे उपरद्वान्त उवचत आधिद्वारतों पर आरकोपपत्र प्रवेवषत वकयद्वा जद्वा चयकद्वा हहै , अततः मद्वामलवे कवे गयर -दकोष पर वबनद्वा ककोई ववचद्वार व्यक वकए यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वलीकद्वार वकए जद्वानवे यकोग्य नहहीं हहै , तद्नयसद्वार आववेदक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र अस्वलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
8. उपरकोकद्वानयसद्वार वद्वाद कवे गयर-दकोष पर वटप्परली वकयवे बगहैर यह अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
9. इस वद्वाद मम यवद ककोई अवंतररम आदवेश हको, तको वह स्वततः समद्वाप्त समझद्वा जद्वाए।
10. कद्वायद्वारलय कको वनदरवशत वकयद्वा जद्वातद्वा हहै वक इस आदवेश ककी प्रवतधलवप सवंबवंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय कको अववलमब प्रवेवषत करम। Order Date :- 17.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad