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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 107466 (ALL)

MAYA v. STATE OF U.P.

BAIL/42976/2024 · 2025-08-03

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:130902 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 42976 of 2024 Applicant :- Maya Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ram Prakash Singh,Virendra Kumar Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेददिकका कवे दवदकान अधधिवकका एववं रकाज्य ककी तरफ सवे दवदकान अपर शकासककीय अधधिवकका कको ससुनका तथका पतकावलली कका पररशलीलन दकयका। 2. वतरमकान दिकाणणण्डिक प्रककीरर जमकानत प्रकाथरनका पत आववेददिकका Maya ककी ओर सवे मसु०अ०सवं० 100/2024, अवंतररत धिकारका 318(4), 305(ए), 317(2), 317(4), 317(5) बली.एन.एस., थकानका रकायपसुरवका, धजलका ककानपसुर नरर मम जमकानत पर मसुक करनवे हवेतसु प्रस्तसुत दकयका रयका हहै। 3. आववेददिकका कवे दवदकान अधधिवकका नवे तकर प्रस्तसुत दकयका दक आववेददिकका कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठका फवं सकायका रयका हहै , उसनवे कधथत अपरकाधि ककाररत नहहीं दकयका हहै। आववेददिकका दकारका ऐसका ककोई भली अपरकाधि ककाररत नहहीं दकयका रयका हहै, जहैसकादक प्रकाथदमककी मम दिदशरत दकयका रयका हहै। प्रथम सझूचनका ररपकोरर दवलणमबत हहै तथका उक दवलमब कका ककोई समसुदचत स्पषलीकरर नहहीं ददियका रयका हहै। आववेददिकका प्रथम सझूचनका ररपकोरर मम नकादमत नहहीं हहै, दिदौरकान दवववेचनका आववेददिकका कका नकाम प्रककाश मम आयका हहै। आववेददिकका कवे पकास सवे वतरमकान घरनका सवे सवंबवंधधित ककोई भली सवंददिग्धि वस्तसु ककी बरकामदिरली दिदशरत नहहीं ककी रयली हहै, तथका उक कधथत घरनका कका ककोई स्वतवंत सकाकली नहहीं हहै। यहकावं प्रकासवंदरक तथ्य हहै दक वतरमकान वकादि मम अन्य सह-अदभयसुकका पझूनम यकादिव ककी जमकानत , जमकानत प्रकाथरनकापत सवं० 38046/2024 मम इसली न्यकायपलीठ दकारका दभन्न दतधथ कको स्वलीकक त ककी जका चसुककी हहै। अततः जमकानत प्रकाप्त सह-अदभयसुकका सवे समकान भझूदमकका कवे आधिकार पर आववेददिकका भली जमकानत पकानवे कका अधधिककारली हहै। आववेददिकका दकारका अपनवे पझूवर कवे आपरकाधधिक इदतहकास कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 17 मम स्पष दकयका रयका हहै।। पसुनतः उनकका यह भली कथन हहै दक आववेददिकका ककी तरफ सवे यह आश्वकासन ददियका रयका हहै दक वह ककानझून ककी प्रदक्रियका मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयकार हहै और जब भली आवश्यकतका हकोरली वह ईमकानदिकारली सवे अदिकालत कवे समक खसुदि कको उपलब्धि करकाएरली और उन सभली शतरवं कको स्वलीककार करनवे कवे धलए भली तहैयकार हहै जको न्यकायकालय उस पर अधधिरकोदपत करवेरली। आववेददिकका दनदिरष हहै तथका वह इस प्रकरर मम ददि० 14.09.2024 सवे ककारकारकार मम दनरुद्ध हहै। इसधलए आववेददिकका कको जमकानत पर छकोड़ ददियका जकाय। 4. दवदकान अपर शकासककीय अधधिवकका नवे आववेददिकका कवे जमकानत कका प्रबल दवरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तसुत दकयका दक आववेददिकका दकारका ककाररत अपरकाधि सवंवंजवेय एववं रवंभलीर प्रकक दत कका हहै, इसधलए आववेददिकका कको जमकानत पर न छकोड़का जकाय। 5. आववेददिकका कवे दवदकान अधधिवकका कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतकावलली पर उपलब्धि सकारवकान तथ्ययों एववं पररणस्थदतययों कका समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बकादि, सबझूतयों ककी प्रकक दत और दकसली भली ठकोस दवरकोधिकात्मक सकामग्रली ककी अनसुपणस्थदत एववं उपलब्धि सकामग्रली सवे छवेड़छकाड़ ककी सवंभकावनका न हकोनवे कवे तथ्य कको दिवेखतवे हहए मवेरली रकाय मम आववेददिकका कको जमकानत पर मसुक करनवे कका उपयसुक आधिकार हहै। 6. अततः वकादि कवे रसुर -दिकोष पर दबनका ककोई दरप्परली दकए हहए आववेददिकका कको उपरकोक वदररत अपरकाधि मम सवंबवंधधित न्यकायकालय ककी सवंतसुदष पर व्यदकरत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरकादश कवे ककोई भली दिको प्रदतभझू प्रस्तसुत करनवे पर दनमनधलधखत शतरवं कवे सकाथ जमकानत पर छकोड़ ददियका जकाय। i. आववेददिकका दवववेचनका यका परलीकर कवे दिदौरकान अदभयकोजन सकाक्ष्ययों कवे सकाथ छवेड़छकाड़ नहहीं करवेरली। ii. आववेददिकका अदभयकोजन सकादकययों व पलीदड़तका / दशककायतकतकार कको ण्डिरकायवेरली/धिमककायवेरली नहहीं। iii. आववेददिकका न्यकायकालय कवे आदिवेशयों कका पकालन करवेरली , वह परलीकर कवे दिदौरकान दबनका ककोई अनकावश्यक स्थरन धलए दनयत दतधथ पर न्यकायकालय मम उपणस्थत हकोरली तथका परलीकर मम ईमकानदिकारली सवे सहयकोर करवेरली। iv. आववेददिकका जमकानत पर ररहका हकोनवे कवे बकादि जमकानत ककी स्वतवंततका कका दिसुरूपयकोर नहली करवेरली और दकसली भली अपरकाधधिक रदतदवधधि मम धलप्त नहहीं हकोरली न ककोई अपरकाधधिक कक त्य करवेरली। v. आववेददिकका प्रत्यक यका अप्रत्यक रूप सवे मकामलवे कवे तथ्ययों सवे पररदचत दकसली भली व्यदक यका पसुधलस अधधिककाररययों कको ककोई प्रलकोभन यका धिमककी नहहीं दिवेरली न हली उनसवे ककोई वकायदिका करवेरली, धजसकवे ककारर उन्हम न्यकायकालय मम तथ्ययों कको उजकारर करनवे सवे दवरत रहनका पण्डिवेडे़। 7. उपरकोक शतरवं मम सवे दकसली कवे उलवंघन कवे मकामलवे मम , परलीकर न्यकायकालय आववेददिकका ककी जमकानत दनयमकानसुसकार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 4.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad