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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 107465 (ALL)
SMT VINEETA GOYAL v. STATE OF U.P. AND ANOTHER
NABAIL/11245/2024 · 2025-08-05
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 107465 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:133216 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 11245 of 2024 Applicant :- Smt Vineeta Goyal Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Kalp Dev Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A.,Manoj Mishra,Shashank Mishra Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा ककी तरफ ससे आज प्रवत शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा, धजससे पत्रद्वाविलली पर रखिद्वा जद्वाय।
2. वितरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आविसेवदकद्वा शलीमतली वविनलीतद्वा गगोयल ककी ओर ससे ममु०अ०स० 179/2024, अन्तगरत धिद्वारद्वा 115(2), 352, 351(3), 118(1), 109 बली.एन.एस., थद्वानद्वा कमलद्वानगर, धजलद्वा आगरद्वा मम अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक करनसे हसेतमु प्रस्तमुत वकयद्वा गयद्वा हहै।
3. आविसेवदकद्वा कसे वविदद्वान अधधिविकद्वा एविवं वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा शली चवंदन धसवंह कगो समुनद्वा तथद्वा पत्रद्वाविलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा।
4. आविसेवदकद्वा कसे वविदद्वान अधधिविकद्वा नसे तकर प्रस्तमुत वकयद्वा वक आविसेवदकद्वा वनदर्दोष हहै, उससे उपरगोक धिद्वारद्वाओवं मम दसेषविश तवंग वि परसेशद्वान करनसे ककी वनयत ससे आधलप वकयद्वा गयद्वा हहै, उससे आशवंकद्वा हहै वक उससे उपरगोक विवररत मद्वामलसे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै, जबवक उसकसे वविरूद्ध कगोई वविश्विसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै। आविसेवदकद्वा दद्वारद्वा ऐसद्वा कगोई भली अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम उलसेधखित वकयद्वा गयद्वा हहै। आविसेवदकद्वा एक मवहलद्वा हहै और नद्वावमत सह-अवभयमुक मयवंक ककी मद्वामाँ हहै। आविसेवदकद्वा कद्वा कधथत घटनद्वा ससे कगोई सवंबवंधि नहहीं हहै। सह - अवभयमुक ककी मद्वामाँ हगोनसे कसे नद्वातसे आविसेवदकद्वा कगो वितरमद्वान मद्वामलसे मम फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै। आविसेवदकद्वा जद्वावंच कद्वायरविद्वाहली मम सहयगोग कर रहली हहै। आविसेवदकद्वा कगो पपूविर मम
न्यद्वायद्वालय कसे आदसेश वदनद्वावंक 27.11.2024 कगो अवंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी जद्वा चमुककी हहै। उनकद्वा यह भली कथन हहै वक आविसेवदकद्वा कसे वविरूद्ध अभली तक कगोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै एविवं आविसेवदकद्वा ककी ओर ससे यह भली आश्विद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक विह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयगोग करनसे कसे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आविश्यकतद्वा हगोगली विह ईमद्वानदद्वारली ससे न्यद्वायद्वालय कसे समक खिमुद कगो उपलब्धि करद्वाएगली और उन सभली शतर्दोवं कगो स्विलीकद्वार करनसे कसे धलए भली तहैयद्वार हहै जगो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरगोवपत करसेगली।
5.
वविदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिविकद्वा दद्वारद्वा यह तकर प्रस्तमुत वकयद्वा गयद्वा वक आविसेवदकद्वा दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि गवंभलीर प्रकक वत कद्वा हहै तथद्वा आविसेवदकद्वा कसे वविरुद्ध पयद्वारप सद्वाक्ष्य कसे आधिद्वार पर पमुधलस दद्वारद्वा आविसेवदकद्वा कसे वविरुद्ध सवंबवंधधित वविचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम आरगोपपत्र प्रसेवषत वकयद्वा गयद्वा हहै। इसधलए आविसेवदकद्वा कगो अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक वकयसे जद्वानसे कद्वा कगोई औवचत्य प्रतलीत नहहीं हगोतद्वा हहै। अतत आविसेवदकद्वा कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आविसेदन पत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वाय।
6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, कसे मद्वामलसे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नसे मद्वानद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत पर वनररय करतसे समय न्यद्वायद्वालय कगो आरगोप ककी प्रकक वत और गवंभलीरतद्वा, अवभयमुक कद्वा पपूविरविकत, अवभयमुक कसे न्यद्वाय ससे भद्वागनसे ककी सवंभद्वाविनद्वा पर वविचद्वार करनद्वा चद्वावहए तथद्वा न्यद्वायद्वालय कगो अवभयमुक कसे वविरुद्ध उपलब्धि सवंपपूरर सद्वामग्रिली कद्वा सद्वाविधिद्वानलीपपूविरक मपूल्यद्वावंकन करनद्वा चद्वावहए तथद्वा अवभयमुक ककी सटलीक भपूवमकद्वा कगो भली ध्यद्वान मम रखिनद्वा चद्वावहए।
7. वितरमद्वान मद्वामलसे मम अवग्रिम जमद्वानत सवंबवंधिली वविधधि कसे स्थद्वावपत धसद्धद्वावंततों कगो ध्यद्वान मम रखितसे हहए और पककद्वारतों कसे वविदद्वान अधधिविकद्वाओवं कसे कथनतों , आरगोपतों ककी प्रकक वत, आविसेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलसे कसे सभली तथ्यतों एविवं पररणस्थवतयतों कगो ध्यद्वान मम रखितसे हहए चपूवंवक सवंबवंधधित वविचद्वारर न्यद्वायद्वालय मम आविसेवदकद्वा कसे वविरुद्ध सद्वाक्ष्य पद्वायसे जद्वानसे कसे उपरद्वान्त आरगोपपत्र प्रसेवषत वकयद्वा जद्वा चमुकद्वा हहै , अतत
मद्वामलसे कसे गमुर -दगोष पर वबनद्वा कगोई वविचद्वार व्यक वकए यह अवग्रिम जमद्वानत आविसेदन पत्र स्विलीकद्वार वकए जद्वानसे यगोग्य नहहीं हहै, तद्नमुसद्वार आविसेवदकद्वा कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आविसेदन पत्र अस्विलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
8. उपरगोकद्वानमुसद्वार विद्वाद कसे गमुर-दगोष पर वटप्परली वकयसे बगहैर यह अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वातद्वा हहै।
9. इस विद्वाद मम यवद कगोई अवंतररम आदसेश हगो, तगो विह स्वितत समद्वाप समझद्वा जद्वाए।
10. कद्वायद्वारलय कगो वनदरवशत वकयद्वा जद्वातद्वा हहै वक इस आदसेश ककी प्रवतधलवप सवंबवंधधित वविचद्वारर न्यद्वायद्वालय कगो अवविलम्ब प्रसेवषत करम। Order Date :- 6.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad