Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 106462 (ALL)

SARVESH @ KANDHAI LODHI v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/41512/2024 · 2025-10-07

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 41512 of 2024 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 103/2018 से उद्भूत सत्र परीक्षण सं० 128/2018, अन्तगर्त धारा 354, 376 भा०दं०िव० एवं धारा 3/4 पाक्सो एक्ट, थाना गाजीपुर, िजला फतेहपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक की ओर से िवद्वान अिधवक्ता श्री अजय कु मार श्रीवास्तव, श्री संजीव कु मार साहू, हाईकोटर् लीगल सेल की ओर से िवद्वान अिधवक्ता सुश्री आभा पाण्डेय एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक का यह िद्वतीय जमातन आवेदन पत्र है। आवेदक का प्रथम जमानत, जमानत आवेदन पत्र सं० 39633/2020 में इस न्यायालय के अन्य न्यायपीठ के आदेश िदनांक 22.10.2021 के द्वारा िनरस्त िकया गया है। 4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने नवीन तकर् यह प्रस्तुत िकया िक आवेदक लगभग सात वषर् से कारागार में िनरूद्ध है तथा मामलें के सत्र परीक्षण में अिभयोजन साक्षी सं० 6 का परीक्षण हो चुका है, िकतु आवेदक का प्रथम जमानत िनरस्त होने के उपरांत भी मामलें के सत्र परीक्षण में मुख्यतथ्य की साक्षी किथत पीिड़ता उपिस्थत नहीं हो रही है तथा िवचारण न्यायालय द्वारा उसके िवरूद्ध लगातार सम्मन िनगर्त िकये जाने के उपरांत किथत पीिड़ता सत्र परीक्षण उपिस्थत नहीं हो रही है। इससे पिरलिक्षत हो रहा है िक अिभयोजन पक्ष द्वारा जानबूझकर मामलें के सत्र परीक्षण के शीघ्र िनस्तारण में बाधा उत्पन्न िकया जा रहा है। आगे यह भी कहा गया िक इस वाद से संबंिधत सत्र परीक्षण के िनस्तारण की शीघ्र संभावना नजर नहीं आ रही है। आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने अपने तकर् के समथर्न में Indrani Pratim Mukerjea Vs. Central Bureau of Investigation and Another passed in Special Leave to Appeal (Crl.) No. 1627 of 2022 to Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Kumar Srivastava, Ajay Kumar Yadav, Sanjeev Kumar Sahu Counsel for Opposite Party(s) : Abha Pandey, G.A., Prabhakar Singh Sarvesh @ Kandhai Lodhi .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) submit that prolonged incarceration of a person as an under trial is against his fundamental rights under Article 21 of the Constitution of India. में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रितपािदत िविध-व्यवस्था की ओर न्यायालय का ध्यान आकृ ष्ट िकया। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 26.05.2018 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य एवं पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा 5. BAIL No. 41512 of 2024 2 , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 8, 2025 CP.sahani BAIL No. 41512 of 2024 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad