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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 106414 (ALL)

JITENDRA @ CHHOTA AND ANOTHER v. State of U.P. AND 3 OTHERS

ABAIL/10823/2024 · 2025-07-10

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:111539 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 10823 of 2024 Applicant :- Jitendra @ Chhota And Another Opposite Party :- State Of U.P. And 3 Others Counsel for Applicant :- Akhilesh Srivastava,Saksham Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा न्यद्वायद्वालय कको अवगत करद्वायद्वा गयद्वा वक प्रश्नगत वद्वाद मम आववेदक ससं० 1 (Jitendra @ Chhota) ककी ममृत्यय हको चयककी हह, अततः वह आववेदक ससं० 1 (Jitendra @ Chhota) कवे ससंबसंधि मम अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाररनद्वापत्र पर बल नहहीं दवेनद्वा चद्वाहतवे हह तरद्वा आववेदक ससं० 2 (Deepak Kumar) कवे ससंबसंधि मम अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाररनद्वापत्र पर बल दवेनद्वा चद्वाहतवे हह। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाररनद्वा पत्र , आववेदक ससं० 2 (Deepak Kumar) ककी ओर सवे मय०अ०ससं० 18/2024, अन्तगरत धिद्वारद्वा 323, 504, 506, 354 भद्वा.दसं.ससं. एवसं धिद्वारद्वा 7/8 पपॉक्सको अधधिवनयम, रद्वानद्वा बरलद्वा, धजलद्वा अललीगढ़ मम अवग्रिम जमद्वानत ककी मपॉग करतवे हहए इस प्रद्वाररनद्वा कवे सद्वार यकोधजत वकयद्वा गयद्वा हह वक वगरफ्तद्वारली ककी णसरवत मम आववेदक ससं० 2 (Deepak Kumar) कको जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे । 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सयनद्वा तरद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारद्वा आज प्रत्ययत्तर शपरपत्र कवे मद्वाध्यम सवे ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक ककी प्रमद्वावरत प्रवतधलवप दद्वाधखिल ककी गयली, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाए। 5. कद्वायद्वारलय ककी आख्यद्वा कवे अनयसद्वार पपूवर मम ववपकली ससं० 2 पर नकोवटिस कद्वा तद्वामलीलद्वा पयद्वारप्त हह, वकन्तय ववपकली ससं० 2 ककी तरफ सवे ककोई उपणसरत नहहीं हह। 6. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रसतयत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हह , उसवे उपरकोक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप्त वकयद्वा गयद्वा हह, उसवे आशसंकद्वा हह वक उसवे उपरकोक ववररत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हह जबवक उसकवे ववरूद्ध ककोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हह और आववेदक कवे ववरूद्ध अभली ककोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हह। प्ररम सपूचनद्वा ररपकोटिर ववलणमबत हह तरद्वा उक ववलमब कवे ससंबसंधि मम ककोई समयवचत सपषलीकरर नहहीं वदयद्वा गयद्वा हह। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भली कमृ त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हह , जहसद्वावक वतरमद्वान प्रद्वारवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हह। आववेदक दद्वारद्वा पलीवड़ितद्वा कवे सद्वार कधरत घटिनद्वा कद्वाररत नहहीं ककी गयली हह। घटिनद्वा कद्वा ककोई सवतसंत्र सद्वाकली नहहीं हह। पलीवड़ितद्वा कवे वचवकत्सलीय परलीकर मम भली वकसली प्रकद्वार ककी ककोई चकोटि नहहीं पद्वायली गयली हह। पलीवड़ितद्वा कवे बयद्वाननों असंतगरत धिद्वारद्वा 161 एवसं 164 दसं०प्र०ससं० एवसं प्रद्वारवमककी कवे तथ्यनों मम कद्वाफकी ववरकोधिद्वाभद्वास हह। वतरमद्वान वद्वाद मम आरकोपपत्र दद्वाधखिल वकयवे जद्वानवे कवे उपरद्वान्त पपूवर कवे आदवेश वदनद्वासंक 27.11.2024 कवे जररए आववेदक कको असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी जद्वा चयककी हह तरद्वा असंतररम जमद्वानत मम अधधिरकोवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा बखिपूबली अनयपद्वालन वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह। पयनतः उनकद्वा करन हह वक आववेदक ववचद्वारर और जपॉच कवे ददौरद्वान सहयकोग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हह वक वह जपॉच एजमसली यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवकत समय पर उपणसरत रहवेगद्वा एवसं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हह वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहयद्वार हह और जब भली आवश्यकतद्वा हकोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक खियद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोसं कको सवलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहयद्वार हह , जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगली। 7. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभययक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरकोधि मम यह तकर प्रसतयत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मम अवभययक ककी भपूवमकद्वा पररलवकत हको रहली हह तरद्वा इस घटिनद्वा मम इनककी भपूवमकद्वा ससंभद्वाव्य हह। इसधलए अवभययक कको अवग्रिम जमद्वानत पर मयक न वकयद्वा जद्वाय। 8. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हह वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हह वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय-वनररयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कको आरकोपनों ककी प्रकमृ वत और गसंभलीरतद्वा, आरकोपली ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कको आरकोपली कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभली सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानली सवे मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए और आरकोपली ककी वद्वासतववक भपूवमकद्वा पर भली ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए। 9. उभय पक कवे तकर्दो एवसं वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधिली ववधधि कवे सरद्वावपत धसद्धद्वासंतनों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पककद्वारनों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे करननों, आरकोपनों ककी प्रकमृ वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यनों एवसं ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधरयनों पर आववेदक कवे वनयवमत रूप सवे उपणसरत हकोनवे, पररणसरवतयनों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए तरद्वा आज प्रसतयत आदवेश फलक कवे अवलकोकन सवे यह भली पररलवकत हकोतद्वा हह वक आववेदक ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय कवे समक वनयवमत रूप सवे उपणसरत हको रहद्वा हह तरद्वा अनद्वावश्यक सरगन नहहीं लवे रहद्वा हह एवसं न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग कर रहद्वा हह, अततः मद्वामलवे कवे गयर-दकोष पर वबनद्वा ककोई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाररनद्वा सवलीकद्वार वकए जद्वानवे यकोग्य हह। 10. तद्नयसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र सवलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 11. उपरकोक मयकदमद्वा अपरद्वाधि ससंख्यद्वा मम सणममधलत आववेदक ससं० 2 (Deepak Kumar) ककी वगरफ्तद्वारली ककी दशद्वा मम , उसवे ससंबसंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय ककी ससंतयवष पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बसंधि पत्र एवसं उसली धिनरद्वावश कवे दको प्रवतभपू प्रसतयत करनवे पर, सत्र परलीकर कवे वनसतद्वारर हकोनवे तक वनमन शतर्दो कवे अधिलीन अवग्रिम जमद्वानत पर मयक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :- i) आववेदक अवभयकोजन पक कवे सद्वाक्ष्यनों कवे सद्वार छवेड़िछद्वाड़ि नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभयकोजन पक कवे गवद्वाहनों कको धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा। iii) आववेदक ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत प्रत्यवेक वतधर एवसं समय पर उपणसरत हकोगद्वा तरद्वा अनद्वावश्यक सरगन नहहीं लवेगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान ककोई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरकोप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हह यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा ससंदवेह हह। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्यनों सवे पररवचत वकसली व्यवक कको प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे ककोई प्रलकोभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसली पयधलस अधधिकद्वारली कवे समक तथ्यनों कद्वा खियलद्वासद्वा करनवे सवे ववमयखि हको जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्यनों कवे सद्वार छवेड़िछद्वाड़ि करवे। 12. उपरकोक उलवेधखित शतर्दोसं मम सवे वकसली भली शतर कवे उलघसंन ककी णसरवत मम ससंबधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय आववेदक कको प्रदत्त जमद्वानत वनरसत करनवे हवेतय सवतसंत्र हह। Order Date :- 11.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad