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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 106330 (ALL)

NASIV @ NASHIV v. State of UP AND ANOTHER

ABAIL/10779/2024 · 2025-07-10

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:111168 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 10779 of 2024 Applicant :- Nasiv @ Nashiv Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Manoj Pandey Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र कवे मद्वाध्यम सवे ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक ककी प्रमद्वावणत प्रवतधलवप दद्वाधखिल ककी गययी हह, धजसवे पत्रद्वावलयी पर रखिद्वा जद्वाए। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र आववेदक Nasiv @ Nashiv ककी ओर सवे ममु०अ०स० 198/2020, अन्तगरत धिद्वारद्वा 420, 482 भद्वा.दसं.ससं., थद्वानद्वा हयद्वातनगर, धजलद्वा सम्भल मम अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक करनवे हवेतमु प्रस्तमुत वकयद्वा गयद्वा हह। 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा शयी चसंदन धससंह कको समुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलयी कद्वा पररशयीलन वकयद्वा। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तमुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हह , उसवे उपरकोक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप वकयद्वा गयद्वा हह, उसवे आशसंकद्वा हह वक उसवे उपरकोक ववणरत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हह, जबवक उसकवे ववरूद्ध ककोई ववश्वसनयीय सद्वाक्ष्य नहहीं हह। आववेदक दद्वारद्वा प्रद्वाथवमककी मम दवशरत उपरकोक धिद्वारद्वाओसं कद्वा अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हह। आवदवेदक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद कको कद्वाररत करनवे कद्वा न तको ककोई हवेतमुक हह , न हयी ककोई सरकोकद्वार हह। आववेदक दद्वारद्वा वकसयी कवे सद्वाथ ककोई धिकोखिद्वाधिडयी नहहीं ककी हह और न हयी वकसयी कम्पनयी कद्वा ककोई वचह्न इस्तवेमद्वाल वकयद्वा हह और न हयी वकसयी कम्पनयी कवे दद्वारद्वा प्रद्वाथवमककी दजर करद्वाययी गययी हह। ववववेचक दद्वारद्वा वतरमद्वान वद्वाद मम आरकोपपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा जद्वा चमुकद्वा हह तथद्वा आववेदक कको ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा तलब वकयद्वा गयद्वा हह। आववेदक कको पपूवर मम आदवेश वदनद्वासंक 28.11.2024 कको असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गययी हह , धजसमम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अधधिरकोवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा अनमुपद्वालन वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह। आववेदक ककी ओर सवे यह भयी आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हह वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहयद्वार हह और जब भयी आवश्यकतद्वा हकोगयी वह ईमद्वानदद्वारयी सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्ष खिमुद कको उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभयी शतर्दोसं कको स्वयीकद्वार करनवे कवे धलए भयी तहयद्वार हह जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोवपत करवेगयी। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा यह तकर प्रस्तमुत वकयद्वा गयद्वा वक अवभयमुक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि गसंभयीर प्रकक वत कद्वा हह तथद्वा पपूवर मम प्रद्वाप अवग्रिम जमद्वानत मम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अधधिरकोवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा पद्वालन नहहीं वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा अनद्वावश्यक रूप सवे जद्वानबपूझकर अनद्वावश्यक स्थगन धलयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग नहहीं वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह , इसधलए आववेदक कको अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक वकयवे जद्वानवे कद्वा ककोई औवचत्य प्रतयीत नहहीं हकोतद्वा हह। अततः अवभयमुक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हह वक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, कवे मद्वामलवे मम मद्वाननयीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नवे मद्वानद्वा हह वक अवग्रिम जमद्वानत पर वनणरय करतवे समय न्यद्वायद्वालय कको आरकोप ककी प्रकक वत और गसंभयीरतद्वा, अवभयमुक कद्वा पपूवरवकत, अवभयमुक कवे न्यद्वाय सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए तथद्वा न्यद्वायद्वालय कको अवभयमुक कवे ववरुद्ध उपलब्धि ससंपपूणर सद्वामग्रियी कद्वा सद्वावधिद्वानयीपपूवरक मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए तथद्वा अवभयमुक ककी सटयीक भपूवमकद्वा कको भयी ध्यद्वान मम रखिनद्वा चद्वावहए। 7. वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधियी ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वासंततों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पक्षकद्वारतों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनतों , आरकोपतों ककी प्रकक वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभयी तथ्यतों एवसं पररणस्थवतयतों कको ध्यद्वान मम रखितवे हहए, आववेदक कको पपूवर मम सशतर असंतररम जमद्वानत न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा प्रदद्वान ककी गययी थयी , वकन्तमु प्रपत्रतों कवे अवलकोकन सवे वववदत हकोतद्वा हह वक आववेदक दद्वारद्वा उक शतर्दोसं कद्वा अनमुपद्वालन नहहीं वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा अनद्वावश्यक स्थगन लवेकर न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा मम सहयकोग प्रदद्वान न करकवे पपूवर मम प्रद्वाप असंतररम जमद्वानत कद्वा दमुरुपयकोग कर रहद्वा हह , अततः मद्वामलवे कवे गमुण -दकोष पर वबनद्वा ककोई ववचद्वार व्यक वकए यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वयीकद्वार वकए जद्वानवे यकोग्य नहहीं हह, तद्नमुसद्वार आववेदक कद्वा अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र अस्वयीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 8. उपरकोकद्वानमुसद्वार वद्वाद कवे गमुण-दकोष पर वटप्पणयी वकयवे बगहर यह अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत्र वनरस्त वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 9. इस वद्वाद मम यवद ककोई असंतररम आदवेश हको, तको वह स्वततः समद्वाप समझद्वा जद्वाए। 10. कद्वायद्वारलय कको वनदरवशत वकयद्वा जद्वातद्वा हह वक इस आदवेश ककी एक प्रवतधलवप अववलम्ब ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे भवेजनद्वा समुवनणश्चत करम। Order Date :- 11.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad