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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 106017 (ALL)

INDRAPAL SINGH v. State of U.P. AND ANOTHER

ABAIL/10769/2024 · 2025-08-10

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:136207 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 10769 of 2024 Applicant :- Indrapal Singh Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Lokesh Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A.,Sushil Kumar Pandey Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र कवे मद्वाध्यम सवे ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक ककी प्रमद्वावणत प्रवतधलवप दद्वाधखिल ककी गययी हह, धजसवे पत्रद्वावलयी पर रखिद्वा जद्वाए। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र, आववेदक इसंद्रपद्वाल धससंह ककी ओर सवे ममु०अ०ससं० 11/2023, अन्तगरत धिद्वारद्वा 406, 506 भद्वा.दसं.ससं., थद्वानद्वा छपद्वार, धजलद्वा ममुजफ्फरनगर मम अवग्रिम जमद्वानत ककी ममॉग करतवे हहए इस प्रद्वाथरनद्वा कवे सद्वाथ ययोधजत वकयद्वा गयद्वा हह वक वगरफ्तद्वारयी ककी णसथवत मम आववेदक कयो जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे । 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररवद्वादयी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कयो समुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलयी कद्वा पररशयीलन वकयद्वा। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रसतमुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हह , उसवे उपरयोक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप वकयद्वा गयद्वा हह, उसवे आशसंकद्वा हह वक उसवे उपरयोक ववणरत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हह जबवक उसकवे ववरूद्ध कयोई ववश्वसनयीय सद्वाक्ष्य नहहीं हह और आववेदक कवे ववरूद्ध अभयी कयोई भयी बद्वाध्यकद्वारयी प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गययी हह। यह एक दयीवद्वानयी प्रकक वत कद्वा वववद्वाद हह। जद्वाजाँच अधधिकद्वारयी नवे आरयोप -पत्र प्रसतमुत कर वदयद्वा हह वकन्तमु अभयी तक आववेदक कवे ववरुद्ध आरयोप तय नहहीं वकयद्वा गयद्वा हह। अवग्रिम उनकवे दद्वारद्वा यह भयी कथन वकयद्वा गयद्वा वक आववेदक कयो पपूवर मम आदवेश वदनद्वासंवकत 13.12.2024 कवे दद्वारद्वा सशतर अवग्रिम असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गययी थयी, धजसमम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अधधिरयोवपत शतर्दोसं कद्वा आववेदक दद्वारद्वा बखिपूबयी अनमुपद्वालन वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह तथद्वा पमुननः उनकद्वा कथन हह वक आववेदक ववचद्वारण और जमॉच कवे ददौरद्वान आगवे भयी सहययोग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हह वक वह जमॉच एजमसयी यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवक्षित समय पर उपणसथत रहवेगद्वा एवसं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हह वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहययोग करनवे कवे धलए तहयद्वार हह और जब भयी आवश्यकतद्वा हयोगयी वह ईमद्वानदद्वारयी सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्षि खिमुद कयो उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभयी शतर्दोसं कयो सवयीकद्वार करनवे कवे धलए भयी तहयद्वार हह, जयो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरयोवपत करवेगयी। 5. पररवद्वादयी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभयमुक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरयोधि मम यह तकर प्रसतमुत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मम अवभयमुक ककी भपूवमकद्वा पररलवक्षित हयो रहयी हह तथद्वा इस घटनद्वा मम इनककी भपूवमकद्वा ससंभद्वाव्य हह। इसधलए अवभयमुक कयो अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक न वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हह वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मम मद्वाननयीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हह वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय-वनणरयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कयो आरयोपपों ककी प्रकक वत और गसंभयीरतद्वा, आरयोपयी ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कयो आरयोपयी कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभयी सद्वामग्रियी कद्वा सद्वावधिद्वानयी सवे मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए और आरयोपयी ककी वद्वासतववक भपूवमकद्वा पर भयी ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए। 7. उभय पक्षि कवे तकर्दो एवसं वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधियी ववधधि कवे सथद्वावपत धसद्धद्वासंतपों कयो ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पक्षिकद्वारपों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनपों, आरयोपपों ककी प्रकक वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभयी तथ्यपों एवसं ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधथयपों पर आववेदक कवे वनयवमत रूप सवे उपणसथत हयोनवे, पररणसथवतयपों कयो ध्यद्वान मम रखितवे हहए , मद्वामलवे कवे गमुण-दयोष पर वबनद्वा कयोई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाथरनद्वा सवयीकद्वार वकए जद्वानवे ययोग्य हह। 8. तद्नमुसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र सवयीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 9. उपरयोक ममुकदमद्वा अपरद्वाधि ससंख्यद्वा मम सणममधलत आववेदक ककी वगरफ्तद्वारयी ककी दशद्वा मम, उसवे ससंबसंधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय ककी ससंतमुवष्टि पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बसंधि पत्र एवसं उसयी धिनरद्वावश कवे दयो प्रवतभपू प्रसतमुत करनवे पर, आरयोप तय हयोनवे तक वनमन शतर्दो कवे अधियीन अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :- i) आववेदक अवभययोजन पक्षि कवे सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभययोजन पक्षि कवे गवद्वाहपों कयो धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा। iii) आववेदक ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत प्रत्यवेक वतधथ एवसं समय पर उपणसथत हयोगद्वा तथद्वा अनद्वावश्यक सथगन नहहीं लवेगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान कयोई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरयोप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हह यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा ससंदवेह हह। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्यपों सवे पररवचत वकसयी व्यवक कयो प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे कयोई प्रलयोभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसयी पमुधलस अधधिकद्वारयी कवे समक्षि तथ्यपों कद्वा खिमुलद्वासद्वा करनवे सवे ववममुखि हयो जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ करवे। 10. उपरयोक उलवेधखित शतर्दोसं मम सवे वकसयी भयी शतर कवे उलघसंन ककी णसथवत मम ससंबधधित ववचद्वारण न्यद्वायद्वालय आववेदक कयो प्रदत्त जमद्वानत वनरसत करनवे हवेतमु सवतसंत्र हह। Order Date :- 11.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad