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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 105530 (ALL)

JITENDRA PAL v. State of U.P.

ABAIL/10888/2024 · 2025-07-06

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:106911 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 10888 of 2024 Applicant :- Jitendra Pal Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ashwani Kumar Sachan,Saurabh Sachan Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखद्वा जद्वाए। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र, आववेदक धजततद्र पद्वाल ककी ओर सवे मतु०अ०ससं० 135/2023, अन्तगरत धिद्वारद्वा 457, 380, 411 भद्वा.दसं.ससं. , थद्वानद्वा क्ययोलवड़ियद्वा, धजलद्वा बरवेलली मत अवग्रिम जमद्वानत ककी ममॉग करतवे हहए इस प्रद्वाथरनद्वा कवे सद्वाथ ययोधजत वकयद्वा गयद्वा हहै वक वगरफ्तद्वारली ककी णस्थवत मत आववेदक कयो जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे । 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कयो सतुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्ततुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हहै , उसवे उपरयोक धिद्वारद्वाओसं मत दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप्त वकयद्वा गयद्वा हहै , उसवे आशसंकद्वा हहै वक उसवे उपरयोक ववररत मद्वामलवे मत वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हहै जबवक उसकवे ववरूद्ध कयोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हहै और आववेदक कवे ववरूद्ध अभली कयोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हहै। आववेदक प्रद्वाथवमककी मत नद्वामजद नहहीं हहै , ददौरद्वान ववववेचनद्वा नद्वामजद सह- अवभयतुक कवे तलीसरली बद्वार वदयवे गयवे बयद्वान कवे आधिद्वार पर आववेदक कयो वतरमद्वान वद्वाद मत अवभयतुक बनद्वायद्वा गयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा कयोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , जहैसद्वावक प्रद्वाथवमककी मत दशद्वारयद्वा गयद्वा हहै। आववेदक कवे पद्वास सवे वतरमद्वान वद्वाद सवे ससंबसंधधित वकसली भली वस्ततु ककी बरद्वामदगली नहहीं पद्वायली गयली हहै , जयो भली बरद्वामदगली दशद्वारयली गयली हहै , वह बनद्वावटली एवसं फजर्जी हहै। प्रश्नगत वद्वाद मत आरयोपपत्र दद्वाधखल वकयद्वा जद्वा चतुकद्वा हहै , वकन्ततु ववववेचक दद्वारद्वा ऐसद्वा कयोई भली सद्वाक्ष्य ससंकधलत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै , धजससवे आववेदक कवे ववरुद्ध उपरयोक आरयोवपत अपरद्वाधि बनतद्वा प्रतलीत हयोतद्वा हयो। पतुननः उनकवे दद्वारद्वा कथन वकयद्वा गयद्वा वक आववेदक कयो पपूवर मत आदवेश वदनद्वासंक 22.01.2025 कवे दद्वारद्वा असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गयली थली , तथद्वा न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश वदनद्वासंक 23.05.2025 कवे अनतुपद्वालन मत आववेदक कवे दद्वारद्वा आज पपूरक शपथपत्र कवे मद्वाध्यम सवे ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय कवे आदवेश फलक कयो दद्वाधखल वकयद्वा गयद्वा हहै , धजसमत यह दवशरत वकयद्वा गयद्वा हहै वक ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधथययों पर आववेदक उपणस्थत हयो रहद्वा हहै तथद्वा अनद्वावश्यक स्थगन नहहीं लवे रहद्वा हहै। पतुननः उनकद्वा कथन हहै वक आववेदक ववचद्वारर और जमॉच कवे ददौरद्वान सहययोग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हहै वक वह जमॉच एजतसली यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवक्षित समय पर उपणस्थत रहवेगद्वा एवसं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हहै वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मत सहययोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भली आवश्यकतद्वा हयोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्षि खतुद कयो उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोसं कयो स्वलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहैयद्वार हहै, जयो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरयोवपत करवेगली। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभयतुक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरयोधि मत यह तकर प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मत अवभयतुक ककी भपूवमकद्वा पररलवक्षित हयो रहली हहै तथद्वा इस घटनद्वा मत इनककी भपूवमकद्वा ससंभद्वाव्य हहै। इसधलए अवभयतुक कयो अवग्रिम जमद्वानत पर मतुक न वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हहै वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मत मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हहै वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय -वनररयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कयो आरयोपयों ककी प्रकक वत और गसंभलीरतद्वा, आरयोपली ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कयो आरयोपली कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभली सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानली सवे मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए और आरयोपली ककी वद्वास्तववक भपूवमकद्वा पर भली ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए। 7. उभय पक्षि कवे तकर्दो एवसं वतरमद्वान मद्वामलवे मत अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधिली ववधधि कवे स्थद्वावपत धसद्धद्वासंतयों कयो ध्यद्वान मत रखतवे हहए और पक्षिकद्वारयों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनयों , आरयोपयों ककी प्रकक वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्ययों एवसं ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधथययों पर आववेदक कवे वनयवमत रूप सवे उपणस्थत हयोनवे , पररणस्थवतययों कयो ध्यद्वान मत रखतवे हहए, मद्वामलवे कवे गतुर-दयोष पर वबनद्वा कयोई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाथरनद्वा स्वलीकद्वार वकए जद्वानवे ययोग्य हहै। 8. तद्नतुसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र स्वलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हहै। 9. उपरयोक मतुकदमद्वा अपरद्वाधि ससंख्यद्वा मत सणममधलत आववेदक ककी वगरफ्तद्वारली ककी दशद्वा मत , उसवे ससंबसंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय ककी ससंततुवष्टि पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बसंधि पत्र एवसं उसली धिनरद्वावश कवे दयो प्रवतभपू प्रस्ततुत करनवे पर , सत्र परलीक्षिर कवे वनस्तद्वारर हयोनवे तक वनमन शतर्दो कवे अधिलीन अवग्रिम जमद्वानत पर मतुक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :- i) आववेदक अवभययोजन पक्षि कवे सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़िछद्वाड़ि नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभययोजन पक्षि कवे गवद्वाहयों कयो धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा। iii) आववेदक ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत वतधथ एवसं समय पर उपणस्थत हयोगद्वा तथद्वा अनद्वावश्यक स्थगन नहहीं लवेगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान कयोई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरयोप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हहै यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा ससंदवेह हहै। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्ययों सवे पररवचत वकसली व्यवक कयो प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे कयोई प्रलयोभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसली पतुधलस अधधिकद्वारली कवे समक्षि तथ्ययों कद्वा खतुलद्वासद्वा करनवे सवे ववमतुख हयो जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्ययों कवे सद्वाथ छवेड़िछद्वाड़ि करवे। 10. उपरयोक उलवेधखत शतर्दोसं मत सवे वकसली भली शतर कवे उलघसंन ककी णस्थवत मत ससंबधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय आववेदक कयो प्रदत्त जमद्वानत वनरस्त करनवे हवेततु स्वतसंत्र हहै। Order Date :- 7.7.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad