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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 105500 (ALL)

SMT SUNEETA KESARWANI v. State of U.P. AND 2 OTHERS

NABAIL/10488/2024 · 2025-09-25

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 10488 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेिदका श्रीमती सुनीता की ओर से मु०अ०स० 154/2024 अन्तगर्त धारा 85/ 80(20 बी.एन.एस. एवं धारा 3/4 दहेज प्रितषेध अिधिनयम., थाना िपपरी, िजला कौशाम्बी में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा अवर न्यायालय इस वाद से संबंिधत अवर न्यायालय का आदेश फलक दािखल िकया गया, उसे अनुलग्नक X (एक्स) के रूप में पत्रावली पर रखा जाए। 4. आवेिदका के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेिदका िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेिदका दारा प्राथिमकी में दिशत उपरोक्त धाराओं का अपराध कािरत नहीं िकया गया है। आवेिदका की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक आवेिदका को इस न्यायालय की अन्य न्यायपीठ द्वारा िदनाँक 11.11.2024 को अन्तिरम अिग्रम जमानत कु छ शतोर्ं के साथ प्रदान की गयी थी, िजसका आवेिदका द्वारा अनुपालन नहीं िकया जा रहा है। इस प्रकार आवेिदका द्वारा पूवर् में िदये गये अन्तिरम अिग्रम जमानत एवं जमानत के साथ लगायी गयी शतोर्ं का लगातार उल्लंघन िकया जा रहा है। िजससे यह पिरलिक्षत हो रहा है िक िजससे सत्र परीक्षण के िनस्तारण में अनावश्यक िवलम्ब हो रहा है। अिभयुक्ता द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है इसिलए आवेिदका को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है अतः अिभयुक्ता का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। अिभयुक्ता द्वारा कािरत Versus Counsel for Applicant(s) : Shri Kant Kesarwani Counsel for Opposite Party(s) : Ashish Kumar Mishra, G.A., Nitesh Kumar Jauhari, Nitesh Kumar Singh Smt Suneeta Kesarwani .....Applicant(s) State Of U.P. And 2 Others .....Opposite Party(s) अपराध गंभीर प्रकृ ित का है इसिलए आवेिदका को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है अतः अिभयुक्ता का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 6. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 7. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेिदका की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए एवं सम्पूणर् दस्तावेजों के अवलोकन से यह िविदत होता है िक आवेिदका द्वारा पूवर् में िदये गये अंतिरम आदेश का दुपर्योग िकया जा रहा है। अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्रुसार आवेिदका का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 8. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। 9. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 10. आवेदक िनयिमत जमानत प्राथर्नापत्र दािखल करने हेतु स्वतंत्र है। कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप अिवलम्ब संबंिधत िवचारण न्यायालय के भेजना सुिनिश्चत करें। September 26, 2025 S.Mishra NABAIL No. 10488 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad