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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 105287 (ALL)

RAVI KUMAR v. State of U.P.

BAIL/39796/2024 · 2025-10-07

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 39796 of 2024 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. सूची पुनरीिक्षत वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक गुलाम नबी की ओर से मु.अ. सं० 535/2024 अन्तगर्त धारा 376/ 377 भा.दं.सं., थाना सािहबाबाद, िजला गािजयाबाद में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। उक्त घटना का कोई स्वतन्त्र एवं िनष्पक्ष साक्षी नहीं है। उसका उक्त घटना से कोई वास्ता तालुक नहीं है। आवेदक व वािदनी मुकदमा दोनों अिधवक्ता है और आवेदक वािदया का जूिनयर था, िजसके पास तीस हजारी कोटर् िदल्ली में प्रेिक्टस करता है और आपस में मधुर व व्यवसाियक सम्बन्ध रहे हैं। वािदया एक लालची व अव्यवहािरक मिहला है, जो ब्लैकमेिलग करके व कानूनी प्रिक्रया और वकील होने का फायदा उठाकर अपने जाल में फं साकर झूठे मुकदमेबाजी करके व दबाव बनाकर अवैध लाभ कमाने के कायर् में िलप्त रहती है। असल व सही तथ्य यह है िक आवेदक तथा वािदनी मुकदमा दोनों ही अिधवक्ता हैं तथा आवेदक पीिड़ता के पास बतौर जूिनयर कायर् सीख रहा था। आवेदक व पीिड़ता वषर् 2022 से एक-दूसरे के साथ प्रेम सम्बन्धों में रहे हैं तथा आवेदक द्वारा कभी भी पीिड़ता के साथ कोई सम्बन्ध िबना पीिड़ता की अनुमित के नहीं बनाये हैं। पीिड़ता आवेदक से करीब 10 वषर् बड़ी है तथा कानून की ज्ञाता है तथा कानून की पेिचदिगयों को व कानून की कमजोरी को भली भांित जानती है, िजसका लाभ उठाकर आवेदक के िवरूद्ध उक्त मुकदमा िलखाया है। जबिक असल तथ्य यह है िक पीिड़ता द्वारा आवेदक को ब्लैक करना आरम्भ कर िदया था। आवेदक द्वारा पीिड़ता को उसकी मांग के अनुसार धनरािश दी जाती थी तथा जब आवेदक द्वारा पीिड़ता को धनरािश देना बन्द कर िदया तो पीिड़ता द्वारा Versus Counsel for Applicant(s) : Rajesh Pathak, Sanjay Kumar Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ravi Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) उक्त एफ० आई० आर० दजर् करा दी गई। आवेदक ने वािदनी मुकदमा के साथ िबना सहमित कोई शारीिरक सम्बन्ध व अप्राकृ ितक सम्बन्ध नहीं बनाये है। वािदनी मुकदमा 36 वषीर्य बािलग व समझदार युवती है और आवेदक से 10 वषर् बड़ी है तथा वािदनी मुकदमा ने आवेदक से जैसा भी सम्बन्ध रखा है, वह स्वयं की मजीर् व पूणर् होश-हवास में रखा है आवेदक ने कभी वािदनी मुकदमा से शादी की बात नहीं की है। वािदनी मुकदमा आवेदक से उधार रूपये लेती रही है, िजसका प्रमाण पत्र संलग्न है। आवेदक द्वारा वािदनी मुकदमा के अनुसार पैसे न देने से इंकार करने पर वािदनी ने अवैध लाभ कमाने के िलए उत्त मुकदमा घटना से लगभग दो वषर् बाद दजर् कराया है, िजस देरी का कोई स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है वािदनी मुकदमा के साथ कािरत घटना के सम्बन्ध में कोई मेिडकल अपराध की पुिष्ट के सम्बन्ध में नहीं है एकमात्र वािदनी की झूठी गवाही के आधार पर आवेदक को झूठा फं साया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतों को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 05.08.2024 से कारागार में िनरुद्ध है इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर् का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंम्भीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाये। 5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की सन्तुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. BAIL No. 39796 of 2024 2 आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। October 8, 2025 S.Mishra BAIL No. 39796 of 2024 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad