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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 104904 (ALL)
ANKUR KUMAR AND ANOTHER v. State of U.P.
BAIL/38294/2024 · 2025-07-31
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 104904 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:129486 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 38294 of 2024 Applicant :- Ankur Kumar And Another Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Dharmendra Pratap Singh Counsel for Opposite Party :- Jagdish Prasad Mishra,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. ससूचची पपुनरचीकक्षित।
2. आववेदकगण कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सपुनद्वा तथद्वा पतद्वावलची कद्वा पररशचीलन ककयद्वा।
3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीणर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदकगण अवंकपु र कपु मद्वार एववं ररकतक कपु मद्वार ककी ओर सवे मपु०अ०सवं० 236/2024, अवंतगरत धिद्वारद्वा 190, 191(2), 191(3), 115(2), 109, 352, 351(2), 324(2) बची.एन.एस., थद्वानद्वा छपद्वार, धजलद्वा मपुजफ्फरनगर मम जमद्वानत पर मपुक करनवे हवेतपु प्रस्तपुत ककयद्वा गयद्वा हहै।
4.
आववेदकगण कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदकगण कको इस प्रकरण मम गलत एववं फजर्जी ढवंग सवे झसूठद्वा फवं सद्वायद्वा गयद्वा हहै , उन्हहोंनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं ककयद्वा हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भची कक त्य कद्वाररत नहहीं ककयद्वा गयद्वा हहै, जहैसद्वाकक प्रद्वाथकमककी मम दकशरत ककयद्वा गयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम लड़कहों ककी आपसची लड़द्वाई हहै , धजसमम वद्वादची दद्वारद्वा रवंधजशन उपरकोक धिद्वारद्वाओवं मम प्रद्वाथकमककी दजर करद्वा दची गयची हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा ककसची भची घद्वातक हधथयद्वार सवे मद्वारपचीट नहहीं ककी गयची हहै, बणलक घटनद्वा कवे चक्षिपुदकशरयहों कवे मपुतद्वाकबक सभची खद्वालची हद्वाथ थवे तथद्वा उनकवे हद्वाथ मम ककोई हधथयद्वार नहहीं थद्वा। वतरमद्वान घटनद्वा कको कद्वाररत करनवे मम आववेदकगण यद्वा ककसची अन्य सह -अकभयपुक ककी ककोई कवकशष्ट भसूकमकद्वा दकशरत नहहीं ककी गयची हहै , वरनन् सभची ककी समद्वान भसूकमकद्वा दकशरत ककी गयची हहै।
वतरमद्वान वद्वाद मम हत्यद्वा कवे प्रयद्वास कवे उदवेश्य सवे ककोई हमलद्वा नहहीं ककयद्वा गयद्वा हहै। घद्वायलहों ककी कचककत्सचीय आख्यद्वा एववं अकभयकोजन कथद्वानक मम परस्पर कवरकोधिद्वाभद्वास हहै। आववेदकगण दद्वारद्वा अपनवे पसूवर कवे आपरद्वाधधिक इकतहद्वास कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 14 एववं 15 कवे मद्वाध्यम सवे स्पष्ट ककयद्वा गयद्वा हहै , धजसमम उनककी जमद्वानत पसूवर मम हची स्वचीकक त हको चपुककी हहै। पपुननः उनकद्वा यह भची कथन हहै कक आववेदकगण ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन कदयद्वा गयद्वा हहै कक वह कद्वानसून ककी प्रकक्रियद्वा मम सहयकोग करनवे कवे धलए तहैयद्वार हह और जब भची आवश्यकतद्वा हकोगची ववे ईमद्वानदद्वारची सवे अदद्वालत कवे समक्षि खपुद कको उपलब्धि करद्वाएवंगवे और उन सभची शतरवं कको स्वचीकद्वार करनवे कवे धलए भची तहैयद्वार हह जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोकपत करवेगची। आववेदकगण कनदरष हह तथद्वा ववे इस प्रकरण मम कद० 24.08.2024 सवे कद्वारद्वागद्वार मम कनरुद्ध हह। इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय।
5. कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदकगण कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल कवरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदकगण दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं गवंभचीर प्रकक कत कद्वा हहै, इसधलए आववेदकगण कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
6.
आववेदकगण कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलची पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यहों एववं पररणस्थकतयहों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद प्रथमदृष्टयद्वा आववेदकगण कवे कवरुद्ध उपरकोक आरकोकपत धिद्वारद्वाओवं कद्वा अपरद्वाधि बनतद्वा पररलकक्षित नहहीं हको रहद्वा हहै , अतनः सबसूतहों ककी प्रकक कत और ककसची भची ठकोस कवरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रची ककी अनपुपणस्थकत एववं उपलब्धि सद्वामग्रची सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरची रद्वाय मम आववेदकगण कको जमद्वानत पर मपुक करनवे कद्वा उपयपुक आधिद्वार हहै।
7. अतनः वद्वाद कवे गपुण -दकोष पर कबनद्वा ककोई कटप्पणची ककए हहए आववेदकगण कको उपरकोक वकणरत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतपुकष्ट पर व्यककगत बवंधि-पत एववं अधधिक धिनरद्वाकश कवे ककोई भची दको -दको प्रकतभसू प्रस्तपुत करनवे पर कनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय।
i. आववेदकगण कवववेचनद्वा यद्वा परचीक्षिण कवे ददौरद्वान अकभयकोजन सद्वाक्ष्यहों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करमगवे। ii. आववेदकगण अकभयकोजन सद्वाकक्षियहों व पचीकड़तद्वा / कशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायमगवे/धिमकद्वायमगवे नहहीं। iii. आववेदकगण न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशहों कद्वा पद्वालन करमगवे, वह परचीक्षिण कवे ददौरद्वान कबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थगन धलए कनयत कतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हहोंगवे तथद्वा परचीक्षिण मम ईमद्वानदद्वारची सवे सहयकोग करमगवे। iv. आववेदकगण जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दपुरूपयकोग नहची करमगवे और ककसची भची अपरद्वाधधिक गकतकवधधि मम धलप्त नहहीं हहोंगवे न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करमगवे। v. आववेदकगण प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यहों सवे पररकचत ककसची भची व्यकक यद्वा पपुधलस अधधिकद्वाररयहों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दमगवे न हची उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करमगवे, धजसकवे कद्वारण उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यहों कको उजद्वागर करनवे सवे कवरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
8. उपरकोक शतरवं मम सवे ककसची कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परचीक्षिण न्यद्वायद्वालय आववेदकगण ककी जमद्वानत कनयमद्वानपुसद्वार रद करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad