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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 104793 (ALL)

VANSH KUMAR v. State of UP

BAIL/38155/2024 · 2025-07-31

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:129425 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 38155 of 2024 Applicant :- Vansh Kumar Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Dharmendra Pratap Singh Counsel for Opposite Party :- Jagdish Prasad Mishra,G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. ससूचची पपुनरचीकक्षित। 2. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सपुनद्वा तथद्वा पतद्वावलची कद्वा पररशचीलन ककयद्वा। 3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक ववंश कपु मद्वार ककी ओर सवे मपु०अ०सवं० 236/2024, अवंतररत धिद्वारद्वा 190, 191(2), 191(3), 115(2), 109, 352, 351(2), 324(2) बची.एन.एस., थद्वानद्वा छपद्वार, धजलद्वा मपुजफ्फरनरर मम जमद्वानत पर मपुक करनवे हवेतपु प्रस्तपुत ककयद्वा रयद्वा हहै। 4. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झसूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं ककयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भची कक त्य कद्वाररत नहहीं ककयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वाकक प्रद्वाथकमककी मम दकशरत ककयद्वा रयद्वा हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम लड़ककों ककी आपसची लड़द्वाई हहै, धजसमम वद्वादची दद्वारद्वा रवंधजशन उपरकोक धिद्वारद्वाओवं मम प्रद्वाथकमककी दजर करद्वा दची रयची हहै। आववेदक दद्वारद्वा ककसची भची घद्वातक हधथयद्वार सवे मद्वारपचीट नहहीं ककी रयची हहै, बणलक घटनद्वा कवे चक्षिपुदकशरयकों कवे मपुतद्वाकबक सभची खद्वालची हद्वाथ थवे तथद्वा उनकवे हद्वाथ मम ककोई हधथयद्वार नहहीं थद्वा। वतरमद्वान घटनद्वा कको कद्वाररत करनवे मम आववेदक यद्वा ककसची अन्य सह-अकभयपुक ककी ककोई कवकशष्ट भसूकमकद्वा दकशरत नहहीं ककी रयची हहै, वरनन् सभची ककी समद्वान भसूकमकद्वा दकशरत ककी रयची हहै। वतरमद्वान वद्वाद मम हत्यद्वा कवे प्रयद्वास कवे उदवेश्य सवे ककोई हमलद्वा नहहीं ककयद्वा रयद्वा हहै। घद्वायलकों ककी कचककत्सचीय आख्यद्वा एववं अकभयकोजन कथद्वानक मम परस्पर कवरकोधिद्वाभद्वास हहै। आववेदक कद्वा ककोई पसूवर आपरद्वाधधिक इकतहद्वास नहहीं हहै। पपुननः उनकद्वा यह भची कथन हहै कक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन कदयद्वा रयद्वा हहै कक वह कद्वानसून ककी प्रकक्रियद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भची आवश्यकतद्वा हकोरची वह ईमद्वानदद्वारची सवे अदद्वालत कवे समक्षि खपुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभची शतरवं कको स्वचीकद्वार करनवे कवे धलए भची तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोकपत करवेरची। आववेदक कनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम कद० 31.08.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम कनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय। 5. कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल कवरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभचीर प्रकक कत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय। 6. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलची पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यकों एववं पररणस्थकतयकों कद्वा समग्र रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद प्रथमदृष्टयद्वा आववेदक कवे कवरुद्ध उपरकोक आरकोकपत धिद्वारद्वाओवं कद्वा अपरद्वाधि बनतद्वा पररलकक्षित नहहीं हको रहद्वा हहै , अतनः सबसूतकों ककी प्रकक कत और ककसची भची ठकोस कवरकोधिद्वात्मक सद्वामग्रची ककी अनपुपणस्थकत एववं उपलब्धि सद्वामग्रची सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरची रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मपुक करनवे कद्वा उपयपुक आधिद्वार हहै। 7. अतनः वद्वाद कवे रपुर-दकोष पर कबनद्वा ककोई कटप्परची ककए हहए आववेदक कको उपरकोक वकररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतपुकष्ट पर व्यककरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वाकश कवे ककोई भची दको प्रकतभसू प्रस्तपुत करनवे पर कनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक कवववेचनद्वा यद्वा परचीक्षिर कवे ददौरद्वान अकभयकोजन सद्वाक्ष्यकों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अकभयकोजन सद्वाकक्षियकों व पचीकड़तद्वा / कशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशकों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परचीक्षिर कवे ददौरद्वान कबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए कनयत कतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परचीक्षिर मम ईमद्वानदद्वारची सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दपुरूपयकोर नहची करवेरद्वा और ककसची भची अपरद्वाधधिक रकतकवधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यकों सवे पररकचत ककसची भची व्यकक यद्वा पपुधलस अधधिकद्वाररयकों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हची उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यकों कको उजद्वारर करनवे सवे कवरत रहनद्वा पण्डिवेडे़। 8. उपरकोक शतरवं मम सवे ककसची कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परचीक्षिर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत कनयमद्वानपुसद्वार रद करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad