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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 38093 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 123/2024, अंतगर्त धारा 406, 420, 467, 468, 471, 504, 506 भा.दं.सं., थाना गागलहेड़ी, िजला सहारनपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आज पूरक शपथपत्र दािखल िकया गया, िजसे पत्रावली पर रखा जाय।
4. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। प्राथिमकी अित- िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। आवेदक को सूचनाकतार् द्वारा झूठा फं साया गया है, क्योंिक सूचनाकतार् और उसके पिरवार के सदस्यों ने आवेदक के िपता, जो बैंक कमर्चारी हैं, से ऋण िलया था। जब आवेदक ने सूचनाकतार् के पिरवार के सदस्यों पर पैसा वापस करने का दबाव डाला, तो उन्होंने आवेदक के िवरुद्ध मनगढ़़़़ंत तथ्यों पर वतर्मान प्राथिमकी पंजीकृ त करा दी। आवेदक द्वारा िकसी प्रकार के दस्तावेज की कू टरचना/फजीर्वाड़ा कािरत नहीं िकया गया है। आवेदक ने न तो सूचनाकतार् को कोई जाली/ फजीर् दस्तावेज़ िदया है और न ही साविध जमा प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर िकए हैं। आवेदक के हस्ताक्षर भी प्रमाणपत्र पर अंिकत हस्ताक्षर से िभन्न हैं। आवेदक के बैंक खाते में सूचनाकतार् द्वारा दी गई धनरािश ऋिणत धनरािश थी जो उसे (सूचनाकतार्) को वापस कर दी गई। अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक वतर्मान वाद में साक्षीगण िवचारण न्यायालय में परीक्षण हेतु िनयत ितिथयों पर उपिस्थत नहीं हो रहे हैं, िजससे सत्र परीक्षण में अनावश्यक िवलम्ब हो रहा है। िवचारण न्यायालय के आदेश फलक की अब तक की सम्पूणर् आख्या आज दािखल पूरक शपथपत्र के प्रस्तर सं० S.A.-1 के रूप में संलग्न की गयी है। अिग्रम उनके द्वारा कथन िकया गया िक सी.आर.पी.सी.
की धारा 437(6) के तहत, यिद िकसी मिजस्ट्रेट द्वारा िवचारणीय अपराध का मुकदमा अिभयोजन साक्ष्य शुरू होने की पहली तारीख से 60 िदनों के भीतर समाप्त नहीं होता है, तो अिभयुक्त को जमानत िमल सकती है, बशतेर् अिभयुक्त पूरी अविध के दौरान िहरासत में रहा हो और मिजस्ट्रेट ने इसके िखलाफ िवशेष Versus Counsel for Applicant(s) : Ashutosh Ganguli, Lokesh Kumar, Masoom Alam, Rahul Gaur Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Bhupendra Kumar .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s)
कारण दजर् न िकए हों। इस आधार पर आवेदक धारा 437(6) दं.प्र.सं. का लाभ पाने का अिधकारी है। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 11.08.2024 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय।
5. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
6. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv.
आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
8. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 17, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 38093 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad