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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 104594 (ALL)

MUKESH KUMAR v. State of UP AND ANOTHER

ABAIL/10388/2024 · 2025-08-05

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC:133314 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 10388 of 2024 Applicant :- Mukesh Kumar Opposite Party :- State of U.P. and Another Counsel for Applicant :- Rajesh Prasad Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा ककी तरफ सवे आज पपूरक शपथपत्र दद्वाधखिल वकयद्वा गयद्वा हह, धजसवे पत्रद्वावलली पर रखिद्वा जद्वाय। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर अवग्रिम जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत्र, आववेदक ममुकवे श कमु मद्वार ककी ओर सवे ममु०अ०ससं० 152/2023 सवे उदपूत वद्वाद ससं० 851/2024, अन्तगरत धिद्वारद्वा 420 भद्वा.दसं.ससं., थद्वानद्वा बरलद्वा, धजलद्वा अललीगढ़ मम अवग्रिम जमद्वानत ककी ममॉग करतवे हहए इस प्रद्वाथरनद्वा कवे सद्वाथ ययोधजत वकयद्वा गयद्वा हह वक वगरफ्तद्वारली ककी णसथवत मम आववेदक कयो जमद्वानत पर ररहद्वा वकयद्वा जद्वा सकवे । 3. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एवसं ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कयो समुनद्वा तथद्वा पत्रद्वावलली कद्वा पररशलीलन वकयद्वा। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रसतमुत वकयद्वा वक आववेदक वनदर्दोष हह , उसवे उपरयोक धिद्वारद्वाओसं मम दवेषवश तसंग व परवेशद्वान करनवे ककी वनयत सवे आधलप वकयद्वा गयद्वा हह, उसवे आशसंकद्वा हह वक उसवे उपरयोक ववररत मद्वामलवे मम वगरफ्तद्वार वकयद्वा जद्वा सकतद्वा हह जबवक उसकवे ववरूद्ध कयोई ववश्वसनलीय सद्वाक्ष्य नहहीं हह और आववेदक कवे ववरूद्ध अभली कयोई भली बद्वाध्यकद्वारली प्रवक्रियद्वा नहहीं अपनद्वाई गयली हह। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा कयोई भली कक त्य कद्वाररत नहहीं वकयद्वा गयद्वा हह , जहसद्वावक प्रद्वाथवमककी मम दवशरत वकयद्वा गयद्वा हह। आववेदक दद्वारद्वा वकसली भली व्यवक कद्वा आधिद्वारकद्वाण्डिर लवेकर बबक खिद्वातद्वा नहहीं खियोलद्वा गयद्वा हह , न हली वकसली कद्वा खिद्वातद्वा ससंचद्वाधलत वकयद्वा हह। आववेदक दद्वारद्वा वकसली प्रकद्वार ककी कपू टरचनद्वा नहहीं ककी गयली हह , न हली वकसली प्रकद्वार ककी धियोखिद्वाधिडली कद्वाररत ककी गयली हह। अवग्रिम उनकवे दद्वारद्वा कथन वकयद्वा गयद्वा वक वतरमद्वान वद्वाद मम आरयोपपत्र दद्वाधखिल हयो चमुकद्वा हह तथद्वा आरयोपपत्र दद्वाधखिल हयोनवे कवे पश्चद्वातत् आववेदक कयो वदनद्वासंक 13.11.2024 कयो असंतररम जमद्वानत प्रदद्वान ककी गयली हह तथद्वा अभली तक आरयोप ववरवचत नहहीं हहआ हह। पपूवर मम प्रद्वाप सशतर अवग्रिम जमद्वानत ककी शतर्दोसं कद्वा अनमुपद्वालन आववेदक दद्वारद्वा भललीभद्वासंवत वकयद्वा जद्वा रहद्वा हह। पमुननः उनकद्वा कथन हह वक आववेदक ववचद्वारर और जमॉच कवे ददौरद्वान सहययोग करनवे कद्वा वचन दवेतद्वा हह वक वह जमॉच एजमसली यद्वा न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अपवेवक्षित समय पर उपणसथत रहवेगद्वा एवसं आववेदक ककी ओर सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा गयद्वा हह वक वह कद्वानपून ककी प्रवक्रियद्वा मम सहययोग करनवे कवे धलए तहयद्वार हह और जब भली आवश्यकतद्वा हयोगली वह ईमद्वानदद्वारली सवे न्यद्वायद्वालय कवे समक्षि खिमुद कयो उपलब्धि करद्वाएगद्वा और उन सभली शतर्दोसं कयो सवलीकद्वार करनवे कवे धलए भली तहयद्वार हह , जयो न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरयोवपत करवेगली। 5. ववदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा दद्वारद्वा अवभयमुक कवे अवग्रिम जमद्वानत कवे ववरयोधि मम यह तकर प्रसतमुत वकयद्वा गयद्वा वक इस मद्वामलवे मम अवभयमुक ककी भपूवमकद्वा पररलवक्षित हयो रहली हह तथद्वा इस घटनद्वा मम इनककी भपूवमकद्वा ससंभद्वाव्य हह। इसधलए अवभयमुक कयो अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक न वकयद्वा जद्वाय। 6. यह कहद्वा जद्वा सकतद्वा हह वक Siddharam Satlingappa Mhetre vs. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694 कवे मद्वामलवे मम मद्वाननलीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा यह अवधिद्वाररत वकयद्वा गयद्वा हह वक अवग्रिम जमद्वानत यद्वावचकद्वा पर न्यद्वाय-वनररयन करतवे समय न्यद्वायद्वालय कयो आरयोपपों ककी प्रकक वत और गसंभलीरतद्वा, आरयोपली ककी न्यद्वावयक प्रवक्रियद्वा सवे भद्वागनवे ककी ससंभद्वावनद्वा पर ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए और यह वक न्यद्वायद्वालय कयो आरयोपली कवे ववरूद्ध उपलब्धि सभली सद्वामग्रिली कद्वा सद्वावधिद्वानली सवे मपूल्यद्वासंकन करनद्वा चद्वावहए और आरयोपली ककी वद्वासतववक भपूवमकद्वा पर भली ववचद्वार करनद्वा चद्वावहए। 7. उभय पक्षि कवे तकर्दो एवसं वतरमद्वान मद्वामलवे मम अवग्रिम जमद्वानत ससंबसंधिली ववधधि कवे सथद्वावपत धसद्धद्वासंतपों कयो ध्यद्वान मम रखितवे हहए और पक्षिकद्वारपों कवे ववदद्वान अधधिवकद्वाओसं कवे कथनपों, आरयोपपों ककी प्रकक वत, आववेदक ककी भपूवमकद्वा और मद्वामलवे कवे सभली तथ्यपों एवसं ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनयत वतधथयपों पर आववेदक कवे वनयवमत रूप सवे उपणसथत हयोनवे, पररणसथवतयपों कयो ध्यद्वान मम रखितवे हहए , मद्वामलवे कवे गमुर-दयोष पर वबनद्वा कयोई ववचद्वार व्यक वकए अवग्रिम जमद्वानत ककी प्रद्वाथरनद्वा सवलीकद्वार वकए जद्वानवे ययोग्य हह। 8. तद्नमुसद्वार, यह अवग्रिम जमद्वानत आववेदन पत्र सवलीकद्वार वकयद्वा जद्वातद्वा हह। 9. उपरयोक ममुकदमद्वा अपरद्वाधि ससंख्यद्वा मम सणममधलत आववेदक ककी वगरफ्तद्वारली ककी दशद्वा मम, उसवे ससंबसंधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय ककी ससंतमुवष्टि पर रू० 50,000/- कद्वा व्यवकगत बसंधि पत्र एवसं उसली धिनरद्वावश कवे दयो प्रवतभपू प्रसतमुत करनवे पर , आरयोप ववरवचत हयोनवे तक वनमन शतर्दो कवे अधिलीन अवग्रिम जमद्वानत पर ममुक वकयद्वा जद्वाएगद्वा :- i) आववेदक अवभययोजन पक्षि कवे सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करवेगद्वा। ii) आववेदक अवभययोजन पक्षि कवे गवद्वाहपों कयो धिमकद्वाएगद्वा यद्वा परवेशद्वान नहहीं करवेगद्वा। iii) आववेदक ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा वनधिद्वारररत प्रत्यवेक वतधथ एवसं समय पर उपणसथत हयोगद्वा तथद्वा अनद्वावश्यक सथगन नहहीं लवेगद्वा। iv) आववेदक उस अपरद्वाधि कवे समद्वान कयोई अपरद्वाधि नहहीं करवेगद्वा, धजसकद्वा आरयोप आववेदक पर लगद्वायद्वा गयद्वा हह यद्वा धजसकवे वकए जद्वानवे कद्वा ससंदवेह हह। v) आववेदक मद्वामलवे कवे तथ्यपों सवे पररवचत वकसली व्यवक कयो प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे कयोई प्रलयोभन, धिमककी यद्वा वद्वादद्वा नहहीं करवेगद्वा धजससवे वह व्यवक न्यद्वायद्वालय यद्वा वकसली पमुधलस अधधिकद्वारली कवे समक्षि तथ्यपों कद्वा खिमुलद्वासद्वा करनवे सवे ववममुखि हयो जद्वाए यद्वा सद्वाक्ष्यपों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड करवे। 10. उपरयोक उलवेधखित शतर्दोसं मम सवे वकसली भली शतर कवे उलघसंन ककी णसथवत मम ससंबधधित ववचद्वारर न्यद्वायद्वालय आववेदक कयो प्रदत्त जमद्वानत वनरसत करनवे हवेतमु सवतसंत्र हह। Order Date :- 6.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad