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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 104442 (ALL)

ABHISHEK KUMAR CHATURVEDI v. STATE OF U.P.

BAIL/38179/2024 · 2025-02-23

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

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Neutral Citation No. - 2025:AHC:25935 Court No. - 84 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 38179 of 2024 Applicant :- Abhishek Kumar Chaturvedi Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Anurag Shukla,Manvendra Narain Pathak,R.K.Paramhans Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. आववेदक कवे ववदद्वान वररिष्ठ अधधिवकद्वा शश्री गगोपद्वाल स्वरूप चततुवरदश्री तथद्वा अधधिवकद्वा शश्री अनतुरिद्वाग शतुक्लद्वा एववं रिद्वाज्य ककी तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककीय अधधिवकद्वा शश्री आरि.कवे . शश्रीवद्वास्तव कगो सतुनद्वा तथद्वा पतद्वावलश्री कद्वा पररिशश्रीलन वकयद्वा। 2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक ककी ओरि सवे मतु०अ०सवं० 158 सनन् 2024, अवंतगरत धिद्वारिद्वा 8/21 स्वद्वापक औषधधि औरि मननःप्रभद्वावश्री पदद्वाथर अधधिवनयम , 1985, थद्वानद्वा भलतुअनश्री , धजलद्वा दवेवररियद्वा मम जमद्वानत परि मतुक करिनवे हवेततु प्रस्ततुत वकयद्वा गयद्वा हहै। 3. वदनद्वावंक 22.08.2024 कगो समय 03.30 बजवे प्रभद्वारिश्री वनरिश्रीक्षक दद्वारिद्वा आववेदक सवहत छह व्यवकययों कवे ववरुद्ध इस आशय ककी प्रथम ससूचनद्वा ररिपगोरर दजर करिद्वायश्री गयश्री वक मतुखवबरि खद्वास सवे प्रद्वाप्त ससूचनद्वा कवे आधिद्वारि परि दगो चद्वारि पवहयद्वा वद्वाहनयों कगो रिगोकनवे कद्वा प्रयद्वास वकयद्वा गयद्वा, धजसमम सवे एक वद्वाहन मगोड़ करिकवे भद्वाग गयद्वा तथद्वा एक वद्वाहन ममौकवे परि पकड़ धलयद्वा गयद्वा, धजसमम आववेदक अवभषवेक कतु मद्वारि चततुवरदश्री (क्रमशनः जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवंख्यद्वा-40786/2024 एववं 38179/2024) तथद्वा एक अन्य अवभयतुक अममृतद्वाश धसवंह (जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवंख्यद्वा-40620/2024) बहैठवे हहए थवे। अवभयतुकगर नवे स्वयवं बतद्वायद्वा वक उनकवे वद्वाहन मम चरिस व बद्वाउन सतुगरि नद्वामक नशश्रीलद्वा पदद्वाथर रिखवे थवे। प्रथम ससूचनद्वा ररिपगोरर मम यह भश्री कहद्वा गयद्वा हहै वक अवभयतुकगर सवे कहद्वा गयद्वा वक उनककी तलद्वाशश्री रिद्वाजपवतत अधधिकद्वारिश्री कवे समक्ष लश्री जद्वाएगश्री, तगो पकड़वे गयवे व्यवकययों नवे अपनश्री सहमवत दवे दश्री। तत्पश्चद्वात प्रभद्वारिश्री क्षवेतद्वाधधिकद्वारिश्री कगो मगोबद्वाइल फगोन सवे अवभयतुकगर ककी जद्वामद्वा तलद्वाशश्री हवेततु उपणस्थत हगोनवे कद्वा अनतुरिगोधि वकयद्वा गयद्वा तथद्वा क्षवेतद्वाधधिकद्वारिश्री कवे आनवे परि अवभयतुकगर ककी जद्वामद्वा तलद्वाशश्री लश्री गयश्री, तगो वद्वाहन कवे वपछलवे वहस्सवे मम दगोनयों सश्रीरयों कवे मध्य एक कद्वालवे रिवंग कवे बहैग मम तवेरिह पहैकवे र चरिस तथद्वा पद्वापाँच पहैकवे र बद्वाउन सतुगरि बरिद्वामद हहआ। अवभयतुकगर कगो उनकवे अपरिद्वाधि अवंतगरत धिद्वारिद्वा 8/21 एन.ण्डिश्री.पश्री.एस. अधधिवनयम, समय करिश्रीब दगो बजवे वहरिद्वासत मम धलयद्वा गयद्वा। ममौकवे परि तरिद्वाजसू मपाँगद्वाकरि तमौलनवे परि तवेरिह पहैकवे र चरिस कद्वा वजन 6.4 वकलगोगद्वाम तथद्वा बद्वाउन सतुगरि कद्वा कतु ल वजन 440 गद्वाम पद्वायद्वा गयद्वा। बरिद्वामद नशश्रीलवे पदद्वाथर व चरिस मम सवे अलग -अलग पचद्वास गद्वाम नमसूनद्वा हवेततु अलग वनकद्वालकरि शवेष पदद्वाथर उसश्री झगोलवे मम रिखकरि सश्रील वकयद्वा गयद्वा। अवभयतुकगर सवे बरिद्वामद मगोबद्वाइल फगोन एववं नकद रुपयवे अलग सवे सश्रील वकयवे गयवे। बरिद्वामदगश्री कवे दमौरिद्वान कतु छ रिद्वाहगश्रीरि बड़वे वद्वाहनयों सवे आम रिद्वास्तद्वा हगोनवे कवे कद्वारिर आ जद्वा रिहवे थवे, परिन्ततु कगोई रुकद्वा नहहीं। फदर बरिद्वामदगश्री परि अन्य व्यवकययों कवे सद्वाथ क्षवेतद्वाधधिकद्वारिश्री नवे भश्री हस्तद्वाक्षरि वकयवे हह। 4. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा प्रद्वाथरनद्वापत कवे सद्वाथ प्रस्ततुत शपथपत मम कहद्वा गयद्वा हहै वक आववेदक वनदर्दोष हहै एववं उसकद्वा कगोई आपरिद्वाधधिक इवतहद्वास नहहीं हहै। शपथपत मम यह भश्री कहद्वा गयद्वा हहै वक एन .ण्डिश्री.पश्री.एस. अधधिवनयम ककी धिद्वारिद्वा 41, 42, 50, 51, 52 एववं 57 कवे प्रद्वाववधिद्वानयों कद्वा अनतुपद्वालन नहहीं वकयद्वा गयद्वा हहै। 5. रिद्वाज्य सरिकद्वारि ककी तरिफ सवे प्रवत शपथपत प्रस्ततुत करितवे हहए कहद्वा गयद्वा हहै वक अवभयतुकगर ममौकवे परि नशश्रीलवे पदद्वाथर कवे सद्वाथ पकड़वे गयवे हह तथद्वा अवभरिक्षद्वा मम वदयवे गयवे अपनवे बयद्वान मम उन्हयोंनवे अपनवे अपरिद्वाधि कगो स्वश्रीकद्वारि वकयद्वा हहै। 6. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे अवगम तकर वदयद्वा वक आववेदकगर कगो उनककी वगरिफ्तद्वारिश्री कवे समय वगरिफ्तद्वारिश्री कद्वा कद्वारिर नहहीं बतद्वायद्वा गयद्वा , आववेदकगर कवे मगोबद्वाइल फगोन कब्जवे मम लवे धलयवे गयवे तथद्वा उनककी वगरिफ्तद्वारिश्री कवे ववषय मम उनकवे पररिवद्वारि कगो ससूचनद्वा नहहीं दश्री गयश्री। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे यह भश्री तकर वदयद्वा वक फदर बरिद्वामदगश्री तथद्वा प्रथम ससूचनद्वा ररिपगोरर कवे कथन अक्षरिशनः समद्वान हह एववं सभश्री गवद्वाह पतुधलस कवे कमरचद्वारिश्री /अधधिकद्वारिश्री हह एववं ववववेचनद्वा मम अवंवकत सभश्री कवे बयद्वान भश्री अक्षरिशनः फदर बरिद्वामदगश्री एववं प्रथम ससूचनद्वा ररिपगोरर कवे कथनयों कवे समद्वान हह। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे Dharam Singh And others vs State of Punjab 1993 SUPP(3) SCC 532 कवे वनररय कद्वा आशय धलयद्वा, धजसमम यह अवधिद्वाररित वकयद्वा गयद्वा वक जहद्वापाँ सभश्री सद्वावक्षययों कवे कथन अक्षरिशनः समद्वान हह, उन परि ववश्वद्वास करिनद्वा सहश्री नहहीं हगोगद्वा। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे VIHAAN KUMAR VS. STATE OF HARIYANA 2025 INSC 162 कवे वनररय कद्वा भश्री आशय धलयद्वा, धजसमम मद्वाननश्रीय उच्चतम न्यद्वायद्वालय नवे यह कहद्वा हहै वक अवभयतुक कगो वगरिफ्तद्वारिश्री कवे आधिद्वारि बतद्वानद्वा औपचद्वाररिकतद्वा मद्वात नहहीं हहै , बणलक यह बद्वाध्यकद्वारिश्री, सवंवहैधिद्वावनक प्रद्वाववधिद्वान हहै। वगरिफ्तद्वारिश्री कवे आधिद्वारि न बतद्वानवे सवे वगफ्तद्वारिश्री अवहैधि हगो जद्वातश्री हहै तथद्वा ऐसश्री णस्थवत मम अवभयतुक कगो एक क्षर भश्री अवभरिक्षद्वा मम नहहीं रिखद्वा जद्वा सकतद्वा हहै। आववेदक वदनद्वावंक 22.08.2024 सवे कद्वारिद्वागद्वारि मम वनरुद्ध हहै। 7. धिद्वारिद्वा 50 एन.ण्डिश्री.पश्री.एस. अधधिवनयम मम यह प्रद्वाववधिद्वान हहै वक वकसश्री व्यवक ककी जद्वामद्वा तलद्वाशश्री कवे धलए उसकगो मधजस्रटवेर यद्वा रिद्वाजपवतत अधधिकद्वारिश्री कवे पद्वास लवे जद्वायद्वा जद्वाएगद्वा। इस प्रद्वाववधिद्वान कद्वा उदवेश्य यह हहै वक तलद्वाशश्री ककी कद्वारिरवद्वाई एक वनष्पक्ष उच्च-अधधिकद्वारिश्री ककी उपणस्थवत मम ककी जद्वाए , धजससवे उसककी वनष्पक्षतद्वा सतुवनणश्चत ककी जद्वा सकवे । जब तलद्वाशश्री ककी कद्वारिरवद्वाई एक पतुधलस अधधिकद्वारिश्री कगो ममौकवे परि बतुलद्वाकरि ककी जद्वातश्री हहै तथद्वा वह पतुधलस अधधिकद्वारिश्री जद्वापाँच दल कवे सदस्य कवे रूप मम कद्वायर करितवे हहए फदर बरिद्वामदगश्री परि अपनवे हस्तद्वाक्षरि करितद्वा हहै , तगो ऐसश्री पररिणस्थवत मम उक अधधिकद्वारिश्री ककी वनष्पक्षतद्वा सवंदवेह सवे परिवे नहहीं कहश्री जद्वा सकतश्री तथद्वा पतुधलस क्षवेतद्वाधधिकद्वारिश्री ककी उपणस्थवत मम लश्री गयश्री तलद्वाशश्री धिद्वारिद्वा 50 एन.ण्डिश्री.पश्री.एस. अधधिवनयम कवे आशय कगो पसूरिद्वा नहहीं करितश्री हहै। 8. जब नशश्रीलद्वा पदद्वाथर अलग-अलग- थहैलयों मम पहैक वकयद्वा गयद्वा हगो तथद्वा उन परि कगोई समद्वान वचह्न तथद्वा वजन आवद मतुवद्रित नहहीं हह , तगो ऐसश्री पररिणस्थवत मम हरि पहैकवे र सवे अलग-अलग, दगो-दगो नमसूनवे लवेकरि सश्रील करिनद्वा अवनवद्वायर हहै , जबवक प्रस्ततुत प्रकरिर मम तवेरिह पहैकवे र चरिस मम कतु ल एक नमसूनद्वा तथद्वा पद्वावंच पहैकवे र बद्वाउन सतुगरि मम कतु ल एक नमसूनद्वा धलयद्वा गयद्वा हहै। इस प्रकद्वारि आपधत्तिजनक वस्ततु कवे नमसूनवे लवेनवे मम भश्री गम्भश्रीरि अवनयवमततद्वा बरितश्री गयश्री हहै। आववेदक कगो वगरिफ्तद्वारिश्री कवे कद्वारिर नहहीं बतद्वायवे गयवे हह तथद्वा उसककी वगरिफ्तद्वारिश्री ककी ससूचनद्वा उसकवे पररिवद्वारि कगो नहहीं दश्री गयश्री हहै। 9. यद्यवप आववेदक कवे ववरुद्ध लगद्वायद्वा गयद्वा आरिगोप गम्भश्रीरि प्रकमृ वत कद्वा हहै , तथद्वावप ववववेचनद्वा मम पतुधलस अधधिकद्वाररिययों नवे भश्री गम्भश्रीरि अवनयवमततद्वाएवं बरितश्री हह। 10. उपरिगोक पररिणस्थवतययों कद्वा समग रूप सवे अवलगोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबसूतयों ककी प्रकमृ वत औरि वकसश्री भश्री ठगोस ववरिगोधिद्वात्मक सद्वामगश्री ककी अनतुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामगश्री सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हगोनवे कवे तथ्य कगो दवेखतवे हहए न्यद्वायद्वालय कद्वा मत हहै वक आववेदक जमद्वानत परि मतुक वकयवे जद्वानवे कद्वा अधधिकद्वारिश्री हहै। 11. आववेदक अवभषवेक कतु मद्वारि चततुवरदश्री कगो वनम्नधलधखत शतर्दोवं कवे अधिश्रीन सवंबवंधधित मधजस्रटवेर/न्यद्वायद्वालय ककी सवंततुवष्टि कवे अनतुसद्वारि एक व्यवकगत बवंधिपत औरि समद्वान रिद्वावश ककी दगो जमद्वानतम प्रस्ततुत करिनवे परि उपरिगोक मद्वामलवे मम जमद्वानत परि ररिहद्वा वकयद्वा जद्वाए: - (i). आववेदक परिश्रीक्षर न्यद्वायद्वालय दद्वारिद्वा वनधिद्वारररित वतधथ परि उपणस्थत रिहवेगद्वा। (ii). आववेदक अवभयगोजन सद्वाक्ष्य कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करिवेगद्वा। (iii). आववेदक अवभयगोजन पक्ष कवे गवद्वाहयों परि दबद्वाव नहहीं ण्डिद्वालवेगद्वा। 12. उपरिगोक शतर्दोवं मम सवे वकसश्री कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परिश्रीक्षर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत वनयमद्वानतुसद्वारि रिद करिनवे कगो स्वतवंत हहै। Order Date :- 24.2.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad