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High Court of Chhattisgarh · body

2025 DAILYLAW 10365 (CHH)

SMT. SARITA MATHUR v. STATE OF CHHATTISGARH

WPS/1447/2025 · 2025-02-25

Shri Amitendra Kishore Prasad

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 2025:CGHC:9619 NAFR HIGH COURT OF CHHATTISGARH AT BILASPUR WPS No. 1447 of 2025 1 - Smt. Sarita Mathur W/o Shri Sundarlal Mathur Aged About 32 Years Occupation- Rasoiya/safaikarmi/dainik Mazdoor Sas. Pri. Mat. Anusuchit Jati Kanya Chatravas- Pahriya, R/o Village- Pahriya, Vikaskhand Balouda, Distt.- Janjgir-Champa (C.G.) ... Petitioner(s) versus 1 - State Of Chhattisgarh Sachiv, Aadim Jati And Anusuchit Jati Vikas Vibhag, Mantralaya New Raipur (C.G.). 2 - Aayukt Aadim Jati And Anusuchit Jati Vikas Raipur Distt.- Raipur (C.G.). 3 - Sahayak Aayukt Aadivasi Vikas Janjgir-Champa, Distt.- Janjgir- Champa (C.G.). 4 - Collector Distt.- Janjgir-Champa (C.G.). 5 - Sas. Pri. Mat. Anu. Jati Kanya Chatravas Pahriya Vikaskhand- Balouda, Distt.- Janjgir-Champa (C.G.). ... Respondent(s) Digitally signed by RAGHVENDRA JAT 2 For Petitioner(s) : Mr. Abdul Moin Khan, Advocate. For Respondent(s)/State : Mr. Suyashdhar Badgaiya, Dy. G.A. Hon’ble Mr. Justice Amitendra Kishore Prasad Order on Board 25/02/2025 1. मामले के संቌኌ ्቎ तथ्य यह है किक याቌኌकाकी उ्ቈरवादीगण के अधीनस्थ रसोइया / सफाई कम$ / दैकिनक मजदूर के पद पर व्ቧ) 2016 से अनवरत् काय)रत रही है। जिजसें जनवरी 2025 से अቌኌतरिर्ሹ कम$ होना बताकर मौखि3क आदेश देकर काम पर नहीं र3ा जा रहा है, िሗकतु उसके बाद किनयु्ሹ किकये गये क቞ኌमयों को काम पर र3ा गया है, वह किवगत व्ቧ) 2016 से उ्ቈरवादीगण के अቌኌधनस्थ तुथ) वग) दैकिनक मजदूर के पद पर काय)रत रह कर अपने पूरे परिरवार का 3ूद भरणपो्ቧण करते ले आ रही है और अब उसे जनवरी 2025 से काम पर नहीं र3ा जा रहा है साथ ही उसे जून 2023 से उसके पारिर्ቦकिमक का भी मुगतान नहीं किकया गया है। याቌኌक को किनयु्ሹ किकये जाने के समय उसे किकसी ्ቚकार का किनयुकि्ሹ प्ቔ जारी नहीं किकया गया था य्ቕकिप शाला किनगरानी सकिमቌኌत की बैठक पंजी अगस्त 2022 के ्ቛारा उसकी किनयुकि्ሹ बाबत् अनुशंसा ले3ब्ቍ किकया गया था, जबकिक काम से किनकालने पर किकसी ्ቚकार का कोई खिलखि3त आदेश भी नहीं किदया जा रहा है, याቌኌक से पूव) में भी काम लेने के बाद भी अब तक लगभग 17 माह का वेतन / मजदूरी का भी मुगतान नहीं किकया गया है। अब जबकिक याቌኌक को अन्य्ቔ काम भी नही किमलेगा ऐसी किवपरीत परिरቝኌस्थቌኌत में उसें एकाएक सेवा से किनकाल किदये जाने से याቌኌक एवं उसके परिरवार के सामने जीकिवकोपाज)न की समस्या उत्प्ቐ हो गई है। जबकिक याቌኌक को कई व्ቧJ तक सेवा में र3ने के कारण उसकी सेवा स्थायी ्ቚकृ ቌኌत की ही मानी जावेगी, याቌኌक अत्यቌኌधक 3 गरीब परिरवार की है। वत)मान में भी उ्ቈरवादीगण के अቌኌधनस्थ तुथ) वग) कम$ संबंधी काफी पद भी रिर्ሹ है एवं दैकिनक काय) भी है जिजसमें याቌኌक को लगाया जा सकता है परंतु उसके बाद भी याቌኌक को किवቌኌधवत काम पर नही र3ा जा रहा है। याቌኌकता) ्ቛारा किनम्न अनुतो्ቧो की मांग की गयी है:- “10.1 यह किक उ्ቈरवादी कमांक 03 को किनदMशिशत किकया जावे किक उसके अቌኌधनस्थ पूव) के व्ቧJ में काय)रत समस्त वतुथ)वग) / रसोइया पद में काय)रत कलैक्टर दर पर किनयु्ሹ दैकिनक क቞ኌमयों की सम्पूण) सूी व अन्य संबंቌኌधत समस्त अशिभले3 माननीय न्यायालय के सम ्ቚस्तुत करें। 10.2 यह किक, उ्ቈरवादीगण को किनदMशिशत किकया जावे किक वे याቌኌक को पूव)वत दैकिनक मजदूर के काम पर र3ें। 10.3 यह किक उ्ቈरवादीगण को किनदMशिशत किकया जावे किक वे याቌኌक को सेवा अवቌኌध के समस्त बकाया लाम/ वेतन का अकिवलंब भुगतान सुकिनቌኌQत करें। 10.4 यह किक, अन्य अनुतो्ቧ जो माननीय न्यायालय उቌኌत समझे ” उ्ቈरवादीगण से याቌኌक को किदलाया जावें। 2. याቌኌकाकता) के किव्ቛान वकील का कहना है किक याቌኌकाकता) ने ्ቚቌኌतवादी ्ቅ. 3 के सम एक अभ्यावेदन दायर किकया है। याቌኌकाकता) सीकिमत राहत की मांग कर रहा है किक ्ቚቌኌतवादी ्ቅ. 3 को याቌኌकाकता) ्ቛारा ्ቚस्तुत अभ्यावेदन पर किन቞ኌद्ቖ समय के भीतर किनण)य लेने का किनदMश किदया जाए। 4 3. 'kklu ds fo}ku vf/koDrk dk कहना है किक याቌኌकाकता) ्ቛारा ्ቚस्तुत अभ्यावेदन पर किनण)य लेने के खिलए ्ቚቌኌतवादी ्ቅ. 3 को किनदMश देने के संबंध में याቌኌकाकता) ्ቛारा मांगी गई सीकिमत ्ቚाथ)ना पर उन्हें कोई आपखि्ቈ नहीं है। 4. यቌኌकाकता) के अቌኌधव्ሹा एवं उ्ቈरवादी शासन के अቌኌधव्ሹा की सुनवाई एवं यቌኌका के अशिभले3ो का अवलोकन किकया गया । 5. याቌኌकाकता) को किनदMशिशत किकया जाता है किक वो अपने शिशकायतों और अनुतो्ቧों के संबंध में अपना अभ्यावेदन संबंቌኌधत अቌኌधकारी/ उ्ቈरवादी ्ቅ. 4 & 5 के सम आदेश की ्ቚቌኌत व इस याቌኌका सकिहत समस्त दस्तावेज़ के साथ आदेश किदनांक से 10 किदनों के भीतर पुन: ्ቚस्तुत करे एवं उ्ቈरवादीगण को यह किनदMशिशत किकया जाता है किक वह याቌኌकाकता) के अभ्यावेदन पर उቌኌत परिरशीलन कर के एवं उसमे किनकिहत शिशकायत का उቌኌत किनराकरण करते हुए याቌኌकाकता) को ाहे गए अनुतो्ቧ नए सम्मत आदेश ्ቛारा पारिरत करे। 6. ्ሺात हो किक इस न्यायालय ने ्ቚकरण के गुण - दो्ቧ का किनराकरण नहीं किकया है उ्ቈरवादीगण न्याय सम्मत आदेश पारिरत करने हेतु स्वतं्ቔ है। उ्ቈरवादी ्ቅ. 4 & 5, 45 किदनों के भीतर याቌኌकाकता) को संबंቌኌधत अभ्यावेदन के बारे में किनराकृ त कर के सूቌኌत करेंगे । 7. उपरो्ሹ किनदMश के साथ इस रिरट याቌኌका किनराकृ त की जाती है । Sd/- Sd/- (Amitendra Kishore Prasad) Judge Raghu Jat