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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 102902 (ALL)

SALEEM v. STATE OF U.P. AND 2 OTHERS

ABAIL/9767/2024 · 2025-09-24

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 9767 of 2024 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् अिग्रम जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 101/2024, अन्तगर्त धारा 147, 148, 149, 307, 323, 336, 504, 506 भा.दं.सं., थाना मंसूरपुर, िजला मुजफ्फरनगर में अिग्रम जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता चंदन िसह को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष है, उसे उपरोक्त धाराओं में द्वेषवश तंग व परेशान करने की िनयत से आिलप्त िकया गया है, उसे आशंका है िक उसे उपरोक्त विणत मामले में िगरफ्तार िकया जा सकता है, जबिक उसके िवरूद्ध कोई िवश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। आवेदक द्वारा ऐसा कोई भी कृ त्य कािरत नहीं िकया गया है, जैसािक प्राथिमकी में उल्लेिखत है।चुटैल के बयानों एवं अिभयोजन कथानक में परस्पर िवरोधाभास है। आवेदक को पूवर् में िदनांक 08.11.2024 को सशतर् अंतिरम अिग्रम जमानत प्रदान की गयी थी एवं उसके द्वारा उक्त शतोर्ं का बखूबी अनुपालन िकया जा रहा है। उनका यह भी कथन है िक आवेदक के िवरूद्ध अभी तक कोई भी बाध्यकारी प्रिक्रया नहीं अपनाई गयी है एवं आवेदक की ओर से यह भी आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा यह तकर् प्रस्तुत िकया गया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है तथा आवेदक के िवरुद्ध पयार्प्त साक्ष्य के आधार पर पुिलस द्वारा आवेदक के िवरुद्ध िदनांक 29.11.2024 को संबंिधत िवचारण न्यायालय में आरोपपत्र प्रेिषत Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Rai, Gaurav Singh Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Saleem .....Applicant(s) State Of U.P. And 2 Others .....Opposite Party(s) िकया गया है। इसिलए आवेदक को अिग्रम जमानत पर मुक्त िकये जाने का कोई औिचत्य प्रतीत नहीं होता है। अतः अिभयुक्त का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाय। 5. यह कहा जा सकता है िक Siddharam Satlingappa Mhetre v. State of Maharashtra, (2011) 1 SCC 694, के मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय ने माना है िक अिग्रम जमानत पर िनणर्य करते समय न्यायालय को आरोप की प्रकृ ित और गंभीरता, अिभयुक्त का पूवर्वृत्त, अिभयुक्त के न्याय से भागने की संभावना पर िवचार करना चािहए तथा न्यायालय को अिभयुक्त के िवरुद्ध उपलब्ध संपूणर् सामग्री का सावधानीपूवर्क मूल्यांकन करना चािहए तथा अिभयुक्त की सटीक भूिमका को भी ध्यान में रखना चािहए। 6. वतर्मान मामले में अिग्रम जमानत संबंधी िविध के स्थािपत िसद्धांतों को ध्यान में रखते हुए और पक्षकारों के िवद्वान अिधवक्ताओं के कथनों, आरोपों की प्रकृ ित, आवेदक की भूिमका और मामले के सभी तथ्यों एवं पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए चूंिक आवेदक की तरफ से शतोर्ं का अनुपालन िकया जा रहा है अथवा नहीं, इसके संबंध में भी आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता की तरफ से आदेश फलक प्रस्तुत नहीं िकया गया है। मात्र िदनांक 17.05.2025 का आदेश फलक प्रस्तुत िकया गया है, उक्त आदेश में आवेदक पर आरोप िवरिचत िकये जाने का कथन िकया गया है। उक्त के अितिरक्त अन्य कोई आदेश फलक संलग्न नहीं िकये गये हैं, िजससे यह पिरलिक्षत हो रहा है िक आवेदक न्यायालय द्वारा अिधरोिपत शतोर्ं का अनुपालन नहीं कर रहा है एवं िनयत ितिथयों पर संबंिधत न्यायालय में उपिस्थत नहीं हो रहा है तथा संबंिधत िवचारण न्यायालय में आवेदक के िवरुद्ध पयार्प्त साक्ष्य पाये जाने के उपरान्त आरोपपत्र प्रेिषत िकया जा चुका है, अतः मामले के गुण-दोष पर िबना कोई िवचार व्यक्त िकए यह अिग्रम जमानत आवेदन पत्र स्वीकार िकए जाने योग्य नहीं है, तद्नुसार आवेदक का अिग्रम जमानत आवेदन पत्र अस्वीकार िकया जाता है। 7. उपरोक्तानुसार वाद के गुण-दोष पर िटप्पणी िकये बगैर यह अिग्रम जमानत प्राथर्नापत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. इस वाद में यिद कोई अंतिरम आदेश हो, तो वह स्वतः समाप्त समझा जाए। 9. कायार्लय को िनदेर्िशत िकया जाता है िक इस आदेश की प्रितिलिप संबंिधत िवचारण न्यायालय को अिवलम्ब प्रेिषत करें। September 25, 2025 Pawan Kumar ABAIL No. 9767 of 2024 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad