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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 102866 (ALL)

ROSHAN SINGH v. STATE OF U.P.

BAIL/33817/2025 · 2025-10-06

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33817 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 188/2025 , अन्तगर्त धारा 64(1), 332(बी), 351(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना कोतवाली देहात, िजला िमजार्पुर में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में ्ऺासंिगक तथ्य यह है िक ्ऺथम सूचना िरपोटर् आट िदवस िवलंिबत है, इसका कोई समुिचत स्प्िीकरण नहीं िदया गया है। किथत पीिड़ता शादीशुदा मिहला है तथा उसके ्षारा दुराशय के तहत किथत घटना के इतने िदवस उपरांत आवेदक को इस मामलें में नािमत िकया गया है, जबिक स्वतं्ऴ सा्षी अंिकत िसह/किथत पीिड़ता की भांजी जो ्षारा अपने बयान में यह कथन िकया गया िक "साहब आप िजस घटना िदनांक 30.04.2025 के िवष में पूछ रहे है उस िदन मैं अपने मामा के घर ्षाम सहडाड़ी (दुबरा पहाड़ी) में ही थी। मैं राि्ऴ में अपनी नानी के साथ घर के बरामदे में सो रही थी। राि्ऴ में क्या हुआ मुझे इसके बार में कोई जानकारी नहीं हो पायी। जब मेरे मामा घर परवापस आये तब मेरी मामी उनसे बतायी िक िदनांक 30.04.2025 की राि्ऴ में 11 बजे पड़ोसी रोशन िसह घर में जबरदस्ती घुसकर मेरी मामी के साथ गलत काम िकया" इससे किथत घटना की संिदग्धता दिशत हो रही है। आगे यह भी कहा गया िक यिद किथत घटना जबरदस्ती घिटत हुई होती तो किथत पीिड़ता के शोर-शराबा करने पर वहां सो रहे ्िि्वयों को अवश्य इसकी जानकारी हो जाती है, िकतु किथत पीिड़ता ्षारा सुिनयोिजत तरीके से दुभार्वना व अनुिचत लाभ पाने के आशय से आवेदक को िमथ्या तथ्यों के आधार पर इस मामलें में नािमत कर िदया गया है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी Versus Counsel for Applicant(s) : Shailesh Pandey Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Roshan Singh .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 09.05.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 7. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 7, 2025 CP.sahani BAIL No. 33817 of 2025 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad