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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 102836 (ALL)
ROSHAN PRAKASH v. State of UP
BAIL/36700/2024 · 2025-07-31
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 102836 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:129547 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 36700 of 2024 Applicant :- Roshan Prakash Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Kamlakar Pal,Shiv Kumar Pal Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. ससूचची पपुनरचीकक्षित।
2. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा एववं रद्वाज्य ककी तरफ सवे कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा कको सपुनद्वा तथद्वा पतद्वावलची कद्वा पररशचीलन ककयद्वा।
3. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककीरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक रकोशन प्रकद्वाश ककी ओर सवे मपु०अ०सवं० 713/2021, अवंतररत धिद्वारद्वा 420, 406, 467, 468, 471 भद्वा.दवं.सवं., थद्वानद्वा नकोएण्डिद्वा सवेक्टर-49, धजलद्वा रगौतम बपुद्ध नरर मम जमद्वानत पर मपुक करनवे हवेतपु प्रस्तपुत ककयद्वा रयद्वा हहै।
4. सवंक्षिवेप मम अकभयकोजन कथद्वानक कवे अनपुसद्वार वतरमद्वान आववेदक नवे अन्य सह- अकभयपुकक्तों कवे सद्वाथ कमलकर ससूचनद्वाकतद्वार कवे सवंपकर मम आकर उसवे प्रलकोभन कदयद्वा कक यकद वह उनककी कवं पनची ककी पररयकोजनद्वाओवं मम कनववेश करतद्वा हहै , तको ववे उसवे कवशवेष दरम और अन्य लद्वाभ प्रदद्वान करमरवे। आववेदक एववं सह -अकभयपुकक्तों कवे आश्वद्वासन मम फफँ सवे ससूचनद्वाकतद्वार नवे उक व्यककयक्तों कवे प्रस्तद्वाव कको स्वचीकद्वार कर धलयद्वा और दको फ्लहैट सवंख्यद्वा 2206 और 2106 कवे आववंटन कवे धलए भपुरतद्वान कर कदयद्वा। ममॉकफर यस गचीन, टमॉवर ए मम पररयकोजनद्वा मम प्रत्यवेक कवे धलए 42,94,125/- रुपयवे ककी दर सवे भपुरतद्वान ककयद्वा रयद्वा थद्वा। आरकोकपयक्तों नवे आश्वद्वासन कदयद्वा कक ववे छह महचीनवे ककी मकोहलत कवे सद्वाथ कदसवंबर 2014 तक दकोनक्तों फ्लहैटक्तों कद्वा कब्जद्वा प्रदद्वान कर दमरवे। जब ससूचनद्वाकतद्वार नवे पररयकोजनद्वा कद्वा कनरचीक्षिर ककयद्वा तको उसवे पतद्वा चलद्वा कक फ्लहैट नवंबर 2206 कद्वा कनमद्वारर आरकोपची कवं पनची दद्वारद्वा नहहीं ककयद्वा रयद्वा हहै।
कशकद्वायतकतद्वार कको 12.10.2015 कको फ्लहैट नवंबर ए 2106 पर कब्जद्वा प्रदद्वान ककयद्वा रयद्वा थद्वा, धजसवे कनष्पद्वाकदत नहहीं ककयद्वा जद्वा सकतद्वा , क्यक्तोंकक आरकोपची व्यकक प्रद्वाधधिकरर कद्वा बकद्वायद्वा भपुरतद्वान करनवे मम कवफल रहवे हह। जद्वावंच करनवे पर ससूचनद्वाकतद्वार कको यह भची पतद्वा चलद्वा कक आरकोपची व्यकक प्रद्वाधधिकरर कद्वा बकद्वायद्वा भपुरतद्वान करनवे मम कवफल रहवे हह।
5.
आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदक कको इस प्रकरर मम रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झसूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हहै , उसनवे कधथत अपरद्वाधि कद्वाररत नहहीं ककयद्वा हहै। आववेदक दद्वारद्वा ऐसद्वा ककोई भची कक त्य कद्वाररत नहहीं ककयद्वा रयद्वा हहै, जहैसद्वाकक प्रद्वाथकमककी मम दकशरत ककयद्वा रयद्वा हहै। आववेदक उक कवं पनची कद्वा कनदवेशक हहै। ससूचनद्वाकतद्वार कववद्वाकदत सवंपधत/भसूखवंण्डि कद्वा कवे तद्वा नहहीं हहै , वरनन् वह अन्य कनववेशकक्तों ककी तरह हची कवं पनची मम कनववेशक हहै, जको कवं पकनयक्तों कवे खद्वातवे मम पहैसद्वा दवेकर, अपनद्वा पहैसद्वा कनववेश करतद्वा हहै और कवं पनची सवे ब्यद्वाज सकहत पहैसद्वा कमद्वातद्वा हहै। ससूचनद्वाकतद्वार दद्वारद्वा धिन वद्वापसची कवे प्रस्तद्वाव पर सहमकत व्यक करनवे कवे उपरद्वान्त जररए चवेक रुपए वद्वापस कर कदयद्वा रयद्वा, तको फ्लहैट आववंटन कवे सवंबवंधि मम आरवे ककी कशकद्वायत स्वचीकद्वायर नहहीं हहै और चवेक बद्वाउवंस हकोनवे कवे सवंबवंधि मम कद्वायरवद्वाहची ककी जद्वा सकतची हहै, धजसकवे सवंबवंधि मम ससूचनद्वाकतद्वार नवे उसची मद्वामलवे कवे सवंबवंधि मम धिद्वारद्वा 138 एन.आई.
अधधिकनयम कवे तहत आववेदक कवे धखलद्वाफ कशकद्वायत भची दजर करद्वाई हहै, ससूचनद्वाकतद्वार और आववेदक कवे बचीच RERA न्यद्वायद्वालय मम भची वद्वाद लवंकबत हहै। उक वद्वाद मम सह-अकभयपुकरर पकथ्वचीरद्वाज कसद्वानद्वा और हरमद्र कको मद्वाननचीय उच्च न्यद्वायद्वालय दद्वारद्वा अकगम जमद्वानत प्रदद्वान कर दची रई हहै। आववेदक दद्वारद्वा ससूचनद्वाकतद्वार यद्वा ककसची अन्य कनववेशक कद्वा पहैसद्वा हड़पनवे हवेतपु ककोई धिकोखद्वाधिड़ची कद्वाररत नहहीं ककी हहै। ससूचनद्वाकतद्वार दद्वारद्वा फ्लहैट सवं० ए 2106 कद्वा कवकय-कवलवेख कनष्पद्वाकदत करनवे हवेतपु अभची तक आवश्यक कदम नहहीं उठद्वायद्वा हहै। ससूचनद्वाकतद्वार नवे आववेदक एववं अन्य सह-अकभयपुकक्तों कवे कवरुद्ध समद्वान तथ्यक्तों पर अलर -अलर कद्वाररवद्वाई शपुरू कर दची हहै, जको कवधधिक रूप सवे स्वचीकद्वायर नहहीं हहै। वतरमद्वान वद्वाद दचीवद्वानची प्रकक कत कद्वा हहै , ककन्तपु जद्वानबसूझकर इसवे आपरद्वाधधिक रूप कदयद्वा रयद्वा हहै। चसूवंकक वतरमद्वान वद्वाद मम कववद्वाद कवं पनची सवे सवंबवंधधित हहै , ककन्तपु कवं पनची कको पक्षिकद्वार
बनद्वानवे कवे बजद्वाय सचीधिवे तगौर पर आववेदक कको पक्षिकद्वार बनद्वा कदयद्वा रयद्वा हहै , जकोकक कवधधिसम्मत नहहीं हहै। आववेदक दद्वारद्वा अपनवे पसूवर कवे आपरद्वाधधिक इकतहद्वास कको शपथपत कवे प्रस्तर सवं० 31 एववं 36 मम स्पष्ट ककयद्वा रयद्वा हहै। पपुननः उनकद्वा यह भची कथन हहै कक आववेदक ककी तरफ सवे यह आश्वद्वासन कदयद्वा रयद्वा हहै कक वह कद्वानसून ककी प्रककयद्वा मम सहयकोर करनवे कवे धलए तहैयद्वार हहै और जब भची आवश्यकतद्वा हकोरची वह ईमद्वानदद्वारची सवे अदद्वालत कवे समक्षि खपुद कको उपलब्धि करद्वाएरद्वा और उन सभची शतरवं कको स्वचीकद्वार करनवे कवे धलए भची तहैयद्वार हहै जको न्यद्वायद्वालय उस पर अधधिरकोकपत करवेरची। आववेदक कनदरष हहै तथद्वा वह इस प्रकरर मम कद० 05.08.2024 सवे कद्वारद्वारद्वार मम कनरुद्ध हहै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय।
6. कवदद्वान अपर शद्वासककीय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल कवरकोधि करतवे हहए तकर प्रस्तपुत ककयद्वा कक आववेदक दद्वारद्वा कद्वाररत अपरद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभचीर प्रकक कत कद्वा हहै, इसधलए आववेदक कको जमद्वानत पर न छकोड़द्वा जद्वाय।
7. आववेदक कवे कवदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररप्रवेक्ष्य मम पतद्वावलची पर उपलब्धि सद्वारवद्वान तथ्यक्तों एववं पररणस्थकतयक्तों कद्वा समग रूप सवे अवलकोकन करनवे कवे बद्वाद , सबसूतक्तों ककी प्रकक कत और ककसची भची ठकोस कवरकोधिद्वात्मक सद्वामगची ककी अनपुपणस्थकत एववं उपलब्धि सद्वामगची सवे छवेड़छद्वाड़ ककी सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरची रद्वाय मम आववेदक कको जमद्वानत पर मपुक करनवे कद्वा उपयपुक आधिद्वार हहै।
8.
अतनः वद्वाद कवे रपुर-दकोष पर कबनद्वा ककोई कटप्परची ककए हहए आववेदक कको उपरकोक वकररत अपरद्वाधि मम सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय ककी सवंतपुकष्ट पर व्यककरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरद्वाकश कवे ककोई भची दको प्रकतभसू प्रस्तपुत करनवे पर कनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत पर छकोड़ कदयद्वा जद्वाय। i. आववेदक कवववेचनद्वा यद्वा परचीक्षिर कवे दगौरद्वान अकभयकोजन सद्वाक्ष्यक्तों कवे सद्वाथ छवेड़छद्वाड़ नहहीं करवेरद्वा। ii. आववेदक अकभयकोजन सद्वाकक्षियक्तों व पचीकड़तद्वा / कशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं।
iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशक्तों कद्वा पद्वालन करवेरद्वा , वह परचीक्षिर कवे दगौरद्वान कबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए कनयत कतधथ पर न्यद्वायद्वालय मम उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परचीक्षिर मम ईमद्वानदद्वारची सवे सहयकोर करवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत पर ररहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत ककी स्वतवंततद्वा कद्वा दपुरूपयकोर नहची करवेरद्वा और ककसची भची अपरद्वाधधिक रकतकवधधि मम धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरद्वाधधिक कक त्य करवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक्षि यद्वा अप्रत्यक्षि रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यक्तों सवे पररकचत ककसची भची व्यकक यद्वा पपुधलस अधधिकद्वाररयक्तों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमककी नहहीं दवेरद्वा न हची उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करवेरद्वा, धजसकवे कद्वारर उन्हम न्यद्वायद्वालय मम तथ्यक्तों कको उजद्वारर करनवे सवे कवरत रहनद्वा पण्डिवेडे़।
9. उपरकोक शतरवं मम सवे ककसची कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मम , परचीक्षिर न्यद्वायद्वालय आववेदक ककी जमद्वानत कनयमद्वानपुसद्वार रद्द करनवे कको स्वतवंत हहै। Order Date :- 1.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad