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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 102760 (ALL)

PRAMOD KUMAR v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/33845/2025 · 2025-10-06

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33845 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 281/2025, अन्तगर्त धारा 75, 77, 78, 64(2)(एम), 87, 137(2), 351(3) भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 5एल/6 पाक्सो एक्ट, थाना ्ऺेमनगर, िजला बरेली में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा अवगत कराया गया िक उन्हें ्ऺाप्त अनुदेश के अनुसार िवप्षी सं० 4 को नोिटस, िदनांक 17.09.2025 िनष्पािदत/तामील कराया जा चुका है। 4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक पूवर् में िवप्षी प्षकार संख्या 4 ्षारा आवेदक के िवरु्ध मु०अ०सं० 132 वषर् 2024 में अंतगर्त धारा 363, 366, 506 भारतीय दंड संिहता, थाना ्ऺेमनगर, िजला बरेली में दजर् कराई गई थी, िजसमें आरोप लगाया गया है िक आवेदक ्षारा उसकी पु्ऴी को िदनांक 24.4.2025 को बहला-फु सलाकर भगा ले जाया गया है। उ्व मामले में पीिड़ता का बयान धारा 161 दंड ्ऺि्वया संिहता के अंतगर्त दजर् िकया गया है, िजसमें उसने अिभयोजन प्ष की उ्व ्ऺथम सूचना िरपोटर् में आरोिपत कहानी का खंडन करते हुए उसने कहा है िक वह स्वयं िकसी को सूचना िदए िबना अपने घर से चली गई थी तथा धारा 164 दंड ्ऺि्वया संिहता के तहत बयान में पीिड़ता ने ्ऺथम सूचना िरपोटर् में आरोिपत अिभयोजन प्ष की कहानी का िफर से खंडन िकया है। आगे यह भी कहा गया िक मुख्य िचिकत्सा अिधकारी, बरेली ्षारा आयु ्ऺमाण प्ऴ जारी िकया गया, िजसके अनुसार पीिड़ता की आयु 18 वषर् है। इस Versus Counsel for Applicant(s) : Amit Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Pramod Kumar .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) ्वम में िववेचना अिधकारी ्षारा िववेचना के दौरान आवेदक के िवरू्ध कोई अपराध नहीं पाया गया और इसिलए उनके ्षारा िदनांक 10.5.2024 को इस मामलें में आवेदक के प्ष में अंितम िरपोटर् ्ऺस्तुत की गयी। ्ऺस्तुत की गई इस अंितम िरपोटर् से ्ििथत होकर िवप्षी संख्या 4 ने वतर्मान मामले में आवेदक के िखलाफ पुनः ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई है, जो िमथ्या तथ्यों पर आधािरत है, बिल्क ऐसा ्ऺतीत होता है िक आवेदक को परेशान करने व अनुिचत लाभ पाने के दुराशय से वतर्मान मामले में ्ऺथम सूचना िरपोटर् दजर् कराई गई है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक लगभग 19 वषर् का एक युवा लड़का है और बी.ए. का छा्ऴ है। भाग I में आवेदक है और वह राजिष महािव्यालय, बरेली में अध्ययनरत है तथा पीिड़ता भी लगभग 19 वषर् से अिधक आयु की है तथा बी.कॉम ि्षतीय वषर् की छा्ऴा है तथा बरेली कॉलेज, बरेली में अध्ययनरत है। उनके बीच िम्ऴता िवकिसत हो गई जो िवप्षी प्ष संख्या 4 और उसके पिरवार के सदस्यों को िबल्कु ल पसंद नहीं थी और इसिलए िदनांक 24.4.2024 को पीिड़ता के भाई ने पीिड़ता के साथ मारपीट की और इसिलए वह अपना घर छोड़कर चली गई थी। ्ऺश्नगत मामलें में अंितम िरपोटर् ्ऺस्तुत िकए जाने से ्षुब्ध होकर िवप्षी प्ष संख्या 4 ने पुनः एक झूठी कहानी ग़ाी, िजसके ्षारा उसे वतर्मान मामले में आवेदक को झूठा फं साया गया है, जबिक आवेदक ने पीिड़ता को कभी परेशान नहीं िकया और न ही उसके साथ शारीिरक संबंध बनाने के िलए दबाव डाला। अिभयोजन प्ष की कहानी की असत्यता इस तथ्य से भी स्प्ि होती है िक ्ऺथम सूचना िरपोटर् और पीिड़ता/िवप्षी संख्या 4 के धारा 180 बी.एन.एस.एस. के तहत दजर् बयान में भी आवेदक के िवरु्ध बलात्कार का आरोप नहीं लगाया गया है, तथािप काफी िवलंब के बाद बलात्कार का आरोप लगाया गया है, िजससे अिभयोजन प्ष की पूरी कहानी अत्यिधक संिदग्ध और अिव्षसनीय हो जाती है। आवेदक ने न तो कभी बलात्कार िकया और न ही उसे शारीिरक संबंध बनाने के िलए मजबूर िकया, जबिक आवेदक पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाए गए हैं। वतर्मान मामलें में पीिड़ता ्षारा धारा 180, 183 भादंसं के तहत दजर् िकए गए बयान स्वयं िवरोधाभासी हैं और ऐसा ्ऺतीत होता है िक पीिड़ता ने ये बयान िवप्षी संख्या 4 के दबाव में आवेदक को परेशान करने के उ्देश्य से िदए हैं, इसिलए ये िबल्कु ल भी िव्षसनीय नहीं हैं। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह भी है िक किथत पीिड़ता ्षारा किथत रूप से अ्शील फोटो/वीिडयों बनाने व ्ऺसािरत करने का आ्षेप आरोिपत िकया गया िक गया है, िकतु िववेचक ्षारा ऐसा कोई किथत अ्शील फोटो/वीिडयो बरामद नहीं िकया गया है। इन पिरिस्थितयों में, यहाँ यह उल्लेख करना ्ऺासंिगक है िक पीिड़ता के बयान तोड़-मरोड़ कर िदए गए हैं और िबल्कु ल भी िव्षसनीय नहीं हैं। मामले में ्ऺाथिमकी दजर् होने में काफी देरी हुई है, िजसका स्प्िीकरण नहीं िदया गया है और इसिलए अिभयोजन प्ष की पूरी कहानी की सत्यता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है। किथत पीिड़ता बािलग है तथा अपना अच्छा बुरा समझने में स्षम है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० BAIL No. 33845 of 2025 2 03.08.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 5. 8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 7, 2025 CP.sahani BAIL No. 33845 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad