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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 102741 (ALL)

KITAAB SINGH v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/33815/2025 · 2025-10-06

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33815 of 2025 Court No. - 65 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक ्ऺकीणर् जमानत ्ऺाथर्ना प्ऴ आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 205/2025 , अन्तगर्त धारा 137(2), 87, 64 भारतीय न्याय संिहता एवं धारा 3/4 पाक्सो एक्ट, थाना िसरसागंज, िजला िफरोजाबाद में जमानत पर मु्व करने हेतु ्ऺस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िव्षान अिधव्वा एवं िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा को सुना तथा प्ऴावली का पिरशीलन िकया। 3. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ्षारा अवगत कराया गया िक उन्हें ्ऺाप्त अनुदेश के अनुसार िवप्षी सं० 2 को नोिटस, िदनांक 11.08.2025 िनष्पािदत/तामील कराया जा चुका है। 4. आवेदक के िव्षान अिधव्वा ने तकर् ्ऺस्तुत िकया िक आवेदक को इस ्ऺकरण में गलत एवं फजर् ा़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। इस मामलें में ्ऺासंिगक तथ्य यह भी है िक ्ऺारंिभक आवेदन/िशकायत, गुमशुदगी की िरपोटर् के स्वरूप का है तथा इसमें वतर्मान आवेदक के िवरु्ध कोई आरोप नहीं लगाया गया है, साथ ही उ्व आवेदन/िशकायत में आवेदक की आयु 19 वषर् बताई गई है। इसके उपरांत आवेदक का नाम आठ िदन की देरी के बाद, अिभयो्वा की माँ ्षारा िदनांक 19.04.2025 को दजर् कराई गई ्ऺाथिमकी में सामने आया, िजसमें उसने स्वयं कहा है िक "उसे कै से, कब और कहाँ से पता चला?" यह न तो ्ऺाथिमकी में और न ही उसके बयानों में कहा गया है। यह ्ऺश्न िवशेष रूप से तब ्ऺासंिगक हो जाता है जब अिभयो्वा 06.04.2025 से, यानी लगभग 13 िदन पहले से लापता है। ्ऺाथिमकी स्प्ि रूप से एक बाद में सोची-समझी और अिभयु्व/आवेदक को झूठा फं साने के िलए ्ऺेिरत घटना्वम ्ऺतीत होती है। अिभयो्वा को एक सावर्जिनक स्थान, यानी बीयूआर सीना बस स्टैंड से, उसी िदन बरामद िकया गया था िजस िदन ्ऺाथिमकी दजर् कराई गई थी, न िक आवेदक की िहरासत या सचेत कब्जे से। िदनांक 20.04.2025 को िचिकत्सा Versus Counsel for Applicant(s) : Satya Dheer Singh Jadaun Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Kitaab Singh .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) परी्षण के िलए भेजे जाने के बावजूद, अिभयो्वा ने िचिकत्सा परी्षण कराने से स्प्ि रूप से इनकार कर िदया और िकसी भी िचिकत्सा साष्य या परी्षण िरपोटर् के अभाव में, यौन उत्पीड़न का आरोप अपु्ि है और इसमें फोरेंिसक पुि्ि का अभाव है, जो िक धारा 64 बी.एन.एस. और पॉक्सो अिधिनयम की धारा 3 और 4 के तहत अपराधों के अिभयोजन के िलए आवश्यक है। आगे यह भी कहा गया िक किथत पीिड़ता के धारा 161 दं०्ऺ०सं० एवं 164 दं०्ऺ०सं० के बयान में परस्पर िवरोधाभाष है। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आ्षासन िदया गया है िक वह कानून की ्ऺि्वया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के सम्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतॏल को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदरॏष है तथा वह इस ्ऺकरण में िद० 20.04.2025 से कारागार में िनरु्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 5. िव्षान अपर शासकीय अिधव्वा ने अिभयु्व के जमानत का ्ऺबल िवरोध करते हुए तकर् ्ऺस्तुत िकया िक अिभयु्व ्षारा कािरत अपराध सं्ञेय एवं गंभीर ्ऺकृ ित का है, इसिलए अिभयु्व को जमानत पर न छोड़ा जाय। 6. उभय प्ष के िव्षान अिधव्वा के तकॏल के पिर्ऺेष्य एवं प्ऴावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का सम्ष रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की ्ऺकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक साम्षी की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध साम्षी से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मु्व करने का उपयु्व आधार है। 7. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरो्व विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुि्ि पर ्िि्वगत बंध-प्ऴ एवं अिधक धनरािश के दो स्थानीय ्ऺितभू ्ऺस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतॏल के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परी्षण के दौरान अिभयोजन साष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन साि्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परी्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परी्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतं्ऴता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक ्ऺत्य्ष या अ्ऺत्य्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी ्िि्व या 5. BAIL No. 33815 of 2025 2 पुिलस अिधकािरयों को कोई ्ऺलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 8. उपरो्व शतॏल में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, िवचारण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार र्द करने को स्वतं्ऴ है। October 7, 2025 CP.sahani BAIL No. 33815 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad