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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 101296 (ALL)

RAVI KUMAR TRIPATHI ALIAS RAVI TRIPATHI v. STATE OF U.P.

BAIL/33629/2025 · 2025-09-25

Gautam Chowdhary

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 33629 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र, आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 386/2024 अन्तगर्त धारा 316(2), 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) भारतीय न्याय संिहता, थाना िबन्दकी, िजला फतेहपुर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है। इस मामलें में प्रांसिगक तथ्य यह है िक यह मामला पूणर्तः िसिवल प्रकृ ित का है, िजसमें कोई आपरािधक अपराध नहीं बनता है और आरोपों के अवलोकन से के वल यह कहा जा सकता है िक भुगतान में िवलम्ब हुआ है, िजसके िलए आपरािधक दाियत्व नहीं बनाया जा सकता। आवेदक को इस फमर् से सूचनाकतार् द्वारा भुगतान न िमलने के बारे में कोई जानकारी नहीं है, िजसका संचालन मुख्यतः स्वामी रमेश कु मार पटेल उफर् छोटे और उनके साझेदार उमेश कु मार गुप्ता द्वारा िकया जाता था। आवेदक ने फमर् के िकसी भी उपभोक्ता को कभी भी अपने हस्ताक्षर या मुहर वाली कोई रसीद नहीं दी है, न ही उसने धमर्काटा पर कोई अनाज तोला है, जैसा िक वतर्मान मामले में सूचनादाता द्वारा आरोप लगाया गया है। आगे यह भी कहा गया िक आवेदक की सूचनाकतार् या उसके पिरिचत से फमर् पिरसर में या उसके बाहर कभी मुलाकात नहीं हुई है और उसे सूचनादाता और जाँच अिधकािरयों द्वारा वतर्मान मामले में के वल आवेदक को परेशान करने के इरादे से झूठा फं साया जा रहा है, जो अभी अपने किरयर के शुरुआती चरण में है। किथत फमर् की सभी व्यावसाियक गितिविधयाँ सह-अिभयुक्त और फमर् के मािलक श्री रमेश कु मार ओथ किमशन उफ़र् तोहोते द्वारा की गईं, िजन्हें पहले ही इस माननीय न्यायालय द्वारा आपरािधक िविवध प्रथम जमानत में जमानत दी जा चुकी है। िदनेश कु मार गांधी और उनके बेटे प्रांजल ने िकसानों द्वारा आपूित िकए गए अनाज के Versus Counsel for Applicant(s) : Arpan Kumar Pandey, G.A. Counsel for Opposite Party(s) : Ravi Kumar Tripathi Alias Ravi Tripathi .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) भुगतान का वादा िकया है, यही बात िकसानों के बयान में भी कही गई है। िकसी भी िकसान ने यह नहीं कहा है िक उन्होंने आवेदक को माल की आपूित की है। आवेदक की कोई भूिमका नहीं बताई गई है। िकसानों द्वारा लगाए गए आरोप लेखा-जोखा के आधार पर हैं, और उनका सत्यापन लेखा-जोखा पुस्तकों से िकया जा सकता है, िजसके िलए आवेदक को िकसी भी आपरािधक अपराध के िलए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता। पुनः उनका कथन है िक आवेदक की ओर से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से िवचारण न्यायालय के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 01.02.2025 से कारागार में िनरुद्ध है, इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक अिभयुक्त द्वारा कािरत अपराध गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए अिभयुक्त को जमानत पर न छोड़ा जाय। 5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है। 6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं उसी धनरािश के दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। 1. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। 2. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। 3. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी आपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। 4. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा , 5. BAIL No. 33629 of 2025 2 िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़। 7. उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 26, 2025 CP.sahani BAIL No. 33629 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad