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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32919 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 131/2025, अंतगर्त धारा 305(e), 318(4), 334(1), 3(5), 112, 317(2) बी.एन.एस., थाना िकदवई नगर, िजला कानपुर नगर में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(क) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक प्राथिमकी में नािमत नहीं है, दौरान िववेचना मुखिबर खास की सूचना पर आवेदक का नाम प्रकाश में आया है। प्राथिमकी िवलिम्बत है तथा उक्त िवलम्ब का कोई समुिचत स्पष्टीकरण नहीं िदया गया है। घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। संस्वीकृ त बयान के आधार पर आवेदक को प्रश्नगत घटना में अिभयुक्त बना िदया गया है। मुखिबर खास की सूचना पर िदनांक 18.06.2025 को आवेदक को सावर्जिनक स्थान से िगरफ्तार करते हुए रु० 20,000/- बरामद करने का कथन िकया गया है, िकन्तु उक्त बरामदगी का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है। िववेचना के दौरान, अन्य सह-अिभयुक्तों अथार्त् अंिकत ित्रपाठी, आशीष ित्रपाठी, िजन्हें अन्य स्थान से िगरफ्तार िकया गया था, ने अपने स्वीकारोिक्त बयानों में आवेदक का नाम शािमल िकया, िजन्होंने पहले ही एटीएम काटने और पैसे चोरी करने का अपराध करना स्वीकार कर िलया। उनको भी संस्वीकृ त बयान के आधार पर ही अिभयुक्त बनाया गया है। आवेदक िहताची पेमेंट सिवसेज कं पनी में मुकु ल सोनी नामक एक अन्य व्यिक्त के साथ कस्टोिडयन के पद पर तैनात था और िदनांक 27.04.2025 को कं पनी के प्रबंधक अमृत िसकरवार ने उन्हें कायार्लय में बुलाया और उनकी आईडी ली। काडर् और चािबयाँ छीन लीं और उन्हें सेवा के िलए आने से मना कर िदया। सेवा अविध के दौरान, कं पनी के उक्त प्रबंधक ने आवेदक को मानिसक रूप से परेशान िकया और इस कारण कभी-कभी आवेदक उसकी िटप्पणी पर जवाब देता था, इसिलए उक्त प्रबंधक ने उसे झूठे और मनगढ़़़़ंत मामले में फं साने की धमकी दी और इसी वजह से आवेदक को वतर्मान घटना में अिभयुक्त बना िदया गया। िदनांक 12.06.2025 को राित्र लगभग 11:30 बजे थाने पर बुलाया और उसे िगरफ्तार कर िकदवई नगर थाने की साके त नगर चौकी ले गई और उसे मानिसक और शारीिरक रूप से प्रतािड़त िकया तथा आवेदक के पिरवार से अवैध धन की मांग की और धन लेने के बावजूद संबंिधत पुिलस ने िबना िकसी कारण के Versus Counsel for Applicant(s) : Ajay Kumar Yadav, Priyanka Singh, Satya Dheer Singh Jadaun Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Deepak Jaiswal .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) उसे जबरन िगरफ्तार कर िलया और
उसके कब्जे से उपरोक्त झूठी बरामदगी िदखाई। पुिलस ने आवेदक के कब्जे से के वल 20,000/- रुपये की बरामदगी िदखाई और उसे सावर्जिनक स्थान से िगरफ्तार िकया, लेिकन किथत बरामदगी का कोई प्रत्यक्षदशीर् साक्षी नहीं है। (ख) अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक अिभलेख पर ऐसा कोई सीसीटीवी फु टेज नहीं है िजसमें आवेदक पहचाना जा सके या िजसमें आवेदक की भूिमका पिरलिक्षत हो रही हो। गवाहों के बयानों के अनुसार, यह िबल्कु ल स्पष्ट है िक दो संरक्षक हैं और दो चािबयाँ हैं और पैसे िनकालने के िलए, दोनों संरक्षकों को एक ओटीपी प्राप्त होता है और उसके बाद ताला खोला जा सकता है, इसिलए यह संभव नहीं है िक आवेदक अके ले एटीएम का ताला खोलने में सक्षम हो, इस प्रकार आवेदक की कोई भूिमका नहीं है। संबंिधत पुिलस ने अन्य पाँच सह-अिभयुक्तों को िकसी अन्य स्थान से िगरफ्तार िकया और उनके कब्जे से अन्य उपकरण बरामद िकए, िजन्होंने एटीएम काटने और पैसे चुराने का िगरोह चलाते समय स्वयं को बचाने के िलए आवेदक का नाम गलत बताया था। आवेदक वतर्मान किथत घटना में िकसी भी प्रकार से शािमल नहीं है। िनयमों के अनुसार, एटीएम पर हमेशा एक सुरक्षा गाडर् मौजूद रहता है , लेिकन एटीएम के सुरक्षा गाडर् का कोई बयान दजर् नहीं िकया गया और न ही अिभलेख पर उपलब्ध है, िजससे भी अिभयोजन कथानक िमथ्या पिरलिक्षत हो रहा है। वतर्मान घटना में आवेदक की कोई िविशष्ट भूिमका विणत नहीं की गयी है। आवेदक द्वारा अपने पूवर् के आपरािधक इितहास को शपथपत्र के प्रस्तर सं० 36 में स्पष्ट िकया गया है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी।
आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 18.06.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस BAIL No. 32919 of 2025 2
अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7.
उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 24, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32919 of 2025 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad