RAMESH CHANDRA TIWARI ALIAS RAMESH KUMAR TIWARI v. STATE OF U.P.
BAIL/32753/2025 · 2025-09-22
Gautam Chowdhary
body2025
DailyLaw.ai
[ 2025 DAILYLAW 100131 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 32753 of 2025 Court No. - 70 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. वतर्मान दािण्डक प्रकीणर् जमानत प्राथर्ना पत्र आवेदक की ओर से मु०अ०सं० 002/2020, अंतगर्त धारा 409, 420, 467, 468, 471, 477-ए., 120-बी., 34 भा.दं.सं., थाना वाराणसी सेक्टर (ई.ओ.डब्ल्यू.), िजला वाराणसी में जमानत पर मुक्त करने हेतु प्रस्तुत िकया गया है।
2.
आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं राज्य की तरफ से िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3.(i) आवेदक द्वारा प्रथमतः यह कथन िकया गया िक आिथक अपराध अनुसंधान संगठन, सेक्टर वाराणसी के िनरीक्षक कृ ष्ण मुरारी िमश्रा द्वारा 26.02.2020 को दजर् की गई एफआईआर के अनुसार, जौनपुर िजले में अप्रैल 2004 से अक्टूबर 2005 के बीच सम्पूणर् ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई) के तहत खाद्यान्न िवतरण में अिनयिमतताओं के संबंध में िदनांक 13.04.2007 के एक सरकारी रेफरल से उत्पन्न हुआ है। इस योजना के अनुसार, धनरािश और खाद्यान्न का संयुक्त रूप से िजला पंचायत अध्यक्ष, मुख्य िवकास अिधकारी और पिरयोजना िनदेशक द्वारा पयर्वेक्षण िकया जाना था, िजसमें राशन डीलरों द्वारा मास्टर रोल के माध्यम से उिचत िवतरण िकया जाना था। जांच में पता चला िक मुफ्तीगंज ब्लॉक में, 36 स्वीकृ त पिरयोजनाओं में से, दो यादृिच्छक रूप से नमूना िलए गए कायर् कधारी से िवजयीपुर तक िमट्टी िनमार्ण और िवजयीपुर-बेलाव से कटहरी तक सड़क को फजीर् तरीके से पूणर् िकया गया था। मौिखक और दस्तावेज़ी साक्ष्यों के आधार पर जय प्रकाश पांडेय (तत्कालीन पिरयोजना िनदेशक, डीआरडीए), श्रीमती प्रभावती पाल (तत्कालीन िज़ला पंचायत अध्यक्ष), हिर राम वमार् (तत्कालीन िज़लापूित अिधकारी), अनुराग श्रीवास्तव (तत्कालीन अवर अिभयंता ), अिनल कु मार गुप्ता, रामजतन यादव (तत्कालीन बीडीओ, मुफ़्तीगंज), प्रमोद कु मार यादव ( Versus Counsel for Applicant(s) : Ashvani Tripathi, Raghuvansh Misra, Vishal Tandon Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ramesh Chandra Tiwari Alias Ramesh Kumar Tiwari .....Applicant(s) State of U.P. .....Opposite Party(s) तत्कालीन पूित िनरीक्षक), और रमेश चंद ितवारी (कोटेदार) सिहत कई अिधकािरयों को दोषी ठहराया, साथ ही मृतक अिधकािरयों प्रकाश चंद पांडेय (तत्कालीन अपर मुख्य अिधकारी), रमेश कु मार (तत्कालीन लेखाकार), और सुधांशु (तत्कालीन एनआरईपी िलिपक) को दोषी ठहराया गया। यह संदेह था िक शेष 34 पिरयोजनाओं में भी इसी तरह का गबन हुआ था। (ii) आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा पुनः यह कथन प्रस्तुत िकया िक आवेदक को इस प्रकरण में गलत एवं फजीर् ढ़़़ंग से झूठा फं साया गया है, उसने किथत अपराध कािरत नहीं िकया है। आवेदक द्वारा प्रश्नगत घटना कािरत नहीं की गयी है, जैसा प्राथिमकी में विणत िकया गया है। किथत घटना वषर् 2004-2005 की है, जबिक प्राथिमकी लगभग 15-16 वषोर्ं की अत्यिधक और अस्पष्टीकृ त देरी के बाद वषर् 2020 में दजर् की गई थी। उक्त अविध में िबना िकसी जाँच या कायर्वाही के अत्यिधक और अस्पष्टीकृ त देरी आरोपों की सत्यता पर गंभीर संदेह पैदा करती है। आवेदक को मात्र संदेह के
आधार पर वतर्मान घटना में अिभयुक्त बनाया गया है। एफआईआर के अवलोकन से यह स्पष्ट है िक कायोर्ं के िक्रयान्वयन के िलए अवर अिभयंता िजम्मेदार थे, जबिक िवपणन िनरीक्षक ने मुख्य िवकास अिधकारी के िनदेर्श पर एफ.सी.आई.
गोदाम से खाद्यान्न प्राप्त िकया और अिभलेखों का रखरखाव िकया। अिधशासी अिधकारी ने आवंटन दजर् िकए और अध्यक्ष ने अपर मुख्य अिधकारी के साथ िमलकर मजदूरी िवतरण के िलए योजना के बैंक खाते का संचालन िकया। कायर्-प्रभारी ने कायर्-पूणर्ता िरपोटर् प्रस्तुत की और अवर अिभयंता ने माप पुिस्तका तैयार की। कोटेदार (आवेदक), एक अनुमोिदत राशन िवक्रे ता होने के नाते, िजला पंचायत गोदाम से खाद्यान्न प्राप्त करता था, स्टॉक/िवतरण रिजस्टर का रखरखाव करता था और कू पन के अनुसार श्रिमकों को खाद्यान्न िवतिरत करता था। मुख्य िवकास अिधकारी, पिरयोजना िनदेशक और कायर् सिमित ने उिचत कायार्न्वयन का पयर्वेक्षण, िरपोटर् और सत्यापन िकया। (iii) अिग्रम आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा कथन िकया गया िक आवेदक, उिचत मूल्य की दुकान का िवक्रे ता होने के नाते (कोटेदार), के वल िजला पंचायत द्वारा जारी कू पन के आधार पर श्रिमकों को राशन िवतरण के िलए िजम्मेदार था। िवतरण की वैधता के अलावा, आवेदक की कोई अन्य भूिमका नहीं थी। रवींद्र कु मार ितवारी (आवेदक के भाई) और सरकार के बीच उिचत मूल्य की दुकान के डीलर के संबंध में एक समझौता हुआ था। रवींद्र कु मार ितवारी की मृत्यु के बाद, आवेदक (उनके भाई होने के नाते) को बाद में उनके स्थान पर कायर्भार ग्रहण िकया। आवेदक ने कू पन धारकों को खाद्यान्न िवतरण से संबंिधत सभी अिभलेखों को बनाए रखा था, लेिकन उपरोक्त समझौते के खंड 8 के अनुसार, अिभलेखों को के वल तीन वषोर्ं की अविध के िलए सुरिक्षत अिभरक्षा में रखा जाना आवश्यक था। चूंिक एफआईआर वषर् 2020 में दजर् की गई थी, अथार्त् किथत घटना के लगभग 15-16 साल बाद, आवेदक िनधार्िरत अविध से अिधक उक्त अिभलेखों को रखने के िलए बाध्य नहीं था। आवेदक अपनी िगरफ्तारी तक लगातार उिचत मूल्य की दुकान के एजेंट के रूप में कायर् कर रहा था और इस अविध के दौरान कू पन धारकों BAIL No. 32753 of 2025 2 को खाद्यान्न िवतरण के संबंध में उसके िवरुद्ध कभी कोई िशकायत नहीं की गई। किथत घटना और प्राथिमकी दजर् होने के बीच 15-16 वषोर्ं की पूरी अविध में, आवेदक के िवरुद्ध कभी कोई जाँच, िनरीक्षण या िवभागीय कारर्वाई शुरू नहीं की गई। आवेदक के िवरुद्ध भ्रष्टाचार या गबन का कोई िवशेष आरोप नहीं है। उसकी भूिमका िवपणन िनरीक्षक के माध्यम से िजला पंचायत गोदाम से राशन प्राप्त करने और कू पन के बदले श्रिमकों को िवतिरत करने तक सीिमत थी। आवेदक के वल प्रािधकािरयों द्वारा आपूित िकए गए राशन के प्रबंधन के िलए
िज़म्मेदार था और उसकी खरीद या िवतरण पर उसका कोई िनयंत्रण नहीं था। उसे इसे िजला पंचायत गोदाम से प्राप्त करना था और कू पन के अनुसार श्रिमकों को िवतिरत करना था। इसिलए, उसने िवतरण श्रृंखला में के वल एक कड़ी के रूप में कायर् िकया और वह किथत अपराध नहीं कर सकता था। (iv) आवेदक की आयु लगभग 60 वषर् है। वतर्मान घटना का कोई स्वतंत्र साक्षी नहीं है एवं आवेदक के िवरुद्ध आरोपों की पुिष्ट के िलए िकसी स्वतंत्र गवाह को जांच का िहस्सा नहीं बनाया गया है। प्रश्नगत किथत घटना में सह-अिभयुक्ता प्रभावती पाल (तत्कालीन िजला पंचायत अध्यक्ष) को दािण्डक प्रकीणर् िरट यािचका सं० 3218/2025, आदेश िदनांिकत 31.07.2025 द्वारा अंतिरम राहत प्रदान कर दी गई है। यिद यह मान भी िलया जाय िक आरोप सत्य हैं, तब भी आवेदक कोई भी दस्तावेज़ जाली नहीं बना सकता था, क्योंिक उसकी भूिमका के वल खाद्यान्न िवतरण तक ही सीिमत थी। आवेदक के िवरुद्ध भारतीय दंड संिहता की धारा 409 के अंतगर्त अपराध नहीं बनता, क्योंिक उसने के वल राशन के संरक्षक के रूप में कायर् िकया था और उसका सरकारी धन पर कोई िनयंत्रण नहीं था या कायोर्ं के िनष्पादन का प्रबंधन करने का कोई अिधकार नहीं था। आवेदक के िवरुद्ध भारतीय दंड संिहता की धारा 420, 467, 468, 471 और 477-ए के अंतगर्त अपराध नहीं बनता, क्योंिक उसने के वल कू पन के अनुसार राशन िवतिरत िकया था, िकसी भी दस्तावेज़ में जालसाजी या पिरवतर्न नहीं िकया था, िकसी भी जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में इस्तेमाल नहीं िकया था, और खातों या िवत्तीय अिभलेखों पर उसका कोई िनयंत्रण नहीं था। आवेदक का कोई पूवर् आपरािधक इितहास नहीं है। पुनः उनका यह भी कथन है िक आवेदक की तरफ से यह आश्वासन िदया गया है िक वह कानून की प्रिक्रया में सहयोग करने के िलए तैयार है और जब भी आवश्यकता होगी वह ईमानदारी से अदालत के समक्ष खुद को उपलब्ध कराएगा और उन सभी शतोर्ं को
स्वीकार करने के िलए भी तैयार है जो न्यायालय उस पर अिधरोिपत करेगी। आवेदक िनदोर्ष है तथा वह इस प्रकरण में िद० 06.09.2025 से कारागार में िनरुद्ध है। इसिलए आवेदक को जमानत पर छोड़ िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने आवेदक के जमानत का प्रबल िवरोध करते हुए तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक द्वारा कािरत अपराध संज्ञेय एवं गंभीर प्रकृ ित का है, इसिलए आवेदक को जमानत पर न छोड़ा जाय।
5. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं के पिरप्रेक्ष्य में पत्रावली पर उपलब्ध सारवान तथ्यों एवं BAIL No. 32753 of 2025 3
पिरिस्थितयों का समग्र रूप से अवलोकन करने के बाद, सबूतों की प्रकृ ित और िकसी भी ठोस िवरोधात्मक सामग्री की अनुपिस्थित एवं उपलब्ध सामग्री से छेड़छाड़ की संभावना न होने के तथ्य को देखते हुए मेरी राय में आवेदक को जमानत पर मुक्त करने का उपयुक्त आधार है।
6. अतः वाद के गुण-दोष पर िबना कोई िटप्पणी िकए हुए आवेदक को उपरोक्त विणत अपराध में संबंिधत न्यायालय की संतुिष्ट पर व्यिक्तगत बंध-पत्र एवं अिधक धनरािश के कोई भी दो प्रितभू प्रस्तुत करने पर िनम्निलिखत शतोर्ं के साथ जमानत पर छोड़ िदया जाय। i. आवेदक िववेचना या परीक्षण के दौरान अिभयोजन साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। ii. आवेदक अिभयोजन सािक्षयों व पीिड़ता/ िशकायतकतार् को डरायेगा/धमकायेगा नहीं। iii. आवेदक न्यायालय के आदेशों का पालन करेगा, वह परीक्षण के दौरान िबना कोई अनावश्यक स्थगन िलए िनयत ितिथ पर न्यायालय में उपिस्थत होगा तथा परीक्षण में ईमानदारी से सहयोग करेगा। iv. आवेदक जमानत पर िरहा होने के बाद जमानत की स्वतंत्रता का दुरूपयोग नही करेगा और िकसी भी अपरािधक गितिविध में िलप्त नहीं होगा न कोई अपरािधक कृ त्य करेगा। v. आवेदक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से पिरिचत िकसी भी व्यिक्त या पुिलस अिधकािरयों को कोई प्रलोभन या धमकी नहीं देगा न ही उनसे कोई वायदा करेगा, िजसके कारण उन्हें न्यायालय में तथ्यों को उजागर करने से िवरत रहना पडे़।
7.
उपरोक्त शतोर्ं में से िकसी के उल्लंघन के मामले में, परीक्षण न्यायालय आवेदक की जमानत िनयमानुसार रद्द करने को स्वतंत्र है। September 23, 2025 Pawan Kumar BAIL No. 32753 of 2025 4 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad