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High Court of Chhattisgarh · body

2024 DAILYLAW 906 (CHH)

THE NEW INDIA ASSURANCE COMPANY LIMITED v. RAMABAI CHANDRAVANSHI

MAC/376/2024 · 2026-08-05

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2024

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} CGHC010039842024 2026:CGHC:34583 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -376 /2024  द न्या+ इं!ति-या एश्या0र1स क! पुनी लिलतिमांटे-, द्वार स!भाग या प्र!धक, स!भाग या कया7लया-तिद्वा या ल, एल.आई.स . इंन्वेस्टेमां1टे तिल्डिं=-!ग, फे ज-1, ज वेनी मां मांग7, पु!-र , रयापुर, लिजल–रयापुर (छत्ती सगढ़) । (द0षी वेहनी क्रमां!क-स .ज .-09- .-1292 क मां क! पुनी ) -----अपु लर्थीG तिवेरूद्घ 1. रमांई च!द्रवे!शी पुति-स्वेगGया स!0षी च!द्रवे!शी , आया लगभाग 35 वेषी7, 2. आयाषी च!द्रवे!शी तिपु-स्वेगGया स!0षी च!द्रवे!शी , आया लगभाग 15 वेषी7, 3. याज्ञ च!द्रवे!शी तिपु-स्वेगGया स!0षी च!द्रवे!शी , आया लगभाग 12 वेषी7, प्रत्यार्थीG क्रमां!क-2 वे 3 अवेयास्क द्वार अपुनी प्रकO तिक स!रतिPक एवे! मां रमांई च!द्रवे!शी पुति-स्वेगGया स!0षी च!द्रवे!शी (प्रत्यार्थीG क्रमां!क-1), 4. कमांल ई पुति-आज+रमां च!द्रवे!शी , आया लगभाग 74 वेषी7, उपुर0क्त सभा तिनीवेस –मांकनी क्रमां!क 10, गरुनील क पुस रयापुर र0-, हदरग!ज वे-7 क्रमां!क 24, कवेध7, र्थीनी एवे! हस ल–कवेध7, लिजल–क रधमां (छत्ती सगढ़) । ---(दवेक7गण) 5. अशी0कदस मांतिणकपुर तिपु-तिवेजयादस, आया लगभाग 32 वेषी7, तिनीवेस –वे-7 क्रमां!क 2, कT लशी नीगर, कवेध7, र्थीनी एवे! हस ल–कवेध7, लिजल–क रधमां (छत्ती सगढ़) । (द0षी वेहनी क्रमां!क-स .ज .-09- .-1292 क चलक) 6. द्र प्रसद पुल तिपु-क! वेल पुल , आया लगभाग 55 वेषी7, तिनीवेस –वे-7 क्रमां!क 16, पुल पुर, कवेध7, लिजल–क रधमां (छत्ती सगढ़) । (द0षी वेहनी क्रमां!क-स .ज .-09- .-1292 क पु!ज कO स्वेमां ) -----प्रत्यार्थीGगण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.08.11 14:21:24 +0530 2 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार : श्री दशीरर्थी गप्ता, अलिधवेक्त । दवेक7/प्रत्यार्थीG क्रमां!क-1 स 4 द्वार : श्री प्रवे ण क मांर लस्यानी, अलिधवेक्त । प्रत्यार्थीG क्रमां!क-5 एवे! 6 द्वार : श्री तिशीखर शीक्ल, अलिधवेक्त । न्यायामां+ति7 श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनीण7या पु ठ पुर पुरिर !! 06/08/2026 1. मां0टेर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 क^ धर 173 क अ!ग7 प्रस् इंस अपु ल मां1 मां0टेर दर्घ7टेनी दवे अलिधकरण, क रधमां, छत्ती सगढ़ द्वार दवे प्रकरण क्रमां!क-09/2023, “रमांई च!द्रवे!शी वेगTरह तिवेरुद्ध अशी0कदस मांतिनीकपुर वेगTरह” मां1 पुरिर अलिधतिनीण7या तिदनी!क 01/11/2023 क0 चनीc द गई हT । लिजस आग स!Pपु मां1 “प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या” स स!0लिध तिकया ज रह हT । 2. प्रकरण क थ्या, स!Pपु मां1, इंस प्रकर हe तिक दर्घ7टेनी तिदनी!क 15/08/2022 क0 मांOक स!0षी च!द्रवे!शी अपुनी मां0टेरसइंतिकल स रष्ट्रीg या रजमांग7 कवेध7–रयापुर मांग7 पुर कवेध7 क^ ओर ज रह र्थी । उस समांया मां!गल+ ढा तिरह क पुस अशी0कदस मांतिनीकपुर द्वार मांटे-0र वेहनी टेटे 1109, पु!ज यानी क्रमां!क स .ज .-09- .-1292 (लिजस आग स!Pपु मां1 "द0षी वेहनी" स स!0लिध तिकया ज रह हT) क0 व्र गति एवे! लपुरवेह पु+वे7क चलया लिजसक^ टेक्कर लगनी स मांOक क0 ग!भा र च0टे1 आई! । उस उपुचरर्थी7 च!द्रयानी ह=र्थी क यार अस्पुल, कवेध7 मां1 भाG करया गया, जहl उपुचर क दcरनी उसक^ मांOत्या ह0 गई । उक्त र्घटेनी क स!!ध मां1 र्थीनी-कवेध7 मां1 अपुरध क्रमां!क-652/2022 पु!ज द्ध तिकया गया र्थी स!पु+ण7 तिवेवेचनी उपुर! अतिभाया0गपुत्र प्रस् तिकया गया । 3 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} 3. दवेक7गण द्वार मां0टेर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 क^ धर 166 क अ!ग7 प्रतिकर प्रप्ता करनी ह दवे आवेदनी प्रस् तिकया गया । उक्त दवे आवेदनी पुर सनीवेई उपुर! अलिधकरण नी याह अवेधरिर तिकया तिक दर्घ7टेनी क समांया मांOक क^ मांलिसक आया ₹9,540/-, आया 50 वेषी7 र्थी । अलिधकरण द्वार भावे स!भावेनीओ! क मांद मां1 25% क^ वेOतिद्ध, व्यातिक्तग एवे! ज तिवेक0पुज7नी व्याया क^ मांद मां1 ¼ क^ कटेc र्थी 13 क गणक लग+ कर हqए, अन्या पुर!पुरग मांदr क अ!ग7 प्रतिकर क^ गणनी कर क ल ₹14,72,225/- क प्रतिकर, उस पुर दवे आवेदनी प्रस् तिकए जनी क^ तिलिर्थी स अदयाग क 6% वेतिषी7क ब्याज सतिह, अलिधतिनीण7या पुरिर तिकया गया । उक्त अलिधतिनीण7या क0 अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार इंस अपु ल मां1 चनीc द गई हT । 4. अपु लर्थीG मां क! पुनी क तिवेद्वानी अलिधवेक्त क क7 हT तिक मांOक स!0षी च!द्रवे!शी क^ जन्मांतिलिर्थी 16/09/1970 र्थी । इंस स!!ध मां1 उन्हrनी Pत्र या पुरिरवेहनी कया7लया, कवेध7 स प्रप्ता मांOक क चलनी अनीज्ञतिप्ता क^ प्रति अतिभालख पुर प्रस् कर हqए व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क आदशी 41 तिनीयामां 27 क अ!ग7 एक आवेदनी भा प्रस् तिकया हT । उक्त आवेदनी क मांध्यामां स याह तिनीवेदनी तिकया गया हT तिक चलनी अनीज्ञतिप्ता मां1 अ!तिक जन्मांतिलिर्थी क आधर पुर र्घटेनी तिदनी!क 15/08/2022 क0 मांOक क^ आया 52 वेषी7 तिनीध7रिर क^ जए र्थी उस क अनीरूपु प्रतिकर रतिशी क पुनीu तिनीध7रण तिकया जए । सर्थी ह , उक्त दस्वेज क0 अतिरिरक्त सक्ष्या क रूपु मां1 अतिभालख पुर लिलए जनी क भा तिनीवेदनी तिकया गया हT । लिजसक आधर पुर तिनीवेदनी हT तिक अपु ल स्वे कर कर हqए अपु लर्थीG मां क! पुनी क तिवेरुद्ध पुरिर "प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या" अपुस् तिकया जए । 4 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} 5. इंसक तिवेपुर , दवेक7/प्रत्यार्थीG क्रमां!क-1 स 4 क तिवेद्वानी अलिधवेक्त नी प्रतिकर रतिशी मां1 वेOतिद्ध तिकए जनी क लिलए प्रत्या0त्तीर आPपु (क्रwस ऑब्जक्शीनी) प्रस् कर हqए क7 तिदया तिक मांOक मांसस7 अतिमां क! स्टेgक्शीनी मां1 पुया7वेPक (सपुरवेइंजर) क पुद पुर कया7र र्थी र्थी ₹22,000/- स ₹24,000/- प्रतिमांह आया अलिज7 कर र्थी । उक्त थ्या क समांर्थी7नी मां1 उन्हrनी मांसस7 अतिमां क! स्टेgक्शीनी क प्र!धक पु0षीण लिस!ह ठक र क पुर Pण कर हqए प्रदशी7 पु -13 स पु -17 क क दस्वेज प्रस् तिकए र्थी, तिकन् अलिधकरण नी उक्त मांcलिखक एवे! दस्वेज सक्ष्या क0 स्वे कर नी कर त्रतिटे क^ हT । इंसक अतिरिरक्त, मांOक क स्वेतिमांत्वे मां1 द0 स्कwतिपु7या0 वेहनी ह0नी क स!!ध मां1 प्रदशी7 पु -18 भा अतिभालख पुर प्रस् तिकया गया र्थी, र्थीतिपु अलिधकरण नी उक्त दस्वेज पुर भा समांतिच तिवेचर नीहy तिकया र्थी मांOक क^ मांलिसक आया मांत्र ₹9,540/- तिनीध7रिर कर द , ज0 अतिभालख पुर उपुलब्ध सक्ष्या क तिवेपुर एवे! त्रतिटेपु+ण7 हT । इंस प्रकर, अन्या पुर!पुरग मांदr क अ!ग7 अलिधतिनीणG प्रतिकर रतिशी भा अपुया7प्ता हT । अu दवेक7 पुP द्वार प्रस् प्रत्या0त्तीर आPपु स्वे कर कर प्रतिकर रतिशी मां1 समांतिच वेOतिद्ध क^ जए र्थी अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क आदशी 41 तिनीयामां 27 क अ!ग7 प्रस् आवेदनी क0 तिनीरस् कर हqए उसक^ अपु ल भा तिनीरस् क^ जए । 6. उभाया पुP क क7 श्रीवेण तिकए गए र्थी अतिभालख क स+क्ष्मांपु+वे7क पुरिरशी लनी तिकया गया । 7. याह उल्लेखनी या हT तिक अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार वे7मांनी अपु ल क ल!नीकल मां1 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क आदशी 41 तिनीयामां 27 क अ!ग7 आवेदनी प्रस् तिकया गया हT । उक्त आवेदनी क मांध्यामां स मांOक क^ जन्मांतिलिर्थी प्रमांतिण करनी क उद्देश्या स अलिधकरण द्वार अलिधतिनीण7या पुरिर तिकए जनी क पुश्च Pत्र या पुरिरवेहनी कया7लया, कवेध7 स प्रप्ता मांOक क 5 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} चलनी अनीज्ञतिप्ता क^ प्रति प्रस् कर उस अतिरिरक्त सक्ष्या क रूपु मां1 अतिभालख पुर लिलए जनी क तिनीवेदनी तिकया गया हT । 8. व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क आदशी 41 तिनीयामां 27 क प्रवेधनी तिनीम्नीवे} हe:- “27. अपु ल न्यायालया मां1 अतिरिरक्त सक्ष्या क पुशी तिकया जनी-(1) अपु ल क पुPकर अपु ल न्यायालया मां1 अतिरिरक्त सक्ष्या चह वेह मांcलिखक ह0 या दस्वेज , पुशी करनी क हकदर नीहy हrग, तिक! यातिद- (क) उच्च न्यायालया नी लिजसक^ ति-क्र^ क^ अपु ल क^ गई हT, ऐस सक्ष्या ग्रहण करनी स इंन्कर कर तिदया ह ज0 ग्रहण तिकया जनी चतिहए र्थी, अर्थीवे [(कक) वेह पुPकर ज0 अतिरिरक्त सक्ष्या पुशी करनी चह हT याह लिसद्घ कर द हT तिक वेह सम्याक} त्पुर क प्रया0ग करनी क वेज+द ऐस सक्ष्या क^ जनीकर नीहy रख र्थी या उस उस समांया पुशी नीहy कर सक र्थी ज वेह ति-क्र^ पुरिर क^ गई र्थी लिजसक तिवेरूद्घ अपु ल क^ गई हT, अर्थीवे] (ख) अपु ल न्यायालया तिकस दस्वेज क पुशी तिकए जनी क^ या तिकस सP क^ पुर P क^ जनी क^ अपुP या 0 स्वेया! तिनीण7या सनीनी क समांर्थी7 ह0नी क लिलए या तिकस अन्या सरवेनी} हक क लिलए कर, 0 अपु ल न्यायालया ऐस सक्ष्या क लिलया जनी या दस्वेज क पुशी तिकया जनी या सP क^ पुर P क तिकया जनी अनीज्ञ कर सक ग । (2) जहl कहy अतिरिरक्त सक्ष्या पुशी करनी क लिलए अपु ल न्यायालया अनीज्ञ द द हT वेहl न्यायालया ऐस सक्ष्या क ग्रहण तिकए जनी क करणr क0 लखद्घ करग ।” 9. उपुया7क्त तिवेलिधक प्रवेधनी क आल0क मां1 तिवेचर करनी पुर अलिधकरण क अतिभालख स याह स्पुष्ट्री ह0 हT तिक दवेक7गण द्वार मां0टेर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 क^ धर 166 क अ!ग7 दवे आवेदनी तिदनी!क 04/01/2023 क0 प्रस् तिकया गया र्थी र्थी अ!तिमां अलिधतिनीण7या तिदनी!क 01/11/2023 क0, अर्थी7 लगभाग 10 मांह पुश्च पुरिर तिकया गया । इंस 6 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} अवेलिध क दcरनी अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार मांOक क^ जन्मांतिलिर्थी स स!!लिध उक्त दस्वेज प्रप्ता करनी क क0ई समांतिच प्रयास तिकए जनी क नी 0 क0ई सक्ष्या प्रस् तिकया गया हT और नी ह याह स्पुष्ट्री तिकया गया हT तिक यातिद ऐस प्रयास तिकया गया र्थी, 0 वेह तिकनी करणr स असफेल रह । इंस स!!ध मां1 आवेदनी मां1 वेतिण7 करण नी 0 स्वेभातिवेक प्र ह0 हe और नी ह पुया7प्ता । इंसक अतिरिरक्त, प्रस् चलनी अनीज्ञतिप्ता जन्मांतिलिर्थी क प्रर्थीतिमांक अर्थीवे प्रमांतिणक दस्वेज भा नीहy हT । ऐस ल्डिंस्र्थीति मां1 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क आदशी 41 तिनीयामां 27 क अ!ग7 प्रस् आवेदनी स्वे कर तिकए जनी या0ग्या नीहy पुया ज । फेलu उक्त आवेदनी तिनीरस् तिकया ज हT । 10. जहl क, मांOक स!0षी च!द्रवे!शी क^ आया 52 क प्रश्नी हT? इंस स!!ध मां1 याह उल्लेखनी या हT तिक अलिधकरण क अतिभालख क अनीसर दवेक7गण द्वार प्रस् दवे आवेदनी मां1 मांOक क^ आया 50 वेषी7 अ!तिक क^ गई हT । इंसक अतिरिरक्त, पुलिलस अतिभालख, यार्थी मांग7 पु!चनीमां, शीवे पुर Pण प्रतिवेदनी र्थी अन्या स!!लिध दस्वेजr मां1 भा मांOक क^ आया 50 वेषी7 ह दशी7ई गई हT । ऐस ल्डिंस्र्थीति मां1 अपु लर्थीG मां क! पुनी क याह क7 तिक दर्घ7टेनी क समांया मांOक क^ आया 52 वेषी7 र्थी , स्वे कर तिकए जनी या0ग्या नीहy हT । फेलu अलिधकरण द्वार मांOक क^ आया 50 वेषी7 तिनीध7रिर कर प्रतिकर क^ गणनी तिकया जनी तिवेलिधसम्मां एवे! उतिच पुया ज हT । 11. जहl क, मांOक स!0षी च!द्रवे!शी क^ आया क प्रश्नी हT? इंस स!!ध मां1 दवेक7गण क^ ओर स मांसस7 अतिमां क! स्टेgक्शीनी क प्र!धक पु0षीण लिस!ह ठक र क पुर Pण करया गया हT । उक्त सP नी अपुनी कर्थीनी मां1 या हT तिक मांOक अक्टे+र, 2021 स अपुनी मांOत्या तिदनी!क 15/08/2022 क लगभाग 10 मांह क मांसस7 अतिमां क! स्टेgक्शीनी मां1 पुया7वेPक क रूपु मां1 7 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} कया7र र्थी । याद्यतिपु उस क0ई तिनील्डिंश्च मांलिसक वेनी नीहy तिदया ज र्थी, र्थीतिपु उसक^ मांलिसक आया लगभाग ₹22,000/- स ₹24,000/- क मांध्या र्थी । उक्त थ्या क समांर्थी7नी मां1 सP द्वार वेनी पुतिच7याl (प्रदशी7 पु -13 स पु -17), मांसस7 अतिमां क! स्टेgक्शीनी क पुTनी क-7 (प्रदशी7 पु -19), ई-पु!ज यानी प्रमांण-पुत्र (प्रदशी7 पु -20), ज .एस.टे . प्रमांण-पुत्र (प्रदशी7 पु -21) र्थी पुटे7नीरतिशीपु ज .एस.टे . प्रमांण-पुत्र (प्रदशी7 पु -22) अतिभालख पुर प्रस् तिकए गए हe । तिकन्, प्रतिपुर Pण मां1 उक्त सP नी स्वे कर तिकया तिक प्रदशी7 पु -13 स पु -17 क क^ वेनी पुतिच7याr मां1 स!स्र्थी क पु!ज यानी क्रमां!क, तिटेनी नी!र अर्थीवे ज .एस.टे . नी!र अ!तिक नीहy हT । उसनी याह भा स्वे कर तिकया तिक याद्यतिपु स!स्र्थी मां1 आया-व्याया क लख-ज0ख स!धरिर तिकया ज हT, र्थीतिपु उसस स!!लिध क0ई पु!ज अर्थीवे स!गणक मां1 स!धरिर अतिभालख न्यायालया क समांP प्रस् नीहy तिकया गया । इंस प्रकर, मांOक क0 वेनी भागनी तिकए जनी अर्थीवे उसस स!!लिध लख!कनी एवे! कर स!!ध क0ई स्वे!त्र दस्वेज भा अतिभालख पुर प्रस् नीहy तिकया गया । उपुर0क्त थ्या एवे! सक्ष्या क पुरिरप्रक्ष्या मां1 अलिधकरण द्वार याह तिनीष्कषी7 तिनीकलनी तिक मांOक मांसस7 अतिमां क! स्टेgक्शीनी मां1 ₹22,000/- स ₹24,000/- प्रतिमांह वेनी पुर कया7र र्थी, तिवेश्वेसनी या रूपु स प्रमांतिण नीहy हqआ हT । अतिभालख पुर उपुलब्ध प्रदशी7 पु -18/स स याह स्पुष्ट्री ह0 हT तिक मांOक क नीमां द0 स्कwतिपु7या0 वेहनी पु!ज द्ध र्थी । स्वेया! अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार मांOक क चलक अनीज्ञतिप्ता पुशी हT । अर्थी7} वेह चलक क भा कया7 कर ल र्थी । स!पु+ण7 अतिभालख क अवेल0कनी स याह भा पुरिरलतिP नीहy ह0 तिक मांOक क0 अक शील श्रीतिमांक क^ श्रीण मां1 रख ज सक हT । 12. मांनीनी या उच्चमां न्यायालया नी Sebati Nath & Ors. v. Shriram General Insurance Company Ltd., 2025 SCC OnLine SC 3468 मां1 मांOक क^ आया क 8 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} तिनीध7रण क स!!ध मां1 तिवेचर कर हqए, कल्डिं†-क-8 मां1 तिनीम्नीनीसर अतिभामां व्याक्त तिकया हT:— “8. We are inclined to interfere with the findings of the Courts below in assessing the income of the deceased at Rs. 7,000/- per month as the same was not assessed correctly on the basis of the evidence on record. This Court in Chandra v. Mukesh Kumar Yadav (2022) 1 SCC 198, has held that “In the absence of documentary evidence on record, some guesswork is required to be done”. Also, in the case of Prabhavathi v. Bangalore Metropolitan Transport Corpn 2025 SCC OnLine SC 455., this Court has held that: “13. It is the settled law that under the Motor Vehicle Act, 1988 it is established that in compensation cases, the strict rules of evidence used in criminal trials do not apply. Instead, the standard of proof is based on the preponderance of probability. This Court in Sunita v. Rajasthan SRTC observed that: “22. It is thus well settled that in motor accident claim cases, once the foundational fact, namely, the actual occurrence of the accident, has been established, then the Tribunal's role would be to calculate the quantum of just compensation if the accident had taken place by reason of negligence of the driver of a motor vehicle and, while doing so, the Tribunal would not be strictly bound by the pleadings of the parties. Notably, while deciding cases arising out of motor vehicle accidents, the standard of proof to be borne in mind must be of preponderance of probability and not the strict standard of proof beyond all reasonable doubt which is followed in criminal cases.” The exposition came to be reiterated in Rajwati alias Rajjo v. United India Insurance Company Ltd., wherein it was observed that: 9 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} “20. It is well settled that Motor Vehicles Act, 1988 is a beneficial piece of legislation and as such, while dealing with compensation cases, once the actual occurrence of the accident has been established, the Tribunal's role would be to award just and fair compensation. As held by this Court in Sunita (Supra) and Kusum Lata (Supra), strict rules of evidence as applicable in a criminal trial, are not applicable in motor accident compensation cases, i.e., to say, “the standard of proof to be borne in mind must be of preponderance of probability and not the strict standard of proof beyond all reasonable doubt which is followed in criminal cases.” 13. ऐस ल्डिंस्र्थीति मां1, याह न्यायालया पु हT तिक अलिधकरण द्वार मांOक क^ मांलिसक आया ₹9,540/- तिनीध7रिर तिकया जनी उतिच नीहy हT । अu मांOक क^ मांलिसक आया ढ़कर ₹12,000/- तिनीध7रिर क^ ज हT । 14. फेलस्वेरूपु, मांOक क^ वेतिषी7क आया ₹1,44,000/- (₹12,000 × 12) ह0 हT । भावे स!भावेनीओ! क मांद मां1 25% अर्थी7 ₹36,000/- ज0ड़े जनी पुर उसक^ वेतिषी7क आया ₹1,80,000/- ह0 हT । च+lतिक दवेक7गण क^ स!ख्या चर हT, अu व्यातिक्तग एवे! ज तिवेक0पुज7नी व्याया क मांद मां1 1/4 अर्थी7 ₹45,000/- क^ कटेc तिकए जनी पुर वेतिषी7क आलिश्री ₹1,35,000/- ह0 हT । 15. अतिभालख क अनीसर दर्घ7टेनी क समांया मांOक क^ आया 50 वेषी7 र्थी । अu 13 क गणक लग+ तिकए जनी पुर आलिश्री क^ क ल हतिनी ₹17,55,000/- ह0 हT । दवेक7गण स!पुद क^ हतिनी क मांद मां1 ₹16,500/-, अ!तिमां स!स्कर व्याया क मांद मां1 ₹16,500/- र्थी सहचया7 क^ हतिनी क मांद मां1 प्रत्याक दवेक7 क0 ₹44,000/- क^ दर स क ल ₹1,76,000/- प्रप्ता करनी क अलिधकर हe । 10 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} 16. उपुया7क्त तिवेवेचनी र्थी मांनीनी या सवे‹च्च न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट्री! National Insurance Company Limited v. Pranay Sethi, (2017) 16 SCC 680, न्यायादृष्ट्री! Sarla Verma v. Delhi Transport Corporation, (2009) 6 SCC 121 र्थी न्यायादृष्ट्री! Magma General Insurance Co. Ltd. v. Nanu Ram @ Chuhru Ram & Ors., (2018) 18 SCC 130 क प्रकरणr मां1 प्रतिपुतिद तिवेलिध क आल0क मां1, याह न्यायालया प्रतिकर रतिशी क पुनीतिनी7ध7रण तिनीम्नीनीसर कर हTu- क्र. मांद अलिधकरण द्वार अलिधतिनीणG प्रतिकर इंस न्यायालया द्वार अलिधतिनीणG प्रतिकर 1 वेतिषी7क आया ₹1,14,480 (₹9,540 × 12) ₹1,44,000 (₹12,000 × 12) 2 भावे स!भावेनीएl (25%) ज0ड़ेनी क पुश्च क ल वेतिषी7क आया ₹1,43,100 (₹1,14,480 + ₹28,620) ₹1,80,000 (₹1,44,000 + ₹36,000) 3 व्यातिक्तग एवे! ज तिवेक0पुज7नी व्याया (1/4) क^ कटेc क पुश्च वेतिषी7क आलिश्री ₹1,07,325 (₹1,43,100 − ₹35,775) ₹1,35,000 (₹1,80,000 − ₹45,000) 4 गणक (13) लग+ करनी क पुश्च आलिश्री क^ क ल हतिनी ₹13,95,225 (₹1,07,325 × 13) ₹17,55,000 (₹1,35,000 × 13) 5 स!पुद क^ हतिनी ₹77,000 (16,500+16,500+40,000 = 70,000 + 10%) ₹16,500 6 अ!तिमां स!स्कर व्याया ₹16,500 7 सहचया7 क^ हतिनी ₹1,76,000 (₹44,000 × 4) क ल प्रतिकर ₹14,72,225 ₹19,64,000 11 / 11 {MA(C) No. 376 of 2024} 17. पुरिरणमांस्वेरूपु, अपु लर्थीG मां क! पुरिरणमांस्वेरूपु, अपु लर्थीG मां क! पुनी द्वार प्रस् अपु ल खरिरज क^ ज हT र्थी दवेक7गण द्वार प्रस् प्रति-आPपु आ!तिशीक रूपु स स्वे कर तिकया ज हT । दवेक7गण ₹4,91,775/- (रुपुया चर लख इंक्यानीवे हजर स सc पुचहत्तीर मांत्र) क^ अतिरिरक्त प्रतिकर रतिशी प्रप्ता करनी क अलिधकर हrग । उक्त अतिरिरक्त प्रतिकर रतिशी पुर दवे आवेदनी तिदनी!क स उसक वेस्तिवेक भागनी क 6% (छu प्रतिशी) वेतिषी7क क^ दर स ब्याज दया ह0ग । फेलu, "प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या" उपुया7क्त स मां क स!शी0लिध तिकया ज हT र्थी उसक^ शीषी शी•! यार्थीवे} रह1ग । 18. रलिजस्टेg क0 तिनीद•तिशी तिकया ज हT तिक इंस अपु ल मां1 दवेक7गण क पुP मां1 स्वे कO अतिरिरक्त प्रतिकर रतिशी क स!!ध मां1 उन्ह1 तिवेलिधवे} स+तिच तिकया जए । इंस प्रया0जनीर्थी7, आवेश्याक ह0नी पुर स!!लिध Pत्र, जहl दवेक7गण तिनीवेस कर हe, क लिजल तिवेलिधक सवे प्रलिधकरण क सतिचवे क समांन्वेया स पुTरल गल स्वेया!सवेकr क^ सहया प्रप्ता क^ ज सक हT । 19. तिनीण7या क^ प्रति क सर्थी अलिधकरण क अतिभालख शी घ्रपु+वे7क आवेश्याक कया7वेह ह स+चनीर्थी7 वे पुलनीर्थी7 वेपुस प्रतिषी ह0 । सह /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध शी पो मन