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1 / 6 {MA(C) No. 592 of 2024}
CGHC010099952024
2026:CGHC:30296 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-592
/2024
1. ति)वेक मांर यादवे, तिपु-स्वेग,या चलहन यादवे, आया लगभग 47 वेर्ष3, व्यावेसया-क5 तिर्ष, तिनवेस -ग्रामां तिवेमांलपुर, थान-ति8क! डा, जि;ल-लरमांपुर-रमांन;ग!; (छत्ती सगढ़) । (द=र्ष वेहन मां=टरसइतिकल क्रमां!क-स .; .-15-स .क्याC.-8656 क वेहन चलक)
2. ;)वे! यादवे, तिपु-ति)वेक मांर यादवे, आया लगभग 22 वेर्ष3, तिनवेस -ग्रामां तिवेमांलपुर, थान-ति8क! डा, जि;ल-लरमांपुर-रमांन;ग!; (छत्ती सगढ़) । (द=र्ष वेहन मां=टरसइतिकल क्रमां!क-स .; .-15-स .क्याC.-8656 क पु!; क5 स्वेमां ) -----अपु लथा,गण तिवेरूद्घ
1. श्री मां स! , पुत्न -स्वेग,या ललहदर तिदनकर, आया लगभग 32 वेर्ष3, व्यावेसया- ग5तिहण ,
2. क मांर तिप्रया, पु8 -स्वेग,या ललहदर तिदनकर, आया लगभग 7 वेर्ष3, व्यावेसया-तिवेद्यथा,,
3. र=तिह, पु8-स्वेग,या ललहदर तिदनकर, आया लगभग 5 वेर्ष3, व्यावेसया-तिवेद्यथा,, प्रत्याथा, क्रमां!क-2 एवे! 3 अवेयास्क, द्वार-अपुन प्रक5 तिक स!रतिNक एवे! मां श्री मां
स!
4. !) धर, तिपु-स्वेग,या रमांप्रसद, आया लगभग 52 वेर्ष3, व्यावेसया-क5 तिर्ष,
5. स=तिनया, पुत्न -स्वेग,या !) धर, आया लगभग 49 वेर्ष3, व्यावेसया-ग5तिहण , उपुर=क्त सभ तिनवेस -ग्रामां तिवेमांलपुर, थान-ति8क! डा, जि;ल-लरमांपुर-रमांन;ग!; (छत्ती सगढ़) । -----प्रत्याथा,गण/दवेक3गण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.17 14:32:28 +0530
2 / 6 {MA(C) No. 592 of 2024} अपु लथा,गण द्वार : श्री नवेन क मांर यादवे, अजिधवेक्त । प्रत्याथा,गण/दवेक3गण द्वार : श्री रहQल तिमांश्री, अजिधवेक्त कR ओर स श्री तिवेवेक सहT, अजिधवेक्त । न्यायामांCति3 श्री स!;या क मांर ;यासवेल !! तिनण3या पु ठ पुर पुरिर !! 16/07/2026
1. मां=टर यान अजिधतिनयामां, 1988 कR धर 173 क अ!ग3 प्रस् इस अपु ल मांX मां=टर दर्घ3टन दवे अजिधकरण, लरमांपुर स्थान रमांन;ग!;, छत्ती सगढ़ द्वार मां=टर दर्घ3टन दवे प्रकरण क्रमां!क-58/2018, “श्री मां स! वेग[रह तिवेरुद्ध ति)वेक मांर यादवे वे एक अन्या” मांX पुरिर अजिधतिनण3या तिदन!क 11/01/2024 क= चन_ द गई ह[, जि;सक ह अपु लथा,गण क तिवेरुद्ध था दवेक3गण/प्रत्याथा,गण क पुN मांX ₹16,42,480/- (स=लह लख ब्याल स ह;र चर स_ अस्स रुपुया मां8) क अजिधतिनण3या, मांया ब्या; क पुरिर तिकया गया ह[ । जि;स आग स!Nपु मांX “प्रश्नध न अजिधतिनण3या” स स!=जिध तिकया ; रह ह[ ।
2. प्रकरण क थ्या, स!Nपु मांX, इस प्रकर हf तिक तिदन!क 24/06/2018 क= सया!
लगभग 07:00 ; ललहदर तिदनकर (मां5क) सब्; खर दकर सड़क क तिकनर पु[दल अपुन ग्रामां तिवेमांलपुर ल_ट रह था । उस समांया अपु लथा, ति)वेक मांर यादवे मां=टरसइतिकल क्रमां!क स .; .-15-स .क्याC.-8656 (जि;स आग स!Nपु मांX "द=र्ष वेहन" स स!=जिध तिकया ; रह ह[) क= व्र एवे! लपुरवेह पुCवे3क चल हQए आया जि;सकR टक्कर लगन स ललहदर तिदनकर क= ग!भ र च=टX आई!, पुरिरणमांस्वेरूपु उसकR मां5त्या ह= गई ।
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3. दवेक3गण/प्रत्याथा, क्रमां!क-1 स 5 द्वार मां=टर यान अजिधतिनयामां, 1988 कR धर 166 क अ!ग3 प्रस् दवे आवेदन पुर उभयापुN क= सनन क उपुर! अजिधकरण न "प्रश्नध न अजिधतिनण3या" पुरिर तिकया । अजिधकरण न याह पु हQए तिक "द=र्ष वेहन" दर्घ3टन कR तिजिथा क= तिमां नहj था, अपु लथा,गण, ;= क्रमां)k "द=र्ष वेहन" क चलक एवे! पु!; क5 स्वेमां
हf, क= प्रतिकर रति) क भगन ह उत्तीरदया ठहरया । जि;स इस अपु ल मांX चन_ द
गई ह[ ।
4. अपु लथा,गण क तिवेद्वान अजिधवेक्त क क3 ह[ तिक दर्घ3टन मांX उनक "द=र्ष वेहन" कR स!जिलप्त नहj था । इस स!!ध मांX चलक क पुर Nण भ करया गया ह[ । थातिपु, अजिधकरण न 8तिटपुCण3 तिनष्कर्ष3 तिनकल हQए अपु लथा,गण क= प्रतिकर क भगन ह उत्तीरदया ठहर तिदया ह[, ;= तिवेजिध कR दृतिo मांX स्थिस्थार रख ;न या=ग्या नहj ह[ । अk अपु ल स्वे कर कर "प्रश्नध न अजिधतिनण3या" क= अपुस् तिकया ;ए ।
5. दवेक3गण/प्रत्याथा,गण कR ओर स उपुस्थिस्था तिवेद्वान अजिधवेक्त न अपु ल क तिवेर=ध कर हQए क3 तिकया तिक दर्घ3टन "द=र्ष वेहन" स ह करिर हQई था , जि;सक अपु लथा,गण द्वार क=ई खण्डान नहj तिकया ; सक ह[ । अजिधकरण न अतिभलख पुर उपुलब्ध मां_जिखक एवे! दस्वे; सक्ष्याt क मांCल्या!कन क उपुर! तिवेजिधसम्मां रूपु स "प्रश्नध न अजिधतिनण3या" पुरिर तिकया ह[ । अk अपु लथा,गण क क3 स्वे कर तिकए ;न या=ग्या नहj ह=न स अपु ल खरिर; तिकया ;ए ।
6. उभयापुN क क3 श्रीवेण तिकए गए था अतिभलख क सCक्ष्मांपुCवे3क पुरिर) लन तिकया गया ।
7.
प्रकरण मांX मां5क क तिपु !) धर क न्यायालया क समांN पुर Nण करया गया ह[ । याद्यतिपु वे र्घटन क प्रत्याNद), सN नहj हf, थातिपु उनकR ओर स प्रद)3 पु -1 स पु -13 क
4 / 6 {MA(C) No. 592 of 2024} पुजिलस तिवेवेचन स स!!जिध प्रमांतिण दस्वे; प्रस् तिकए गए हf । उक्त दस्वे;t स याह स्पुo ह= ह[ तिक दर्घ3टन तिदन!क 24/06/2018 क= र्घतिट हQई था था तिदन!क 28/06/2018 क= )Cन्या पुर अपुरध पु!; द्ध कर "द=र्ष वेहन" क चलक क तिवेरुद्ध अपुरध कयामां तिकया गया था । तिवेवेचन उपुर! अपु लथा, ति)वेक मांर यादवे क= "द=र्ष
वेहन" क चलक था ;सवे! यादवे क= उसक पु!; क5 स्वेमां पु हQए उनक तिवेरुद्ध धर 279, 337, 304-ए भर या दण्डा स!तिह एवे! धर 3/181, 5/180 था 146/196 मां=टर यान अजिधतिनयामां क अ!ग3 अ!तिमां प्रतिवेदन प्रस् तिकया गया ह[ ।
8. पुजिलस द्वार तिवेवेचन पुश्च प्रस् अतिभया=ग-पु8 क सस्थिक्ष्याक मांCल्या क ति!द पुर मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार ICICI Lombard General Insurance Company Limited v. Rajani Sahu and Others, (2025) 2 SCC 599 क तिनण3या कR कस्थिण्डाक-8 स 10 मांX तिनम्ननसर तिवेजिध प्रतिपुतिद कR गई ह[k-
“8 As regards the reliability of charge-sheet and other documents collected by the police during the investigation in motor accident cases, this Court in Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd. [Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 : (2018) 3 SCC (Civ) 335 : (2018) 2 SCC (Cri) 819 : 2018 INSC 311] , held in para 27, thus : (SCC p. 672)
“27. Another reason which weighed with the High Court to interfere in the first appeal filed by Respondents 2 and 3, was absence of finding by the Tribunal about the factum of negligence of the driver of the subject jeep. Factually, this view is untenable. Our understanding of the analysis done by the Tribunal is to hold that Jeep No. RST 4701 was driven rashly and negligently by Respondent 2 when it collided with the motorcycle of the appellant leading to the accident.
This can be discerned from the evidence of witnesses and the contents of the charge-sheet filed by the police, naming Respondent 2. This Court in a recent decision
5 / 6 {MA(C) No. 592 of 2024} in Dulcina Fernandes [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 :
(2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] , noted that the key of negligence on the part of the driver of the offending vehicle as set up by the claimants was required to be decided by the Tribunal on the touchstone of preponderance of probability and certainly not by standard of proof beyond reasonable doubt. Suffice it to observe that the exposition in the judgments already adverted to by us, filing of charge-sheet against Respondent 2 prima facie points towards his complicity in driving the vehicle negligently and rashly. Further, even when the accused were to be acquitted in the criminal case, this Court opined that the same may be of no effect on the assessment of the liability required in respect of motor accident cases by the tribunal.”
9. It is true that the Tribunal had looked into the oral and documentary evidence including the FIR, final report and such other documents prepared by the police in connection with the accident in question. The Tribunal had also taken note of the fact that based on the final report, the driver of the offending truck was tried and found guilty for rash and negligent driving. The High Court took note of such aspects and found no illegality in the procedure adopted by the Tribunal and consequently dismissed the appeal. 10. In the contextual situation it is relevant to refer to a decision of this Court in Mathew Alexander v. Mohd. Shafi [Mathew Alexander v. Mohd. Shafi, (2023) 13 SCC 510 : 2023 INSC 621] , this Court held thus : (SCC p. 514, para 12)
“12. …A holistic view of the evidence has to be taken into consideration by the Tribunal and strict proof of an accident caused by a particular vehicle in a particular manner need not be established by the claimants.
The claimants have to establish their case on the touchstone of preponderance of probabilities. The standard of proof beyond reasonable doubt cannot be applied while considering the petition seeking compensation on account of death or injury in a road traffic accident. To the same effect is the observation made by this Court in Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier
6 / 6 {MA(C) No. 592 of 2024} Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] which has referred to the aforesaid judgment in Bimla Devi [Bimla Devi v. Himachal RTC, (2009) 13 SCC 530 :
(2009) 5 SCC (Civ) 189 : (2010) 1 SCC (Cri) 1101] .”
9. प्रकरण मांX "द=र्ष वेहन" क चलक ति)वेक मांर यादवे न स्वेया! क पुर Nण कर हQए याह कथान तिकया ह[ तिक उसकR मां=टरसइतिकल स क=ई दर्घ3टन करिर नहj हQई था । थातिपु, प्रतिपुर Nण क द_रन उसन याह स्वे कर तिकया ह[ तिक उसक तिवेरुद्ध द;3 अपुरध क आधर पुर आपुरजिधक प्रकरण न्यायालया मांX ल!ति ह[ था उस झूCठ फँy सए ;न क स!!ध मांX उसन तिकस सNमां प्रजिधकर क समांN क=ई ति)कया भ प्रस् नहj कR ह[ । ऐस स्थिस्थाति मांX चलक ति)वेक मांर यादवे क उक्त कथान तिवेश्वेसन या एवे! स्वे कर या=ग्या नहj ह[ ।
10. इन समांस् थ्याt क= दृतिoग रख हQए दवेक3 पुN कR सक्ष्या स याह प्रमांतिण रह ह[ तिक दर्घ3टन मांX "द=र्ष वेहन" कR स!जिलप्त था था न्यायादृo!
Rajani Sahu (पुCवे{क्त) मांX प्रतिपुतिद तिवेजिधक जिसद्ध! क प्रक) मांX अपु लथा,गण क क3 स्वे कर तिकए ;न या=ग्या नहj ह[ । अजिधकरण द्वार पुरिर "प्रश्नध न अजिधतिनण3या" अतिभलख पुर उपुलब्ध सक्ष्या क प्रतिकC ल न ह=न स उसमांX तिकस प्रकर क हस्Nपु कR आवेश्याक नहj पुई ; । फँलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर तिकए ;न या=ग्या नहj ह=न स खरिर; कR ; ह[ ।
11.
तिनण3या कR प्रति क सथा अजिधकरण क अतिभलख ) घ्रपुCवे3क आवेश्याक कया3वेह ह सCचनथा3 वे पुलनथा3 वेपुस प्रतिर्ष ह= । सह /- (स!;या क मांर ;यासवेल) न्यायाध ) पो
मन