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High Court of Chhattisgarh · body
2024 DAILYLAW 797 (CHH)
Usha Dhruw v. STATE OF CHHATTISGARH
ACQA/753/2024 · 2026-01-04
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2024
[ 2024 DAILYLAW 797 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024}
2026:CGHC:482 अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल ्ቅमु!क
-753
/2024
उष वे पुति-स!दोर लल वे, उ्-लगभग 32 वेष., ति/वेस -ቇኋमु खै2र, पुलिलस च4क5-करही जार, पुलिलस था/-लिसटी कवेल , ल4दो जार, लिजाल-ल4दो जार-भटीपुर, छቈኍ सगढ़ -----अपु लथा:/्ቚलिथा.या तिवेरू्ሾ
1. छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर था/ ्ቚभर , पुलिलस च4क5-करही जार, पुलिलस था/-लिसटी
कवेल , ल4दो जार, लिजाल-ल4दो जार-भटीपुर, छቈኍ सगढ़, (रज्या)
2. दोवेकरमु सहीA तिपु-सकलBरमु, उ्-लगभग 54 वेष., (अतिभया)
3. टी करमु यादो तिपु-चवेरमु यादो, उ्-लगभग 55 वेष., (अतिभया)
4. लरमु सहीA तिपु-भगउरमु, उ्-लगभग 45 वेष., (अतिभया)
5. जागदो श ्ቚसदो तिगर तिपु-रघु/!दो/ तिगर , उ्-लगभग 25 वेष., (अतिभया) सभ ति/वेस -ቇኋमु खै2र, पुलिलस च4क5-करही जार, पुलिलस था/-लिसटी कवेल , ल4दो जार, लिजाल-ल4दो जार-भटीपुर, छቈኍ सगढ़ -----उቈኍरवेदो गण अपु लथा:/्ቚलिथा.या ቛኋर : ቦኍ रतिवेन््ቖ शमु., अलिIवे सतिही ቦኍ सतिहील सहीA, अलिIवे। रज्या/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-1 ቛኋर : ቦኍ तिवेवेक तिमुቦኍ, पु2/ल अलिIवे । अतिभया/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-2 वे 5 ቛኋर : ቦኍ रू्ቖ ्ቚपु दो, अलिIवे । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.01.07 10:54:46 +0530
2 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} मु// या न्यायामुBति. ቦኍ स!जाया क मुर जायासवेल
, न्यायाI श
!! ति/ण.या पु ठ पुर पुरिर !! 05/01/2026
1. Iर-14(क)( ) i अ/सBतिच जाति एवे! अ/सBतिच जा/जाति (अत्याचर ति/वेरण) अलिIति/यामु, 1989 क ही दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् इस अपु ल मुV तिवेचरण न्यायालया- तिवेशष न्यायाI श (अ/सBतिच जाति एवे! अ/सBतिच जा/जाति (अत्याचर ति/वेरण) अलिIति/यामु, 1989 क ही गतिठ न्यायालया, लिजास आग स!ቌኔपु मुV “तिवेशष अलिIति/यामु” कही गया ही2), ल4दोजार, लिजाल-ल4दोजार-भटीपुर, छቈኍ सगढ़ ቛኋर तिवेशष स्ቔ ्ቚकरण ्ቅमु!क-24/2021 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरू्ሾ दोवेकरमु सहीA वेग2रही” मुV पुरिर ति/ण.या तिदो/!क-15/07/2024 क5 वे2I क च/4 दो गई ही2 । लिजासक ही अतिभयाजा/ क मुमुल ्ቚमुतिण / पु ही]ए अतिभयागण क Iर-294, 506 भग-दो, 323 सहीपुतिठ Iर-34 भर या दोण्ड स!तिही, 1860 एवे! तिवेशष अलिIति/यामु क5 Iर- 3(1)( ), 3(2)( - r v क) क अपुरI स दोषमु तिकया गया । लिजास आग स!ቌኔपु मुV
“्ቚश्/I / ति/ण.या” स स!लिI तिकया जा रही ही2 ।
2. याही थ्या अतिवेवेतिदो ही2 तिक कलिथा घुटी/ तिदो/!क 21/01/2021 क ቇኋमु पु!चया खै2र क5 सरपु!च ्ቚलिथा.या उष वे (अ.स.-3) थाc । इसक पुBवे. लगभग 10 वेष. क उ पु!चया क सरपु!च अतिभया दोवेकरमु सहीA रही था उसक पुश्च उसक5 पुत्/ लगभग 05 वेष.
क सरपु!च रहीc ।
3. अतिभयाजा/ क मुमुल स!ቌኔपु मुV इस ्ቚकर ही2 तिक घुटी/ तिदो/!क 21/01/2021 क रति्ቔ लगभग 08:00 जा ቇኋमु खै2र ቝኌस्था तिशवे मु!तिदोर मुV अतिभया दोवेकरमु सहीA ቛኋर एक 2ठक आयालिजा क5 गई था , लिजासक5 सBच/ फो/ क मुध्यामु स ्ቚलिथा.या उष वे (अ.स.-3)
3 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} क भ दो गई था । जा ्ቚलिथा.या उष वे अपु/ अन्या सलिथायाg क सथा मु!तिदोर क पुस पुही]hच , अतिभयागण ቛኋर उस मुh-ही/ क5 अश्ल ल गलिलयाh दो गई! था जा/ स मुर/ क5 Iमुक5 दो ही]ए हीथा-मुक्कg स मुरपु टी क5 गई, लिजासस ्ቚलिथा.या उष वे क एh हीथा क5 छटी अ!गल मुV चटी आई । इसक पुश्च अगल तिदो/ तिदो/!क 22/01/2021 क तिवेचर-तिवेमुश./सलही-मुशतिवेर क उपुर! ्ቚलिथा.या क5 रिरपुटी. पुर पुलिलस था/ लिसटी
कवेल , ल4दोजार मुV अपुरI ्ቅमु!क 59/2021 पु!जा ्ቍ तिकया गया । तिवेवेच/ क दो4र/ घुटी/स्थाल क /क्श 2यार तिकया गया, ्ቚलिथा.या क जाति ्ቚमुणपु्ቔ जा् तिकया गया था सतिቌኔयाg क कथा/ दोजा. तिकए गए । स!पुBण. तिवेवेच/ उपुर! अतिभयाग-पु्ቔ ्ቚस् तिकया गया ।
4. तिवेचरण क दो4र/ आरपु क ्ቚमुण/ ही अतिभयाजा/ क5 ओर स अपु/ पुቌኔ क समुथा./ मुV क ल 10 सतिቌኔयाg क पुर ቌኔण करया गया था 07 दोस्वेजा ्ቚदोतिश. करए गए । Iर 313 दोण्ड ्ቚति्ቅया स!तिही क ही अतिभयागण / अपु/ तिवेरु्ቍ आए सतिቌኔयाg क कथा/g स इ!कर कर ही]ए स्वेया! क ति/दोnष ही/ या था रजा/ तिक ቛኋषवेश झूBठ फोh सए जा/ क कथा/ तिकया । अतिभयागण ቛኋर चवे मुV ቇኋमु खै2र क ति/वेस उतिमु.ल वे (.स.-1) एवे! रमुजा (.स.-2) क पुर ቌኔण करया गया । त्पुश्च उभयापुቌኔ क स/कर तिवेचरण न्यायालया ቛኋर “्ቚश्/I / ति/ण.या” पुरिर कर ही]ए अतिभयागण क दोषमु तिकया गया, लिजास दोषमुति क इस अपु ल मुV च/4 दो गई ही2 ।
5. अपु लथा:/्ቚलिथा.या क तिवेቛኋ/ अलिIवे क क.
ही2 तिक अतिभयागण क5 अन्या अपुरIg मुV पुरिर दोषमुति पुर ल /हीc तिदोया जा रही ही2, अतिपु क वेल Iर 323 सहीपुतिठ Iर 34 भर या दोण्ड स!तिही क अ!ग. क5 गई दोषमुति पुर ही ल तिदोया जा रही ही2 । ्ቚलिथा.या उष वे / अपु/ सቌኚया मुV स्पु्ቖ रूपु स अतिभयागण ቛኋर उसक सथा मुरपु टी तिकए जा/
4 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} था उसस चटी पुही]hच/ क कथा/ तिकया ही2, लिजासक5 पुति्ቖ ्ቚत्याቌኔदोश: सቌኔ घु/रमु वेमु. (अ.स.-1) एवे! श्यामुलल वेमु. (अ.स.-2) क कथा/g स ही ही2 । इसक अतिरिर तिचतिकत्सक आक!ቌኔ स/वे/ (अ.स.-10) / भ उ थ्या क5 पुति्ቖ क5 ही2 । इस ्ቚकर स, Iर-323 सहीपुतिठ Iर-34 भर या दोण्ड स!तिही क अपुरI ्ቚमुतिण रही ही2 । तिवेचरण न्यायालया ቛኋर उ/क सቌኚया पुर तिवेश्वेस / कर ही]ए ्ቔतिटीपुBण. ति/ष्कष. ति/कल ही2 जा तिवेलिI क5 दृति्ቖ मुV ቝኌस्थार रखै जा/ याग्या /हीc ही2 । अu Iर-323 सहीपुतिठ Iर-34 भर या दोण्ड स!तिही क ही क5 गया दोषमुति क ति/ण.या अपुस् कर ही]ए अपु ल स्वे कर क5 जाकर अतिभयागण क दोषलिस्ቍ कर दोቝኌण्ड तिकया जाए ।
6. अतिभया/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-2 स 5 क तिवेቛኋ/ अलिIवे ቛኋर तिवेचरण न्यायालया क
“्ቚश्/I / ति/ण.या” क समुथा./ कर ही]ए क. तिदोया गया ही2 तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर जा दोषमुति क ति/ष्कष. अ!तिक तिकया गया ही2, वेही पुBण.u उतिच ही2 । अपु लथा:/्ቚलिथा.या पुቌኔ ቛኋर अपु ल मुV उठए गए क. स्वे कर याग्या /हीc हीv । अu अपु ल खैरिरजा क5 जाए ।
7. न्यायादृ्ቖ! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुV मु// या उच्चमु न्यायालया ቛኋर दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् अपु ल क ति/रकरण ही क छ न्यातियाक लिस्ሾ! ्ቚतिपुतिदो तिकए गए हीv जा कቝኌण्डक-42 मुV ति/म्//सर ही2u-
“42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty.
All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as:
5 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.”
8. अपु लथा: पुቌኔ क क./सर, इस न्यायालया क समुቌኔ तिवेचरण या एकमु्ቔ ्ቚश्/ याही ही2 तिक क्या अतिभयागण / समुन्या आशया क अቇኋसरण मुV ्ቚलिथा.या उष वे क सथा हीथा-मुक्कg स मुरपु टी कर स्वेच्छ उपुहीति करिर क5? 9. तिचतिकत्सक आक!ቌኔ स/वे/ (अ.स.-10) / घुटी/ क अगल तिदो/, अथा.y रिरपुटी. तिदो/!क 22/01/2021 क ्ቚलिथा.या क तिचतिकत्सक5या पुर ቌኔण कर ्ቚदोश. पु -7 क रूपु मुV ्ቚतिवेदो/ ्ቚस् तिकया । उ ्ቚतिवेदो/ क अ/सर ्ቚलिथा.या क एh हीथा क5 छटी अ!गल
मुV मु्ቔ सBजा/ पुई गई, लिजासक स!!I मुV ्ቚलिथा.या ቛኋर दोदो. ही/ या गया । तिचतिकत्सक / याही भ उቤኔखै तिकया ही2 तिक उ चटी क़ቨ एवे!
भथार वेस् स 24 घु!टी क भ र करिर ही
6 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} सक ही2 । तिचतिकत्सक आक!ቌኔ स/वे/ / ्ቚतिपुर ቌኔण क दो4र/ चवे पुቌኔ क इस सझूवे क स्वे कर तिकया ही2 तिक ्ቚलिथा.या उष वे क उ चटी कठर Iरल पुर तिगर/ स भ आ सक ही2 । उ स्वे क| सझूवे क आIर पुर भ सቌኚया क5 समु ቌኔ उतिच हीग ।
10. याही ቝኌस्थाति स्पु्ቖ ही ही2 तिक घुटी/ क समुया ्ቚलिथा.या ቦኍ मु उष वे ቇኋमु पु!चया खै2र क5 सरपु!च थाc, जातिक इसक पुBवे. अतिभया दोवेकरमु सहीA था उसक5 पुत्/ लगभग 10 स 15 वेषn! क उ ቇኋमु पु!चया क सरपु!च रही चक था । अतिभलखै पुर ्ቚस् अन्या सቌኚया स याही थ्या भ ति/तिवे.वेदो रूपु स स्पु्ቖ ही2 तिक उभयापुቌኔ क मुध्या पुBवे. स ही रजा/ तिक ्ቚतिቛኋ!तिቛኋ क करण र!लिजाश क5 ቝኌस्थाति तिवे्ቕमु/ था । याही भ स्पु्ቖ ही2 तिक अतिभया दोवेकरमु सहीA क अतिरिर अन्या अतिभया उसक रिरश्दोर हीv, लिजा/क तिवेरु्ቍ मुरपु टी क स!!I मुV कई तिवेतिश्ቖ कथा/ ्ቚलिथा.या ቛኋर /हीc तिकए गए हीv । इसक अतिरिर याही थ्या भ
समु/ आ ही2 तिक घुटी/ क5 रिरपुटी. अगल तिदो/ दोजा. करई गई ही2 था तिवेल! क करण
“सलही-मुशतिवेर क पुश्च रिरपुटी. तिकया जा/” या गया ही2 । इस ्ቚकर याही भ स्पु्ቖ ही2 तिक ्ቚलिथा.या पुቌኔ क रिरपुटी. दोजा. कर/ स पुBवे. पुया.् समुया उपुलब्I रही, लिजासमुV तिवेचर- तिवेमुश. तिकया गया था ।
11. स!पुBण. सቌኚया क पुरिरश ल/ स याही स्पु्ቖ ही ही2 तिक ्ቚलिथा.या उष वे (अ.स.-3) / ्ቚतिपुर ቌኔण क दो4र/ चवे पुቌኔ क इस सझूवे क स्वे कर तिकया ही2 तिक घुटी/ क समुया घुटी/स्थाल पुर अ/क व्याति उपुቝኌस्था था, लिजा/मुV सलिखैया स/, ग4मु वे, रमुकल सहीA क सथा-सथा उतिमु.ल वे (.स.-1) एवे!
रमुजा (.स.-2) भ शतिमुल था । उ चवे सतिቌኔयाg क अतिभयाजा/ ቛኋर अपु/ सቌኚया-सBच मुV सቝኌम्मुलिल /हीc तिकया गया, / ही उ/क पुर ቌኔण करया गया । लिजा/ दो सतिቌኔयाg, घु/रमु वेमु. (अ.स.-1) एवे! श्यामुलल वेमु. (अ.स.-2) / न्यायालया / या/ मुV ्ቚलिथा.या क कथा/g क5 पुति्ቖ क5 ही2,
7 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} उ/क /मु ्ቚथामु सBच/ पु्ቔ मुV अ!तिक हीv । चBhतिक ्ቚथामु सBच/ पु्ቔ सलही-मुशतिवेर क पुश्च लिलखैई गई ही2, अu इस स!भवे/ स इ!कर /हीc तिकया जा सक तिक ्ቚलिथा.या ቛኋर सतिቌኔयाg क /मु भ तिवेचर-तिवेमुश. क उपुर! अपु/ इच्छ स /मुजादो तिकए गए । ऐस
ቝኌस्थाति मुV, जा याही स्वे कर तिकया गया ही2 तिक घुटी/स्थाल पुर अ/क व्याति उपुቝኌस्था था था उतिमु.ल वे (.स.-1) एवे! रमुजा (.स.-2) / अतिभयागण क पुቌኔ क समुथा./ तिकया ही2 । सቌኚया मुV याही थ्या भ आया ही2 तिक ्ቚलिथा.या क दोवेर भर ቛኋर अतिभया दोवेकरमु सहीA क Iक्क तिदोया गया था था उस मुर/ ही आग ढ़/ पुर अतिभया दोवेकरमु सहीA भगकर अपु/ भई सवेकरमु क घुर क भ र चल गया था । त्पुश्च ्ቚलिथा.या उष वे एवे! अन्या लग पु/u मु!तिदोर ल4टी आए और याही कही गया तिक चBhतिक मुमुल गhवे क ही2, अu गhवे मुV ही पु!चया कर ल जाएग । उ चवे सतिቌኔयाg ቛኋर स्पु्ቖ रूपु स कही गया ही2 तिक अतिभयाजा/ ቛኋर लिजास ्ቚकर क5 घुटी/ क वेण./ तिकया गया ही2, वे2स
घुटी/ वेस्वे मुV घुतिटी /हीc ही]ई था । याही भ उቤኔखै/ या ही2 तिक जातिग था अश्ल ल गल -गल4जा क आरपु ्ቚमुतिण /हीc पुया गया ही2 था इस तिवेषया क लकर अपु ल मुV भ
्ቚलिथा.या पुቌኔ ቛኋर तिवेशष ल /हीc तिदोया गया ही2 । इसक अतिरिर, ्ቚलिथा.या ቛኋर याही कथा/ तिकया गया तिक मुरपु टी स उसक /खैB/ उखै़ቨ गया था, तिक!
उ थ्या क5 पुति्ቖ तिचतिकत्सक5या सቌኚया स /हीc ही पुई ही2 । तिचतिकत्सक आक!ቌኔ स/वे/ / स्वे कर तिकया ही2 तिक ्ቚलिथा.या क पुया गया चटी क़ቨ Iरल पुर तिगर/ स आ सक ही2 । अतिभयाजा/ सቌኔ
ቦኍ मु स/मु वे (अ.स.-6) / भ अपु/ सቌኚया मुV याही स्वे कर तिकया ही2 तिक पुBवे. मुV सरपु!च च/वे क लकर रजा/ तिक र!लिजाश क करण उभयापुቌኔ क मुध्या मु/मुटीवे चल आ रही था । स्वेया! ्ቚलिथा.या / भ ्ቚतिपुर ቌኔण मुV याही स्वे कर तिकया ही2 तिक वेही अतिभया दोवेकरमु सहीA एवे! उसक सलिथायाg स पुBवे. स पुरश/ था था तिशवे मु!तिदोर क अध्याቌኔ /ए
8 / 8 {Acq. A. No.-753 of 2024} जा/ क समुया उ/क ቛኋर पुरश/ तिकए जा/ क स!!I मुV उस/ च4क5 करही जार मुV एक झूBठ रिरपुटी. दोजा. करई था । इस अवेस्था मुV, ्ቚलिथा.या क कथा/ क स!दोही स पुर तिवेश्वेस/ या /हीc मु/ जा सक ।
12. उपुर न्यायादृ्ቖ! क ्ቚकश मुV सቌኚया तिवेवेच/ क फोलस्वेरूपु याही न्यायालया पु ही2 तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर जा दोषमुति क ति/ष्कष. अ!तिक तिकया गया ही2 वेही अतिभलखै मुV उपुलब्I थ्या और सቌኚया क तिवेपुर या तिवेरIभस /हीc ही2 था ्ቚश्/I / दोषमुति क ति/ण.या मुV कई अवे2I या अश्ሾ पुरिरलतिቌኔ /हीc ही । इसलिलए उसमुV हीस्ቌኔपु क5 आवेश्याक /हीc पुया जा ।
13. अu दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् याही अपु ल स्वे कर याग्या / ही/ स खैरिरजा क5 जा ही2 ।
14. ति/ण.या क5 ्ቚतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलखै श ्ቈपुBवे.क वेपुस ्ቚतिष ही । सही /- (स!जाया क मुर जायासवेल) न्यायाI श पुमु/