Research › Search › Judgment

High Court of Chhattisgarh · body

2024 DAILYLAW 746 (CHH)

ASLAM @ ANKUSH MADAME v. STATE OF CHHATTISGARH

CRA/1809/2024 · 2026-03-10

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2024

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 2026:CGHC:11650 प्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिर्णया सरति तिक-03/03/2026 तिर्णया उद्घो(ति) तिक-11/03/2026 ण्डि,-क अपु ल क्रमांक -411 /2024  स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे तिपु-भवे ध्रुवे, उम्र-लगभग 18 वे), तिवेस -अर2टी पुर लभद्र वे-, भटीपुर, पुलिलस था-भटीपुर, लि=ल-ल2=र-भटीपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था-सरगवे, लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या सतिC ण्डि,-क अपु ल क्रमांक -467 /2024  तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF तिपु-स() सCF, उम्र-लगभग 20 वे), तिवेस -कल्यार्ण सगर पुर, पुलिलस था-भटीपुर, लि=ल-ल2=र-भटीपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था-सरगवे, लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.03.11 16:20:57 +0530 2 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) सतिC ण्डि,-क अपु ल क्रमांक -529 /2024  कन्C उर्फ वेप्रकशु गरच तिपु-याशुवे गरच , उम्र-लगभग 20 वे), तिवेस -रस्टी Cउस क पु छ, यापुर, भटीपुर, पुलिलस था-भटीपुर (शुCर), लि=ल-ल2=र-भटीपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार था प्रभर , पुलिलस था-सरगवे, लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या सतिC ण्डि,-क अपु ल क्रमांक -930 /2024  स पु उर्फ प्रशु वेMष्र्णवे तिपु-ललिल वेMष्र्णवे, उम्र-लगभग 19 वे), तिवेस -वे- सख्या-18, समां कमां वे-, भटीपुर, पुलिलस था-भटीपुर (शुCर), लि=ल- ल2=र-भटीपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था-सरगवे, लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या सतिC ण्डि,-क अपु ल क्रमांक -1795 /2024  तिवेवेक ध्रुवे तिपु-तिल पु, उम्र-लगभग 20 वे), तिवेस -पुचशु ल गर, गरूक वे-, भटीपुर, पुलिलस था-भटीपुर (शुCर), लि=ल-ल2=र-भटीपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभयाक्त 3 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था-सरगवे, लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या एवे ण्डि,-क अपु ल क्रमांक -1809 /2024  असलमां उर्फ अक शु मां-मां तिपु-मांथा, उम्र-लगभग 20 वे), तिवेस -वे- सख्या-18, समां कमां वे-, भटीपुर, पुलिलस था-भटीपुर (शुCर), लि=ल-ल2=र- भटीपुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा>/अतिभयाक्त तिवेरूद्घो  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस था-सरगवे, लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे /रज्या अपु लथा> स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे द्वार : श्री ऋति) रCTल स( , अलिUवेक्त । अपु लथा> तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF द्वार : श्री भर लल -म्ब्रा, अलिUवेक्त । अपु लथा> कन्C उर्फ वेप्रकशु गरच द्वार : श्री तिवे=या शुकर तिमांश्री, अलिUवेक्त । अपु लथा> स पु उर्फ प्रशु वेMष्र्णवे द्वार : श्री तिवेकस क मांर पु,-या, अलिUवेक्त । अपु लथा> तिवेवेक ध्रुवे द्वार : श्री तिवेकस क मांर पु,-या, अलिUवेक्त । अपु लथा> असलमां उर्फ अक शु मां-मां द्वार : श्री ऋति) रCTल स( , अलिUवेक्त । रज्या/उत्तीरवे द्वार : श्री सतिमां लिसC, उपु मांCलिUवेक्त । न्यायामां5ति श्री स=या क मांर =यासवेल 4 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) !! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. ,- प्रतिक्रया सतिC, 1973 क[ Uर-374 (2) क C प्रस् इस ण्डि,-क अपु ल मां], तिवेचरर्ण न्यायालया-प्रथामां अपुर सत्र न्यायाU शु, मांगल , लि=ल-मांगल , छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमांक-31/2023 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो असलमां उर्फ अक शु मां-मां वेगMरC” मां] पुरिर तिर्णया तिक-06/02/2024 क( च2  गई CM । लि=सक C अपु लथा>गर्ण क( तिम्सर ()लिसद्ध कर ण्डि,- तिकया गया CM । लि=स आग सपु मां] “प्रश्U  तिर्णया” स स(लिU तिकया = रC CMf- अपु लथा> क मां ()लिसतिद्ध ,-शु स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF कन्C उर्फ वेप्रकशु गरच स पु उर्फ प्रशु वेMष्र्णवे तिवेवेक ध्रुवे असलमां उर्फ अक शु मां-मां Uर-341/149 भर या ,- सतिC, 1860 01 मांC क करवेस एवे 100/-रूपुया क अथा,- था अथा,- रतिशु अ  कर क[ शु मां] 07 ति क अतिरिरक्त करवेस क[ स= स ण्डि,- तिकया गया । Uर-397/394 भर या ,- सतिC, 1860 07 वे) क सश्रीमां करवेस क[ स= स ण्डि,- तिकया गया । Uर-307/149 भर या ,- सतिC, 1860 07 वे) क सश्रीमां करवेस एवे 500/- रूपुया क अथा,- था अथा,- रतिशु अ  कर क[ शु मां] 01 मांC क अतिरिरक्त सश्रीमां करवेस क[ स= स ण्डि,- तिकया गया । 5 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF असलमां उर्फ अक शु मां-मां Uर-25(1)(1-ख) आयाU अलिUतियामां, 1959 01 वे) क करवेस एवे 500/- रूपुया क अथा,- था अथा,- रतिशु अ  कर क[ शु मां] 01 मांC क अतिरिरक्त करवेस क[ स= स ण्डि,- तिकया गया । Uर-27(1) आयाU अलिUतियामां, 1959 03 वे) क करवेस एवे 500/- रूपुया क अथा,- था अथा,- रतिशु अ  कर क[ शु मां] 01 मांC क अतिरिरक्त करवेस क[ स= स ण्डि,- तिकया गया । सभ मां5ल स=ए सथा-सथा चल]ग । 2. अतिभया(= मांमांल, सपु मां], इस प्रकर CM तिक तिक 05/05/2023 क( प्रf 06:20 = प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) अपु सलिथायाh स रमां सCF (अ.स.-2), = Cर (अ.स.-3) एवे स() तिवेर (अ.स.-5) क सथा मां(टीरसइतिकल स .- . ति-लक्स क्रमांक स = -04-एलएक्स-9306 मां] ग्रामां सवेपुर स सरगवे C( CTए लमां क[ ओर = रC था । = वे रष्ट्रीm या र=मांग क्रमांक 130 पुर ग्रामां तिकर ण्डिस्था आर ढा क समां पु पुCToच, भ पु छ स ( मां(टीरसइतिकल पुर सवेर अपु लथा>गर्ण आए और आग तिकल CTए उन्C] र(ककर गल -गल2= कर लग । उमां] स एक व्यातिक्त  स() तिवेर (अ.स.-5) क( था 5सर  स रमां सCF (अ.स.-2) क( चक5 स वेर तिकया लि=सस उन्C] च(टी] आया । = वे वेCo स भग क प्रयास कर लग,  अपु लथा>गर्ण/अतिभयाक्तगर्ण  उक पु छ कर उन्C] पुकड़ लिलया । इस 2र 6 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग क[ = स ₹500/-, उक[ मां(टीरसइतिकल, स() तिवेर क[ = स ₹1,000/- था उसक स्पुशु-पुटी (टीच-स्क्र[) मां(इल र्फ( ल5टी लिलए । उक्त मांरपु टी क र्फलस्वेरूपु स() तिवेर क पुटी मां] था स रमां सCF क[ ई =घ मां] च(टी आई । प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग द्वार घटी क[ रिरपु(टी उस ति था सरगवे मां] = करए = पुर अपुरU क्रमांक 72/2023 पु= द्ध तिकया गया । 3. तिवेवेच क 2र उक प्रकटी करर्ण कथा क आUर पुर अतिभयाक्त तिवेवेक ध्रुवे स रमांस्वेरूपु वेग क एक आUर क- एवे ₹300/- ग (प्रशु पु -11), अतिभयाक्त तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF स एक स्टी ल क टीर चक5 एवे मां(टीरसइतिकल Ch- स .- . 100 -m मां (प्रशु पु -12), अतिभयाक्त स पु उर्फ प्रशु वेMष्र्णवे स मां(टीरसइतिकल C र( एच.एर्फ. ति-लक्स (प्रशु पु -13), अतिभयाक्त स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे स मां(टीरसइतिकल C र( स्प्ल]-र प्र( (प्रशु पु -14) था अतिभयाक्त असलमां उर्फ अक शु मां-मां स एक स्टी ल क टीर चक5 (प्रशु पु -15) =प्त तिकए गए । तिक 06/05/2023 क( Cस ल कयालया सरगवे मां] प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) स अतिभयाक्त तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF, स पु उर्फ प्रशु वेMष्र्णवे, कन्C उर्फ वेप्रकशु गरच एवे तिवेवेक ध्रुवे क[ पुCच करई गई, लि=सक[ कयावेC प्रशु पु -33 क रूपु मां] अतिक CM । त्पुश्च तिक 20/05/2023 क( Cस ल कयालया सरगवे मां] C प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग स अतिभयाक्त स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे एवे असलमां उर्फ अक शु मां-मां क[ पुCच कयावेC करई गई, लि=सक[ कयावेC प्रशु पु -4 क रूपु मां] अतिक CM । तिवेवेच क 2र सतियाh क कथा लिलए गए, मां2क-क्शु Mयार तिकया गया था सपु5र्ण तिवेवेच उपुर अतिभयाक्तगर्ण क तिवेरुद्ध अतिभया(ग-पुत्र प्रस् तिकया गया । 7 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 4. आर(पु प्रमांर्ण वेस् तिवेचरर्ण न्यायालया क समां अतिभया(= क[ ओर स अपु पु समांथा मां] 14 सतियाh क पुर र्ण था 48 स्वे= प्रशु तिचन्Cतिक करवेया गया । Uर-313 ,- प्रतिक्रया सतिC क C कथा मां] अपु लथा>गर्ण  अपु तिवेपुर  सतियाh क कथाh क( इकर कर CTए कC CM तिक वे तिy) Cz था उन्C] झू5ठा र्फo सया गया CM । चवे मां] उक[ ओर स क(ई सक्ष्या प्रस् C~ तिकया गया । उभयापु क स =कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लथा>गर्ण/अतिभयाक्तगर्ण क( इस तिर्णया क[ कण्डि,-क-1 क असर ()लिसद्ध कर ण्डि,- तिकया गया CM । लि=स इस अपु ल मां] च2  गई CM । 5. अपु लथा>गर्ण क तिवेद्वा अलिUवेक्तगर्ण क क CM तिक घटी क ति C = करई गई प्रथामां स5च पुत्र मां] तिकस भ अतिभयाक्त क मां अतिक C~ CM । अपु लथा>गर्ण क तिवेरुद्ध अतिभया(= क मांमांल मांख्याf उक तिवेरुद्ध करई गई तिशुख़् कयावेC पुर आUरिर CM । इस सU मां] प्रशु पु -33 तिक 06/05/2023 क( था प्रशु पु -4 तिक 20/05/2023 क( आया(लि= क[ गई, तिक  उक्त (h C तिशुख़् कयावेC क वेल प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) स C करई गई, शु) प्रथा> या प्रत्या सतियाh स C~ करया गया । तिशुख़् कयावेC मां]  ( पुयाप्त सख्या मां] समां प्रक€ ति क अन्या व्यातिक्तयाh क( सण्डिम्मांलिल तिकया गया और  C प्रत्याक अतिभयाक्त क[ तिशुख़् पु€थाक-पु€थाक एवे तिवेलिU सम्मां ढाग स करई गई । इसक अतिरिरक्त याC थ्या भ स्वेया तिशुख़्क प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1)  स्वे कर तिकया CM तिक अतिभयाक्तh क( उस, तिशुख़् कयावेC स पु5वे C तिख तिया गया था । ऐस पुरिरण्डिस्थाति मां] उक्त तिशुख़् कयावेC क[ तिष्पु एवे तिवेश्वेस या सCस्पु C( गया CM । इस सभ मां] इस न्यायालया द्वार प्रतिपुति न्यायादृष्ट्री Pramod v. State of Chhattisgarh with other connected matters, 2024 SCC OnLine Chh 3080 क Cवेल तिया CM लि=सक असर याति 8 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) अतिभयाक्त, गवेC क( पु5वे मां] तिख तिया गया C( अथावे तिशुख़् कयावेC तिवेलिUसम्मां ढाग स  करई गई C(, ( ऐस तिशुख़् कयावेC अतिवेश्वेस या एवे अवेMU मां = CM । अf उक्त पुरिरण्डिस्थातियाh मां] अतिभया(= क सपु5र्ण मांमांल सCस्पु C( गया CM । 6. अपु लथा>गर्ण क तिवेद्वा अलिUवेक्तगर्ण क आग क CM तिक ()लिसतिद्ध क 5सर प्रमांख आUर याC CM तिक अपु लथा>गर्ण स ल5टी क[ रकमां, मां(टीरसइतिकल, आUर क- था घटी मां] प्रयाक्त चक5 क[ =ब् CM । अपु लथा>गर्ण क प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् क स भवेश्वेर क2तिशुक (अ.स.-8)  उक्त कयावेC क[ पुतिष्ट्री C~ क[ CM । 5सर स र= क2तिशुक (अ.स.-6)  याC स्वे कर तिकया CM तिक उस सभ Cस्र एक C समांया पुर था मां] तिकए था था उस भ तिवेलिU क असर अतिभयाक्तगर्ण क प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् क स्पुष्ट्री समांथा C~ तिकया CM । इसक अतिरिरक्त उक्त प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् कयावेC क( Mयार कर वेल तिर क तिवेवेचक प्रमां( -स (अ.स.-14) क कथा स भ प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् कयावेC तिवेलिUवे प्रमांतिर्ण C~ C( CM । इस सU मां] अपु लथा>गर्ण क तिवेद्वा अलिUवेक्त द्वार Babu Sahebagouda Rudragoudar And Others v. State of Karnataka, (2024) 8 SCC 149 क न्यायादृष्ट्री क Cवेल तिया गया CM, लि=समां] याC प्रतिपुति तिकया गया CM तिक याति प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् क[ कयावेC तिवेलिU क असर प्रमांतिर्ण  C(, ( उसक सक्ष्या सतिग्U C( = CM । इसक अतिरिरक्त याC भ क तिकया गया CM तिक प्रथा> पु द्वार लि=स मां(टीरसइतिकल क[ ल5टी C( या गया CM, अतिभया(= याC स्थातिपु कर मां] असर्फल रC CM तिक कलिथा रूपु स =ब् मां(टीरसइतिकल वेC CM =( घटी मां] ल5टी गई था । अतिभयाक्त असलमां उर्फ अक शु मां-मां था अतिभयाक्त तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF स चक5 क[ =ब् भ तिवेलिUवे† प्रमांतिर्ण C~ CM । अतिभयाक्त तिवेवेक ध्रुवे स ग रकमां क[ =ब् शुई गई CM, तिक  याC 9 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) स्थातिपु C~ तिकया = सक CM तिक उक्त रकमां वेC ल5टी गई रतिशु CM । अतिभयाक्त तिवेवेक ध्रुवे स प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग क आUर क- =ब् C( या गया CM, =तिक स्वेया रमांस्वेरूपु वेग  अपु कथा मां] आUर क- क ल5टी = अथावे ख( = क[ क(ई  C~ कC CM । अपु लथा>गर्ण क अपुरU स प्रत्या एवे स U सU स्थातिपु कर मां] अतिभया(= असर्फल रC CM । ऐस ण्डिस्थाति मां] "प्रश्U  ()लिसतिद्ध एवे ,-शु" क तिर्णया तिवेलिU क[ दृतिष्ट्री मां] वेMU और उतिच  C( स ण्डिस्थार रख = या(ग्या C~ CM । अf अपु ल स्वे कर कर "प्रश्U  ()लिसतिद्ध एवे ,-शु" क तिर्णया अपुस् कर CTए अपु लथा>गर्ण क( ()मांक्त तिकया =ए । 7. उत्तीरवे /रज्या क[ ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वा अलिUवेक्त  अपु लथा>गर्ण क तिवेर(U कर CTए क तिया CM तिक अतिभया(= सतियाh  पु5र्ण रूपु स अतिभया(= मांमांल क समांथा तिकया CM लि=पुर अतिवेश्वेस तिकया = क क(ई करर्ण C~ CM । तिवेचरर्ण न्यायालया क “प्रश्U  तिर्णया” सक्ष्या क[ उतिच समां  पुर आUरिर CM । अतिभया(=  अपु लथा>गर्ण क तिवेरूद्घो अपु मांमांल सC स पुर प्रमांतिर्ण तिकया CM । अपु लथा> पु द्वार अपु ल मां] उठाया गया क स्वे कर या(ग्या C~ CM । अf अपु ल खरिर= तिकया =या । 8. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और अतिभलख क स5क्ष्मांपु5वेक पुरिरशु ल तिकया गया । 9. घटी तिक 05/05/2023 क[ CM । प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1)  अपु न्यायालया  कथा मां] या CM तिक वेC स रमां सCF (अ.स.-2), = Cर (अ.स.-3) था स() तिवेर (अ.स.-5) क सथा अपु ससरल ग्रामां सवेपुर स ग्रामां टीमांर क[ ओर = रC था । = वे तिलसपुर–रयापुर रष्ट्रीm या र=मांग पुर तिवेर पुटीm(ल पुपु एवे आर ढा क समां पु पुCTच, भ ( मां(टीरसइतिकलh मां] सवेर 06 व्यातिक्त 10 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) वेCo आए और उन्C] र(क लिलया । उ व्यातिक्तयाh क Cथाh मां] चक5 था तिपुस्2ल था । प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग क असर उक्त व्यातिक्तयाh  स रमां सCF (अ.स.-2) था स() तिवेर (अ.स.-5) पुर चक5 स Cमांल तिकया । इस 2र प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग क पुस स ₹500/- एवे मां(इल र्फ( छ  क प्रयास तिकया गया, तिक  उस अपु मां(इल र्फ( 5र र्फ] क तिया । इसक अतिरिरक्त स() तिवेर स पुस, ग रतिशु था मां(इल र्फ( ल5टी लिलए गए था उक[ मां(टीरसइतिकल भ छ  ल गई । घटी क 2र स() तिवेर क पुटी मां] था स रमां सCF क[ =घ मां] चक5 स वेर तिकया । त्पुश्च† प्रथा> द्वार था सरगवे मां] रिरपु(टी = करई गई, लि=सक आUर पुर प्रथामां स5च पुत्र प्रशु पु -1 = क[ गई । 10. प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) क उक्त कथाh क[ पुतिष्ट्री कर CTए स रमां सCF (अ.स.-2)  या CM तिक वे चरh व्यातिक्त एक C मां(टीरसइतिकल स ग्रामां टीमांर = रC था, भ अज्ञा व्यातिक्तयाh  उक[ मां(टीरसइतिकल ल5टी ल था उ पुर चक5 स Cमांल तिकया, लि=सस उस था स() तिवेर क( च(टी] आई । = Cर (अ.स.-3)  भ घटी क[ पुतिष्ट्री कर CTए या CM तिक ( मां(टीरसइतिकलh मां] आए लगभग 06 व्यातिक्तयाh  चक5 तिखकर उक सथा मांरपु टी क[ था ल5टीपुटी क[ । इस प्रकर स() तिवेर (अ.स.-5)  भ अपु कथा मां] घटीक्रमां क समांथा कर CTए कC CM तिक ( मां(टीरसइतिकलh मां] सवेर 06 व्यातिक्तयाh  चक5 एवे तिपुस्2ल तिखकर उसस मां(इल र्फ( था लगभग ₹800-900/- क[ ग रतिशु ल5टी ल था उमां] स एक व्यातिक्त  उसक पुटी मां] चक5 स वेर तिकया, लि=सस उस च(टी आई । 11. तिचतिकत्सक मां(Cतिस क रŠ (अ.स.-7)  स() तिवेर (अ.स.-5) क तिचतिकत्स या पुर र्ण तिकया था अपु प्रतिवे मां] उसक पुटी क समां पु Uरर Cलिथायार स लग 2 x 11 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 0.5 स.मां . आकर क[ था लगभग 2 स.मां . गCरई क[ च(टी क उल्लेख तिकया CM । इस प्रकर उन्Ch स रमां सCF (अ.स.-2) क तिचतिकत्स या पुर र्ण प्रतिवे प्रशु पु -22 क( भ प्रमांतिर्ण कर CTए उसक एo =घ मां] Uरर Cलिथायार क[ च(टी C( या CM । इस प्रकर प्रस् तिचतिकत्स या एवे मां2लिखक अतिभया(= सक्ष्या स याC थ्या प्रमांतिर्ण C( CM तिक पुoच स अलिUक व्यातिक्तयाh  तिवेलिU तिवेरुद्ध =मांवे क सस्या रC CTए प्रथा> पु क  क वेल स() अवेर(U तिकया, ण्डिल्क घक Cलिथायारh स ससण्डिज्= C(कर उ पुर Cमांल कर Cत्या क प्रयास तिकया था उस ल5टी क[ घटी करिर क[ । 12. प्रमांख रूपु स याC ख = CM तिक क्या उक्त घटी अपु लथा>गर्ण  करिर क[ था ? 13. अपु लथा>गर्ण क[ ()लिसतिद्ध क प्रथामां आUर याC या गया CM तिक तिशुख़् कयावेC प्रशु पु -4 था प्रशु पु -33 मां] प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) द्वार अपु लथा>गर्ण क[ पुCच घटी करिर कर वेल व्यातिक्तयाh क रूपु मां] क[ गई CM । प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग द्वार पुलिलस था मां] =( प्रथामां स5च पुत्र = करई गई CM, उसमां] तिकस भ अपु लथा> अथावे अतिभयाक्त क मां, CTलिलया अथावे पुCच सU तिवेवेरर्ण अतिक C~ CM । पुरिरर्णमांस्वेरूपु अतिभया(= क( अतिभयाक्तगर्ण क[ पुCच स्थातिपु कर क उद्देश्या स तिशुख़् कयावेC कर आवेश्याक प्र  CTआ । उक्त तिशुख़् कयावेC क वेल प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) स C करई गई CM । =तिक घटी क समांया स रमां सCF (अ.स.-2), = Cर (अ.स.-3) था स() तिवेर (अ.स.-5) भ घटीस्थाल पुर उपुण्डिस्था था, थातिपु अतिभया(= द्वार उस तिकस भ अतिभयाक्त क[ पुCच कर क प्रयास C~ तिकया गया । अf उपुयाक्त पुरिरण्डिस्थातियाh मां] प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) द्वार क[ गई तिशुख़् कयावेC क[ वेMU एवे तिवेश्वेस या क पुर र्ण तिवेशु) सवेU क सथा तिकया = आवेश्याक C( = CM । 12 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 14. In the matter of Dal Chand v. State, AIR 1953 All 123, their Lordships of Allahabad High Court held that as a safe rule of prudence, a fair proportion of outsiders mixed with the suspects, considering the circumstances of the case should always be insisted upon by every Magistrate who is charged with the duty of conducting identification proceedings. 15. Similarly, in State v. Wahid Bux, AIR 1953 All 314 in identification parades, it is always better to have as large a number of persons mixed up with the accused as possible. If five times the number of the accused persons are mixed with them, it cannot be said that there is any flaw in the identification proceedings. 16. प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) स तिक 06/05/2023 क( प्रशु पु -33 क असर क ल 04 अतिभयाक्तh क[ तिशुख़् कयावेC या Cस लर शुक मांर क रŠ (अ.स.-13) द्वार करई गई CM । उक्त तिशुख़् कयावेC मां] अन्या व्यातिक्तयाh क रूपु मां] मांत्र   व्यातिक्तयाh क( C सण्डिम्मांलिल तिकया गया था । इस प्रकर लि= अतिभयाक्तh क[ पुCच करई = था , उक सथा तिमांलए गए व्यातिक्तयाh क[ सख्या उस भ कमां था , =( तिवेलिUसम्मां तिशुख़् कयावेC क[ प्रतिक्रया क अरूपु प्र  C~ C( । इसक पुश्च† 5सर र तिक 20/05/2023 क( इस प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) स प्रशु पु -4 क असर कयापुलिलक मांलि=स्टीmटी सशु ल क मांर क लतिमांत्र (अ.स.-9) द्वार तिशुख़् कयावेC अतिभयाक्त स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे था असलमां उर्फ अक शु मां-मां क[ करई गई । उक्त तिशुख़् कयावेC मां] अन्या व्यातिक्तयाh क रूपु मां] 04 व्यातिक्तयाh क( 13 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) सण्डिम्मांलिल तिकया गया था । इस प्रकर न्यायादृष्ट्री क असर तिशुख़् कयावेC मां] अपु लथा>गर्ण क सथा तिमांलए गए व्यातिक्तयाh क[ सख्या पुयाप्त C~ था । 17. Recently, in the matter of Gireesan Nair v. State of Kerala, (2023) 1 SCC 180, Their Lordships of the Supreme Court held as under:- "32. If identification in the TIP has taken place after the accused is shown to the witnesses, then not only is the evidence of TIP inadmissible, even an identification in a court during trial is meaningless {Sk. Umar Ahmed Shaikh v. State of Maharashtra, (1998) 5 SCC 103}. Even a TIP conducted in the presence of a police officer is inadmissible in light of Section 162 of the Criminal Procedure Code, 1973 {Chunthuram v. State of Chhattisgarh (2020) 10 SCC 733} and {Ramkishan Mithanlal Sharma v. State of Bombay, (1954) 2 SCC 516}. 33. It is significant to maintain a healthy ratio between suspects and non-suspects during a TIP. If rules to that effect are provided in Prison Manuals or if an appropriate authority has issued guidelines regarding the ratio to be maintained, then such rules/guidelines shall be followed. The officer conducting the TIP is under a compelling obligation to mandatorily maintain the prescribed ratio. While conducting a TIP, it is a sine qua non that the non-suspects should be of the same age-group and should also have similar physical features (size, weight, color, beard, scars, marks, bodily injuries etc.) to that of the 14 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) suspects. The officer concerned overseeing the TIP should also record such physical features before commencing the TIP proceeding. This gives credibility to the TIP and ensures that the TIP is not just an empty formality {Rajesh Govind Jagesha v. State of Maharashtra and Ravi v. State, (2007) 15 SCC 372}.” 18. In the matter of Bollavaram Pedda Narsi Reddy v. State of Andhra Pradesh, (1991) 3 SCC 434, their Lordships of the Supreme Court clearly held that the evidence given by the witnesses before the Court is the substantive evidence. In a case where the witness is a stranger to the accused and he identifies the accused person before the court for the first time, the court will not ordinarily accept that identification as conclusive. It is to lend assurance to the testimony of the witnesses that evidence in the form of an earlier identification is tendered and held observed in Para- 08 as under: "8. The witness is a stranger to the accused and he identifies the accused person before the court for the first time, the court will not ordinarily accept that identification as conclusive. It is to lend assurance to the testimony of the witnesses that evidence in the form of an earlier Identification is tendered. If the accused persons are got identified by the witness soon after their arrest and such Identification does not suffer from any infirmity that circumstance leads corroboration to the evidence given by the witness before the court. But in a case where the evidence before 15 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) the court is itself shaky, the Identification before the magistrate would be of no assistance to the prosecution." 19. उपुर(क्त न्यायादृष्ट्रीh क आल(क मां] तिष्पु एवे पुपु रतिC तिवेवेच क लिलए प्रत्याक अतिभयाक्त क[ तिशुख़् पु€थाक-पु€थाक रूपु स करई = चतिCए । प्रस् प्रकरर्ण मां] ऐस तिकया = अतिभलख स पुरिरलति C~ C( । स्थातिपु तिवेलिUक लिसद्धh क असर तिशुख़् कयावेC मां] अतिभयाक्त क सथा सण्डिम्मांलिल तिकए = वेल व्यातिक्तयाh क[ सख्या अतिभयाक्तh क[ सख्या स कमां स कमां चर स पुoच ग अलिUक C( चतिCए, लि=सस पुCच क[ प्रतिक्रया तिष्पु एवे तिवेश्वेस या C( । तिक  तिवेचरU  मांमांल मां] करई गई तिशुख़् कयावेC मां] याC आवेश्याक भ C~ अपुई गया । याC भ उल्लेख या CM तिक क ल छC अतिभयाक्तh क[ तिशुख़् कयावेC ( अलग-अलग तिलिथायाh पुर करई गई CM, तिक  प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग, =( तिक पुCच कर वेल मांख्या स CM, उस कथा मां] क वेल एक C र प्रशु पु -4 क अग तिशुख़् कयावेC C( क[  कC CM । प्रशु पु -33 क अग सपुन्न तिशुख़् कयावेC क सU मां] उस क(ई स्पुष्ट्री कथा C~ तिकया CM । इसक अतिरिरक्त प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग  अपु प्रतिपुर र्ण क[ कण्डि,-क-13 मां] याC भ स्वे कर तिकया CM तिक पुCच कयावेC स पु5वे पुलिलस द्वार उस लकर अतिभयाक्तगर्ण क( तिखया गया था था कC गया था तिक याC व्यातिक्त अपुरU मां] सण्डिम्मांलिल था, लि=क[ पुCच क[ = CM । प्रथा> क असर उस उस आUर पुर अतिभयाक्तगर्ण क[ पुCच क[ था । ऐस ण्डिस्थाति मां], = प्रथामां स5च पुत्र मां] तिकस भ अतिभयाक्त क मां अथावे CTलिलया उल्लेलिख C~ तिकया गया CM,  न्यायालया क समां प्रथा> क याC कC तिक वेC अतिभयाक्तगर्ण क( पुCच था और वे C अपुरU मां] सण्डिम्मांलिल था, स्वेभतिवेक एवे तिवेश्वेस या C~ पुया = । इस प्रकर इस मांमांल मां] करई गई तिशुख़् कयावेC 16 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) स्पुष्ट्री, तिष्पु एवे सC स पुर प्रमांतिर्ण C~ C( , अतिपु उसमां] गभ र सC उत्पुन्न C( CM । लि= अन्या सतियाh स तिशुख़् C~ करई गई CM, उक द्वार न्यायालया  कथा मां] याC कC तिक वे अतिभयाक्तगर्ण क( पुCच Cz, वेC भ तिवेश्वेस या C~ मां = सक । र्फलस्वेरूपु, याC न्यायालया पु CM तिक अपु लथा>गर्ण क[ ()लिसतिद्ध क =( एक प्रमांख आUर तिशुख़् कयावेC क( या गया CM, वेC तिवेलिUवे एवे तिवेश्वेस या C~ पुई = । उक्त तिशुख़् कयावेC सCस्पु C( क करर्ण अपु लथा>गर्ण क[ ()लिसतिद्ध क आUर C~  सक । 20. अपु लथा>गर्ण क[ ()लिसतिद्ध क 5सर प्रमांख आUर याC या गया CM तिक अपु लथा>गर्ण स ल5टी क[ वेस्ओ था घटी मां] प्रयाक्त चक5 क[ =ब् क[ गई CM । अतिभलख स याC पुरिरलति C( CM तिक उक्त समांस् प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् क[ कयावेC तिर क तिवेवेचक प्रमां( -स (अ.स.-14) द्वार क[ गई CM । उक कथा क असर अतिभयाक्त तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF क मांमां(र,-मां कथा प्रशु पु -5 क आUर पुर उसस एक C र( Ch- स - -100 -m मां मां(टीरसइतिकल, लि=सक इ= क्रमांक 67 10542 JC EA 85 था चलिसस क्रमांक 4 67 024283 ME JC DFKA CM, था एक स्टी ल क टीर चक5 =ब् कर प्रशु पु -12 Mयार तिकया गया । इस प्रकर अतिभयाक्त स पु उर्फ प्रशु वेMष्र्णवे क मांमां(र,-मां कथा प्रशु पु -7 क आUर पुर उसस एक C र( एचएर्फ ति-लक्स मां(टीरसइतिकल, लि=सक इ= क्रमांक 11 00280 HA ENHHG था चलिसस क्रमांक 233 07067 MBLHAR HHG CM, =ब् कर प्रशु पु -13 Mयार तिकया गया । अतिभयाक्त तिवेवेक ध्रुवे क मांमां(र,-मां कथा प्रशु पु -8 क आUर पुर उसस प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग क आUर क- था क ₹300/- =ब् कर प्रशु पु -11 Mयार तिकया गया । अतिभयाक्त स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे क मांमां(र,-मां कथा प्रशु पु -9 क आUर पुर एक C र( 17 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) स्प्ल]-र प्र( मां(टीरसइतिकल क्रमांक स .= .-04-क .-ब्ल्या5.-9766 =ब् कर प्रशु पु -14 Mयार तिकया गया था अतिभयाक्त असलमां उर्फ अक शु मां-मां क मांमां(र,-मां कथा प्रशु पु -10 क आUर पुर उसस एक स्टी ल क टीर चक5 =ब् कर प्रशु पु -15 Mयार तिकया गया । 21. उपुर(क्त प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् कयावेC क स भवेश्वेर क2तिशुक (अ.स.-8) पुद्र(C C( गया CM । उस उक्त कयावेC क[ पुतिष्ट्री C~ क[ CM, ण्डिल्क क वेल अपु Cस्र C( स्वे कर तिकया CM । इस प्रकर इस स्वेत्र स द्वार तिवेवेचक क कथाh क[ पुतिष्ट्री C~ क[ गई CM, लि=सस उक्त प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् कयावेC क[ तिवेश्वेस या सतिग्U C( CM । 22. अतिभयाक्तगर्ण क प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् कयावेC क 5सर मांCत्वेपु5र्ण स र= क2तिशुक (अ.स.-6) CM । उस अपु न्यायालया  कथा मां] अपु लथा>गर्ण क प्रकटी करर्ण कथा था =ब् पुर अपु Cस्र C( स्वे कर तिकया CM । अतिभया(= द्वार उस पुद्र(C घ(ति) तिकए = पुर स5चक प्रश्h क मांध्यामां स उस उक्त प्रकटी करर्ण कथा एवे =ब् कयावेC क[ पुतिष्ट्री तिकया CM । थातिपु प्रतिपुर र्ण क 2र इस स  याC भ कC CM तिक उस सभ Cस्र था मां] एक C समांया पुर तिकए था था वेC लगभग ( घटी क था मां] उपुण्डिस्था रC, लि=सक 2र समांस् कयावेC सपुन्न CTई था । इस प्रकर उसक कथा स याC स्पुष्ट्री C( CM तिक वेC स5चक प्रश् क पुश्च† प्रतिपुर र्ण मां] अपु कथा पुर ण्डिस्थार C~ रC CM । इसक अतिरिरक्त, पु€थाक रूपु स पु5छ = पुर वेC याC  मां] भ असमांथा रC तिक तिकस अतिभयाक्त स क2-स वेस् क[ =ब् क[ गई था । इस प्रकर 5सर स्वेत्र स क कथा स भ तिवेवेचक क कथा क स्पुष्ट्री समांथा C~ C( CM, लि=सस प्रकटी करर्ण एवे =ब् कयावेC सतिग्U C( CM । 18 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 23. स्वेया तिवेवेचक तिर क प्रमां( -स (अ.स.-14) क कथा क[ तिवेश्वेस या क आकल कर पुर याC उल्लेख या CM तिक तिवेवेचक क कथा अपु आपु मां] स्पुष्ट्री, ससग एवे तिवेलिU क अरूपु C( चतिCए । तिवेशु) रूपु स Uर-27 भर या सक्ष्या अलिUतियामां क प्रवेU क असर याC आवेश्याक CM तिक तिवेवेचक अपु कथा मां] स्पुष्ट्री रूपु स याC शुए तिक तिकस अतिभयाक्त  क्या कथा तिकया, उस कथा क आUर पुर क2-स या थ्या प्रकशु मां] आया था अतिभयाक्त क[ तिशुC पुर तिकस स्था स क2-स वेस् =ब् क[ गई । तिवेवेचक द्वार स्वे=h क( मांत्र तिचन्Cतिक तिकया = तिवेलिUक रूपु स प्रमांतिर्ण कर क[ अपु क( पु5र C~ कर । इस सU मां] मां या सवेyच्च न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट्री Raja Khan v. State of Chhattisgarh, (2025) 3 SCC 314 क[ कण्डि,-क-38 मां] तिम्सर प्रतिपुति तिकया गया CMf- “38. This Court in Varun Chaudhary v. State of Rajasthan, (2011) 12 SCC 545 and Mustkeem a v. State of Rajasthan, (2011) 11 SCC 724, has held that if the recovery memos have been prepared in the police station itself or signed by the panch witnesses in the police station, the same would lose their sanctity and cannot be relied upon by the Court to support the conviction.” 24. मां या सवेyच्च न्यायालया क न्यायादृष्ट्री Babu Sahebagouda Rudaragoudar (Supra) क[ कण्डि,-क-66 एवे 67 तिम्सर CMf- “66. Further, in Subramanya v. State of Karnataka, (2023) 11 SCC 255, it was held as under: (SCC pp. 299-300, paras 76 to 78) 19 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) "76. Keeping in mind the aforesaid evidence, we proceed to consider whether the prosecution has been able to prove and establish the discoveries in accordance with law. Section 27 of the Evidence Act reads thus: 27. How much of information received from accused may be proved.-Provided that, when any fact is deposed to as discovered in consequence of information received from a person accused of any offence. in the custody of a police officer, so much of such information, whether it amounts to a confession or not, as relates distinctly to the fact thereby discovered, may be proved.' 77. The first and the basic infirmity in the evidence of all the aforesaid prosecution witnesses is that none of them have deposed the exact statement said to have been made by the appellant herein which ultimately led to the discovery of a fact relevant under Section 27 of the Evidence Act. 78. If, it is say of the investigating officer that the appellant-accused while in custody on his own free will and volition made a statement that he would lead to the place where he had hidden the weapon of offence, the site of burial of the dead body, clothes, etc, then the first thing that the investigating officer should have done was to call for two independent witnesses at the police station itself. Once the two independent witnesses would arrive at the police station thereafter in their presence the accused should 20 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) be asked to make an appropriate statement as he may desire in regard to pointing out the place where he is said to have hidden the weapon of offence, etc. When the accused while in custody makes such statement before the two independent witnesses (panch witnesses) the exact statement or rather the exact words uttered by the accused should be incorporated in the first part of the panchnama that the investigating officer may draw in accordance with law. This first part of the panchnama for the purpose of Section 27 of the Evidence Act is always drawn at the police station in the presence of the independent witnesses so as to lend credence that a particular statement was made by the accused expressing his willingness on his own free will and volition to point out the place where the weapon of offence or any other article used in the commission of the offence had been hidden. Once the first part of the panchnama is completed thereafter b the police party along with the accused and the two independent witnesses (panch witnesses) would proceed to the particular place as may be led by the accused. If from that particular place anything like the weapon of offence or bloodstained clothes or any other article is discovered then that part of the entire process would form the second part of the panchnama. This is how the law expects the investigating officer to draw the discovery panchnama as contemplated under Section 27 of the Evidence Act. If we read the entire oral evidence of the investigating officer then it is 21 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) clear that the same is deficient in all the aforesaid relevant aspects of the matter." 67. Similar view was taken by this Court in Ramanand v. State of U.P., (2023) 16 SCC 510, wherein this Court held that mere exhibiting of memorandum prepared by the investigating officer during investigation cannot tantamount to proof of its contents. While testifying on oath, the investigating officer would be required to narrate the sequence of events which transpired leading to the recording of the disclosure statement.” 25. उपुर(क्त न्यायादृष्ट्रीh क आल(क मां] प्रस् प्रकरर्ण मां] सकलिल सक्ष्या पुर तिवेचर कर स याC स्पुष्ट्री C( CM तिक तिवेवेचक प्रमां( -स (अ.स.-14)  अपु न्यायालया  कथा मां] याC स्पुष्ट्री रूपु स उल्लेख C~ तिकया CM तिक तिकस अतिभयाक्त  क्या कथा तिकया था था उ कथाh क आUर पुर तिकस स्था पुर =कर क2-स वेस् क[ =ब् क[ गई । क वेल स्वे=h क( प्रशु अतिक कर  था उमां] तिवेवेचक क Cस्र क( तिचन्Cतिक कर , Uर 27 भर या सक्ष्या अलिUतियामां क अग अतिभयाक्त क प्रकटी करर्ण कथा था उसक आUर पुर क[ गई =ब् क( तिवेलिUवे प्रमांतिर्ण कर क लिलए पुयाप्त C~ मां = सक । तिवेवेचक  तिवेलिU क अरूपु अपु लथा>गर्ण क प्रकटी करर्ण कथा एवे कलिथा =ब् क( स्पुष्ट्री एवे तिवेलिUवे प्रमांतिर्ण C~ तिकया CM था उक्त कथा और =ब् कयावेC तिकस स्वेत्र स द्वार स्पुष्ट्री रूपु स पुष्ट्री भ C~ CM, इसलिलए याC कयावेC तिवेलिUवे प्रमांतिर्ण C~ पुई = । र्फलस्वेरूपु, अपु लथा> तिप्रयाशु सCF उर्फ स्वेया र= सCF था असलमां उर्फ अक शु मां-मां स कलिथा रूपु स चक5 क[ =ब् भ प्रमांतिर्ण C~ C( । अf उक तिवेरुद्ध आयाU अलिUतियामां क अग आर(पु भ प्रमांतिर्ण C~ पुया = । 22 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 26. प्रथा> पु कलिथा घटी क समांया लि=स मां(टीरसइतिकल स = रC था था =( मां(टीरसइतिकल ल5टी लिलए = क कथा तिकया गया CM, उसक सU मां] क(ई स्वे= अतिभलख पुर प्रस् C~ तिकया गया CM । प्रथामां स5च पुत्र प्रशु पु -1 मां] ल5टी गई मां(टीरसइतिकल क( स .- . ति-लक्स, पु= या क्रमांक स .= .-04-एल.एक्स.-9306 या गया CM, तिक  उक्त मां(टीरसइतिकल क क(ई पु= या प्रमांर्णपुत्र न्यायालया क समां प्रमांतिर्ण C~ करया गया CM । अपु लथा>गर्ण क प्रकटी करर्ण कथा क आUर पुर लि=   मां(टीरसइतिकलh क[ =ब् शुई गई CM, उमां] स तिकस क भ पु= या क्रमांक उपुर(क्त कलिथा ल5टी गई मां(टीरसइतिकल क पु= या क्रमांक क समांरूपु स्थातिपु C~ तिकया = सक CM । =ब् क[ गई   मां(टीरसइतिकलh मां] स क वेल एक मां(टीरसइतिकल क पु= या क्रमांक स .= .- 04-क .-ब्ल्या5.-9766 या गया CM, =( तिक =ब् प्रशु पु -14 क असर अतिभयाक्त स2रभ उर्फ स(मां5 ध्रुवे स =ब् क[ गई CM, तिक  याC मां(टीरसइतिकल ल5टी क[ कलिथा तिवे)या- वेस् C~ CM । अन्या ( मां(टीरसइतिकलh क सU मां] =ब् पुत्र मां] क वेल उक इ= क्रमांक था चलिसस क्रमांक क उल्लेख तिकया गया CM । =तिक ल5टी गया मां(टीरसइतिकल क इ= वे चलिसस क्रमांक क्या था, याC अतिभलख मां] C~ CM । =ब् मां(टीरसइतिकलh क[ पुCच भ C~ करया गया CM लि=सस तिक ल5टी क[ मां(टीरसईतिकल क[ तिशुख़् क[ = सक । इस प्रकर याC स्थातिपु C~ तिकया = सक CM तिक =ब् मां] क2 स मां(टीरसईतिकल था , =( घटी मां] ल5टी गई था~ । 27. इस प्रकर, =( मां(ईल र्फ( ल5टी क[ तिवे)या-वेस् या गया CM, वेMस क(ई मां(ईल र्फ( भ तिकस अपु लथा> स =ब् C~ CTआ CM । अपु लथा> तिवेवेक ध्रुवे स क ₹300/- क[ =ब् क प्रश् CM, याC सवेतिवेति थ्या CM तिक इ रतिशु समांन्याf तिकस भ व्यातिक्त क पुस उपुलब्U C( सक CM । =ब् क[ गई रतिशु भ इ अलिUक C~ CM तिक 23 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) उसक आUर पुर याC तिष्क) तिकल = सक तिक वेC अवेश्या C ल5टी क[ C रतिशु था । इसक अतिरिरक्त, तिकस प्रकर क[ तिवेतिशुष्ट्री पुCच अथावे (टीh क क्रमांक भ अतिभलख पुर प्रस् C~ तिकया गया CM, लि=सस याC कC = सक तिक तिवेवेक ध्रुवे स =ब् तिकए गए (टी वेC था, =( ल5टी गया था । अf मांत्र ₹300/- क[ क =ब् क आUर पुर अपु लथा> तिवेवेक ध्रुवे क[ ल5टी क अपुरU मां] सलिलप्त क( स्पुष्ट्री रूपु स स्थातिपु C~ तिकया = सक । 28. तिवेवेचक प्रमां( -स (अ.स.-14) क कथासर अपु लथा> तिवेवेक ध्रुवे स =ब् प्रशु पु -11 क अग प्रथा> रमांस्वेरूपु वेग (अ.स.-1) क आUर क- भ =ब् तिकया = या गया CM । तिक  स्वेया रमांस्वेरूपु वेग   ( प्रथामां स5च पुत्र मां] और  C Uर 180 भर या गरिरक सर सतिC क अग अपु कथा मां] कC~ याC उल्लेख तिकया CM तिक उसक आUर क- ल5टी लिलया गया था अथावे ख( गया था । ऐस ण्डिस्थाति मां] अपु लथा> तिवेवेक ध्रुवे स आUर क- क[ कलिथा =ब् सCस्पु C( CM । 29. उपुर(क्त सक्ष्या तिवेवेच क आUर पुर याC न्यायालया पु CM तिक अपु लथा>गर्ण क अतिभया(= था उक[ ()लिसतिद्ध क प्रमांख आUर तिशुख़् कयावेC एवे प्रकटी करर्ण कथा क आUर पुर ल5टी क[ वेस्ओ क[ =ब् रC CM । थातिपु अतिभलख पुर उपुलब्U सक्ष्या स उक्त तिशुख़् कयावेC , प्रकटी करर्ण कथा था उसक आUर पुर क[ गई =ब् , सC स पुर तिवेलिU सम्मां रूपु स प्रमांतिर्ण C~ CM था समांस् कयावेC सCस्पु CM । इस प्रकर कलिथा घटी मां] अपु लथा>गर्ण क[ सलिलप्त प्रमांतिर्ण C~ CM । ऐस सCस्पु सक्ष्या क आUर पुर क[ गई अपु लथा>गर्ण क[ "प्रश्U  ()लिसतिद्ध एवे ,-शु" क तिर्णया ण्डिस्थार रख = या(ग्या C~ CM । 24 / 24 (Cr. A. No.-411 of 2024, 467 of 2024, 529 of 2024, 930 of 2024, 1795 of 2024 & 1809 of 2024) 30. अf अपु ल स्वे कर क[ = CM । “प्रश्U  ()लिसतिद्ध वे ,-शु” अपुस् तिकया = CM था अपु लथा>गर्ण क( आर(तिपु अपुरU स ()मांक्त तिकया = CM । 31. अपु लथा>गर्ण क( =ल मां] तिरूद्घो या गया CM । याति उक[ अन्या मांमांल मां] आवेश्याक  C( ( उन्C] त्कल रिरC तिकया =ए । 32. तिर्णया क[ प्रति क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क( मां5ल अतिभलख था तिर्णया क[ सत्याप्रतिलिलतिपु सलिU =ल अU क क( आवेश्याक कयावेC C स5चथा एवे पुलथा शु घ्रपु5वेक प्रति) C( । सC /- (स=या क मांर =यासवेल) न्यायाU शु पु(मां