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High Court of Chhattisgarh · body

2024 DAILYLAW 736 (CHH)

NEETU SAHU v. STATE OF CHHATTISGARH

ACQA/74/2024 · 2026-01-20

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2024

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} 2026:CGHC:3511 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिर्णया सरति ति क-07/01/2026 तिर्णया उद्घो*ति+ ति क-21/01/2026 *+मुति- अपु ल क्रमु क -74 /2024   0 सहू2 पुति-स्वेग4या *रर्ण सहू2, उम्र-लगभग 35 वे+, तिवेस -खमुरई, ;मु ग*ई, पुलिलस था-सरकण्डा, लि@ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़. -----अपु लथा4/मुBक कC पुत् तिवेरूद्घो 1. छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार था प्रभर , पुलिलस था-सरकण्डा, लि@ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ (रज्या), 2. स*0 सहू2 तिपु-रमुचरर्ण सहू2, उम्र-लगभग 29 वे+, तिवेस -रमुयार्ण चKक, ठाक र वे मु तिर क पुस, पुलिलस था-सरकण्डा, लि@ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ (अतिभया-). -----उत्तीरवे गर्ण अपु लथा4/मुBक कC पुत् द्वार : श्री क वेर लल सहू2, अलिOवे- । रज्या/उत्तीरवे क्रमु क-1 द्वार : श्री ग*रलल उइक , पु;ल अलिOवे- । अतिभया-/उत्तीरवे क्रमु क-2 द्वार : श्री क ०पु ०एस० ग O , अलिOवे- । मु या न्यायामु0ति श्री स @या क मुर @यासवेल , न्यायाO श POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.01.21 16:38:07 +0530 2 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} !! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. ण्डा प्रतिक्रया स तिहू, 1973 कC Oर-372 क हू *+मुति- क तिवेरूद्घो प्रस् इस अपु ल मुV तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाO श, तिलसपुर, लि@ल-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमु क-270/2021 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो स*0 सहू2” मुV पुरिर तिर्णया ति क-06/01/2024 कC वे;O क* चK गई हू; । लि@सक हू तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अतिभया*@ क मुमुल प्रमुतिर्ण  पु हू[ए अतिभया-/उत्तीरवे क्रमु क-2 क* स हू क लभ  हू[ए Oर-306 भर या ण्डा स तिहू, 1860 क अपुरO स *+मु- तिकया गया हू; । लि@स आग “प्रश्O  तिर्णया” स स *लिO तिकया @ रहू हू; । 2. अतिभया*@ मुमुल स पु मुV इस प्रकर हू; तिक *रर्ण सहू2, तिवेस तिलसपुर, रपुटा चKक स्थिस्था  O कaम्प्लक्स मुV “मुe ग डाक*रश” क मु स टाVटा एवे डाक*रश कC क क स चल कर था । उसकC पुत्  0 सहू2 (अ.स.-7) कC हू तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) अतिवेवेतिहू था । अतिभया- स*0 सहू2, @* पु0वे स तिवेवेतिहू था, वेहू तिरूपु सहू2 स प्रमु कर था था उसस तिवेवेहू कर चहू था, लि@सक लिलए वेहू मुBक *रर्ण सहू2 पुर तिर र वे या कर था । तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) क @हूe-@हूe तिवेवेहू या हू* था, वेहूe अतिभया- स*0 सहू2 @कर क छ  क छ कहूकर उ- तिवेवेहू ड़वे  था, लि@सस तिरूपु सहू2 क हू*ई *रर्ण सहू2 अत्या  पुरश रहू लग था । उ- g क* लकर मुBक *रर्ण सहू2 और अतिभया- स*0 सहू2 क मुध्या तिवेवे भ हू* चक था । ति क 23/06/2021 क* प्रj लगभग 07:00 स 08:00 @ क मुध्या *रर्ण सहू2 अपु घर स क @ क लिलए तिकल । उस ति *पुहूर लगभग 11:23 @ उस अपु मु*इल फो* क व्हूट्सएपु पुर एक स्टाटास अपुल*डा तिकया, लि@समुV याहू उल्लेख तिकया 3 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} गया था तिक अतिभया- द्वार उस मुलिसक रूपु स प्रतिड़ तिकया @ रहू हू;, लि@सक करर्ण वेहू आत्मुहूत्या कर रहू हू; । उ- व्हूट्सएपु स्टाटास क* खकर @ क मुV कया कर वेल कमुचर एवे पुरिर@ ग*मु पुहू[eच, * उन्हूg *रर्ण सहू2 क* रस्स क फो  स लटाक हू[आ पुया । त्पुश्च उस  च उरकर उपुचर हू लिसम्स अस्पुल, तिलसपुर ल @या गया, @हूe उपुस्थिस्था तिचतिकत्सक द्वार उस मुB घ*ति+ कर तिया गया । घटा कC स0च तिमुल पुर पुलिलस द्वार मुग कयामु कर शवे क पुर र्ण करया गया । मुग @eच उपुर  अपुरO पु @ द्ध तिकया गया । घटास्थाल क क्श ;यार तिकया गया, कलिथा व्हूट्सएपु स्टाटास स स  लिO सक्ष्या स कलिल तिकए गए, अतिभया- स मु*इल फो* कC @ब् कC गई था सतियाg क कथा @ तिकए गए । स पु0र्ण तिवेवेच पु0र्ण तिकए @ क पुश्च अतिभया*गपुत्र प्रस् तिकया गया । 3. आर*पु क प्रमुर्ण वेस् अतिभया*@ कC ओर स अपु पु समुथा मुV तिवेचरर्ण न्यायालया क समु 16 सतियाg क पुर र्ण करया गया था 17 स्वे@ प्रश तिचन्हू तिक करए गए । Oर-313 ण्डा प्रतिक्रया स तिहू क हू कथा मुV अतिभया-  अपु तिवेपुर  सतियाg क कथाg क* इकर कर हू[ए स्वेया क* तिt+ हू* था झू0ठा फो स @ या । अतिभया-  चवे मुV क*ई सक्ष्या प्रस् हूv तिकया । त्पुश्च तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार उभयापु क* स @कर प्रश्O  *+मुति- क तिर्णया पुरिर तिकया गया । लि@स इस अपु ल मुV चK गई हू; । 4. अपु लथा4/मुBक कC पुत् कC ओर स याहू क प्रस् तिकया गया हू; तिक तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार प्रकरर्ण मुV उपुलब्O स पु0र्ण सक्ष्या कC उतिच तिवेवेच हूv कC गई, @तिक अतिभया*@ द्वार प्रस् सक्ष्या स याहू थ्या स हू स पुर प्रमुतिर्ण हू[आ हू; तिक अतिभया- स*0 सहू2 कC 4 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} ष्प्ररर्ण क फोलस्वेरूपु हू मुBक *रर्ण सहू2  आत्मुहूत्या कC । थातिपु, तिवेचरर्ण न्यायालया  अतिभलख पुर उपुलब्O सक्ष्या क समुतिच मु0ल्या क तिकए ति प्रश्O  तिर्णया पुरिर कर अतिभया- क* *+मु- कर तिया, @* थ्या एवे तिवेलिO *g कC दृति{ स त्रतिटापु0र्ण था स्थिस्थार रख @ या*ग्या हूv हू; । अj वेमु अपु ल स्वे कर तिकए @, प्रश्O  *+मुति- क तिर्णया क* अपुस् तिकए @ था अतिभया- क* *+लिसद्ध कर स्थिण्डा तिकए @ क तिवे तिकया गया हू; । 5. रज्या/उत्तीरवे क्रमु क-1 क तिवेद्वा अलिOवे-  अपु लथा4/मुBक कC पुत् क कt क समुथा तिकया हू; । 6. अतिभया-/उत्तीरवे क्रमु क-2 क तिवेद्वा अलिOवे- द्वार तिवेचरर्ण न्यायालया क “प्रश्O  तिर्णया” क समुथा कर हू[ए क तिया गया हू; तिक तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार @* *+मुति- क तिष्क+ अ तिक तिकया गया हू;, वेहू पु0र्णj उतिच हू; । अपु लथा4/रज्या पु द्वार अपु ल मुV उठाए गए क स्वे कर या*ग्या हूv हू} । अj अपु ल खरिर@ कC @ए । 7. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलख क स0क्ष्मुपु0वेक पुरिरश ल तिकया गया । 8. प्रकरर्ण मुV मुBक *रर्ण सहू2 क भई ग*वेO सहू2 (अ.स.-1), पुत्  0 सहू2 (अ.स.- 7), सल तिरूपु सहू2 (अ.स.-2), मु अमुB ई (अ.स.-3), तिपु फोग0रमु सहू2 (अ.स.-4), भई कC पुत् स*मु सहू2 (अ.स.-6) था रिरश् मुV सल च पुश क मुर सहू2 (अ.स.-8) क कथा एवे तिचतिकत्सक आर.क . मुरकमु (अ.स.-12) द्वार प्रमुतिर्ण शवे पुर र्ण प्रतिवे, प्रश पु -13, क आOर पुर याहू प्रमुतिर्ण हू* हू; तिक *रर्ण सहू2 5 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} कC मुBत्या गल मुV फोeस क फो  लग स श्वे सगति अवेरुद्ध हू* क करर्ण हू[ई था । इस प्रकर *रर्ण सहू2 कC मुBत्या आत्मुहूत्या कC प्रकB ति कC था । तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार इस स  O मुV तिकल गया तिष्क+ अतिभलख पुर उपुलब्O थ्या एवे सक्ष्या क प्रतिक0 ल अथावे तिवेर*Oभस हूv हू;, अj उ- तिष्क+ उतिच पुया @ हू; । 9. 0सर तिवेचरर्ण या प्रश् याहू हू; तिक क्या मुBक *रर्ण सहू2  अतिभया- स*0 सहू2 कC ष्प्ररर्ण क फोलस्वेरूपु आत्मुहूत्या कC था ? 10. न्यायादृ{  Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुV मु या उच्चमु न्यायालया द्वार *+मुति- क तिवेरूद्घो प्रस् अपु ल क तिरकरर्ण हू क छ न्यातियाक लिसद्घो  प्रतिपुति तिकए गए हू} @* कस्थिण्डाक-42 मुV तिम्सर हू;j- “42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; 6 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.” 11. मु या सवेtच्च न्यायालया द्वार प्रतिपुति उपुर*- तिवेलिO लिसद्ध  क आल*क मुV तिवेचरर्ण या मु0ल प्रश् याहू हू; तिक क्या वेमु प्रकरर्ण मुV अतिभया*@ द्वार ऐस पुयाप्त, ठा*स, सस ग एवे तिवेश्वेस या सक्ष्या प्रस् तिकया गया हू;, लि@सक आOर पुर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार पुरिर *+मुति- क आश मुV हूस्पु कर उस *+लिसतिद्ध मुV पुरिरवेति कर तिवेलिOसम्मु एवे न्याया*तिच ठाहूरया @ सक । 12. In the matter of Naresh Kumar v. State of Haryana reported in (2024) 3 SCC 573, Hon’ble Supreme Court has been principally laid down the factum of abetment of suicide and held that there should be clear and reliable evidence for abetment, which shows that after abetment, there was no other option left for suicide. Hon’ble Supreme Court has held as under: “15. Section 306 of the IPC reads as under :- 7 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} “306. Abetment of suicide. If any person commits ─ suicide, whoever abets the commission of such suicide, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.” 16. Thus, the basic ingredients to constitute an offence under Section 306 of the IPC are suicidal death and abetment thereof. Abetment of a thing is defined under Section 107 IPC as under:- “107. Abetment of a thing.─A person abets the doing of a thing, who─ First. Instigates any person to do that thing; or ─ Secondly. Engages with one or more other person ─ or persons in any conspiracy for the doing of that thing, if an act or illegal omission takes place in pursuance of that conspiracy, and in order to the doing of that thing; or Thirdly. Intentionally aids, by any act or illegal ─ omission, the doing of that thing. Explanation 1. A person who by wilful ─ misrepresentation, or by wilful concealment of a material fact which he is bound to disclose, voluntarily causes or procures, or attempts to cause or procure, a thing to be done, is said to instigate the doing of that thing. Explanation 2. Whoever, either prior to or at the ─ time of the commission of an act, does anything in order to facilitate the commission of that act, and thereby facilitate the commission thereof, is said to aid the doing of that act.” 17. This Court in Geo Varghese v. State of Rajasthan, (2021) 19 SCC 144, has considered the provisions of Section 306 IPC along with the definition of abetment under Section 107 IPC observed as under:- 8 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} “14. Section 306 of IPC makes abetment of suicide a criminal offence and prescribes punishment for the same. … 15. The ordinary dictionary meaning of the word ‘instigate’ is to bring about or initiate, incite someone to do something. This Court in Ramesh Kumar v. State of Chhattisgarh (2001) 9 SCC 618, has defined the word ‘instigate’ as under:- “20. Instigation is to goad, urge forward, provoke, incite or encourage to do “an act”.” 16. The scope and ambit of Section 107 IPC and its co-relation with Section 306 IPC has been discussed repeatedly by this Court. In the case of S.S. Cheena v. Vijay Kumar Mahajan (2010) 12 SCC 190, it was observed as under:- “25. Abetment involves a mental process of instigating a person or intentionally aiding a person in doing of a thing. Without a positive act on the part of the accused to instigate or aid in committing suicide, conviction cannot be sustained. The intention of the legislature and the ratio of the cases decided by the Supreme Court is clear that in order to convict a person under Section 306 IPC there has to be a clear mens rea to commit the offence. It also requires an active act or direct act which led the deceased to commit suicide seeing no option and that act must have been intended to push the deceased into such a position that he committed suicide.” 18. This Court in M. Arjunan v. State, represented by its Inspector of Police, (2019) 3 SCC 315, while explaining the necessary ingredients of Section 306 IPC in detail, observed as under:- 9 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} “7. The essential ingredients of the offence under Section 306 I.P.C. are: (i) the abetment; (ii) the intention of the accused to aid or instigate or abet the deceased to commit suicide. The act of the accused, however, insulting the deceased by using abusive language will not, by itself, constitute the abetment of suicide. There should be evidence capable of suggesting that the accused intended by such act to instigate the deceased to commit suicide. Unless the ingredients of instigation/abetment to commit suicide are satisfied, accused cannot be convicted under Section 306 IPC.” 19. This Court in Ude Singh v. State of Haryana, (2019) 17 SCC 301, held that in order to convict an accused under Section 306 IPC, the state of mind to commit a particular crime must be visible with regard to determining the culpability. 20. This Court in Mariano Anto Bruno v. The Inspector of Police, (2023) 15 SCC 560, after referring to the abovereferred decisions rendered in context of culpability under Section 306 IPC observed as under:- “45. …...It is also to be borne in mind that in cases of alleged abetment of suicide, there must be proof of direct or indirect acts of incitement to the commission of suicide. Merely on the allegation of harassment without their being any positive action proximate to the time of occurrence on the part of the accused which led or compelled the person to commit suicide, conviction in terms of Section 306 IPC is not sustainable.” 21. This Court in Gurcharan Singh v. State of Punjab, (2020) 10 SCC 200, observed that whenever a person instigates or intentionally aids by any act or illegal omission, the doing of a thing, a person can be said to have abetted in doing that thing. To prove the offence of abetment, as specified under Section 107 IPC, the 10 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} state of mind to commit a particular crime must be visible, to determine the culpability. 22. This Court in Kashibai v. The State of Karnataka, (2023) 15 SCC 751, observed that to bring the case within the purview of ‘Abetment’ under Section 107 IPC, there has to be an evidence with regard to the instigation, conspiracy or intentional aid on the part of the accused and for the purpose proving the charge under Section 306 IPC, also there has to be an evidence with regard to the positive act on the part of the accused to instigate or aid to drive a person to commit suicide.” 13. उपुर*- न्यायादृ{ g क प्रकश मुV ष्प्ररर्ण क स  O मुV प्रस् सक्ष्या पुर तिवेचर कर पुर याहू स्पु{ हू* हू; तिक प्रकरर्ण क प्रमुख स मुBक कC सल तिरूपु सहू2 (अ.स.-2), पुत्  0 सहू2 (अ.स.-7), भई ग*वेO सहू2 (अ.स.-1) था रिरश् मुV सल च पुश क मुर सहू2 (अ.स.-8) हू} । लि@ सभ  कहू हू; तिक तिरूपु सहू2 क @हूe-@हूe तिवेवेहू या हू* था वेहूe अतिभया- स*0 सहू2 @कर उ- तिवेवेहू क* ड़वे  था था तिरूपु सहू2 एवे उसक पुरिर@g क* याहू OमुकC  था तिक याति उसक तिवेवेहू कहूv अन्यात्र तिकया गया * वेहू उस @ स मुर ग । याहू भ कलिथा हू; तिक घटा क ठा क पु0वे मुBक *रर्ण सहू2  अपु मु*इल क व्हूट्सएपु मुV याहू उल्लेख तिकया था तिक वेहू अतिभया- द्वार कC @ रहू मुलिसक प्रड़ क फोलस्वेरूपु आत्मुहूत्या कर रहू हू;, लि@ थ्याg क आOर पुर अतिभया- क तिवेरुद्ध अतिभया*@ प्रस् तिकया गया, तिक  अतिभया*@ सक्ष्याg मुV आवेश्याक स्पु{ एवे सस गति क अभवे मुV अतिभया*@ याहू प्रमुतिर्ण कर मुV असफोल रहू हू; तिक अतिभया- कC ष्प्ररर्ण क करर्ण हू मुBक *रर्ण सहू2  आत्मुहूत्या कC था । 14. अतिभया- स*0 सहू2 लि@स तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) स तिवेवेहू कर चहू था, उस स तिरूपु सहू2  अपु न्यायालया  कथा मुV याहू स्पु{ तिकया हू; तिक अतिभया- स उसकC 11 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} @-पुहूच हू* क पुश्च मु*इल क मुध्यामु स च  हू* था , अतिभया- उस पुस  कर था था उसस तिवेवेहू कर क लिलए वे डाल था, लि@सस वेहू पुरश रहू लग था ; तिक  @ उस याहू @कर प्रप्त हू[ई तिक अतिभया- पु0वे स तिवेवेतिहू हू;,  उस अतिभया- स अपु स  O समुप्त कर लिलए । याहू भ कहू हू; तिक अतिभया- द्वार उस पुरश तिकया @ था, उसक तिवेवेहू ड़वेए @ था था उस @ स मुर कC OमुकC @ था , थातिपु इस स  O मुV उसक द्वार कभ भ पुलिलस मुV क*ई तिशकया @ हूv करई गई । उस याहू भ स्वे कर तिकया हू; तिक उसक @ @ *रर्ण सहू2 द्वार भ अतिभया- क तिवेरुद्ध कभ क*ई पुलिलस तिशकया हूv कC गई था । इसक अतिरिर-, उस याहू स्वे कर तिकया हू; तिक ति क 30/06/2021 क*, अथाƒ घटा क लगभग एक सप्तहू पुश्च, उसक तिवेवेहू ग्रामु हूरई मुV हू* या था, तिक  उ- तिवेवेहू क* ड़वे हू अतिभया- द्वार क*ई प्रयास तिकया गया हू*, इस स  O मुV भ क*ई तिशकया पुलिलस मुV हूv कC गई । स  याहू भ स्वे कर तिकया हू; तिक र-र तिवेवेहू टा0टा क करर्ण उस स्वेया कभ आत्मुहूत्या कर क क*ई प्रयास हूv तिकया था । अ  मुV, उस याहू भ स्वे कर तिकया हू; तिक *रर्ण सहू2 क हू*ई अलिOवे- हू; था अतिभया*गपुत्र मुV स लग्न उसक कथा उस पुढ़कर सए और समुझूए गए था । 15. मुBक क भई ग*वेO सहू2 (अ.स.-1)  अपु न्यायालया  कथा मुV याहू स्वे कर तिकया हू; तिक मुBक *रर्ण सहू2 एवे अतिभया- स*0 सहू2 क मुध्या च  था तिवेवे हू[आ था, लि@सक पुश्च अतिभया- क पुरिर@g क* लकर समुझूइश तिए @ पुर तिवेवे श  हू* गया था । स पु0र्ण अतिभया*@ सतियाg क कथाg स याहू भ पुरिरलति हू* हू; तिक अतिभया- एवे तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) क मुध्या प्रमु स  O हू* क करर्ण कई अवेसरg पुर तिवेवे कC 12 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} स्थिस्थाति उत्पुन्न हू[ई था ; थातिपु, इ पुरिरस्थिस्थातियाg क हू* हू[ए भ तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) द्वार कभ आत्मुहूत्या कर क क*ई प्रयास हूv तिकया गया । 16. मुBक *रर्ण सहू2 कC पुत्  0 सहू2 (अ.स.-7)  अपु न्यायालया  कथा मुV याहू स्वे कर तिकया हू; तिक ति क 30/06/2021 क* उसकC हू तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) क तिवेवेहू पुvटा0 सहू2 क सथा हू* या हू[आ था था घटा स एक ति पु0वे ति क 22/06/2021 क* पुvटा0 सहू2 क पुरिर@g द्वार सड़ आति लकर आ पुर एक लघ कयाक्रमु आया*लि@ तिकया गया था, तिक  उ- कयाक्रमु मुV  * वेहू स्वेया और  हू उसक पुति *रर्ण सहू2 (मुBक) सस्थिम्मुलिल हू[ए था । उस चवे पु क इस सझूवे क* भ स्वे कर तिकया हू; तिक उसक पुति *रर्ण सहू2 क* उ- कयाक्रमु मुV आमु तित्र तिकया गया था, थातिपु वेहू उसमुV सस्थिम्मुलिल हूv हू[आ ।  0 सहू2  याहू भ स्वे कर तिकया हू; तिक उसक पुति *रर्ण सहू2 आमु तित्र तिकए @ क वे@0 इसलिलए कयाक्रमु मुV हूv गया था क्याgतिक वेहू उस कयाक्रमु क* सहू कर कC मुलिसक स्थिस्थाति मुV हूv था । इस प्रकर, चवे पु द्वार याहू थ्या लया गया हू; तिक स्वेया *रर्ण सहू2, याहू हूv चहू था तिक उसकC सल तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) क तिवेवेहू कहूv, स पुन्न हू* । ऐस पुरिरस्थिस्थातियाg मुV अतिभया- द्वार कC गई कलिथा प्रड़ क फोलस्वेरूपु *रर्ण सहू2 द्वार आत्मुहूत्या तिकए @ क थ्या स हूस्पु हू* @ हू; । 17. इस ति  पुर एक अन्या प्रमुख स च पुश क मुर सहू2 (अ.स.-8) हू;, @* तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) एवे  0 सहू2 (अ.स.-7) क भई हू; था मुBक रिरश् मुV उसक हू*ई लग था । उ- स  अपु न्यायालया  कथा मुV याहू स्वे कर तिकया हू; तिक घटा स एक ति पु0वे ति क 22/06/2021 क* उसकC हू तिरूपु सहू2 (अ.स.-2) क 13 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} तिवेवेहू क स  O मुV एक छ*टा कयाक्रमु आया*लि@ तिकया गया था, लि@समुV मुBक *रर्ण सहू2 एवे उसकC पुत्  0 सहू2 क* आमु तित्र हूv तिकया गया था । उस याहू भ स्वे कर तिकया हू; तिक उसक हू*ई *रर्ण सहू2 शर क सवे कर था । इस स  चवे पु क इस सझूवे क* भ स्वे कर तिकया हू; तिक उ- लघ कयाक्रमु मुV *रर्ण सहू2 क* इस आश क क करर्ण आमु तित्र हूv तिकया गया था, तिक कहूv वेहू आकर तिरूपु सहू2 क तिवेवेहू  ड़वे  । इस स  याहू भ स्वे कर तिकया हू; तिक *रर्ण सहू2  तिक करर्णg स आत्मुहूत्या कC, इसकC उस क*ई @कर हूv हू; । 18. इस प्रकर, स्वेया तिरूपु सहू2 (अ.स.-2),  0 सहू2 (अ.स.-7) था उक भई च पुश क मुर सहू2 (अ.स.-8) क कथाg स याहू प्रकटा हू* हू; तिक तिरूपु सहू2 क तिवेवेहू स स  लिO आया*लि@ लघ कयाक्रमु मुV *रर्ण सहू2 (मुBक) क* @0झूकर आमु तित्र हूv तिकया गया था, क्याgतिक उन्हूV याहू श क था तिक वेहू तिवेवेहू ड़वे सक हू; । ऐस स्थिस्थाति मुV, लि@स प्रकर क तिवेवेहू ड़वे क आर*पु अतिभया- पुर लगया गया हू;, उस प्रकर क आर*पु स्वेया मुBक पुर उसक पुरिर@g द्वार स क ति तिकया गया हू; । पुरिरर्णमुस्वेरूपु, याहू थ्या तिक घटा ति क 23/06/2021 क* मुBक *रर्ण सहू2  अतिभया- कC OमुकC अथावे प्रड़ क फोलस्वेरूपु आत्मुहूत्या कC हू*, पु0र्णj स हूस्पु हू* गया हू; । 19. न्यायादृ{ g क प्रकश मुV उपुर*- सक्ष्या-तिवेवेच क पुरिरर्णमुस्वेरूपु याहू न्यायालया पु हू; तिक तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अ तिक *+मुति- क तिष्क+ अतिभलख पुर उपुलब्O थ्याg एवे सक्ष्याg क तिवेपुर  अथावे तिवेर*Oभस हूv हू; था प्रश्O  *+मुति- क तिर्णया मुV तिकस प्रकर कC अवे;O या अशद्ध पुरिरलति हूv हू* ; इसलिलए उसमुV हूस्पु तिकए @ कC क*ई आवेश्याक हूv पुई @ । 14 / 14 {Acq. A. No.-74 of 2024} 20. अj *+मुति- क तिवेरूद्घो प्रस् याहू अपु ल स्वे कर या*ग्या  हू* स खरिर@ कC @ हू; । 21. तिर्णया कC प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरर्ण न्यायालया क अतिभलख श घ्रपु0वेक वेपुस प्रति+ हू* । सहू /- (स @या क मुर @यासवेल) न्यायाO श पु*मु