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High Court of Chhattisgarh · body

2023 DAILYLAW 918 (CHH)

SUKHCHAND KASHYAP v. SAMPAT BAGHEL

MAC/309/2023 · 2026-09-14

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2023

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 (MA(C) No. 309 of 2023) CGHC010024602023 2026:CGHC:40242 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -309 /2023 1. सखच!द कश्यापु, तिपु-दर कश्यापु, आया-लगभग 22 वेर्ष0, ति1वेस -मांक1 क्रमां!क 81, क3टवेरपुर, ग्रामां-च3ल1र, पुलिलस च7क8-स्र, था1-क3वेल , लि;ल-स्र, छ.ग.। (द3र्ष वेह1 मां3टरसइतिकल क्रमां!क-स .; .-04-क .पु .-2757 क पु!; कB स्वेमां ) -----अपु लथाC तिवेरूद्घ 1. स!पु घेल, तिपु-र!; घेल, आया-लगभग 49 वेर्ष0, 2. श्री मां दयामां घेल, पुति-स!पु घेल, आया-लगभग 47 वेर्ष0, द31H ति1वेस - खसपुर, ग्रामां-भHड, था1-क3वेल , ;गदलपुर, लि;ल-स्र, छत्ती सगढ़ । -----दवेक0गण 3. तिद इफ्क3 ट3तिकया3 ;1रल इ!श्या3रLस क! पु1 लिलतिमांटड, शाख कया0लया—दक1 क्रमां!क 208, लिसल्वेर भवे1, उद्य3ग भवे1 क समां1, रिंर!ग र3ड क्रमां!क 01, मांहवे र 1गर, रयापुर, लि;ल रयापुर, छत्ती सगढ़ । (द3र्ष वेह1 मां3टरसइतिकल क्रमां!क-स .; .-04-क .पु .-2757 क मां क! पु1 ) -----प्रत्याथाCगण अपु लथाC द्वार : श्री प्रवे ण क मांर ल्सया1, अलिधवेक्ता । दवेक0गण/प्रत्याथाC क्रमां!क-1 वे 2 द्वार : श्री पु .आर. पुट!कर, अलिधवेक्ता क8 ओर स श्री स्वेप्निW1ल थावे1, अलिधवेक्ता । मां क! पु1 /प्रत्याथाC क्रमां!क-3 द्वार : श्री मां1 र्ष ति1गमां, अलिधवेक्ता क8 ओर स श्री स!दर लल सहX, अलिधवेक्ता । POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.09.16 10:24:15 +0530 2 / 6 (MA(C) No. 309 of 2023) न्यायामांYति0 श्री स!;या क मांर ;यासवेल !! ति1ण0या पु ठ पुर पुरिंर !! 15/09/2026 1. मां3टर या1 अलिधति1यामां, 1988 क8 धर 173 क अ!ग0 प्रस् इस अपु ल मांL प्रथामां अतिरिंरक्ता मां3टर दघे0ट1 दवे अलिधकरण, ;गदलपुर, लि;ल-स्र (छत्ती सगढ़) द्वार दवे प्रकरण क्रमां!क 44/2019, “स!पु घेल वेग^रह तिवेरुद्ध सखच!द कश्यापु वेग^रह” मांL पुरिंर अलिधति1ण0या तिद1!क 15/07/2022 क3 च17 द गई ह^ । उक्ता अलिधति1ण0या द्वार स!पु घेल एवे! श्री मां दयामांति घेल द्वार धर 166, मां3टर या1 अलिधति1यामां क अ!ग0 प्रस् दवे आवेद1 क3 स्वे कर कर हdए उ1क पुक्ष मांL ₹12,55,000/- क8 प्रतिकर रतिशा 9% वेतिर्ष0क ब्या; सतिह अपु लथाC सखच!द कश्यापु, ;3 द3र्ष वेह1 क चलक एवे! स्वेमां ह^, क तिवेरुद्ध अलिधति1णC क8 गई ह^ । सथा ह , प्रत्याथाC क्रमां!क 3/ मां क! पु1 , तिद इफ्क3 ट3तिकया3 ;1रल इ!श्या3रLस क! पु1 लिलतिमांटड क3 पुiलिलस क8 शाj! क उल्लं!घे1 पुए ;1 क करण दतियात्वे स मांक्ता तिकया गया ह^ । उक्ता अलिधति1ण0या क3 आग स!क्षपु मांL “प्रश्1ध 1 अलिधति1ण0या” स स!3लिध तिकया ; रह ह^ । 2. प्रकरण क थ्या स!क्षपु मांL इस प्रकर हm तिक हलधर घेल (मांBक) मांn द!श्वेर दवे क दशा01 ह तिद1!क 10-11/10/2018 क8 दरम्या1 र अपु1 तिमांत्रोंH क सथा पु^दल ; रह था । इस द7र1 अपु लथाC सखच!द कश्यापु मां3टरसइतिकल क्रमां!क स .; .-04-क .पु .-2757 (लि;स आग स!क्षपु मांL “द3र्ष वेह1” क रूपु मांL स!3लिध तिकया ; रह ह^) क3 ; एवे! लपुरवेह पुYवे0क चल हdए आया लि;सक8 ठ3कर लग1 स हलधर क3 ग!भ र च3टL आई! । उपुचर ह अस्पुल ल ; समांया उसक8 मांBत्या ह3 गई । मांBक क8 आया 19 वेर्ष0 था । 3 / 6 (MA(C) No. 309 of 2023) घेट1 क स!!ध मांL पुलिलस द्वार अपुरध पु!; द्ध कर तिवेवेच1 उपुर! अतिभया3गपुत्रों प्रस् तिकया गया । 3. मांBक हलधर घेल क मां-तिपु द्वार मां3टर या1 अलिधति1यामां, 1988 क8 धर 166 क अ!ग0 प्रतिकर ह दवे आवेद1 प्रस् तिकए ;1 पुर, अलिधकरण द्वार याह ति1ष्कतिर्ष0 तिकया गया तिक "द3र्ष वेह1" चल रह अपु लथाC सखच!द कश्यापु क पुस वे^ध चलक अ1ज्ञापुत्रों 1हt था । अu अलिधकरण 1 मां पुiलिलस क8 शाj! क उल्लं!घे1 पुए ;1 क करण प्रत्याथाC क्रमां!क 3/ मां क! पु1 क3 दतियात्वे स मांक्ता कर हdए "द3र्ष वेह1" क चलक एवे! पु!; कB स्वेमां सखच!द कश्यापु क3 प्रतिकर रतिशा क भग1 ह उत्तीरदया ठहरया । उक्ता ति1ष्कर्ष0 एवे! अलिधति1ण0या क3 अपु लथाC सखच!द कश्यापु द्वार वे0मां1 अपु ल मांL च17 द गई ह^ । 4. अपु लथाC क तिवेद्वा1 अलिधवेक्ता क क0 ह^ तिक चलक सखच!द कश्यापु क चलक अ1ज्ञापुत्रों क8 छयाप्रति अतिभलख पुर प्रस् क8 गई था । मां क! पु1 अपु1 दतियात्वे क ति1वे0ह1 मांL याह प्रमांतिण कर1 मांL असफल रह ह^ तिक उक्ता चलक अ1ज्ञापुत्रों फ;C था अथावे मां पुiलिलस क8 तिकस शा0 क उल्लं!घे1 तिकया गया था । ऐस प्निस्थाति मांL अलिधकरण द्वार मां क! पु1 क3 दतियात्वे स मांक्ता तिकया ;1 उतिच 1हt ह^ । चY!तिक "द3र्ष वेह1" घेट1 क समांया तिमां था और मां पुiलिलस क8 शाj! क उल्लं!घे1 क क3ई प्रमांण प्रस् 1हt तिकया गया ह^ । अu "प्रश्1ध 1 अलिधति1ण0या" क3 उक्ता स मां क अपुस् कर हdए मां क! पु1 क3 प्रतिकर रतिशा क भग1 ह उत्तीरदया ठहरया ;ए । 5. दवेक0गण/प्रत्याथाC क्रमां!क 1 एवे! 2 क तिवेद्वा1 अलिधवेक्ता क क0 ह^ तिक "द3र्ष वेह1" घेट1 क समांया तिमां था । अu अलिधकरण द्वार अलिधति1तिण0 प्रतिकर रतिशा क भग1 मां क! पु1 स करया ;या । 4 / 6 (MA(C) No. 309 of 2023) 6. मां क! पु1 /प्रत्याथाC क्रमां!क 3 क तिवेद्वा1 अलिधवेक्ता क क0 ह^ तिक अलिधकरण द्वार मां पुiलिलस क8 शाj! क उल्लं!घे1 प्रमांतिण पुए ;1 क आधर पुर मां क! पु1 क3 दतियात्वे स मांक्ता तिकया गया ह^ था अपु लथाC, ;3 "द3र्ष वेह1" क चलक एवे! पु!; कB स्वेमां ह^, क3 प्रतिकर रतिशा क भग1 ह उत्तीरदया ठहरया गया ह^ । वेह पुYण0u उतिच ह^ । अलिधकरण क उक्ता ति1ष्कर्ष0 क तिवेरुद्ध दवेक0गण क8 ओर स 1 3 क3ई प्रति-आक्षपु प्रस् तिकया गया ह^ और 1 ह क3ई अपु ल दयार क8 गई ह^ । ऐस प्निस्थाति मांL, दवेक0गण द्वार वे0मां1 अपु ल मांL मां क! पु1 क3 प्रतिकर रतिशा क भग1 ह उत्तीरदया ठहरए ;1 स!!ध ति1वेद1 स्वे कर तिकए ;1 या3ग्या 1हt ह^ । 7. उभयापुक्ष क क0 श्रीवेण तिकया गया था अतिभलख क सYक्ष्मांपुYवे0क पुरिंरशा ल1 तिकया गया । 8. अतिभलख क पुरिंरशा ल1 था उभयापुक्ष क सक्ष्या क समांग्रा मांYल्या!क1 स याह स्पुष्ट ह^ तिक अपु लथाC सखच!द कश्यापु ह "द3र्ष वेह1" क चलक एवे! पु!; कB स्वेमां ह^ । अपु लथाC क8 ओर स अतिभलख पुर चलक अ1ज्ञापुत्रों क8 क वेल छयाप्रति प्रस् क8 गई ह^, ;तिक उक्ता अ1ज्ञापुत्रों क मांYल अतिभलख प्रस् 1हt तिकया गया था उसक प्रस् 1 तिकए ;1 क क3ई स!3र्ष;1क करण भ 1हt या गया ह^ । याह भ उल्लंख1 या ह^ तिक अलिधकरण क समांक्ष अपु लथाC क8 ओर स प्रस् ;वेदवे मांL उसक पुस वे^ध चलक अ1ज्ञापुत्रों ह31 क क3ई स्पुष्ट अतिभवेच1 1हt तिकया गया ह^ और 1 ह कलिथा चलक अ1ज्ञापुत्रों क क्रमां!क उल्लंलिख तिकया गया ह^ । इ1 ह 1हt, अपु लथाC स्वेया! अलिधकरण क समांक्ष सक्ष क रूपु मांL उपुप्निस्था ह3कर अपु1 चलक अ1ज्ञापुत्रों क स!!ध मांL क3ई सक्ष्या प्रस् 1हt तिकया ह^ । 5 / 6 (MA(C) No. 309 of 2023) 9. दYसर ओर, मां क! पु1 क8 ओर स अपु लथाC द्वार प्रस् चलक अ1ज्ञापुत्रों क8 छयाप्रति क आधर पुर लि;ल पुरिंरवेह1 कया0लया, द!वेड़ा स स!!लिध चलक अ1ज्ञापुत्रों पु!; आहX करया गया था । उक्ता अतिभलख क3 लि;ल पुरिंरवेह1 कया0लया, द!वेड़ा क सहयाक श्रीण - III तिद1शा क मांर 1ग (अ1वेदक सक्ष क्रमां!क-1) था डट ए!ट} ऑपुरटर अरुण क मांर सलमां (अ1वेदक सक्ष क्रमां!क-2) द्वार अलिधकरण क समांक्ष प्रस् तिकया गया । उ1क सक्ष्या स याह थ्या स्थातिपु हdआ तिक अपु लथाC द्वार प्रस् कलिथा चलक अ1ज्ञापुत्रों, लि;ल पुरिंरवेह1 कया0लया, द!वेड़ा स ;र 1हt हdई था । इस प्रकर, अलिधकरण क समांक्ष उपुलब्ध सक्ष्या स याह ति1ष्कर्ष0 स्थातिपु ह3 ह^ तिक दघे0ट1 क समांया अपु लथाC क पुस वे^ध चलक अ1ज्ञापुत्रों 1हt था, इस करण मां पुiलिलस क8 शाj! क उल्लं!घे1 हdआ था । ऐस प्निस्थाति मांL, मां क! पु1 क3 दतियात्वे स मांक्ता कर हdए "द3र्ष वेह1" क चलक एवे! पु!; कB स्वेमां अपु लथाC सखच!द कश्यापु क3 प्रतिकर रतिशा क भग1 ह उत्तीरदया ठहर1 स!!ध अलिधकरण क ति1ष्कर्ष0 अतिभलख पुर उपुलब्ध सक्ष्या क अ1रूपु ह^ । उक्ता ति1ष्कर्ष0 मांL क3ई त्रोंतिट पुरिंरलतिक्ष 1हt ह3 ह^ । 10. ;हn क, दवेक0गण क तिवेद्वा1 अलिधवेक्ता द्वार मां क! पु1 स अलिधति1तिण0 प्रतिकर रतिशा क भग1 "अदयाग एवे! वेसYल " क लिसद्घ! अ1सर करए ;1 स!!ध ति1वेद1 क प्रश्1 ह^? याह उल्लंख1 या ह^ तिक दघे0ट1 क8 तिलिथा क3 "द3र्ष वेह1" तिमां था । ऐस प्निस्थाति मांL, मां11 या सवेjच्च न्यायालया द्वार न्यायादृष्ट! Amrit Paul Singh and Another v. Tata AIG General Insurance Company Limited and Others, (2018) 7 SCC 558 मांL प्रतिपुतिद तिवेलिध-लिसद्ध! था वे0मां1 प्रकरण क थ्या एवे! पुरिंरप्निस्थातियाH क सम्याक• पुरिंरशा ल1 क उपुर!, उक्ता ति1ण0या मांL प्रतिपुतिद “अदयाग एवे! वेसYल ” क लिसद्ध! क3 वे0मां1 प्रकरण मांL लगY तिकया ;1 न्याया3तिच प्र ह3 ह^ । फलu, मां क! पु1 6 / 6 (MA(C) No. 309 of 2023) क3 ति1द‚तिशा तिकया ; ह^ तिक वेह अलिधकरण द्वार अलिधति1णC प्रतिकर रतिशा क प्रथामांu भग1 दवेक0गण क3 कर, त्पुश्च भग1 क8 गई उक्ता रतिशा क8 वेसYल ह स!!लिध दवे अलिधकरण क समांक्ष पुBथाक ति1ष्पुद1 कया0वेह स!प्निस्था कर, "द3र्ष वेह1" क स्वेमां एवे! चलक स तिवेलिध अ1सर वेसYल कर1 क लिलए स्वे!त्रों ह3ग । 11. उपुर3क्ता ति1द‚शा क सथा इस अपु ल क ति1रकरण तिकया ; ह^ । 12. ति1ण0या क8 प्रति क सथा अलिधकरण क अतिभलख शा घ्रपुYवे0क आवेश्याक कया0वेह ह सYच1था0 वे पुल1था0 वेपुस प्रतिर्ष ह3 । सह /- (स!;या क मांर ;यासवेल) न्यायाध शा पोमन