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High Court of Chhattisgarh · body

2023 DAILYLAW 905 (CHH)

SHRIRAM GENERAL INSURANCE COMPANY LIMITED v. SMT. KAUSHALYA NAYAK

MAC/1456/2023 · 2026-07-13

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2023

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023} CGHC010275112023 2026:CGHC:29781 प्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -1456 /2023 1. श्री रमां जनरल इं!श्या0र1स क! पुन लिलतिमांटेड, द्वार तिवेलिध प्र!धक, चर्थ7 ल, मांरुति हाइंट्स, स्कई ऑटे0 मांरुति ड लर क गल मां1, मांहा0 जर, रयापुर, लिजल–रयापुर, तिपुन–492010, छत्ती सगढ़ । (दो0षी वेहान स्कCतिपु7या0 क्रमां!क-स .ज .-18-ड .-0926 क  मां क! पुन ) -----अपु लर्थF तिवेरूद्घ 1. श्री मां कIशल्या नयाक पुति-स्वेगFया रमांश क मांर नयाक, आया-लगभग 32 वेषी7, 2. क ० मांन्ना नयाक तिपु-स्वेगFया रमांश क मांर नयाक, आया-लगभग 05 वेषी7, 3. क ० कP तिक नयाक तिपु-स्वेगFया रमांश क मांर नयाक, आया-लगभग 08 मांहा, 4. श्री मां तिनमां7ल दोवे पुति-रजश क मांर नयाक, आया-लगभग 50 वेषी7, 5. रजश क मांर नयाक तिपु-नमांकQ नयाक, आया-लगभग 56 वेषी7, प्रत्यार्थF क्रमां!क-2 एवे! 3 द्वार-अपुन मां एवे! प्रकP तिक स!रतिTक श्री मां कIशल्या नयाक सभ तिनवेस -ग्रामां सभषी नगर, वेड7 क्रमां!क-1, दो0रनपुल, पुलिलस र्थन-दो0रनपुल, हास ल-कVटे, लिजल-सकमां, छत्ती सगढ़ । (-----दोवेक7गण) 6. अश0क क मांर ग!दोमां तिपु-तिचन्ना ग!दोमां , आया-लगभग 33 वेषी7, तिनवेस -क म्हाररस, सकमां, पुलिलस र्थन-सकमां, लिजल-सकमां (छत्ती सगढ़), (दो0षी वेहान स्कCतिपु7या0 क्रमां!क-स .ज .-18-ड .-0926 क वेहान चलक) 7. श्री मां क0श ग!दोमां तिपु-अश0क ग!दोमां , आया-लगभग 30 वेषी7, तिनवेस -क म्हाररस, सकमां, पुलिलस र्थन-क रलपुल, लिजल-सकमां (छत्ती सगढ़) (दो0षी वेहान स्कCतिपु7या0 क्रमां!क-स .ज .-18-ड .-0926 क पु!ज कP  स्वेमां ) -----प्रत्यार्थFगण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.15 14:31:04 +0530 2 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023} अपु लर्थF  मां क! पुन द्वार : श्री सIरभ शमां7, अलिधवेक्ता क[ ओर स सश्री हारन  कIर खनQज, अलिधवेक्ता । दोवेक7/प्रत्यार्थF क्रमां!क-1 स 5 द्वार : क0ई उपुस्थिस्र्थ नहा_ । प्रत्यार्थF क्रमां!क-6 एवे! 7 द्वार : क0ई उपुस्थिस्र्थ नहा_ । न्यायामांQति7 श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनण7या पु ठ पुर पुरिर !! 14/07/2026 1. मां0टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क[ धर 173 क अ!ग7 प्रस् इंस अपु ल मां1 मां0टेर दोर्घ7टेन दोवे अलिधकरण, दोतिTण स्र दो!वेड़ा, छत्ती सगढ़ द्वार दोवे प्रकरण क्रमां!क- 116/2021, “श्री मां कIशल्या नयाक वेगgरहा तिवेरुद्ध अश0क क मांर ग!दोमां वेगgरहा” मां1 पुरिर अलिधतिनण7या तिदोन!क 13/04/2023 क0 चनI दो गई हाg, लिजसक द्वार दोवेक7/ प्रत्यार्थF क्रमां!क-1 स 5 क पुT मां1 र्थ अपु लर्थF  मां क! पुन क तिवेरुद्ध ₹46,04,456/-(तिछयालिलस लख चर हाजर चर सI छप्पुन रुपुया मांत्र) क[ प्रतिकर रतिश, मांया ब्याज क अवेड7 पुरिर तिकया गया हाg । लिजस आग स!Tपु मां1 “प्रश्नध न अलिधतिनण7या” स स!0लिध तिकया ज रहा हाg । 2. प्रकरण क थ्या, स!Tपु मां1, इंस आशया क हाo तिक दोर्घ7टेन तिदोन!क 24/12/2020 क0 रमांश क मांर नयाक (मांPक) शसक[या कया7 स मां0टेरसइंतिकल द्वार सकमां आया हाpआ र्थ । उस तिदोन सया!कल लगभग 04:00 ज ज वेहा वेपुस अपुन गPहा ग्रामां दो0रनपुल ज रहा र्थ,  रष्ट्रीr या रजमांग7 क्रमां!क-30 पुर ग्रामां तिचकपुल क आग 0दोगड़ा नल मां0ड़ा क पुस स्कCतिपु7या0 वेहान क्रमां!क-स .ज .-18-ड .-0926 (लिजस आग स!Tपु मां1 “दो0षी वेहान” स स!0लिध तिकया ज रहा हाg) क चलक अश0क क मांर ग!दोमां द्वार उक्ता वेहान क0 3 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023}  व्र एवे! लपुरवेहा पुQवे7क चलया, लिजसक[ टेक्कर लगन क फलस्वेरूपु रमांश क मांर नयाक ग!भ र रूपु स र्घयाल हा0 गया र्थ उसक[ मांPत्या हा0 गई । उक्ता र्घटेन क स!!ध मां1 र्थन- क रलपुल मां1 अपुरध क्रमां!क-13/2020, तिदोन!क 24/12/2020 क0 पु!ज द्ध तिकया गया र्थ तिवेवेचन पुQण7 कर दो0षी वेहान क चलक क तिवेरुद्ध अतिभया0ग-पुत्र प्रस् तिकया गया । 3. दोवेक7गण/प्रत्यार्थF क्रमां!क-1 स 5 द्वार मां0टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क[ धर 166 क अ!ग7 प्रस् दोवे आवेदोन पुर उभयापुT क0 सनन क उपुर! अलिधकरण द्वार "प्रश्नध न अलिधतिनण7या" पुरिर तिकया गया । लिजसमां1 याहा अतिभलिललिख तिकया तिक "दो0षी वेहान" क चलक अश0क क मांर ग!दोमां र्थ उसक[ पु!ज कP  स्वेतिमांन श्री मां क0श ग!दोमां हाg । अलिधकरण न याहा भ अतिभलिललिख तिकया तिक दोर्घ7टेन क[ तिलिर्थ क0 "दो0षी वेहान" अपु लर्थF  मां क! पुन स  तिमां र्थ । फलस्वेरूपु, अलिधकरण न अलिधतिनण7या पुरिर कर हाpए प्रतिकर रतिश क भगन करन क दोतियात्वे अपु लर्थF  मां क! पुन पुर अलिधर0तिपु तिकया । लिजस इंस अपु ल मां1 चनI दो गई हाg । 4. अपु लर्थF  मां क! पुन क तिवेद्वान अलिधवेक्ता क क7 हाg तिक दोर्घ7टेन तिदोन!क 24/12/ 2020 क[ हाg । मांग7 एवे! प्रर्थमां सQचन पुत्र मां1 दोर्घ7टेन करिर वेहान क क0ई क्रमां!क अर्थवे तिवेवेरण अ!तिक नहा_ हाg । "दो0षी वेहान" क0 र्घटेन क लगभग  न मांहा पुश्चw तिदोन!क 02/04/2021 क0 जप्त कर उस झूQठ रूपु स आलिलप्त कर तिदोया गया हाg । वेस्z "दो0षी वेहान" स दोर्घ7टेन र्घतिटे नहा_ हाpई र्थ । ऐस स्थिस्र्थति मां1 अपु लर्थF  मां क! पुन पुर प्रतिकर रतिश क भगन क दोतियात्वे अलिधर0तिपु तिकया जन तिवेलिधसम्मां नहा_ हाg । अz अपु ल स्वे कर कर अपु लर्थF  मां क! पुन क तिवेरुद्ध पुरिर "प्रश्नध न अलिधतिनण7या" क0 अपुस् तिकया जए । 4 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023} 5. दोवेक7गण क[ ओर स क0ई उपुस्थिस्र्थ नहा_ । 6. उपुस्थिस्र्थ पुT क क7 श्रीवेण तिकया गया र्थ अतिभलख क सQक्ष्मांपुQवे7क पुरिरश लन तिकया गया । 7. अतिभलख क पुरिरश लन स याहा स्थिस्र्थति स्पुष्ट्री हा0 हाg तिक तिदोन!क 24/12/2020 क[ दोर्घ7टेन मां1 रमांश क मांर नयाक क[ मांPत्या हाpई हाg । मांग7 सQचन (प्रदोश7 ए-2) क अनसर दोर्घ7टेन तिकस चरपुतिहाया वेहान स हा0न अ!तिक हाg । इंस प्रकर, उस तिदोन दोज7 प्रर्थमां सQचन पुत्र (प्रदोश7 ए-3) अज्ञा वेहान क तिवेरुद्ध पु!ज द्ध तिकया गया र्थ । तिवेवेचन क दोIरन पुलिलस द्वार तिदोन!क 02/04/2021 क0 प्रदोश7 ए-7 क अनसर चलक अश0क क मांर ग!दोमां स "दो0षी वेहान" मांया दोस्वेज जप्त तिकया गया र्थ तिवेवेचन मां1 "दो0षी वेहान" क[ दोर्घ7टेन मां1 स!लिलप्त पुए जन पुर उसक चलक अश0क क मांर ग!दोमां क तिवेरुद्ध धर 304-ए भर या दोण्ड स!तिहा क अ!ग7 अ!तिमां प्रतिवेदोन प्रस् तिकया गया । इंसक अतिरिरक्ता, "दो0षी वेहान" क चलक एवे! पु!ज कP  स्वेमां द्वार प्रस् जवेदोवे मां1 भ इंस थ्या क क0ई तिवेतिशष्ट्री खण्डन नहा_ तिकया गया हाg तिक दोर्घ7टेन "दो0षी वेहान" स हाpई र्थ । र्घटेन क प्रत्याTदोशF सT मांड़ावे धरवे न अपुन कर्थन मां1 दोर्घ7टेन सफ दो र!ग क[ स्कCतिपु7या0 वेहान स हा0न या हाg । उक्ता सT पुलिलस द्वार प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदोन मां1 भ सQच द्ध सT हाg र्थ उसक कर्थन क क0ई खण्डन नहा_ हाpआ हाg । 8. अपु लर्थF  मां क! पुन क[ ओर स अन्वेषीक अमांरन्द्र क मांर दो तिT क पुर Tण करया गया हाg । उक्ता सT न दोर्घ7टेन स्वेया! नहा_ दोख इंस न क0ई थ्यात्मांक जनकर नहा_ दो हाg । उसन क वेल याहा कर्थन तिकया हाg तिक उसक द्वार तिकए गए अन्वेषीण क दोIरन याहा थ्या स!ज्ञान मां1 आया तिक पुलिलस मां1 दोज7 प्रर्थमां सQचन पुत्र मां1 अज्ञा वेहान द्वार टेक्कर करिर 5 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023} तिकया जन उल्लेलिख र्थ, तिक!  लगभग  न मांहा पुश्चw पुलिलस द्वार "दो0षी वेहान" क0 जप्त कर उस गल रूपु स उक्ता दोर्घ7टेन मां1 स!लिलप्त दोश7या गया हाg । 9. पुलिलस द्वार तिवेवेचन पुश्च प्रस् अतिभया0ग-पुत्र क सस्थिक्ष्याक मांQल्या क ति!दो पुर मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार ICICI Lombard General Insurance Company Limited v. Rajani Sahu and Others, (2025) 2 SCC 599 क तिनण7या क[ कस्थिण्डक-8 स 10 मां1 तिनम्ननसर तिवेलिध प्रतिपुतिदो क[ गई हाgz- “8 As regards the reliability of charge-sheet and other documents collected by the police during the investigation in motor accident cases, this Court in Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd. [Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 : (2018) 3 SCC (Civ) 335 : (2018) 2 SCC (Cri) 819 : 2018 INSC 311] , held in para 27, thus : (SCC p. 672) “27. Another reason which weighed with the High Court to interfere in the first appeal filed by Respondents 2 and 3, was absence of finding by the Tribunal about the factum of negligence of the driver of the subject jeep. Factually, this view is untenable. Our understanding of the analysis done by the Tribunal is to hold that Jeep No. RST 4701 was driven rashly and negligently by Respondent 2 when it collided with the motorcycle of the appellant leading to the accident. This can be discerned from the evidence of witnesses and the contents of the charge-sheet filed by the police, naming Respondent 2. This Court in a recent decision in Dulcina Fernandes [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] , noted that the key of negligence on the part of the driver of the offending vehicle as set up by the claimants was required to be decided by the Tribunal on the touchstone of preponderance of probability and certainly not by standard of proof beyond reasonable doubt. Suffice it to observe that the exposition in the judgments already adverted to by us, filing of charge-sheet against Respondent 2 prima facie 6 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023} points towards his complicity in driving the vehicle negligently and rashly. Further, even when the accused were to be acquitted in the criminal case, this Court opined that the same may be of no effect on the assessment of the liability required in respect of motor accident cases by the tribunal.” 9. It is true that the Tribunal had looked into the oral and documentary evidence including the FIR, final report and such other documents prepared by the police in connection with the accident in question. The Tribunal had also taken note of the fact that based on the final report, the driver of the offending truck was tried and found guilty for rash and negligent driving. The High Court took note of such aspects and found no illegality in the procedure adopted by the Tribunal and consequently dismissed the appeal. 10. In the contextual situation it is relevant to refer to a decision of this Court in Mathew Alexander v. Mohd. Shafi [Mathew Alexander v. Mohd. Shafi, (2023) 13 SCC 510 : 2023 INSC 621] , this Court held thus : (SCC p. 514, para 12) “12. …A holistic view of the evidence has to be taken into consideration by the Tribunal and strict proof of an accident caused by a particular vehicle in a particular manner need not be established by the claimants. The claimants have to establish their case on the touchstone of preponderance of probabilities. The standard of proof beyond reasonable doubt cannot be applied while considering the petition seeking compensation on account of death or injury in a road traffic accident. To the same effect is the observation made by this Court in Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] which has referred to the aforesaid judgment in Bimla Devi [Bimla Devi v. Himachal RTC, (2009) 13 SCC 530 : (2009) 5 SCC (Civ) 189 : (2010) 1 SCC (Cri) 1101] .” 10. उपुया7क्ता न्यायादृष्ट्री! मां1 प्रतिपुतिदो तिवेलिधक लिसद्ध! क प्रकश मां1 याहा न्यायालया पु हाg तिक दोवेक7गण/प्रत्यार्थF क्रमां!क-1 स 5 क[ ओर स पुर तिT प्रत्याTदोशF सT मांड़ावे धरवे 7 / 7 {MA(C) No. 1456 of 2023} र्थ पुलिलस अतिभया0ग-पुत्र क दोस्वेज सक्ष्या क क0ई खण्डन नहा_ तिकया ज सक हाg । पुलिलस तिवेवेचन मां1 "दो0षी वेहान" क0 दोर्घ7टेन मां1 स!लिलप्त पुए जन पुर उसक चलक क तिवेरुद्ध अ!तिमां प्रतिवेदोन प्रस् तिकया गया हाg । अपु लर्थF  मां क! पुन क[ ओर स प्रस् अन्वेषीक भ ऐस क0ई स्वे!त्र एवे! प्रत्याT सक्ष्या प्रस् नहा_ कर सक हाg, लिजसस पुलिलस तिवेवेचन अर्थवे दोवेक7 पुT क[ सक्ष्या क खण्डन हा0 सक । 11. इंन समांस् थ्याV क0 दृतिष्ट्रीग रख हाpए र्थ न्यायादृष्ट्री! Rajani Sahu (पुQवे‚क्ता) मां1 प्रतिपुतिदो तिवेलिधक लिसद्ध! क प्रकश मां1 अपु लर्थF  मां क! पुन क क7 स्वे कर तिकए जन या0ग्या नहा_ हाg । अलिधकरण द्वार पुरिर "प्रश्नध न अलिधतिनण7या" अतिभलख पुर उपुलब्ध सक्ष्या क प्रतिकQ ल न हा0न स उसमां1 तिकस प्रकर क हास्Tपु क[ आवेश्याक नहा_ पुई ज । फलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर तिकए जन या0ग्या नहा_ हा0न स खरिरज क[ ज हाg । 12. तिनण7या क[ प्रति क सर्थ अलिधकरण क अतिभलख श घ्रपुQवे7क आवेश्याक कया7वेहा हा सQचनर्थ7 वे पुलनर्थ7 वेपुस प्रतिषी हा0 । सहा /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध श पो मन