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High Court of Chhattisgarh · body

2022 DAILYLAW 738 (CHH)

THE ORIENTAL INSURANCE COMPANY LIMITED v. SMT. MAHESHMATI MOUWAR

MAC/645/2022 · 2026-07-27

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2022

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} CGHC010170602022 2026:CGHC:32429 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -645 /2022  ओरिरएण्टल इं!श्या0र1स क! पुनी लिलतिमांटड, द्वार स!भाग या प्र!धक, स!भाग या कया7लया, रमां ट8ड स1टर, प्रथमां ल, रजी वे प्लज़ा क समांनी, पुरनी स स्ट>ण्ड क तिनीकट, तिलसपुर, हस ल एवे! लिजील तिलसपुर (छत्ती सगढ़), प्रतितिनीलिधत्वे द्वार प्रभार , ट .पु . ह, ट .पु . ह कया7लया, रमां ट8ड स1टर, प्रथमां ल, रजी वे प्लज़ा क समांनी, पुरनी स स्ट>ण्ड क तिनीकट, तिलसपुर (छत्ती सगढ़) – 495001 (दो0षी वेहनी स्कGतिपु7या0 क्रमां!क-स .जी .-10-एफ.-3178 क  मां क! पुनी ) -----अपु लथL तिवेरूद्घ 1. श्री मां मांहशमां मांQवेर पुति-स्वेगLया लक्ष्मांण लिस!ह मांQवेर, आया-लगभाग 52 वेषी7, 2. उमांश लिस!ह तिपु-स्वेगLया लक्ष्मांण लिस!ह मांQवेर, आया-लगभाग 27 वेषी7, 3. गश क मांर तिपु-स्वेगLया लक्ष्मांण लिस!ह मांQवेर, आया-लगभाग 23 वेषी7, उपुर0क्त सभा तिनीवेस -ग्रामां रिरस्दो, पुलिलस थनी-मांस्र , लिजील-तिलसपुर, छत्ती सगढ़। (-----दोवेक7गण) 4. खेलYरमां यादोवे तिपु-पुसउरमां यादोवे, तिनीवेस -ग्रामां छQनी, पुलिलस थनी-जीरहग!वे, लिजील-मां!गल (छत्ती सगढ़), (दो0षी वेहनी स्कGतिपु7या0 क्रमां!क-स .जी .-10-एफ.-3178 क वेहनी चलक) 5. रमांश क मांर सहZ तिपु-दोरमां सहZ, तिनीवेस -कछ ड़ी , !धवेपुर, सरकण्ड, पुलिलस थनी-सरकण्ड, लिजील-तिलसपुर (छत्ती सगढ़) (दो0षी वेहनी स्कGतिपु7या0 क्रमां!क-स .जी .-10-एफ.-3178 क पु!जी क\  स्वेमां ) POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.29 17:10:09 +0530 2 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} 6. लवे तिनीमांश जीयासवेल तिपु-स्वेगLया जीग जीयासवेल, तिनीवेस -नीया सरकण्ड, लिजील-तिलसपुर (छत्ती सगढ़) (दो0षी वेहनी स्कGतिपु7या0 क्रमां!क-स .जी .-10-एफ.-3178 क  मांधर ) -----प्रत्याथLगण अपु लथL  मां क! पुनी द्वार : श्री आर.एनी. पुस्ट , अलिधवेक्त सतिह श्री आकश श्री वेस्वे, अलिधवेक्त । दोवेक7/प्रत्याथL क्रमां!क-1 स 3 द्वार : श्री आनी!दो क शवेरवेनी , अलिधवेक्त । प्रत्याथL क्रमां!क-4, 5 एवे! 6 द्वार : क0ई उपुस्थिस्थ नीह` । न्यायामांYति7 श्री स!जीया क मांर जीयासवेल !! तिनीण7या पु ठ पुर पुरिर !! 28/07/2026 1. मां0टर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 कc धर 173 क अ!ग7 प्रस् इंस अपु ल मां1 तिद्वा या अपुर मां0टर दोर्घ7टनी दोवे अलिधकरण, तिलसपुर, लिजील-तिलसपुर, छत्ती सगढ़ द्वार दोवे प्रकरण क्रमां!क-1438/2019, “श्री मां मांहशमां मांQवेर वेग>रह तिवेरुद्ध खेलYरमां यादोवे वेग>रह” मां1 पुरिर अलिधतिनीण7या तिदोनी!क 17/11/2021 क0 चनीQ दो गई ह> । लिजीस आग स!क्षेपु मां1 “प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या” स स!0लिध तिकया जी रह ह> । 2. प्रकरण क थ्या, स!क्षेपु मां1, इंस आशया क हk तिक तिदोनी!क 27.01.2019 क0 लक्ष्मांण लिस!ह मांQवेर (मां\क), जी0 छत्ती सगढ़ रज्या तिवेद्य तिवेरण क! पुनी लिलतिमांटड मां1 लइंनीमां>नी ग्राड-1 क पुदो पुर कया7र थ, अपुनी क7व्यास्थल अकलर जीनी ह तिपुपुरदो-अकलर मांग7 क तिकनीर पु>दोल जी रह थ । उस समांया ग्रामां रग!वे स्कY ल क समां पु अकलर कc ओर स 3 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} स्कGतिपु7या0 वेहनी क्रमां!क स .जी .-10-एफ.-3178 (लिजीस आग स!क्षेपु मां1 "दो0षी वेहनी" कह जीएग) क चलक खेलYरमां यादोवे द्वार उक्त वेहनी क0  व्र एवे! लपुरवेह पुYवे7क चल आया लिजीसकc ठ0कर लगनी स उस ग!भा र च0ट1 आई! । उपुचरथ7 उस स्वेस्थिस्क अस्पुल, तिलसपुर मां1 भाL करया गया, जीहp उपुचर क दोQरनी तिदोनी!क 08.02.2019 क0 उसकc मां\त्या ह0 गई । उक्त र्घटनी क स!!ध मां1 थनी अकलर मां1 मांग7 जीpच उपुर! प्रथमां सYचनी पुत्र क्रमां!क-157/2019 पु!जी द्ध तिकया गया थ तिवेवेचनी उपुर! "दो0षी वेहनी" क चलक क तिवेरुद्ध अतिभाया0ग-पुत्र प्रस् तिकया गया । 3. दोवेक7गण पुक्षे कc ओर स मां0टर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 कc धर 166 क अ!ग7 दोवे आवेदोनी प्रस् कर हrए अतिभावेचनी तिकया गया तिक दोर्घ7टनी क समांया मां\क लइंनीमां>नी ग्राड-1 क पुदो पुर स्थया रूपु स कया7र थ थ उस ₹1,27,000/- प्रतिमांह वेनी प्रप्त ह0 थ । तिवेतिभान्न मांदोv क अ!ग7 प्रतिकर क दोवे तिकए जीनी पुर अलिधकरण नी उभायापुक्षे क0 सनीनी थ अतिभालखे पुर उपुलब्ध मांQलिखेक एवे! दोस्वेजी सक्ष्या क पुरिरश लनी उपुर! “प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या” पुरिर तिकया । अलिधकरण नी मां\क कc मांलिसक आया ₹68,360/- तिनीध7रिर कर हrए, उसकc जीन्मांतिलिथ 03.12.1958 क आधर पुर दोर्घ7टनी कc तिलिथ पुर उसकc आया 60 वेषी7 मांनी , आया मां1 15% कc अतिभावे\तिद्ध कc, व्यातिक्तग एवे! जी वेनी-तिनीवे7ह व्याया कc मांदो मां1 1/3 कc कटQ कर गणक 9 लगY तिकया थ स!पुदो कc हतिनी, दोह-स!स्कर, सहचया7 सखे कc हतिनी एवे! उपुचर व्याया सतिह क ल ₹59,47,697/- क प्रतिकर 9% वेतिषी7क ब्याजी सतिह अलिधतिनीण7या पुरिर तिकया, लिजीस इंस अपु ल मां1 चनीQ दो गई ह> । 4. अपु लथL  मां क! पुनी क तिवेद्वानी अलिधवेक्त नी क7 तिकया ह> तिक दोर्घ7टनी क लगभाग 13 तिदोवेस पुश्च मां\क कc मां\त्या हrई, थतिपु प्रर!तिभाक मांग7 सYचनी मां1 तिकस वेहनी क क्रमां!क 4 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} अथवे पुहचनी अ!तिक नीह` ह> । प्रथमां सYचनी पुत्र भा तिवेल! स दोजी7 कc गई थ कलिथ "दो0षी वेहनी" कc जीप्त र्घटनी क लगभाग 10 मांह पुश्च तिदोनी!क 13.11.2019 क0 कc गई । "दो0षी वेहनी" दोर्घ7टनी मां1 स!लिलप्त नीह` थ और उस तिमांथ्या रूपु स इंस दोर्घ7टनी मां1 आलिलप्त तिकया गया ह> । इंसलिलए “प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या” तिवेलिधसम्मां नीह` ह> । अ{ अपु ल स्वे कर कर अपु लथL क उत्तीरदोतियात्वे समांप्त तिकया जीनी चतिहए । तिवेद्वानी अलिधवेक्त द्वार याह भा क7 प्रस् तिकया गया तिक दोर्घ7टनी कc तिलिथ पुर मां\क कc आया 60 वेषी7 01 मांह 24 तिदोवेस थ , अ{ उस 61 वेषी7 कc आया क मांनी जीनी चतिहए थ । ऐस स्थिस्थति मां1 न्यायादृष्टां! National Insurance Company Limited v. Pranay Sethi, (2017) 16 SCC 680 क प्रकश मां1 नी 0 15% भातिवेष्या कc स!भावेनीओ! क लभा दोया थ और नी ह गणक 9 लगY तिकया जी सक थ । अ{ “प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या” अपुस् तिकए जीनी या0ग्या ह> । 5. दोवेक7गण/प्रत्याथL क्रमां!क-1 स 3 क तिवेद्वानी अलिधवेक्त नी क7 प्रस् तिकया तिक अलिधकरण द्वार पुरिर “प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या” अतिभालखे पुर उपुलब्ध मांQलिखेक एवे! दोस्वेजी सक्ष्या पुर आधरिर ह> । अलिधकरण द्वार तिदोए गए तिनीष्कषी7 मां1 तिकस प्रकर कc त्रतिट पुरिरलतिक्षे नीह` ह0 । अ{ अपु ल मां1 तिकस हस्क्षेपु कc आवेश्याक नीह` ह> इंसलिलए अपु ल खेरिरजी तिकया जीए । 6. उपुस्थिस्थ पुक्षे क क7 श्रीवेण तिकया गया थ अतिभालखे क सYक्ष्मांपुYवे7क पुरिरश लनी तिकया गया । 7. अतिभालखे स स्पुष्टां ह> तिक दोवेक7 पुक्षे कc ओर स मां\क कc पुत्नी श्री मां मांहशमां मांQवेर (आ.स.-1), प्रत्याक्षेदोशL सक्षे अतिवेनीश क मांर प्रधनी (आ.स.-2) थ सश्री अनी  5 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} ढाल (आ.स.-3) क पुर क्षेण करया गया । इंसक तिवेपुर , दो0षी वेहनी क चलक, पु!जी क\  स्वेमां वे अपु लथL  मां क! पुनी कc ओर स तिकस सक्षे क पुर क्षेण नीह` करया गया । 8. मां\क कc पुत्नी श्री मां मांहशमां मांQवेर (आ.स.-1) नी इंस दोर्घ7टनी क  पुलिलस द्वार प्रस् दोस्वेजी कc प्रमांतिण प्रतिलिलतिपु अ!तिमां प्रतिवेदोनी प्रदोश7 पु -1, मांग7 सYचनी प्रदोश7 पु -2, जीप्त पुत्र प्रदोश7 पु -3, नीक्श पु!चयानीमां प्रदोश7 पु -4 और शवे पुर क्षेण आवेदोनी वे प्रतिवेदोनी प्रदोश7 पु -5 क रूपु मां1 प्रस् तिकए हk । उक्त दोस्वेजीv क पुरिरश लनी स स्पुष्टां ह0 ह> तिक पुलिलस तिवेवेचनी मां1 दो0षी वेहनी कc स!लिलप्त पुई गई थ उसक चलक क तिवेरुद्ध अतिभाया0ग-पुत्र प्रस् तिकया गया । सथ ह , प्रत्याक्षेदोशL सक्षे अतिवेनीश क मांर प्रधनी (आ.स.-2), जी0 अतिभाया0जीनी क सYच द्ध सक्षे भा ह>, नी अपुनी कथनी मां1 स्पुष्टां रूपु स कह ह> तिक दोर्घ7टनी "दो0षी वेहनी" स ह करिर हrई थ । उसक इंस कथनी क प्रतिपुर क्षेण मां1 खे!डनी नीह` तिकया जी सक । 9. पुलिलस द्वार तिवेवेचनी पुश्च प्रस् अतिभाया0ग-पुत्र क सस्थिक्ष्याक मांYल्या क ति!दो पुर मांनीनी या उच्चमां न्यायालया द्वार ICICI Lombard General Insurance Company Limited v. Rajani Sahu and Others, (2025) 2 SCC 599 क तिनीण7या कc कस्थिण्डक-8 स 10 मां1 तिनीम्नीनीसर तिवेलिध प्रतिपुतिदो कc गई ह>{- “8 As regards the reliability of charge-sheet and other documents collected by the police during the investigation in motor accident cases, this Court in Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd. [Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 : (2018) 3 SCC (Civ) 335 : (2018) 2 SCC (Cri) 819 : 2018 INSC 311] , held in para 27, thus : (SCC p. 672) 6 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} “27. Another reason which weighed with the High Court to interfere in the first appeal filed by Respondents 2 and 3, was absence of finding by the Tribunal about the factum of negligence of the driver of the subject jeep. Factually, this view is untenable. Our understanding of the analysis done by the Tribunal is to hold that Jeep No. RST 4701 was driven rashly and negligently by Respondent 2 when it collided with the motorcycle of the appellant leading to the accident. This can be discerned from the evidence of witnesses and the contents of the charge-sheet filed by the police, naming Respondent 2. This Court in a recent decision in Dulcina Fernandes [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] , noted that the key of negligence on the part of the driver of the offending vehicle as set up by the claimants was required to be decided by the Tribunal on the touchstone of preponderance of probability and certainly not by standard of proof beyond reasonable doubt. Suffice it to observe that the exposition in the judgments already adverted to by us, filing of charge-sheet against Respondent 2 prima facie points towards his complicity in driving the vehicle negligently and rashly. Further, even when the accused were to be acquitted in the criminal case, this Court opined that the same may be of no effect on the assessment of the liability required in respect of motor accident cases by the tribunal.” 9. It is true that the Tribunal had looked into the oral and documentary evidence including the FIR, final report and such other documents prepared by the police in connection with the accident in question. The Tribunal had also taken note of the fact that based on the final report, the driver of the offending truck was tried and found guilty for rash and negligent driving. The High Court took note of such aspects and found no illegality in the procedure adopted by the Tribunal and consequently dismissed the appeal. 10. In the contextual situation it is relevant to refer to a decision of this Court in Mathew Alexander v. Mohd. Shafi [Mathew Alexander v. Mohd. Shafi, (2023) 13 SCC 510 : 7 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} 2023 INSC 621] , this Court held thus : (SCC p. 514, para 12) “12. …A holistic view of the evidence has to be taken into consideration by the Tribunal and strict proof of an accident caused by a particular vehicle in a particular manner need not be established by the claimants. The claimants have to establish their case on the touchstone of preponderance of probabilities. The standard of proof beyond reasonable doubt cannot be applied while considering the petition seeking compensation on account of death or injury in a road traffic accident. To the same effect is the observation made by this Court in Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] which has referred to the aforesaid judgment in Bimla Devi [Bimla Devi v. Himachal RTC, (2009) 13 SCC 530 : (2009) 5 SCC (Civ) 189 : (2010) 1 SCC (Cri) 1101] .” 10. तिवेचरध नी प्रकरण मां1 प्रत्याक्षेदोशL सक्षे अतिवेनीश क मांर प्रधनी (आ.स.-2) नी स्पुष्टां रूपु स कथनी तिकया ह> तिक दोर्घ7टनी उक्त "दो0षी वेहनी" स करिर हrई थ । उसक इंस कथनी क प्रतिपुर क्षेण मां1 क0ई खे!डनी नीह` तिकया जी सक । उसक कथनी कc पुतिष्टां पुलिलस द्वार प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदोनी थ प्रदोश7 पु -1 स प्रदोश7 पु -5 क क दोस्वेजीv स भा ह0 ह> । इंसक तिवेपुर , वेहनी चलक, पु!जी क\  स्वेमां वे अपु लथL  मां क! पुनी कc ओर स उक्त सक्ष्या क खे!डनी करनी ह क0ई मांQलिखेक अथवे दोस्वेजी सक्ष्या प्रस् नीह` तिकया गया । ऐस स्थिस्थति मां1 याह न्यायालया पु ह> तिक "दो0षी वेहनी" कc स!लिलप्त क स!!ध मां1 अलिधकरण द्वार अतिभालिललिखे तिनीष्कषी7 अतिभालखे पुर उपुलब्ध सक्ष्या क अनीरूपु ह> थ उसमां1 तिकस प्रकर कc त्रतिट पुरिरलतिक्षे नीह` ह0 । फलस्वेरूपु, अपु लथL  मां क! पुनी कc याह आपुलित्ती तिक "दो0षी वेहनी" दोर्घ7टनी मां1 स!लिलप्त नीह` थ, स्वे कर तिकए जीनी या0ग्या नीह` ह> । 8 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} 11. अपु लथL  मां क! पुनी नी अलिधकरण द्वार तिनीध7रिर आया पुर क0ई आपुलित्ती नीह` कc ह> । उनीक मांख्या क7 क वेल याह ह> तिक दोर्घ7टनी कc तिलिथ पुर मां\क कc आया 60 वेषी7 01 मांह 24 तिदोवेस थ , इंसलिलए न्यायादृष्टां! Pranay Sethi (पुYवे…क्त) क प्रकश मां1 उस 61 वेषी7 कc आया क मांनी हrए भातिवेष्या कc स!भावेनीओ! क लभा नीह` तिदोया जीनी चतिहए थ थ गणक 9 क स्थनी पुर गणक 7 लगY तिकया जीनी चतिहए थ । उक्त क7 क दोवेक7 पुक्षे द्वार तिवेर0ध तिकया गया ह> । 12. अलिधकरण नी सवे पुस्थिस्क क आधर पुर मां\क कc जीन्मांतिलिथ 03.12.1958 स्वे कर कc ह> । उक्त जीन्मांतिलिथ क आधर पुर दोर्घ7टनी तिदोनी!क 27.01.2019 क0 मां\क कc आया 60 वेषी7 01 मांह 24 तिदोवेस ह0 ह> । अथ7† वेह 61 वेषी7 कc आया पुYण7 नीह` कर पुया थ । न्यायादृष्टां! Pranay Sethi (पुYवे…क्त) क अनीसर 51 स 60 वेषी7 आया वेग7 क वेनीभा0ग व्यातिक्त कc आया मां1 15% कc अतिभावे\तिद्ध तिकया जीनी तिवेलिधसम्मां ह> । चYpतिक दोर्घ7टनी कc तिलिथ पुर मां\क 60 वेषी7 कc आया वेग7 मां1 ह थ, 61 वेषी7 कc आया पुYण7 नीह` तिकया थ । इंसलिलए अलिधकरण द्वार 15% भातिवेष्या कc स!भावेनीओ! क लभा प्रदोनी तिकए जीनी मां1 क0ई त्रतिट पुरिरलतिक्षे नीह` ह0 । 13. इंस प्रकर, गणक क स!!ध मां1 भा अपु लथL क क7 स्वे कर या0ग्या नीह` ह> । न्यायादृष्टां! Pranay Sethi (पुYवे…क्त) थ उसस स!!लिध तिवेलिधक लिसद्ध!v क अनीसर 56 स 60 वेषी7 आया वेग7 क लिलए गणक 9 थ 61 स 65 वेषी7 आया वेग7 क लिलए गणक 7 तिनीध7रिर ह> । चYpतिक मां\क नी दोर्घ7टनी कc तिलिथ क 61 वेषी7 कc आया पुYण7 नीह` कc थ , इंसलिलए वेह 60 वेषी7 क आया वेग7 मां1 ह आ ह> । ऐस स्थिस्थति मां1 अलिधकरण द्वार गणक 9 क प्रया0ग पुYण7{ तिवेलिधसम्मां ह> और उसमां1 तिकस प्रकर क हस्क्षेपु कc आवेश्याक नीह` पुया जी । 9 / 9 {MA(C) No. 645 of 2022} 14. दोर्घ7टनी कc तिलिथ, मां\क कc आया थ आलिश्रीv कc स!ख्या क पुरिरश लनी करनी पुर याह न्यायालया पु ह> तिक भातिवेष्या कc स!भावेनीओ! क स!!ध मां1 कc गई आया मां1 अतिभावे\तिद्ध, व्यातिक्तग एवे! जी वेनी-तिनीवे7ह व्याया कc कटQ थ अलिधकरण द्वार अपुनीया गया गणक तिवेलिधसम्मां एवे! न्याया0तिच ह> । अ{ उक्त तिनीध7रण मां1 तिकस प्रकर क हस्क्षेपु कc आवेश्याक नीह` पुई जी । 15. उपुर0क्त समांस् थ्याv क0 दृतिष्टांग रखे हrए थ न्यायादृष्टां! Rajani Sahu (पुYवे…क्त) मां1 प्रतिपुतिदो तिवेलिधक लिसद्ध! क प्रकश मां1 अपु लथL  मां क! पुनी क क7 स्वे कर तिकए जीनी या0ग्या नीह` पुया जी । अलिधकरण द्वार पुरिर "प्रश्नीध नी अलिधतिनीण7या" अतिभालखे पुर उपुलब्ध सक्ष्या क प्रतिकY ल नी ह0नी स उसमां1 तिकस प्रकर क हस्क्षेपु कc आवेश्याक नीह` पुई जी । फलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर तिकए जीनी या0ग्या नीह` ह0नी स खेरिरजी कc जी ह> । 16. तिनीण7या कc प्रति क सथ अलिधकरण क अतिभालखे श घ्रपुYवे7क आवेश्याक कया7वेह ह सYचनीथ7 वे पुलनीथ7 वेपुस प्रतिषी ह0 । सह /- (स!जीया क मांर जीयासवेल) न्यायाध श पो मन