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1 / 8 (Cr. R. No.-323 of 2022)
2026:CGHC:12511 प्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दाण्डिक पुनर क्षण
क्रमां$क
-323
/2022
सत्या प्रकश भग तिपु-दायारमां भग, उम्र-लगभग 35 वेर्ष0, तिनवेस -जमांरग ड़ी , पुलिलस थान-गहार, लिजल-जशपुर, छत्ती सगढ़ -----पुनर क्षणक0/अतिभयाक्त तिवेरूद्घ छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार लिजल दालि<कर , अ$तिकपुर, लिजल-सरगज, छत्ती सगढ़ -----अनवेदाक/रज्या पुनर क्षणक0/अतिभयाक्त द्वार : श्री
०एन० प्रजपुति, अलि<वेक्त । अनवेदाक/रज्या द्वार : श्री सतिमां लिस$हा, उपुमांहालि<वेक्त । न्यायामांBति0 श्री स$जया क मांर जयासवेल !! आदाश पु ठ पुर पुरिर !! 16/03/2026
1. <र 397/401 दा प्रतिक्रया स$तिहा क अ$ग0 प्रस् इस पुनर क्षण यातिचक मांN, अपु ल या न्यायालया—पु$चमां अपुर सत्र न्याया< श, अ$तिकपुर, लिजल सरगज (छत्ती सगढ़) POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.03.17 17:10:19 +0530
2 / 8 (Cr. R. No.-323 of 2022) द्वार आपुरलि<क अपु ल क्रमां$क 72/2020, “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरुद्ध सत्या प्रकश भग” मांN पुरिर तिनण0या तिदान$क 22/02/2022 कW चनX दा गई हाZ । आग लिजस
“प्रश्न< न तिनण0या” स स$Wलि< तिकया ज रहा हाZ ।
2.
प्रकरण क थ्या, स$क्षपु मांN, इस प्रकर हा] तिक यातिचकक0/अतिभयाक्त सत्या प्रकश भग पुलिलस तिवेभग मांN वेर्ष0 2008 मांN आरक्षक क पुदा पुर भ_ हा`आ । वेर्ष0 2010 स वेहा कया0लया पुलिलस अ< क्षक, सरगज कa वेन शखा मांN वेन क्लक0 क सहायाक क रूपु मांN कया0र था था कम्प्याBटर क मांध्यामां स समांस् अलि<करिरयाh-कमां0चरिरयाh क वेन दायाक Zयार कर कWर्षलया स ई-पुमांNट क मांध्यामां स उनक ]क खाh मांN रतिश अ$रिर कर था । अतिभयाक्त सत्या प्रकश भग द्वार मांहा जBन 2011 मांN अपुन नक्सल भत्ती कa रतिश 1,610/- रुपुया क स्थान पुर 16,100/- रुपुया, था मांहा जBन 2012 मांN भ 1,610/- रुपुया क स्थान पुर 16,100/- रुपुया अपुन ]क खा मांN अ$रिर करई गई । इस प्रकर मांहा फरवेर 2013 मांN स्पुशल रशनमांन 650/- रुपुया क स्थान पुर 6,50,000/- रुपुया, मांहा जनवेर 2013 मांN 650/- रुपुया क स्थान पुर 6,50,000/- रुपुया था मांहा जनवेर 2014 मांN स्पुशल रशनमांन 650/- रुपुया क स्थान पुर 6,50,000/- रुपुया अ$रिर करवेया गया । इस प्रकर मांहा तिदासम्र 2013 मांN आरक्षक सन ल क मांर क ]क खा, जW मांBलj अतिभयाक्त सत्या प्रकश भग क तिपु दायारमां भग क खा क्रमां$क था, उसमांN 6,64,192/- रुपुया अ$रिर करए गए । इस प्रकर अतिभयाक्त द्वार क ल 26,40,870/- रुपुया कa शसकaया रतिश गन कर प्रप्त तिकया गया । उक्त तिशकया पुर थान अ$तिकपुर मांN अपुर< क्रमां$क 91/2014 पु$ज द्ध तिकया गया था तिवेवेचन उपुर$ अतिभयाWगपुत्र प्रस् तिकया गया ।
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3.
R. No.-323 of 2022)
3. तिवेचरण न्यायालया—न्यातियाक मांलिजस्टlट प्रथामां श्रीण , अ$तिकपुर, लिजल सरगज (छत्ती सगढ़) मांN अतिभयाWगपुत्र प्रस् हाWन क पुश्च प्रकरण ल$ समांया क आरWपु-पुBवे0 क0 हा तिनया रहा । तिदान$क 09/03/2016 कW अतिभयाक्त क तिवेरुद्ध <र 420 एवे$ 409 भर या दा स$तिहा क अ$ग0 आरWपु तिवेरतिच तिकए गए था प्रकरण अतिभयाWजन सक्ष्या हा ल$ति रहा । सतिक्षयाh क नमां आदातिशकएn जर कa ज रहाo, तिक$ एक भ सक्ष क पुर क्षण नहाo हाW सक । अलि<क$श ण्डिस्थातियाh मांN सतिक्षयाh क नमां जर आदातिशकएn अदामां- मां ल रहाo । इस मांध्या सतिक्षयाh कW समांन क अतिरिरक्त जमांन या वेर$ट था क छ अवेसरh पुर तिगरफ्र वेर$ट भ जर तिकए गए, तिक$ अ$j एक भ सक्ष क पुर क्षण नहाo हाW सक । पुरिरणमांस्वेरूपु तिवेचरण न्यायालया न अतिभयाWजन कa रुतिच न पु हा`ए सक्ष्या क अवेसर समांप्त कर तिदाया । अतिभयाWजन सक्ष्या क अभवे मांN अ$तिमां क0 सनन क पुश्च तिदान$क 17/01/2020 कW तिनण0या पुरिर कर हा`ए अतिभयाक्त कW दाWर्षमांक्त कर तिदाया ।
4. उक्त दाWर्षमांतिक्त आदाश कW रज्या द्वार अपु ल मांN चनX दा गई । अपु ल या न्यायालया— पु$चमां अपुर सत्र न्याया< श, अ$तिकपुर, सरगज न “प्रश्न< न तिनण0या” क मांध्यामां स याहा पुया तिक अतिभयाक्त द्वार शसकaया सवेक क रूपु मांN शसन क सथा छल एवे$ आपुरलि<क न्यास-भ$ग तिकया गया हाZ, जW ग$भ र प्रकq ति क अपुर< हाZ जW क्रमांशj 07 एवे$ 10 वेर्ष0 क करवेस स दान या हाZ । प्रकरण क सभ सक्ष पुलिलस तिवेभग, ]क एवे$ कWर्षलया स स$$लि< शसकaया सवेक हा] था अतिभयाक्त भ पुलिलस तिवेभग मांN कया0र रहा हाZ । इसक वेजBदा अतिभयाWजन सक्ष्या प्रस् नहाo तिकया गया । अj अतिभयाWजन कW सक्ष्या प्रस् करन क अवेसर तिदाया जन उतिच पु हा`ए प्रकरण, तिवेचरण न्यायालया कW इस तिनदाrश क सथा पुनj प्रतिर्ष तिकया गया तिक अतिभयाWजन कW सक्ष्या क पुया0प्त अवेसर प्रदान कर हा`ए
4 / 8 (Cr. R. No.-323 of 2022) था सतिक्षयाh कa उपुण्डिस्थाति सतिनण्डिश्च कर प्रकरण क तिवेलि<वे तिनरकरण तिकया जए । लिजस आदाश कW इस पुनर क्षण मांN चनX दा गई हाZ ।
5.
पुनर क्षणक0/अतिभयाक्त क तिवेद्वान अलि<वेक्त क क0 हाZ तिक तिवेचरण न्यायालया मांN अतिभयाWजन कW सक्ष्या प्रस् करन हा लगभग 28 अवेसर प्रदान तिकए गए, लिजस दाXरन सतिक्षयाh कW समांन, जमांन या वेर$ट एवे$ तिगरफ्र वेर$ट भ जर तिकए गए, तिफर भ
अतिभयाWजन एक भ सक्ष प्रस् करन मांN असफल रहा । तिवेचरण कa अवेलि< अतिनण्डिश्चकल क नहाo चल सक । तिवेचरण न्यायालया द्वार अतिभयाWजन कW पुया0प्त अवेसर प्रदान तिकया ज चक था, अj अपु ल या न्यायालया द्वार पुनj अवेसर प्रदान तिकया जन तिवेलि<सम्मां नहाo हाZ । इसलिलए पुनर क्षण स्वे कर कर “प्रश्न< न तिनण0या” कW अपुस् तिकया जए ।
6. रज्या पुक्ष क तिवेद्वान अलि<वेक्त क क0 हाZ तिक याहा मांमांल एक शसकaया सवेक द्वार शसन क सथा छल एवे$ आपुरलि<क न्यास-भ$ग करन स स$$लि< हाZ, लिजसमांN सक्ष भ शसकaया कमां0चर हा] । तिवेवेचन भ पुलिलस द्वार कa गई हाZ था सतिक्षयाh कW ल करन कa लिजम्मांदार भ अतिभयाWजन पुक्ष पुर हा हाW हाZ । इस मांमांल मांN र-र समांन, जमांन या वेर$ट एवे$ तिगरफ्र वेर$ट जर तिकए गए, तिफर भ उनकa उपुण्डिस्थाति सतिनण्डिश्च नहाo हाW सकa । ऐस ण्डिस्थाति मांN अपु ल या न्यायालया द्वार प्रकरण तिवेचरण न्यायालया कW पुनj प्रतिर्ष कर अतिभयाWजन कW सक्ष्या प्रस् करन क अवेसर प्रदान तिकया जन पुBण0j उतिच हाZ। तिवेद्वान अलि<वेक्त द्वार अपुन क0 क समांथा0न मांN न्यायादृष्टां$ Bablu Kumar and others v. State of Bihar and another, (2015) 8 SCC 787 क हावेल तिदाया हाZ ।
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7. उभयापुक्ष क क0 श्रीवेण तिकया गया था अतिभलखा क पुरिरश लन तिकया गया ।
8.
मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार लB क मांर (पुBवेvक्त) मांN प्रतिपुतिदा तिकया गया हाZ तिक न्यायालया तिवेचरण क दाXरन क वेल एक मांXन दाश0क अथावे तिनण्डिwक्रया पुया0वेक्षक नहाo रहा सक, अतिपु उसक याहा तिवेलि<क दातियात्वे हाZ तिक वेहा याहा सतिनण्डिश्च कर तिक न W अतिभयाWजन पुक्ष और न हा अतिभयाक्त आपुरलि<क तिवेचरण क सथा कWई टलमांटWल, छल अथावे अनतिच आचरण करN था न्यातियाक कया0वेहा कa पुतिवेत्र एवे$ गरिरमां अक्षण न
रहा । न्यायालया कW सतिक्रया भBतिमांक तिनभ हा`ए तिनwपुक्ष, प्रभवे एवे$ तिवेलि<सम्मां तिवेचरण सतिनण्डिश्च करन हाW हाZ, जW तिक भर या सक्ष्या अलि<तिनयामां, 1872 क लिसद्ध$h क अनरूपु उसक दातियात्वे हाZ । उक्त तिनण0या कa कण्डिक-22 तिनम्ननसर हाZj—
“22. Keeping in view the concept of fair trial, the obligation of the prosecution, the interest of the community and the duty of the court, it can irrefragably be stated that the court cannot be a silent spectator or a mute observer when it presides over a trial. It is the duty of the court to see that neither the prosecution nor the accused play truancy with the criminal trial or corrode the sanctity of the proceeding. They cannot expropriate or hijack the community interest by conducting themselves in such a manner as a consequence of which the trial becomes a farcical one. The law does not countenance a “mock trial”. It is a serious concern of society. Every member of the collective has an inherent interest in such a trial. No one can be allowed to create a dent in the same. The court is duty-bound to see that neither the prosecution nor the defence takes unnecessary adjournments and take the trial under their control. The court is under the
6 / 8 (Cr. R. No.-323 of 2022) legal obligation to see that the witnesses who have been cited by the prosecution are produced by it or if summons are issued, they are actually served on the witnesses. If the court is of the opinion that the material witnesses have not been examined, it should not allow the prosecution to close the evidence.
There can be no doubt that the prosecution may not examine all the material witnesses but that does not necessarily mean that the prosecution can choose not to examine any witness and convey to the court that it does not intend to cite the witnesses. The Public Prosecutor who conducts the trial has a statutory duty to perform. He cannot afford to take things in a light manner. The court also is not expected to accept the version of the prosecution as if it is sacred. It has to apply its mind on every occasion. Non-application of mind by the trial court has the potentiality to lead to the paralysis of the conception of fair trial.”
9. उपुरWक्त न्यायादृष्टां$ क प्रकश मांN तिवेचर< न मांमांल पुर तिवेचर करN W याहा स्पुष्टां हाZ तिक इस मांमांल मांN अतिभयाक्त पुलिलस कमां_ हाZ, तिवेवेचन भ पुलिलस द्वार कa ज हाZ, कलिथा छल, गन एवे$ आपुरलि<क न्यास-भ$ग कa घटन भ पुलिलस कया0लया स स$$लि< हाZ, सक्ष भ
पुलिलस, ]क एवे$ कWर्षलया क कमां0चर हा] । तिवेचरण न्यायालया क समांक्ष सतिक्षयाh कW उपुण्डिस्था करन कa लिजम्मांदार अतिभयाWजन अथा0 पुलिलस पुर हाW हाZ था समांन, जमांन या वेर$ट एवे$ तिगरफ्र वेर$ट कa मां ल भ पुलिलस द्वार हा सतिनण्डिश्च कa ज
हाZ । ऐस ण्डिस्थाति मांN 28 अवेसर तिदाए जन क पुश्च एक भ सक्ष क न्यायालया मांN पुर क्षण न कर पुन पुलिलस कa कया0प्रणल पुर प्रश्नतिचन्हा लगन वेल हाZ । उपुया0क्त पुरिरण्डिस्थातियाh मांN अपु ल या न्यायालया द्वार प्रकरण कW पुनj तिवेचरण न्यायालया कW प्रतिर्ष कर
7 / 8 (Cr. R. No.-323 of 2022) अतिभयाWजन कW सक्ष्या क अवेसर प्रदान करन क तिनदाrश दान तिवेलि<सम्मां हाZ । “प्रश्न< न तिनण0या” मांN तिकस प्रकर कa अवेZ< या अशद्ध पुरिरलतिक्ष नहाo हाW । अj उसमांN हास्क्षपु करन क कWई औतिचत्या नहाo हाZ ।
10.
उल्लेखान या हाZ तिक तिवेचरण या घटन वेर्ष0 2011-12 कa हाZ । अतिभयाWजन क अलि<क$श सक्ष
शसकaया अलि<कर /कमां0चर हा] । इन ल$ समांया व्या हाW जन क करण उन शसकaया कतिमां0याh कa पुदास्थापुनएn पुरिरवेति0 हाW चकa हाhग था उन्हाN न्यायालया मांN सक्ष्या हा उपुण्डिस्था हाWन स पुBवे0 अपुन वेरिरष्ठ अलि<कर स अनमांति प्रप्त करन हाW हाZ । ऐस
ण्डिस्थाति मांN, तिवेचरण या अपुर< कa प्रकq ति कW दृतिष्टांग रखा हा`ए अतिभयाWजन सतिक्षयाh कa उपुण्डिस्थाति सतिनण्डिश्च करन हा याहा दातियात्वे तिकस वेरिरष्ठ अलि<कर कW स}पु जन न्यायास$ग एवे$ आवेश्याक प्र हाW हाZ, लिजसस पुBवे0 कa रहा अतिभयाWजन एवे$ पुलिलस प्रशसन कa ओर स सक्ष्या प्रस् करन मांN कWई अरुतिच या लपुरवेहा न र ज सक । अj प्रकरण क श घ्र एवे$ प्रभवे तिवेचरण कa दृतिष्टां स तिनम्ननसर तिनदाrश तिदाए ज हा]— .i तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रत्याक मांहा कमां स कमां दाW तिलिथायाn अतिभयाWजन सक्ष्या हा तिनया कa जएnग । सतिक्षयाh क नमां प्रर$भ मांN हा समां$स कa जए जमांन वेर$ट जर तिकया जए$ । आदातिशकए$ पुलिलस मांहातिनर क्षक, सरगज रNज, अ$तिकपुर क मांध्यामां स हा जर
तिकया जए$ । ii. तिवेचरण न्यायालया स सतिक्षयाh क नमां जर आदातिशकओ$ कa मां ल था सतिक्षयाh क उपुण्डिस्थाति कa ति€म्मांदार पुलिलस मांहातिनर क्षक, सरगज रNज, अ$तिकपुर कa हाWग । iii. चवे पुक्ष द्वार श घ्र तिवेचरण मांN पुBण0 सहायाWग तिकया जया । iv. तिवेचरण न्यायालया स अपुक्ष कa ज हाZ तिक प्रकरण क तिवेचरण याथास$भवे 05 मांहा कa अवेलि< क भ र पुBण0 तिकया जए ।
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11. आदाश कa प्रतिलिलतिपु पुलनथा0 पुलिलस मांहातिनर क्षक, सरगज रNज, अ$तिकपुर कW प्रतिर्ष हाW ।
12. आदाश कa प्रतिलिलतिपु पुलिलस मांहातिनदाशक, रयापुर, छत्ती सगढ़ कW इस अपुक्ष क सथा प्रतिर्ष हाW तिक तिवेचर पुश्च, आवेश्याक अनसर उतिच कया0वेहा कa जवेN ।
13. तिवेचरण क स्थागन पुBवे0 मांN जर आदाश समांप्त तिकया ज हाZ ।
14. उपुरWक्तनसर तिनदाrश क सथा, इस पुनर क्षण यातिचक क तिनरकरण तिकया ज हाZ ।
15.
रलिजस्टl कW तिनदाrतिश तिकया ज हाZ तिक इस आदाश कa प्रति याथाश घ्र तिवेचरण न्यायालया एवे$ अपु ल या न्यायालया कW पुलनथा0 एवे$ सBचनथा0 प्रतिर्ष तिकया जए । सहा /- (स$जया क मांर जयासवेल) न्याया< श पुWमांन