MAGMA H. D. I. GENERAL INSURANCE COMPANY LIMITED v. RUKSHANA BEGUM
MAC/461/2021 · 2026-07-12
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2021
DailyLaw.ai
[ 2021 DAILYLAW 486 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021}
CGHC010203522021
2026:CGHC:29441 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-461
/2021
1. मां)ग्मां एच.डी .आई. जनरल इं!श्या4र5स क! पुन लिलतिमांटेडी, द्वार शाखा प्र!धक, शाखा कया;लया-क<ति; क=म्प्लक्स, रजन्द्र नगर चBक, लिल!क र4डी, तिलसपुर, हस ल एवे! लिजल तिलसपुर (छत्ती सगढ़) । (दो4षी वेहन कर क्रमां!क-स .ज .-06-ज .एमां.-0855 क मां क! पुन ) -----अपु लर्थीJ तिवेरूद्घ
1. रुकसन गमां, पुति स्वेगJया मां4हम्मांदो अल मां खान, आया लगभग 34 वेषी;,
2. मां4हम्मांदो हतिशामां, तिपु स्वेगJया मां4हम्मांदो अल मां खान, आया लगभग 18 वेषी;,
3. आयाशा पुरवे न, पुत्री स्वेगJया मां4हम्मांदो अल मां खान, आया लगभग 16 वेषी;,
4. आसमां पुरवे न, पुत्री स्वेगJया मां4हम्मांदो अल मां खान, आया लगभग 15 वेषी;, दोवेक;/प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-3 एवे! 4 द्वार-अपुन मां एवे! प्रकS तिक स!रतिTक रुकसन गमां (प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-1), उपुर4क्त सभ जति-मांस्लिस्लमां, तिनवेस -वेडी; क्रमां!क 10, सन, पुलिलस र्थीन एवे! हस ल- सन, लिजल-मांहसमां!दो (छत्ती सगढ़) । (-----दोवेक;गण)
5. रज्ज खान, तिपु जम्मांन खान, आया लगभग 30 वेषी;, तिनवेस - ग्रामां सहस, पुलिलस र्थीन पुमांगढ़, लिजल ज!जग र-च!पु (छत्ती सगढ़) । (दो4षी वेहन कर क्रमां!क-स .ज .-06-ज .एमां.-0855 क वेहन चलक)
6. प्रमां लिस!ह पु4;, तिपु करण लिस!ह पु4;, आया लगभग 41 वेषी;, तिनवेस - ग्रामां एवे! डीकघर भकल, पुलिलस र्थीन एवे! हस ल-सन, लिजल मांहसमां!दो (छत्ती सगढ़) । (दो4षी वेहन कर क्रमां!क-स .ज .-06-ज .एमां.-0855 क पु!ज कS स्वेमां ) -----प्रत्यार्थीJगण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.15 14:48:31 +0530
2 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} अपु लर्थीJ मां क! पुन द्वार : श्री सBरभ शामां;, अलिधवेक्त । दोवेक;/प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-1 स 4 द्वार : क4ई उपुस्लिस्र्थी नह] । प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-5 एवे! 6 द्वार : क4ई उपुस्लिस्र्थी नह] । न्यायामां^ति; श्री स!जया क मांर जयासवेल !! तिनण;या पु ठ पुर पुरिर !! 13/07/2026
1. मां4टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क< धर 173 क अ!ग; प्रस् इंस अपु ल मां5 अतिरिरक्त मां4टेर दोघ;टेन दोवे अलिधकरण, सरयापुल (मांहसमां!दो), छत्ती सगढ़ द्वार दोवे प्रकरण क्रमां!क-35/2019, “रूकसन गमां वेग)रह तिवेरुद्ध रज्ज खान वेग)रह” मां5 पुरिर अलिधतिनण;या तिदोन!क 30/03/2021 क4 चनB दो गई ह) । लिजसक ह अपु लर्थीJ मां क! पुन क तिवेरूद्घ र्थी दोवेक;गण/प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-1 स 4 क पुT मां5 ₹11,80,000/- (रुपुया ग्यारह लखा अस्स हजर मांत्री) क अलिधतिनण;या मांया ब्याज क पुरिर तिकया गया, लिजस आग स!Tपु मां5 “प्रश्नध न अलिधतिनण;या” स स!4लिध तिकया ज रह ह) ।
2.
प्रकरण क थ्या, स!Tपु मां5, इंस प्रकर हj तिक तिदोन!क 18/02/2019 क4 सया! लगभग 07:30 ज मां4हम्मांदो अल मां खान (मांSक) अपुन मां4टेरसइंतिकल मां5 जर स वेपुस अपुन घर ज रह र्थी । उस समांया अल्टे4 कर क्रमां!क-स .ज .-06-ज .एमां.-0855 (लिजस आग स!Tपु मां5 “दो4षी वेहन” स स!4लिध तिकया ज रह ह)) क चलक रज्ज खान उक्त वेहन क4 सन मांख्या मांग; स्लिस्र्थी कतिmस्न क समांन व्र एवे! लपुरवेह पु^वे;क चल हoए आया लिजसक< ठ4कर लगन स मांSक क4 लिसर मां5 ग!भ र उपुहति करिर हoई । उपुचर क दोBरन तिदोन!क 22/02/2019 क4 मांकहर, रयापुर मां5 उसक< मांSत्या ह4 गई ।
3 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} प्रर!भ मां5 र्थीन-ग4ल जर, रयापुर मां5 मांग; कयामां तिकया गया, लिजस अतिग्रामां कया;वेह ह र्थीन-सन, लिजल-मांहसमां!दो क4 प्रतिषी तिकया गया । र्थीन-सन द्वार असल मांग; कयामां कर मांग; जpच क< गई । मांग; जpच मां5 “दो4षी वेहन” क चलक रज्ज खान क< लपुरवेह पुरिरलतिT ह4न पुर उसक तिवेरूद्घ तिदोन!क 07/04/2019 क4 प्रर्थीमां स^चन पुत्री लखाद्ध कर अपुरध क्रमां!क-163/2019 पु!ज द्ध तिकया गया र्थी तिवेवेचन पु^ण; ह4न पुर अतिभया4ग-पुत्री प्रस् तिकया गया ।
3. दोवेक;गण/प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-1 स 4 द्वार मां4टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क< धर 166 क अ!ग; प्रस् दोवे आवेदोन पुर उभयापुT क4 सनन क उपुर! अलिधकरण न "प्रश्नध न अलिधतिनण;या" पुरिर तिकया । उक्त अलिधतिनण;या मां5 अलिधकरण न याह अतिभलिललिखा तिकया तिक
"दो4षी वेहन" क चलक रज्ज खान र्थी उसक पु!ज कS स्वेमां प्रमां लिस!ह पु4; ह) । अलिधकरण न याह भ अतिभलिललिखा तिकया तिक दोघ;टेन क< तिलिर्थी क4 "दो4षी वेहन" अपु लर्थीJ मां क! पुन स तिमां र्थी । फलस्वेरूपु, अलिधकरण न दोवेक;गण/प्रत्यार्थीJ क्रमां!क-1 स 4 क पुT मां5 ₹11,80,000/- (रुपुया ग्यारह लखा अस्स हजर मांत्री) क< प्रतिकर रतिशा पुर अलिधतिनण;या पुरिर कर हoए उक्त रतिशा क भगन 7% वेतिषी;क ब्याज सतिह करन क दोतियात्वे अपु लर्थीJ मां क! पुन पुर अलिधर4तिपु तिकया । सर्थी ह , याह भ आदोतिशा तिकया तिक यातिदो अलिधतिनण;या तिदोन!क स 30 तिदोवेस क भ र प्रतिकर रतिशा जमां नह] क< ज ह), 4 अलिधतिनण;या तिदोन!क स 9% वेतिषी;क ब्याज दोया ह4ग । लिजस इंस अपु ल मां5 चनB दो गई ह) ।
4.
अपु लर्थीJ मां क! पुन क तिवेद्वान अलिधवेक्त क क; ह) तिक दोघ;टेन मां5 “दो4षी वेहन” क< स!लिलप्त प्रमांतिण नह] हoई ह) । दोघ;टेन तिदोन!क 18/02/2019 क< ह), जतिक प्रर्थीमां स^चन पुत्री तिदोन!क 07/04/2019 क4 अर्थी;u लगभग 50 तिदोवेस पुश्च अज्ञा वेहन क
4 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} तिवेरुद्ध लखाद्ध क< गई । ऐस स्लिस्र्थीति मां5 “दो4षी वेहन” क4 दोघ;टेन मां5 स!लिलप्त करन ह क4ई समांतिच एवे! तिवेश्वेसन या सक्ष्या अतिभलखा पुर उपुलब्ध नह] ह) । फलस्वेरूपु, अपु लर्थीJ मां क! पुन पुर प्रतिकर रतिशा क भगन क दोतियात्वे अलिधर4तिपु तिकया जन तिवेलिधसम्मां नह] ह) । अy “प्रश्नध न अलिधतिनण;या” क4 अपुस् कर हoए अपु लर्थीJ मां क! पुन क4 उक्त दोतियात्वे स मांक्त तिकया जए । याह भ क; प्रस् तिकया गया तिक मां4टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क< धर 173 क अ!ग; अपु ल प्रस् करन क लिलए 90 तिदोवेस क< वे)धतिनक अवेलिध तिनध;रिर ह), जतिक अलिधकरण न अलिधतिनण;या तिदोन!क स 30 तिदोवेस क भ र प्रतिकर रतिशा जमां न तिकए जन क< स्लिस्र्थीति मां5 ब्याज क< दोर 7% स ढ़कर 9% वेतिषी;क कर दो ह) । याह वेस्y दोण्डीत्मांक ब्याज अलिधर4तिपु करन क समांन ह), लिजसक क4ई वे)धतिनक आधर नह] ह) । अy “प्रश्नध न अलिधतिनण;या” क उक्त भग भ अपुस् तिकया जए । अपुन क; क समांर्थी;न मां5 तिवेद्वान अलिधवेक्त न
National Insurance
. Company Limited v Keshav Bahadur and others, (2004) 2 SCC 370
क हवेल तिदोया ह) ।
5. दोवेक;गण क< ओर स क4ई उपुस्लिस्र्थी नह] ।
6. उपुस्लिस्र्थी पुT क क; श्रीवेण तिकया गया र्थी अतिभलखा क स^क्ष्मांपु^वे;क पुरिरशा लन तिकया गया ।
7. दोवेक; पुT स मांSक क< पुत्न रूकसन गमां र्थी दोघ;टेन क प्रत्याTदोशाJ सT क रूपु मां5 मां4हम्मांदो ह क पुर Tण करया गया ह) । वेह], अपु लर्थीJ मां क! पुन क< ओर स सहयाक तिवेलिध अलिधकर दोष्या! क मांर वेमां; क पुर Tण करया गया ह) । दोष्या! क मांर वेमां; न अपुन कर्थीन} मां5 मांख्याy वेह थ्या दो4हरए हj, ज4 अपु लर्थीJ मां क! पुन क< ओर स
5 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} प्रस् क~!
क आधर हj । उन्ह}न याह कह हoए दोघ;टेन मां5 “दो4षी वेहन” क< स!लिलप्त पुर आपुलित्ती तिकया ह) तिक प्रर्थीमां स^चन पुत्री घटेन क लगभग 50 तिदोवेस पुश्च लखाद्ध क< गई ह) ।
8. दोघ;टेन क प्रत्याTदोशाJ सT मां4हम्मांदो ह न स्पुष्ट रूपु स अपुन कर्थीन} मां5 याह अतिभकलिर्थी तिकया ह) तिक दोघ;टेन “दो4षी वेहन” स ह करिर हoई र्थी । उसक इंस कर्थीन क प्रतिपुर Tण मां5 क4ई खाण्डीन नह] तिकया ज सक ह) । उसक कर्थीन} क समांर्थी;न पुलिलस द्वार तिवेवेचन उपुर! प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदोन र्थी उसक सर्थी स!लग्न प्रमांतिण दोस्वेज} स भ
ह4 ह) । पुलिलस न तिवेवेचन पु^ण; ह4न पुर “दो4षी वेहन” क चलक रज्ज खान क तिवेरुद्ध अतिभया4ग-पुत्री प्रस् तिकया ह) ।
9. पुलिलस द्वार तिवेवेचन पुश्च प्रस् अतिभया4ग-पुत्री क सस्लिक्ष्याक मां^ल्या क ति!दो पुर मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार ICICI Lombard General Insurance Company Limited v. Rajani Sahu and Others, (2025) 2 SCC 599 क तिनण;या क< कस्लिण्डीक-8 स 10 मां5 तिनम्ननसर तिवेलिध प्रतिपुतिदो क< गई ह)y-
“8 As regards the reliability of charge-sheet and other documents collected by the police during the investigation in motor accident cases, this Court in Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd. [Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd., (2018) 5 SCC 656 : (2018) 3 SCC (Civ) 335 : (2018) 2 SCC (Cri) 819 : 2018 INSC 311] , held in para 27, thus : (SCC p. 672)
“27. Another reason which weighed with the High Court to interfere in the first appeal filed by Respondents 2 and 3, was absence of finding by the Tribunal about the factum of negligence of the driver of the subject jeep. Factually, this view is untenable. Our understanding of the analysis done by the Tribunal is to hold that Jeep No. RST 4701 was driven rashly and
6 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} negligently by Respondent 2 when it collided with the motorcycle of the appellant leading to the accident. This can be discerned from the evidence of witnesses and the contents of the charge-sheet filed by the police, naming Respondent 2.
This Court in a recent decision in Dulcina Fernandes [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 :
(2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] , noted that the key of negligence on the part of the driver of the offending vehicle as set up by the claimants was required to be decided by the Tribunal on the touchstone of preponderance of probability and certainly not by standard of proof beyond reasonable doubt. Suffice it to observe that the exposition in the judgments already adverted to by us, filing of charge-sheet against Respondent 2 prima facie points towards his complicity in driving the vehicle negligently and rashly. Further, even when the accused were to be acquitted in the criminal case, this Court opined that the same may be of no effect on the assessment of the liability required in respect of motor accident cases by the tribunal.”
9. It is true that the Tribunal had looked into the oral and documentary evidence including the FIR, final report and such other documents prepared by the police in connection with the accident in question. The Tribunal had also taken note of the fact that based on the final report, the driver of the offending truck was tried and found guilty for rash and negligent driving. The High Court took note of such aspects and found no illegality in the procedure adopted by the Tribunal and consequently dismissed the appeal. 10. In the contextual situation it is relevant to refer to a decision of this Court in Mathew Alexander v. Mohd. Shafi [Mathew Alexander v. Mohd. Shafi, (2023) 13 SCC 510 : 2023 INSC 621] , this Court held thus : (SCC p. 514, para 12)
“12. …A holistic view of the evidence has to be taken into consideration by the Tribunal and strict proof of an accident caused by a particular vehicle in a particular manner need not be established by the claimants.
The claimants have to establish their case on the touchstone of preponderance of probabilities. 7 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} The standard of proof beyond reasonable doubt cannot be applied while considering the petition seeking compensation on account of death or injury in a road traffic accident. To the same effect is the observation made by this Court in Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] which has referred to the aforesaid judgment in Bimla Devi [Bimla Devi v. Himachal RTC, (2009) 13 SCC 530 :
(2009) 5 SCC (Civ) 189 : (2010) 1 SCC (Cri) 1101] .”
10. उपुर4क्त न्यायादृष्ट! क प्रकशा मां5 याह स्लिस्र्थीति स्पुष्ट ह4 ह) तिक दोघ;टेन क प्रत्याTदोशाJ सT
मां4हम्मांदो ह न अपुन कर्थीन} मां5 स्पुष्ट रूपु स “दो4षी वेहन” क< स!लिलप्त क अतिभकर्थीन तिकया ह) लिजसक खाण्डीन नह] हoआ ह) । पुलिलस द्वार प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदोन मां5 मां4हम्मांदो ह क नमां सT क रूपु मां5 स^च द्ध ह) । उस पुर अतिवेश्वेस करन क क4ई आधर नह] ह) । अतिभलखा स भ स्पुष्ट ह) तिक दोघ;टेन तिदोन!क 18/02/2019 क4 र्थीन-सन Tत्री मां5 घतिटे हoई र्थी , जतिक मांSक मां4हम्मांदो अल मां खान क< उपुचर क दोBरन तिदोन!क 22/02/2019 क4 मांकहर अस्पुल, रयापुर मां5 मांSत्या हoई । फलस्वेरूपु, मांग; क< प्रर!तिभक कयामां र्थीन-ग4ल जर, रयापुर मां5 क< गई र्थी त्पुश्च शा^न्या पुर मांग; पु!ज द्ध कर अतिग्रामां कया;वेह ह र्थीन-सन क4 प्रतिषी तिकया गया । स्वेभतिवेक रूपु स मांग; र्थीन-सन क4 प्रप्त ह4न एवे!
आवेश्याक मांग; जpच पु^ण; तिकए जन क उपुर! ह अपुरध पु!ज द्ध तिकया गया । अy प्रर्थीमां स^चन पुत्री मां5 हoआ तिवेल!, अपुन आपु मां5, “दो4षी वेहन” क< स!लिलप्त पुर स!दोह उत्पुन्न करन क आधर नह] न । ऐस स्लिस्र्थीति मां5, ज प्रत्याTदोशाJ सT मां4हम्मांदो ह क कर्थीन} क समांर्थी;न पुलिलस द्वार तिवेवेचन उपुर! प्रस् चलन दोस्वेज} स भ ह4 ह) र्थी उसक कर्थीन} क प्रतिपुर Tण मां5 क4ई खाण्डीन नह] तिकया ज सक ह), क वेल प्रर्थीमां स^चन पुत्री क तिवेल! स लखाद्ध ह4न क आधर पुर
“दो4षी वेहन” क< स!लिलप्त स इं!कर नह] तिकया ज सक ।
8 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021}
11. ऐस दोशा मां5,
Rajani Sahu (पु^वे~क्त) क न्यायादृष्ट! क प्रकशा मां5 याह न्यायालया पु ह) तिक अलिधकरण द्वार अतिभलखा पुर उपुलब्ध सक्ष्या क आधर पुर दोघ;टेन मां5 “दो4षी वेहन” क< स!लिलप्त क स!!ध मां5 अतिभलिललिखा तिनष्कषी; अतिभलखा क प्रतिक^ ल नह] ह) । अy उक्त ति!दो पुर अपु लर्थीJ मां क! पुन क क; स्वे कर या4ग्या नह] ह) ।
12. जहp क, अलिधकरण द्वार प्रतिकर रतिशा क भगन मां5 व्यातिक्रमां क< स्लिस्र्थीति मां5 दोण्डीत्मांक ब्याज अलिधर4तिपु तिकए जन क प्रश्न ह)? उस स!!ध मां5 “प्रश्नध न अलिधतिनण;या” क< कस्लिण्डीक-31 तिनम्ननसर ह)y-
“31. उक्त क ल अलिधतिनतिण; मांआवेज रूपुया 11,80,000 रतिशा मां5 अलिधकरण द्वार पुरिर अ!रिरमां अवेडी; रतिशा यातिदो क4ई ह4, क4 समांया4लिज तिकया जवे । उपुर4क्तनसर आवेदोन क4 आ!तिशाक रूपु स स्वे कर कर हoए आवेदोकगण क पुT मां5 अनवेदोकगण क तिवेरूद्ध तिनम्ननसर अवेडी; पुरिर तिकया ज ह) :- (1) अनवेदोक कमां!क 03, आवेदोकगण क4 रूपुया 11,80,000/- Tतिपु^ति; रतिशा अदो करग । (2) उक्त Tतिपु^ति; रतिशा पुर दोवे तिदोन!क स अ!तिमां अदोयाग क 7 प्रतिशा वेतिषी;क ब्याज भ अनवेदोक कमां!क 03 द्वार आवेदोकगण क4 अदो कर5ग । (3)
x x x x x (4) अनवेदोकगण Tतिपु^ति; क< रतिशा अलिधतिनण;या तिदोन!क स 30 तिदोन क भ र अलिधकरण मां5 जमां कर5, ऐस न करन पुर अलिधतिनण;या तिदोन!क स ब्याज क< दोर 9 प्रतिशा रहग । (5)
x x x x x (6)
x x x x x“
13. मां4टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क< धर-171 क अध न प्रतिकर रतिशा पुर ब्याज प्रदोन तिकए जन र्थी प्रतिकर रतिशा क भगन मां5 व्यातिक्रमां ह4न क< स्लिस्र्थीति मां5 उच्चर ब्याज अलिधर4तिपु तिकए जन क< अलिधकरण क< शातिक्त एवे! उसक< स मांओ!
क स!!ध मां5 मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार
Keshav Bahadur (पु^वे~क्त) क तिनण;या क< कस्लिण्डीक-13 मां5 तिनम्ननसर तिवेलिध प्रतिपुतिदो क< गई ह)y-
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“13. Though Section 110-CC of the Act (corresponding to Section 171 of the new Act) confers a discretion on the Tribunal to award interest, the same is meant to be exercised in cases where the claimant can claim the same as a matter of right. In the above background, it is to be judged whether a stipulation for higher rate of interest in case of default can be imposed by the Tribunal. Once the discretion has been exercised by the Tribunal to award simple interest on the amount of compensation to be awarded at a particular rate and from a particular date, there is no scope for retrospective enhancement for default in payment of compensation. No express or implied power in this regard can be culled out from Section 110-CC of the Act or Section 171 of the new Act. Such a direction in the award for retrospective enhancement of interest for default in payment of the compensation together with interest payable thereon virtually amounts to imposition of penalty which is not statutorily envisaged and prescribed. It is, therefore directed that the rate of interest as awarded by the High Court shall alone be applicable till payment, without the stipulation for higher rate of interest being enforced, in the manner directed by the Tribunal.”
14. मांनन या उच्चमां न्यायालया द्वार प्रतिपुतिदो उपुया;क्त तिवेलिध क प्रकशा मां5 "प्रश्नध न अलिधतिनण;या" क पुरिरशा लन करन स याह स्लिस्र्थीति स्पुष्ट ह4 ह) तिक अलिधकरण द्वार प्रतिकर रतिशा पुर 7% वेतिषी;क ब्याज अलिधर4तिपु तिकया जन तिवेलिधसम्मां ह) । र्थीतिपु, अलिधतिनण;या क< कस्लिण्डीक-31(4) क मांध्यामां स अलिधतिनण;या तिदोन!क स 30 तिदोवेस क भ र प्रतिकर रतिशा जमां न तिकए जन क< स्लिस्र्थीति मां5 9% वेतिषी;क ब्याज अलिधर4तिपु तिकया गया ह) । जतिक मां4टेर यान अलिधतिनयामां, 1988 क< धर 173 क अ!ग; अपु ल प्रस् करन ह 90 तिदोवेस क< वे)धतिनक अवेलिध तिनध;रिर ह) । ऐस दोशा मां5 याह 9% ब्याज अलिधर4पुण न्याया4तिच नह] पुया ज ।
15.
ऐस दोशा मां5,
Keshav Bahadur (पु^वे~क्त) क न्यायादृष्ट! क प्रकशा मां5 याह न्यायालया पु ह) तिक कस्लिण्डीक-31(4) क मांध्यामां स अलिधर4तिपु उच्चर ब्याज तिवेलिधसम्मां नह]
10 / 10 {MA(C) No. 461 of 2021} ह) । अy उक्त स मां क अपु ल स्वे कर क< ज ह) र्थी "प्रश्नध न अलिधतिनण;या" क< कस्लिण्डीक-31(4) अपुस् क< ज ह) । शाषी क< पुतिष्ट क< ज ह) ।
16. उपुर4क्तनसर, अपु ल आ!तिशाक रूपु स स्वे कर क< ज ह) ।
17. तिनण;या क< प्रति क सर्थी अलिधकरण क अतिभलखा शा घ्रपु^वे;क आवेश्याक कया;वेह ह स^चनर्थी; वे पुलनर्थी; वेपुस प्रतिषी ह4 । सह /- (स!जया क मांर जयासवेल) न्यायाध शा पो
मन