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High Court of Chhattisgarh · body

2021 DAILYLAW 482 (CHH)

INDA BAI NISHAD v. RAMSHWAROOP SAHU

MAC/605/2021 · 2026-07-07

Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2021

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} CGHC010265832021 2026:CGHC:28171 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर तिवेतिवेध अपु ल ( प्रतिकर ) क्रमां!क -605 /2021 1. इं!दा ई ति,षादा पुति-स्वेग/या रतिरमां, आया-लगभग 62 वेषा2, 2. रमांक मांर तिपु-स्वेग/या रतिरमां, आया-लगभग 47 वेषा2, 3. ति5वेसया तिपु-स्वेग/या रतिरमां, आया-लगभग 32 वेषा2, सभ ति,वेस -,7ति,या कछर, पुलिलस था,-मां!गल , हस ल एवे! लि<ल-मां!गल (छत्ती सगढ़) -----अपु लथा/गण/दावेक2गण तिवेरूद्घ 1. रमांस्वेरूपु सह@, तिपु-सखी रमां सह@, आया लगभग 31 वेषा2, ति,वेस -धपुई, पुBस्ट- पुण्डरभठा, पुलिलस था,-मां!गल , हस ल एवे! लि<ल-मां!गल (छत्ती सगढ़) (दाBषा वेह, हईवे टGक क्रमां!क-स .< .-28-एच.-2613 क वेह, चलक) 2. प्र5! 5क्ल, तिपु-प्रमांBदा 5क्ल, ति,वेस -पुण्डरभठा, पुलिलस था,-मां!गल , हस ल एवे! लि<ल-मां!गल (छत्ती सगढ़) (दाBषा वेह, हईवे टGक क्रमां!क-स .< .-28-एच.-2613 क पु!< कK  स्वेमां ) 3. दा न्या7 इंण्डिण्डया क! पु, लिलतिमांटड (अलिधति,ण2या मांM  मां अवेलिध क उल्लेखी ,हO) द्वार 5खी प्र!धक, 5खी कया2लया–रमां टGड सMटर, तिद्वा या ल, या7.ट .आई. भवे,, र< वे प्लज़ा क समांक्ष, पुलिलस था,–लिसट कBवेल , हस ल एवे! लि<ल–तिलसपुर (छत्ती सगढ़) (दाBषा वेह, हईवे टGक क्रमां!क-स .< .-28-एच.-2613 क  मां क! पु, ) -----प्रत्याथा/गण POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.09 10:48:25 +0530 2 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} अपु लथा/गण/दावेक2गण द्वार : श्री दावे5 < . क ल, अलिधवेक्ता । प्रत्याथा/ क्रमां!क-1 एवे! 2 द्वार : सश्री मांधति,5 लिस!ह, अलिधवेक्ता कZ ओर स सश्री अतिदाति <B5 , अलिधवेक्ता । प्रत्याथा/ क्रमां!क-3 द्वार : श्री दा5रथा गप्ता, अलिधवेक्ता कZ ओर स श्री प्रवे5 सह@, अलिधवेक्ता । न्यायामां7ति2 श्री स!<या क मांर <यासवेल !! ति,ण2या पु ठा पुर पुरिर !! 08/07/2026 1. मांBटर या, अलिधति,यामां, 1988 कZ धर 173 क अ!ग2 प्रस् इंस अपु ल मांM मांBटर दार्घ2ट, दावे अलिधकरण, मां!गल , लि<ल-मां!गल (छत्ती सगढ़) द्वार दावे प्रकरण क्रमां!क- 01/2019, “इं!दा ई ति,षादा वेगbरह तिवेरुद्ध रमांस्वेरूपु सह@ वेगbरह” मांM पुरिर अलिधति,ण2या तिदा,!क 11/12/2019 कB च,f दा गई हb । लि<सक ह अपु लथा/गण कZ ओर स प्रस् धर-166 मांBटर या, अलिधति,यामां, 1988 क दावे आवेदा, खीरिर< कर तिदाया गया हb । लि<स आग स!क्षपु मांM “प्रश्,ध , अलिधति,ण2या” स स!Bलिध तिकया < रह हb । 2. प्रकरण क थ्या, स!क्षपु मांM, इंस प्रकर हi तिक तिदा,!क 31/10/2018 कB सया! लगभग 06:30 < रतिरमां ग्रामां !दाल स सइंतिकल द्वार अपु, ग्रामां ,7ति,या कछर < रह था । उस समांया रयापुर कZ ओर स आ रह हईवे टGक क्रमां!क स .< .-28-एच.-2613 (लि<स आग स!क्षपु मांM "दाBषा वेह," स स!Bलिध तिकया < रह हb) क चलक रमांस्वेरूपु सह@ द्वार उक्ता वेह, कB < एवे! लपुरवेह पु7वे2क सड़क क गल तिदा5 मांM चल हmए रतिरमां कZ सइंतिकल कB टक्कर मांर दा , लि<सक पुरिरणमांस्वेरूपु रतिरमां कB ग!भ र चBटM आई! था उसकZ र्घट,स्थाल पुर ह मांKत्या हB गई । उक्ता र्घट, क स!!ध मांM पुलिलस था, 3 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} मां!गल , लि<ल मां!गल (छत्ती सगढ़) मांM अपुरध क्रमां!क 506/2018 पु!< द्ध कर भर या दाण्ड स!तिह कZ धर 304(क) क अ!ग2 अपुरध कयामां तिकया गया । मांKक क तिवेलिधक वेरिरस,, अथा2n उसकZ पुत्, इं!दा ई ति,षादा था पुत्रगण रमांक मांर एवे! ति5वेसया द्वार मांBटर या, अलिधति,यामां, 1988 कZ धर 166 क अ!ग2 प्रतिकर प्रप्ता कर, ह दावे आवेदा, प्रस् तिकया गया । 3. “प्रश्,ध , अलिधति,ण2या” क ह अलिधकरण , अतिभलखी पुर उपुलब्ध मांfलिखीक एवे! दास्वे< सक्ष्या क पुरिर5 ल, उपुर! याह ति,ष्कषा2 अतिभलिललिखी तिकया तिक दावेक2गण द्वार अपु, पुक्ष समांथा2, मांM सतिक्षयाs क पुर क्षण करए <, क अतिरिरक्ता मांग2 स7च,, प्रथामां स7च, पुत्र, र्घट,स्थाल क ,क्5 पु!च,मां, 5वे पुर क्षण ह आवेदा,, 5वे पुर क्षण प्रतिवेदा, था  मां पुtलिलस प्रस् कZ गई था । थातिपु, पुलिलस द्वार प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदा, अतिभलखी पुर प्रस् ,हO तिकया गया । फलस्वेरूपु, अलिधकरण , वेदा-प्रश्, क्रमां!क-1 क स!!ध मांM याह ति,ष्कषा2 तिदाया तिक याह प्रमांतिण ,हO हmआ हb तिक दार्घ2ट, तिकस व्यातिक्ता कZ उपुक्ष एवे! उवेलपु, क करण र्घतिट हmई । याह भ प्रमांतिण ,हO पुया तिक रतिरमां कZ मांKत्या उक्ता दार्घ2ट, क पुरिरणमांस्वेरूपु हmई था । इंसक अतिरिरक्ता, अलिधकरण , याह भ अतिभलिललिखी तिकया तिक अतिभलखी पुर प्रस्  मां पुtलिलस मांM दाBषा वेह, क पु7ण2 पु!< या, क्रमां!क अ!तिक , हBकर क वेल "स .< .-10" अ!तिक हb । उक्ता आधरs पुर अलिधकरण द्वार अपु लथा/गण/दावेक2गण क दावे आवेदा, ति,रस् कर तिदाया गया । लि<सक तिवेरूद्घ याह अपु ल प्रस् कZ गई हb । 4. अपु लथा/गण/दावेक2गण कZ ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वा, अलिधवेक्ता , आदा5 41 ति,यामां 27 सहपुतिठा धर 151, व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क अ!ग2 प्रस् अ!रिरमां आवेदा, 4 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} क्रमां!क-01/2026, <B 5पुथापुत्र द्वार समांलिथा2 हb, क मांध्यामां स पुलिलस था, मां!गल क अपुरध क्रमां!क-506/2018 मांM प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदा, कZ प्रमांतिण प्रति अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांM अतिभलखी पुर लिलए <, क ति,वेदा, तिकया । तिवेद्वा, अलिधवेक्ता , क2 प्रस् तिकया तिक उक्ता दास्वे< क न्यायाBतिच एवे! प्रभवे ति,ण2या क लिलए अतिभलखी पुर लिलया <, आवेश्याक हb, क्याsतिक अलिधकरण , "प्रश्,ध , अलिधति,ण2या" मांM अ!तिमां प्रतिवेदा, अतिभलखी पुर प्रस् , हB, क आधर पुर दावेक2गण क दावे आवेदा, ति,रस् कर तिदाया हb । अx उक्ता दास्वे< कB अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांM अतिभलखी पुर ग्राहण कर हmए "प्रश्,ध , अलिधति,ण2या" कB अपुस् तिकया <ए था प्रकरण कB तिवेलिध क अ,सर पु,तिवे2चर ह स!!लिध अलिधकरण कB प्रतिप्रतिषा तिकया <ए । 5. प्रत्याथा/गण कZ ओर स उपुण्डिस्था तिवेद्वा, अलिधवेक्तागण , उक्ता अ!रिरमां आवेदा, था मां7ल अपु ल, दाB,s क तिवेरBध कर हmए क2 प्रस् तिकया तिक आदा5 41 ति,यामां 27 सहपुतिठा धर 151, व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क अ!ग2 अतिरिरक्ता सक्ष्या कB क वेल अपुवेदास्वेरूपु पुरिरण्डिस्थातियाs मांM ह अतिभलखी पुर लिलया < सक हb । प्रस् प्रकरण मांM अपु लथा/गण/ दावेक2गण द्वार याह स्पुष्ट ,हO तिकया गया हb तिक <!च क दाfर, स!!लिध दास्वे< प्रप्ता कर उस अलिधकरण क समांक्ष प्रस् कर, ह उन्हs, समांया रह क्या प्रयास तिकए था । वेस्x प्रस् अ!रिरमां आवेदा, अलिधकरण क समांक्ष रह गई कमां कZ पु7ति2 क उद्देश्या स प्रस् तिकया गया हb, लि<सकZ अ,मांति तिवेलिध क अ!ग2 ,हO दा < सक । अx अ!रिरमां आवेदा, ति,रस् तिकया <ए । 6. उभयापुक्ष क क2 श्रीवेण तिकए गए था अतिभलखी क पुरिर5 ल, तिकया गया । 7. आदा5 41 ति,यामां 27 व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह, क प्रवेध, ति,म्,वे हbx- 5 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} “27. अपु ल न्यायालया मांM अतिरिरक्ता सक्ष्या क पु5 तिकया <,- (1) अपु ल क पुक्षकर अपु ल न्यायालया मांM अतिरिरक्ता सक्ष्या चह वेह मांfलिखीक हB या दास्वे< , पु5 कर, क हकदार ,हO हsग, तिक!  यातिदा- (क) उच्च न्यायालया , लि<सकZ तिडक्रZ कZ अपु ल कZ गई हb, ऐस सक्ष्या ग्राहण कर, स इंन्कर कर तिदाया ह <B ग्राहण तिकया <, चतिहए था, अथावे [(कक) वेह पुक्षकर <B अतिरिरक्ता सक्ष्या पु5 कर, चह हb याह लिसद्घ कर दा ह तिक वेह सम्याकn त्पुर क प्रयाBग कर क वे<7दा ऐस सक्ष्या कZ <,कर ,हO रखी था या उस उस समांया पु5 ,हO कर सक था < वेह तिडक्रZ पुरिर कZ गई था लि<सक तिवेरूद्घ अपु ल कZ गई हb, अथावे] (खी) अपु ल न्यायालया तिकस दास्वे< क पु5 तिकए <, कZ या तिकस सक्ष कZ पुर क्ष कZ <, कZ अपुक्ष या B स्वेया! ति,ण2या स,, क समांथा2 हB, क लिलए या तिकस अन्या सरवे,n हक क लिलए कर, B अपु ल न्यायालया ऐस सक्ष्या क लिलया <, या दास्वे< क पु5 तिकया <, या सक्ष कZ पुर क्ष क तिकया <, अ,ज्ञा कर सक ग । (2) <ह€ कहO अतिरिरक्ता सक्ष्या पु5 कर, क लिलए अपु ल न्यायालया अ,ज्ञा दा दा हb वेह€ न्यायालया ऐस सक्ष्या क ग्राहण तिकए <, क करणs कB लखीद्घ करग ।” 8. उक्ता प्रवेध, क पुरिर5 ल, स याह स्पुष्ट हB हb तिक यातिदा अपु ल या न्यायालया स!ष्ट हB तिक तिकस दास्वे< कB अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांM अतिभलखी पुर लिलया <, न्यायाBतिच ति,ण2या प्रदा, कर, अथावे तिकस अन्या सरवे, करणवे5 आवेश्याक हb, B वेह ऐस दास्वे< कB अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांM प्रस् तिकए <, कZ अ,मांति प्रदा, कर सक हb । तिवेचरध , प्रकरण मांM याह ति,तिवे2वेदा हb तिक दावेक2गण द्वार अपु, पुक्ष समांथा2, मांM सतिक्षयाs क पुर क्षण करए <, क अतिरिरक्ता मांग2 स7च,, प्रथामां स7च, पुत्र, र्घट,स्थाल क ,क्5 पु!च,मां, 5वे पुर क्षण ह आवेदा,, 5वे पुर क्षण प्रतिवेदा, था  मां पुtलिलस अतिभलखी पुर प्रस् कZ गई था । थातिपु, पुलिलस क अ!तिमां प्रतिवेदा, क अभवे मांM अलिधकरण द्वार दावे 6 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} आवेदा, ति,रस् कर तिदाया गया । ऐस पुरिरण्डिस्थातियाs मांM था प्रकरण क समांस् थ्या एवे! अतिभलखी पुर उपुलब्ध सक्ष्या कZ प्रकK ति कB दृतिष्टग रखी हmए, याह न्यायालया पु हb तिक न्यायातिह मांM दावेक2गण कB उक्ता दास्वे< अतिभलखी पुर प्रस् कर, था उसक स!!ध मांM स,वेई क अवेसर प्रदा, तिकया <, न्यायाBतिच हBग । 9. <ह€ क प्रदा52-ए/5 क रूपु मांM प्रस्  मां पुtलिलस मांM कलिथा दाBषा वेह, क पु7ण2 पु!< या, क्रमां!क क उल्लेखी , हB, क प्रश्, हb? इंस स!!ध मांM तिवेचर कर, पुर याह स्पुष्ट हB हb तिक उक्ता  मां पुtलिलस कZ प्रतिलिलतिपु स्वेया! दावेक2गण द्वार अतिभलखी पुर प्रस् कZ गई हb । थातिपु, याह स्पुष्ट कर, तिक उक्ता  मां पुtलिलस तिकस वेह, क स!!ध मांM <र कZ गई था , क वेल दावेक2गण क ह ,हO, ण्डिƒक वेह, स्वेमां एवे!  मां क! पु, क भ समां, रूपु स उत्तीरदातियात्वे हb । ऐस पुरिरण्डिस्थातियाs मांM इंस प्रश्, क समांतिच पुर क्षण तिकए ति, मांत्र उक्ता आधर पुर दावे आवेदा, क ति,रस् करण न्यायाBतिच प्र  ,हO हB । अx इंस न्यायालया क मां हb तिक "प्रश्,ध , अलिधति,ण2या" ण्डिस्थार रखी <, याBग्या ,हO हb । न्यायातिह मांM दावेक2गण क सथा-सथा प्रत्याथा/गण कB भ उक्ता तिवेषाया मांM अतिरिरक्ता सक्ष्या प्रस् कर, था स,वेई क समांतिच अवेसर प्रदा, तिकया <, न्यायाBतिच हBग । 10. अx, आदा5 41 ति,यामां 27 सहपुतिठा धर 151, व्यावेहर प्रतिक्रया स!तिह क अ!ग2 प्रस् अ!रिरमां आवेदा, क्रमां!क-01/2026 स्वे कर तिकया < हb । अपु लथा/गण/ दावेक2गण द्वार प्रस् पुलिलस था, मां!गल क अपुरध क्रमां!क-506/2018 क अ!तिमां प्रतिवेदा, अतिरिरक्ता सक्ष्या क रूपु मांM अतिभलखी पुर लिलया < हb । फलस्वेरूपु, "प्रश्,ध , अलिधति,ण2या" अपुस् तिकया < हb । 7 / 7 {MA(C) No. 605 of 2021} 11. प्रकरण कB तिवेलिध क अ,सर पु,x तिवेचर एवे! ति,रकरण ह स!!लिध अलिधकरण कB इंस ति,दा…5 क सथा प्रतिप्रतिषा तिकया < हb तिक उक्ता अ!तिमां प्रतिवेदा, कB अतिभलखी पुर ल, क उपुर! उभयापुक्ष कB आवेश्याक,सर अतिरिरक्ता सक्ष्या प्रस् कर, था स,वेई क समांतिच अवेसर प्रदा, तिकया <ए । त्पुश्चn अतिभलखी पुर उपुलब्ध समांस् मांfलिखीक एवे! दास्वे< सक्ष्याs क सम्याकn मां7ƒया!क, कर हmए प्रकरण क तिवेलिध क अ,सर याथा5 घ्र ति,रकरण तिकया <ए । 12. उभयापुक्ष कB ति,दा…ति5 तिकया < हb तिक अलिधकरण क समांक्ष तिदा,!क-10/08/2026 कB 11.00 < अपु, अलिधवेक्ता क मांध्यामां स उपुण्डिस्था रहM । 13. उपुरBक्ता,सर, अपु ल क ति,रकरण तिकया < हb । 14. ति,ण2या कZ प्रति क सथा अलिधकरण क अतिभलखी 5 घ्रपु7वे2क आवेश्याक कया2वेह ह स7च,था2 वे पुल,था2 वेपुस प्रतिषा हB । सह /- (स!<या क मांर <यासवेल) न्यायाध 5 पो मन