Research › Search › Judgment

High Court of Chhattisgarh · body

2020 DAILYLAW 644 (CHH)

STATE OF CHHATTISGARH v. DURGESH TONDRE

ACQA/79/2020 · 2026-08-12

Shri Sanjay Agrawal, Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2020

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} CGHC010043042020 2026:CGHC:35906-DB अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल क्रमु!क -79 /2020  छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस च,क--जाल!धा, पुलिलस थाना-खै3रगढ़, लिजाल- रजाना!दोग!वे, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा4/रज्या तिवेरूद्घ  दोग7श टोण्ड्रे< तिपु-चलल टोण्ड्रे<, उम्र-लगभग 21 वेष@, तिनावेस -ग्रामु पुतिटोया, पुलिलस च,क--जाल!धा, पुलिलस थाना-खै3रगढ़, लिजाल-रजाना!दोग!वे, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो /अतिभया अपु लथा4/रज्या द्वार : श्री तिवेनादो टोकमु, शसक-या अलिधावे । उत्तीरवेदो /अतिभया द्वार : श्री लिसद्घथा@ पुण्ड्रेया सतिE सश्री तिनाष्ठा लिस!E, अलिधावेगण । यागल पु ठःI मुनाना या न्यायामुJति@ श्री स!जाया अग्रावेल , न्यायाधा श मुनाना या न्यायामुJति@ श्री स!जाया क मुर जायासवेल , न्यायाधा श !! तिनाण@या पु ठः पुर पुरिर !! 13/08/2026 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.08.14 19:01:47 +0530 2 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} द्वार स!जाया क मुर जायासवेल , न्यायाधा श 1. दोण्ड्रे प्रतिक्रया स!तिE, 1973 क- धार 378(1) क अ!ग@ दोषमुति क तिवेरुद्ध प्रस् इस अपु ल मुV अपुर सत्र न्यायाधा श, खै3रगढ़, लिजाल-रजाना!दोग!वे, छत्ती सगढ़ द्वार तिवेशष सत्र प्रकरण क्रमु!क-07/2018, “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरुद्ध दोग7श टोण्ड्रे<” मुV तिदोना!क 30/08/ 2019 क पुरिर तिनाण@या क- वे3धा क चना, दो गई E3, लिजासक द्वार अतिभयाजाना क मुमुल स!दोE स पुर प्रमुतिण ना पुए जाना पुर अतिभया क भर या दोण्ड्रे स!तिE, 1860 क- धार-363 एवे! 376 था ल\तिगक अपुरधा] स लक] क स!रक्षण अलिधातिनायामु, 2012 क- धार 3/4 क अपुरधा] स दोषमु तिकया गया E3 । लिजास स!क्षपु मुV “प्रश्नाधा ना तिनाण@या” स स!लिधा तिकया जा रE E3 । 2. अतिभयाजाना क मुमुल, स!क्षपु मुV, इस प्रकर E3 तिक पु तिa (अ.स.-2) था अतिभया दोग7श दोना] ग्रामु पुतिटोया क तिनावेस E\ । पु तिa कक्ष दोसवेc क- छत्र था । घटोना तिदोना!क 13/03/2018 क वेE पुर क्ष दोना जाल!धा Eईस्कJ ल गई था । पुर क्ष समुप्त Eना क पुश्च जा वेE सइतिकल स अपुना ग्रामु वेपुस आ रE था , शरगढ़ मुa क पुस अतिभया ना उस रक था उसक सथा खै3रगढ़ घJमुना जाना क लिलए कE और लिजादो करना लग । त्पुश्च पु तिa अपुना घर गई, वेE! स 3यार Eकर शरगढ़ मुa पुर वेपुस आई और अतिभया क सथा स मुV 3ठःकर चल गई । अतिभया पुEल उस अपुना मु,स क घर !धावेरदो लकर गया, जाE! दोना] रतित्र मुV रुक । अगल तिदोना तिदोना!क 14/03/2018 क प्रI लगभग 06:00 जा वे ड्रे]गरगढ़ गए और वेE! रलवे स्टोशना पुर रतित्र मुV रुक । त्पुश्च तिदोना!क 15/03/2018 क प्रI लगभग 04:00 जा टो<ना स नागपुर गए, जाE! अतिभया उस अपुना मु! क पुस ल गया । अतिभया क- मु! क मुर टोण्ड्रे< उस तिदोना रतित्र 3 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} लगभग 08:30 जा पु तिa एवे! अतिभया क टो<ना स दोग@ स्टोशना लकर आई था तिदोना!क 16/03/2018 क जाल!धा पुलिलस च,क- पुEj!चकर पु तिa क प्रस् तिकया । इसक पुJवे@ E पु तिa क- मु! क- सJचना पुर तिदोना!क 13/03/2018 क प्रथामु सJचना पुत्र दोजा@ क- जा चक- था । अतिभया क- मु! द्वार पु तिa क पुलिलस क समुक्ष प्रस् तिकए जाना पुर उसक- रमुदोग क पु!चनामु प्रदोश@ पु -8 3यार तिकया गया । पु तिa क तिचतिकत्सक-या पुर क्षण करया गया था तिचतिकत्सक द्वार 3यार स्लइड्रे क रसयातिनाक पुर क्षण E भजा गया । घटोनास्थाल क नाक्श 3यार तिकया गया था सतिक्षया] क कथाना दोजा@ तिकए गए । पु तिa क- जान्मुतिलिथा क स!!धा मुV अ!कसJच एवे! दोलिखैल-खैरिरजा पु!जा जाब् क- गई । स!पुJण@ तिवेवेचना उपुर! अतिभया क तिवेरुद्ध अतिभयागपुत्र प्रस् तिकया गया । 3. तिवेचरण न्यायालया क समुक्ष अतिभयाजाना क- ओर स अपुना पुक्ष समुथा@ना मुV 16 सतिक्षया] क पुर क्षण था 40 दोस्वेजा प्रदोश@ तिचन्E!तिक करए गए । धार-313 दोण्ड्रे प्रतिक्रया स!तिE क E कथाना मुV अतिभया ना अपुना तिवेपुर सतिक्षया] क कथाना] क इनाकर कर Ejए स्वेया! क तिनादोnष Eना या था चवे मुV कई सक्ष्या प्रस् नाEc तिकया गया । उभयापुक्ष क सना जाकर तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रश्नाधा ना दोषमुति क तिनाण@या पुरिर तिकया गया E3 लिजास इस अपु ल मुV चना, दो गई E3 । 4. अपु लथा4/रज्या क- ओर स उपुस्थिस्था तिवेद्वाना अलिधावे ना क@ तिकया E3 तिक पु तिa (अ.स.-2) ना अतिभयाजाना क मुमुल क पुJण@I समुथा@ना तिकया E3, लिजासक- पुतिq अन्या अतिभयाजाना सतिक्षया] क कथाना] स भ E E3 । तिवेद्यलया क तिशक्षक दोमुदोर प्रसदो (अ.स.-10) ना पु तिa क- दोलिखैल-खैरिरजा पु!जा प्रदोश@ पु -18 क प्रमुतिण तिकया E3, लिजासक अनासर पु तिa क- जान्मुतिलिथा 12/07/2001 E3 । उ जान्मुतिलिथा क अनासर 4 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} घटोना तिदोना!क 13/03/2018 क पु तिa 18 वेष@ स कमु आया क- था । ऐस स्थिस्थाति मुV तिवेचरण न्यायालया द्वार उपुलब्धा सक्ष्या पुर तिवेश्वेस ना कर Ejए अतिभया क दोषमु तिकया जाना त्रतिटोपुJण@ E3 । अतिभया क तिवेरुद्ध अतिभयाजाना क मुमुल प्रमुतिण E3 । अI प्रश्नाधा ना दोषमुति क तिनाण@या अपुस् कर अपु ल स्वे कर क- जाए था अतिभया क दोषलिसद्ध कर तिवेलिधा क अनासर दोस्थिण्ड्रे तिकया जाए । 5. इसक तिवेपुर , उत्तीरवेदो /अतिभया क- ओर स उपुस्थिस्था तिवेद्वाना अलिधावे ना तिवेचरण न्यायालया क प्रश्नाधा ना तिनाण@या क समुथा@ना कर Ejए क@ तिकया E3 तिक पु तिa क- जान्मुतिलिथा तिकस तिवेश्वेसना या एवे! स्पुq सक्ष्या स प्रमुतिण नाEc Ejई E3 । तिचतिकत्सक ल ल रमुटोक (अ.स.-9) द्वार पु तिa क- आया क स!!धा मुV प्रस् एक्स-र जा!च प्रतिवेदोना प्रदोश@ पु -17 मुV उसक- आया 15 स 17 वेष@ क मुध्या ई गई E3 था उसमुV दो वेष@ क- कमु अथावे वेtतिद्ध क- स!भवेना E3 । इस प्रकर घटोना तिदोना!क क पु तिa क 18 वेष@ स कमु आया क- Eना क थ्या अतिभयाजाना प्रमुतिण नाEc कर सक E3 । इसक अतिरिर, पु तिa क आचरण एवे! स्वेया! उसक कथाना] स याE पुरिरलतिक्ष E E3 तिक वेE अतिभया क सथा सEमु पुक्ष रE E3 । अI तिवेचरण न्यायालया द्वार अतिभया क दोषमु तिकए जाना क तिनाष्कष@ पुJण@I उतिच E3 और उसमुV Eस्क्षपु क कई आधार नाEc E3 । फलI अपु ल खैरिरजा तिकए जाना क तिनावेदोना तिकया गया । 6. उभयापुक्ष क क@ श्रीवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभलखै क सJक्ष्मुपुJवे@क पुरिरश लना तिकया गया । 7. न्यायादृq! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुV मुनाना या उच्चमु न्यायालया द्वार दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् अपु ल क तिनारकरण E क छ 5 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} न्यातियाक लिसद्घ! प्रतिपुतिदो तिकए गए E\ । लिजासमुV सक्ष्या क समुग्रा मुJल्या!कना, दो स!भतिवे दृतिqकण] क- स्थिस्थाति मुV अतिभया क पुक्ष मुV दृतिqकण अपुनाए जाना था तिवेचरण न्यायालया क तिनाष्कष@ मुV अवे3धा, तिवेकt ति अथावे तिवेलिधा या थ्या स!!धा त्रतिटो पुए जाना पुर E Eस्क्षपु तिकए जाना क लिसद्ध! प्रतिपुतिदो तिकए E\ । 8. तिचतिकत्सक ल ल रमुटोक (अ.स.-9) ना पु तिa क- आया स!!धा एक्स-र जा!च क आधार पुर प्रतिवेदोना प्रदोश@ पु -17 प्रस् तिकया E3, लिजासमुV पु तिa क- आया 15-17 वेष@ क मुध्या आ!क- गई E3 । उ तिचतिकत्स या आया-तिनाधा@रण मुV दो वेष@ क- कमु अथावे वेtतिद्ध क- स!भवेना भ तिवेद्यमुना E3 । अI उ प्रतिवेदोना क अपुना आपु मुV घटोना तिदोना!क क पु तिa क- आया 18 वेष@ स कमु Eना क तिनाण@याक प्रमुण नाEc मुना जा सक । 9. सवे@प्रथामु पु तिa क- आया क स!!धा मुV तिवेचर तिकया जाना उतिच Eग । अतिभयाजाना क मुख्या आधार पु तिa क- जान्मुतिलिथा 12/07/2001 Eना क E3, लिजासक आधार पुर घटोना तिदोना!क 13/03/2018 क उसक- आया 18 वेष@ स कमु ई गई E3 । इस स!!धा मुV पु तिa क तिपु (अ.स.-1) था मु (अ.स.-7) क कथाना] क पुर क्षण तिकया जाना आवेश्याक E3 । दोना] E सक्ष न्यायालया ना कथाना मुV पु तिa क- जान्मुतिलिथा स्पुq रूपु स पुना मुV असमुथा@ रE E\ । उन्E]ना ऐस भ कई कथाना नाEc तिकया E3 तिक तिवेद्यलया मुV प्रवेश क समुया उन्E]ना स्वेया! पु तिa क- उ जान्मुतिलिथा ई था । पु तिa क शल क तिशक्षक दोमुदोर प्रसदो ना दोलिखैल खैरिरजा पु!जा प्रदोश@ पु -18 मुV पु तिa क- जान्मुतिलिथा 12/07/2001 दोजा@ Eना या E3 । ऐस स्थिस्थाति मुV दोलिखैल-खैरिरजा पु!जा मुV अ!तिक जान्मुतिलिथा क- तिवेश्वेसना या क पुर क्षण आवेश्याक E जा E3 । 6 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} 10. न्यायादृq! Manak Chand alias Mani v. State of Haryana, (2024) 20 SCC 561 मुV मुनाना या उच्चमु न्यायालया द्वार तिवेद्यलया ना अतिभलखै मुV अ!तिक जान्मुतिलिथा क- सक्ष्यात्मुक मुEत्ती क स!!धा मुV पुJवे@ मुV प्रतिपुतिदो तिवेलिधा क दोEरया गया E3, जा कस्थिण्ड्रेक- 18 एवे! 19 मुV तिनाम्नानासर E3I- “18. This Court in Birad Mal Singhvi v. Anand Purohit (1988) Supp SCC 604 had observed that the date of birth in the register of a school would not have any evidentiary value without the testimony of the person making the entry or the person who gave the date of birth. 14. …The date of birth mentioned in the scholar’s register has no evidentiary value unless the person who made the entry or who gave the date of birth is examined. The entry contained in the admission form or in the scholar’s register must be shown to be made on the basis of information given by the parents or a person having special knowledge about the date of birth of the person concerned. If the entry in the scholar’s register regarding date of birth is made on the basis of information given by parents, the entry would have evidentiary value but if it is given by a stranger or by someone else who had no special means of knowledge of the date of birth, such an entry will have no evidentiary value. 19. In our opinion, the proof submitted by the prosecution with regard to the age of the 7 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} prosecutrix in the form of the school register was not sufficient to arrive at a finding that the prosecutrix was less than sixteen years of age, especially when there were contradictory evidences before the Trial Court as to the age of the prosecutrix. It was neither safe nor fair to convict the accused, particularly when the age of the prosecutrix was such a crucial factor in the case.” 11. मुनाना या उच्चमु न्यायालया ना न्यायादृq! Alamelu and another v. State represented by Inspector of Police, (2011) 2 SCC 385 में याE अतिभतिनाधा@रिर तिकया E3 तिकI- “the transfer certificate which is issued by a government school and is duly signed by Headmaster would be admissible in evidence u/s 35 of the Evidence Act, 1872. However, the admissibility of such a document would be of not much evidentiary value to prove the age of the prosecutrix in the absence of the material on the basis of which the age was recorded. The Supreme Court held under the facts and circumstances of the case that the date of birth mentioned in the transfer certificate would have no evidentiary value unless the person, who made the entry or who gave the date of birth is examined.” 12. इसक अतिरिर, मुनाना या उच्चमु न्यायालया ना न्यायादृq! Birad Mal Singhvi Vs. Anand Purohit, AIR 1988 SC 1796 क मुमुल मुV याE अतिभतिनाधा@रिर तिकया E3 तिक:- “to render a document admissible under Section 35, three conditions must be satisfied, firstly, entry that is relied on must be one in a public or other official book, register or record, secondly, it must be an entry stating a fact in issue or relevant fact; and thirdly, it must be made by a public servant in discharge of his official duty, or any other person in performance of a duty specially enjoined by law. 8 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} An entry relating to date of birth made in the school register is relevant and admissible under Section 35 of the Act but the entry regarding to the age of a person in a school register is of not much evidentiary value to prove the age of the person in the absence of the material on which the age was recorded.” 13. दोलिखैल-खैरिरजा रलिजास्टोर क तिकस प्रकर प्रस!तिगक मुना जा E3, याE प्रश्ना मुनाना या उच्चमु न्यायालया क समुक्ष न्यायादृq! Babloo Pasi v. State of Jharkhand and another (2008) 13 SCC 133, क मुमुल मुV तिवेचरथा@ आया, लिजासमुV तिनाम्नानासर अतिभतिनाधा@रिर तिकया गया E3:- “22. It is well settled that it is neither feasible nor desirable to lay down an abstract formula to determine the age of a person. The date of birth is to be determined on the basis of material on record and on appreciation of evidence adduced by the parties. The Medical evidence as to the age of a person, though a very useful guiding factor, is not conclusive and has to be considered along with other cogent evidence. 28. It is trite that to render a document admissible under Section 35, three conditions have to be satisfied, namely: (i) entry that is relied on must be one in a public or other official book, register or record; (ii) it must be an entry stating a fact in issue or a relevant fact, and (iii) it must be made by a public servant in discharge of his official duties, or in performance of his duty especially enjoined by law. An entry relating to date of birth made in the school register is relevant and admissible under Section 35 of the Act but the entry regarding the age of a person in a school register is of not much evidentiary value to prove the age of the person in the absence of the material on which the age was recorded. (See: Birad Mal Singhvi v. Anand Purohit (1997) 4 SCC 24).” 14. मुनाना या उच्चमु न्यायालया ना न्यायादृq! Sunil v. State of Haryana (2010) 1 SCC 742 क मुमुल मुV तिनाम्नानासर अतिभतिनाधा@रिर तिकया E3:- 9 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} “26. Bishan, PW8, the father of the prosecutrix has also not been able to give correct date of birth of the prosecutrix. In his statement he clearly stated that he is giving an approximate date without any basis or record. In a criminal case, the conviction of the appellant cannot be based on an approximate date which is not supported by any record. It would be quite unsafe to base conviction on an approximate date. 34. On consideration of the totality of the facts and circumstances of this case, it would be unsafe to convict the appellant when there are so many infirmities, holes and lacunas in the prosecution version. The appellant is clearly entitled to benefit of doubt and consequently the appeal filed by the appellant deserves to be allowed. The appellant is directed to be released forthwith, if not required in any case.” 15. उपुर न्यायादृq! क प्रकश मुV तिवेचरधा ना मुमुल मुV आया सक्ष्या पुर तिवेचर करना Eग । याE मुEत्वेपुJण@ E3 तिक दोलिखैल-खैरिरजा पु!जा प्रदोश@ पु -18 क प्रमुतिण करना वेल तिशक्षक दोमुदोर प्रसदो (अ.स.-10) ना अपुना प्रतिपुर क्षण मुV स्पुq रूपु स स्वे कर तिकया E3 तिक उ पु!जा मुV जान्मुतिलिथा क इ!द्राजा उनाक Eस्लखै मुV नाEc E3 । उसना याE भ स्वे कर तिकया E3 तिक उ इ!द्राजा उसक समुक्ष नाEc तिकया गया था, जान्मुतिलिथा तिकस आधार पुर दोजा@ क- गई इसक- उस जानाकर नाEc E3 था जान्मुतिलिथा तिकस व्याति द्वार ई गई, याE भ वेE नाEc सक । ऐस स्थिस्थाति मुV पु!जा मुV जान्मुतिलिथा अ!तिक Eना स उसक सE Eना क तिनाष्कष@ नाEc तिनाकल जा सक । 16. इस प्रकर, उपुर न्यायादृq! एवे! अतिभलखै पुर उपुलब्धा सक्ष्या क समुग्रा मुJल्या!कना स याE न्यायालया इस तिनाष्कष@ पुर पुEj!च E3 तिक अतिभयाजाना, पु तिa क- जान्मुतिलिथा 12/07/ 10 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} 2001 क तिवेश्वेसना या एवे! स!दोE स पुर सक्ष्या द्वार प्रमुतिण करना मुV असफल रE E3 । तिचतिकत्स या सक्ष्या भ पु तिa क- आया क तिनास्थिश्च रूपु स 18 वेष@ स कमु प्रमुतिण नाEc कर E3 । अI अतिभयाजाना याE प्रमुतिण करना मुV असफल रE E3 तिक घटोना तिदोना!क 13/ 03/2018 क पु तिa 18 वेष@ स कमु आया क- था । 17. अ पु तिa क स्वेया! क कथाना] क पुर क्षण तिकया जाना आवेश्याक E3 । पु तिa क तिपु (अ.स.-1), मु (अ.स.-7) एवे! चचर Eना (अ.स.-15) क कथाना] स याE थ्या समुना आ E3 तिक पु तिa अपुना घर मुV तिकस क जानाकर तिदोए ग3र चल गई था । चचर Eना (अ.स.-15) ना याE भ कE E3 तिक पु तिa भग गई था । इना पुरिरस्थिस्थातिया] क मुJल्या!कना पु तिa क स्वेया! क न्यायालया ना कथाना क सथा तिकया जाना आवेश्याक E3 । 18. स्वेया! पु तिa (अ.स.-2) ना कE E3 तिक जा अतिभया ना उस अपुना सथा चलना क लिलए कE, वेE उसक सथा स मुV 3ठःकर गई था । पु तिa ना याE भ स्वे कर तिकया E3 तिक तिवेद्यलया स ल,टोना क दो वेE अपुना घर पुतिटोया गई, वेE! स 3यार Eकर अक ल शरगढ़ मुa पुर आई और वेE! स अतिभया क सथा चल गई । वे पुEल !धावेरदो गए, उसक दो ड्रे]गरगढ़ और तिफर नागपुर गए । इस दो,रना उन्E]ना सवे@जातिनाक पुरिरवेEना क सधाना], अथा@~ स एवे! टो<ना क उपुयाग तिकया । पु तिa ना अपुना प्रतिपुर क्षण मुV याE भ स्वे कर तिकया E3 तिक जा वेE अतिभया क सथा सवे@जातिनाक स्थाना] पुर स एवे! टो<ना स यात्र कर रE था , उसना तिकस व्याति स याE तिशकया नाEc क- तिक अतिभया उसक सथा कई जार- जारदोस् कर रE E3 । उसना याE भ स्वे कर तिकया E3 तिक नागपुर मुV उसक मु-तिपु था उसक- दो दो उपुस्थिस्था था, तिक! उसना उनास स!पुक@ करना अथावे सEया मु!गना क कई प्रयास नाEc तिकया । 11 / 11 {Acq. A. No.-79 of 2020} 19. अतिभलखै पुर उपुलब्धा सक्ष्या स ऐस कई तिवेश्वेसना या थ्या प्रमुतिण नाEc E, लिजासस याE तिनाष्कष@ तिनाकल जा सक तिक अतिभया ना पु तिa क लपुJवे@क अपुना सथा ल जाकर उसक सथा उसक- इच्छ क तिवेरुद्ध या,ना स!!धा स्थातिपु तिकया था । इसक तिवेपुर , पु तिa क कथाना एवे! आचरण स अतिभया क सथा स्वेच्छ स जाना था तिवेतिभन्न स्थाना] पुर उसक सथा रEना एवे! यात्र करना क- पुरिरस्थिस्थातिया€ पुरिरलतिक्ष E E\ । जा उसक सEमु पुक्ष Eना क इ!तिग कर E3 । 20. स!पुJण@ सक्ष्या क मुJल्या!कना स याE स्पुq E3 तिक अतिभयाजाना, पु तिa क 18 वेष@ स कमु आया क Eना क थ्या स!दोE स पुर प्रमुतिण करना मुV असफल रE E3 । पु तिa क सEमु पुक्ष Eना पुरिरलतिक्ष Ejआ E3 । ऐस दोश मुV, तिवेचरण न्यायालया द्वार जा दोषमुति क तिनाष्कष@ अ!तिक तिकया गया E3 वेE अतिभलखै मुV उपुलब्धा थ्या और सक्ष्या क तिवेपुर या तिवेरधाभस नाEc E3 था प्रश्नाधा ना दोषमुति क तिनाण@या मुV कई अवे3धा या अशद्घ पुरिरलतिक्ष नाEc E । इसलिलए उसमुV Eस्क्षपु क- आवेश्याक नाEc पुया जा । 21. अI दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याE अपु ल स्वे कर याग्या नाEc Eना स खैरिरजा क- जा E3 । 22. तिनाण@या क- प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलखै श घ्रपुJवे@क वेपुस प्रतिष E । सE /- (स!जाया अग्रावेल) न्यायाधा श सE /- (स!जाया क मुर जायासवेल) न्यायाधा श पुमुना