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High Court of Chhattisgarh · body

2019 DAILYLAW 1261 (CHH)

KU. ANUPAMA NARANG v. RAVI LAL JOGI

ACQA/308/2019 · 2026-04-19

Shri Narendra Kumar Vyas, Shri Sanjay Kumar Jaiswal

body2019

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 / 6 {Acq. A. No.-308 of 2019} 2026:CGHC:17837-DB अ्ቚतिवे्ቕ छቈኍ सगढ़ उच्च न्यायालया , तिलसपुर दोषमुति अपु ल ्ቅमु!क -308 /2019  ABC -----अपु लቕኍ,/ति-कयाक. तिवेरू्ሾ 1. रतिवे लल जोग तिपु-ईवेर रमु जोग , उ्቞-लगभग 19 वेष., ति5वेस -ቇኋमु ग़ቨल भठा, पुलिलस ቕኍ5-तिपुቕኍ:र, लिजोल-मुहासमु!दो, छቈኍ सगढ़ (अतिभया) 2. छቈኍ सगढ़ रज्या, ቛኋर लिजोल दोण्डालिBकर , मुहासमु!दो, लिजोल-मुहासमु!दो, छቈኍ सगढ़, (रज्या) -----उቈኍरवेदो गण अपु लቕኍ,/ति-कयाक. ቛኋर : ቦኍ तिक-5 क मुर यादोवे, अलिBवे । अतिभया/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-1 : ज़मु ल अ़ባर लहा5 , अलिBवे । रज्या/उቈኍरवेदो ्ቅमु!क-2 : ቦኍ दो पुक क मुर लिस!हा, पुI5ल अलिBवे । यागल पु ठाJ मु55 या न्यायामुKति. ቦኍ 5रन््ቖ क मुर व्यास , न्यायाB - मु55 या न्यायामुKति. ቦኍ स!जोया क मुर जोयासवेल , न्यायाB - !! ति5ण.या पु ठा पुर पुरिर !! ቛኋर स!जोया क मुर जोयासवेल , न्यायाB - POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.04.21 13:05:36 +0530 2 / 6 {Acq. A. No.-308 of 2019} 20/04/2026 1. ्ቚर!तिभक स्र पुर क. स5 गए । 2. दोण्डा ्ቚति्ቅया स!तिहा, 1973 कU Bर-372 क हा दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् इस अपु ल मुW तिवेचरण न्यायालया-तिቛኋ या अपुर स्ቔ न्यायाB -, मुहासमु!दो, लिजोल-मुहासमु!दो, छቈኍ सगढ़ ቛኋर स्ቔ ्ቚकरण ्ቅमु!क-63/2012 “छቈኍ सगढ़ रज्या तिवेरू्ሾ रतिवे लल जोग ” मुW पुरिर ति5ण.या तिदो5!क-30.01.2013 कU वेIB क च5: दो गई हाI । लिजोसक हा अतिभयाजो5 क मुमुल ्ቚमुतिण 5 पु हा\ए अतिभया क Bर-376 भर या दोण्डा स!तिहा, 1860 क अपुरB स दोषमु तिकया गया । लिजोस आग स!ቌኔपु मुW “्ቚश्5B 5 ति5ण.या” कहा गया हाI । 3. ्ቚकरण क थ्या स!ቌኔपु मुW इस ्ቚकर हाa तिक तिदो5!क 19.06.2012 क अतिभयाक््ቔ क तिपु (अ.स.-2) ቛኋर याहा सKच5 दो गई तिक उसकU लगभग 19 वेष. आया कU पु्ቔ तिदो5!क 18.06.2012 क समुया लगभग 12:00 जो ति5 तिकस क ए घर स कहाd चल गई ቕኍ वेपुस 5हाd ल:टी । तिपु ቛኋर अपु5 स्र पुर पुया.्቎ खोजो 5 तिकए जो5 क वेजोKदो उसक कई पु 5हाd चल सक, लिजोस पुर पुलिलस ቕኍ5 तिपुቕኍ:र, लिजोल मुहासमु!दो मुW गमु इ!स5 ्ቅमु!क 36/12 दोजो. कर जो!च ्ቚर!भ कU गई । जो!च क दो:र5 तिपु ቛኋर याहा आ-!क व्या कU गई तिक अतिभया रतिवेलल जोग , जो पुKवे. स उसकU पु्ቔ क स!पुक. मुW ቕኍ, उस हाल-फु सलकर अपु5 सቕኍ ल गया हाI । गमु-दोग जो!च क दो:र5 तिदो5!क 23.06. 2012 क अतिभयाक््ቔ क रमुदो तिकया गया ቕኍ उसक कቕኍ5 लिलए गए, लिजोसमुW उस5 आरपु लगया तिक अतिभया उस अपु5 सቕኍ ቇኋमु भ खोपुल ल जोकर अपु5 पुस रखोकर उसकU इच्छ क तिवेरु्ቍ उसक सቕኍ लत्कर तिकया । अतिभयाक््ቔ क उ कቕኍ5 क 3 / 6 {Acq. A. No.-308 of 2019} आBर पुर पुलिलस ቕኍ5 तिपुቕኍ:र, लिजोल मुहासमु!दो मुW ्ቚቕኍमु सKच5 पु्ቔ 163/2012 पु!जो ्ቍ कर Bर 363, 366 एवे! 376 भर या दोण्डा स!तिहा क अ!ग. अपुरB कयामु कर तिवेवेच5 कU गई । अतिभया एवे! अतिभयाक््ቔ क तिचतिकत्स या पुर ቌኔण करया गया, घटी5 क समुया पुहा5 गए वेኚᮌ जो्቎ तिकए गए, घटी5 स्ቕኍल क 5जोर 5क्- Iयार तिकया गया ቕኍ अन्या सतिቌኔयाm क कቕኍ5 अतिभलिललिखो तिकए गए । जो्቎ वेस्ओं! क तिवेलिB तिवेሺኋ5 ्ቚयाग-ल पुर ቌኔण हा ्ቚतिष तिकया गया । तिवेवेच5 क दो:र5 अतिभया क तिगरफ्र तिकया गया ቕኍ स!पुKण. तिवेवेच5 उपुर! अतिभयागपु्ቔ ्ቚस् तिकया गया । 4. आरपु क ्ቚमुण5 वेस् अतिभयाजो5 कU ओंर स अपु5 पुቌኔ समुቕኍ.5 मुW 12 सतिቌኔयाm क पुर ቌኔण ቕኍ 22 दोस्वेजो ्ቚदो-. तिचन्हा!तिक करए गए । Bर-313 दोण्डा ्ቚति्ቅया स!तिहा क हा कቕኍ5 मुW अतिभया 5 अपु5 तिवेपुर  सतिቌኔयाm क कቕኍ5m क इ!कर कर हा\ए स्वेया! क ति5दोqष हा5  हा\ए कहा हाI तिक अतिभयाक््ቔ स्वेया! उसक घर आकर 03-04 तिदो5 क रूकU ቕኍ । लिजोस5 चवे मुW कई सቌኚया ्ቚस् 5हाd तिकया ।  उभयापुቌኔ क स5 जोकर तिवेचरण न्यायालया ቛኋर याहा पुया गया तिक अतिभयाक््ቔ वेयास्क ቕኍ और सहामुति स स!!B स्ቕኍतिपु तिकए गए ቕኍ । लिजोसक आBर पुर अपुरB ्ቚमुतिण 5 हा5 पु हा\ए अतिभया कU दोषमुति क “्ቚश्5B 5 ति5ण.या” पुरिर तिकया गया हाI लिजोस इस अपु ल मुW च5: दो गई हाI । 5. न्यायादृኋ᭘! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुW मु55 या उच्चमु न्यायालया ቛኋर दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् अपु ल क ति5रकरण हा क छ न्यातियाक लिस्ሾ! ्ቚतिपुतिदो तिकए गए हाa जो कቄኌण्डाक-42 मुW ति5म्55सर हाIJ- 4 / 6 {Acq. A. No.-308 of 2019} “42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.” 6. स!पुKण. सቌኚया क पुरिर- ल5 स याहा ቄኌस्ቕኍति स्पुኋ᭘ हा हाI तिक अतिभयाक््ቔ (अ.स.-1) 5 अपु5 मुख्या पुर ቌኔण मुW याहा कቕኍ5 तिकया हाI तिक अतिभया रतिवेलल ቛኋर उसक सቕኍ मुरपु टी एवे! गल -गल:च कU गई ቕኍ जो वेहा भग5 क ्ቚयास कर रहा ቕኍ ,  अतिभया 5 उस पुक़ቨकर सयाकल मुW तिठाकर ቇኋमु भ खोपुल ल गया । ቕኍतिपु, ्ቚतिपुर ቌኔण कU क! तिडाक 5 / 6 {Acq. A. No.-308 of 2019} 6 स याहा स्पुኋ᭘ पुरिरलतिቌኔ हा हाI तिक उ मुहात्वेपुKण. थ्याm क उቤኔखो उस5 अपु5 पुलिलस कቕኍ5 (्ቚदो-. डा .-1) मुW 5हाd तिकया हाI । इस ्ቚकर, उसक कቕኍ5 मुW तिवे्ቕमु5 उ सBर उस अतिवेश्वेस5 या 5 हाa, तिवे-षJ  जो ऐस ग!भ र m क ्ቚቕኍमु अवेसर पुर उቤኔखो अपुतिቌኔ ቕኍ । 7. अतिभयाक््ቔ क कቕኍ55सर अतिभया उस सयाकल ቛኋर ቇኋमु भ खोपुल ल गया ቕኍ रति्ቔ मुW उसक सቕኍ उसकU इच्छ क तिवेरु्ቍ दोष्कमु. तिकया । तिकन् अतिभलखो पुर उपुलब्B सቌኚया स याहा पुरिरलतिቌኔ हा हाI तिक सयाकल स ल जो समुया अቕኍवे घटी5स्ቕኍल पुर, जोहा} वेहा अतिभया क सቕኍ एक हा कቌኔ मुW ቕኍ , अतिभयाक््ቔ क पुस ्ቚतिरB कर5, भग5 अቕኍवे सहाया हा पुकर5 क पुया.्቎ अवेसर उपुलब्B ቕኍ, लिजो5क उस5 उपुयाग 5हाd तिकया । याहा आचरण स्वेभतिवेक मु5वे व्यावेहार क ्ቚतिकK ल ्ቚ  हा हाI ቕኍ अतिभयाक््ቔ कቕኍ5 कU तिवेश्वेस5 या पुर स!दोहा उत्पु्ቐ कर हाI । 8. अतिभयाक््ቔ 5 याहा भ अतिभकलिቕኍ तिकया हाI तिक वेहा अतिभया क सቕኍ भ खोपुल स गहार हा हा\ए रयापुर गई ቕኍ वेहा} अतिभया कU हा5 क ति5वेस पुर तिदो5भर रहा । ्ቚतिपुर ቌኔण मुW याहा थ्या भ आया हाI तिक उ अवेलिB मुW वेहा सवे.जोति5क स्ቕኍलm—जोIस रलवे स्टी-5 एवे! या्ቔ क दो:र5 स-स्टीIण्डा पुर रहा , जोहा} पुलिलस एवे! अन्या व्यातियाm कU उपुቄኌस्ቕኍति ቕኍ , ቕኍतिपु उस5 तिकस क भ घटी5 क स!!B मुW अवेग 5हाd करया । या्ቕतिपु उस5 भया एवे! BमुकU क करण या हाI, तिकन् याहा थ्या भ अतिभलखो पुर हाI तिक अवेसर ्ቚ्቎ हा5 पुर वेहा स्वेया! अपु5 घर ल:टी आई, लिजोसस याहा अपुतिቌኔ ቕኍ तिक वेहा पुKवे. मुW भ सहाया ्ቚ्቎ कर सक ቕኍ । याहा आचरण अतिभयाजो5 कቕኍ5 क अ5रूपु ्ቚ  5हाd हा । 6 / 6 {Acq. A. No.-308 of 2019} 9. अतिभयाक््ቔ क ्ቚतिपुर ቌኔण स याहा भ स्पुኋ᭘ हा हाI तिक रयापुर मुW पुया.्቎ समुया व्या  कर5 एवे! रति्ቔ मुW अतिभया क सቕኍ पु5J अपु5 ቌኔ्ቔ मुW ल:टी5 क दो:र5 भ उस5 5  तिकस ्ቚकर क ्ቚतिरB तिकया और 5 हा तिकस अन्या व्याति स सहाया ल5 क ्ቚयास तिकया । अतिभलखो क अ5सर घटी5 तिदो5!क क अतिभयाक््ቔ कU आया लगभग 18 वेष. 11 मुहा ቕኍ । तिचतिकत्सक (अ.स.-10) ቛኋर ्ቚदोቈኍ तिचतिकत्स ्ቚमुणपु्ቔ (्ቚदो-. पु .-20) स याहा भ स्पुኋ᭘ हा हाI तिक उसक -र र, तिवे-षJ ति5जो अ!गm पुर, तिकस ्ቚकर कU ्ቨ चटी क तिच्ቡ पुरिरलतिቌኔ 5हाd हा\ए । उपुया. समुस् पुरिरቄኌस्ቕኍतियाm क मुKल्या!क5 स याहा पुया जो हाI तिक अतिभयाक््ቔ सहामु पुቌኔ ቕኍ , लिजोसस अतिभयाजो5 ्ቚकरण स!दोहा स पुर ्ቚमुतिण 5हाd हा । 10. इस ्ቚकर, उपुर न्यायादृኋ᭘! क आBर पुर सቌኚया तिवेवेच5 क फुलस्वेरूपु हामु पु हाa तिक तिवेचरण न्यायालया ቛኋर सहामुति क आBर पुर जो दोषमुति क ति5ष्कष. अ!तिक तिकया गया हाI । वेहा अतिभलखो मुW उपुलब्B थ्या और सቌኚया क तिवेपुर  या तिवेरBभस 5हाd हाI । ्ቚश्5B 5 दोषमुति क ति5ण.या मुW कई अवेIB या अ-्ሾ पुरिरलतिቌኔ 5हाd हा । इसलिलए उसमुW हास्ቌኔपु कU आवेश्याक 5हाd पुया जो । 11. अJ दोषमुति क तिवेरू्ሾ ्ቚस् याहा अपु ल ቇኋ्ቨ याग्या 5 हा5 स ्ቚर!तिभक स्र पुर खोरिरजो कU जो हाI । 12. ति5ण.या कU ्ቚतिलिलतिपु क सቕኍ तिवेचरण न्यायालया क अतिभलखो - ्ቈपुKवे.क वेपुस ्ቚतिष हा । सहा /- (5रन््ቖ क मुर व्यास) न्यायाB - सहा /- (स!जोया क मुर जोयासवेल) न्यायाB - पुमु5