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1 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018}
CGHC010298042018
2026:CGHC:35302-DB अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल क्रमु!क
-376
/2018
छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-लरमुपुर, लि1ल-लरमुपुर-रमुना1ग!1, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा2/रज्या तिवेरूद्घ प्यार मुहम्मुदो उर्फ9 मुलि:ल तिपु-स रूउद्दी ना शेख, उम्र-लगभग 36 वेष9 वे9मुना 45 वेष9, तिनावेस -ग्रामु ड़कD, मुहर , पुलिलस थाना-लरमुपुर, लि1ल-सरग1, वे9मुना लि1ल-लरमुपुर-रमुना1ग!1, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो /अतिभया अपु लथा2/रज्या द्वार : श्री तिवेनादो टेकमु, शेसकDया अलिHवे । उत्तीरवेदो /अतिभया द्वार : श्री तिवेद्य भJषण सना , अलिHवे । यागल पु ठःM मुनाना या न्यायामुJति9 श्री स!1या अग्रावेल
, न्यायाH शे
मुनाना या न्यायामुJति9 श्री स!1या क मुर 1यासवेल
, न्यायाH शे
!! तिनाण9या पु ठः पुर पुरिर !! 11/08/2026 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.08.12 18:22:28 +0530
2 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018} द्वार
स!1या क मुर 1यासवेल
, न्यायाH शे
1. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिह, 1973 कD Hर-378 (1) क ह दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुW तिवेचरण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाH शे, रमुना1ग!1, लि1ल-लरमुपुर- रमुना1ग!1, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरण क्रमु!क-01/2010 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ प्यार मुहम्मुदो उर्फ9 मुलि:ल” मुW पुरिर तिनाण9या तिदोना!क-26/04/2018 कD वे[H क चना\ दो गई ह[, लि1सक ह अतिभया1ना क मुमुल प्रमुतिण ना पु ह^ए अतिभया क भर या दोण्ड स!तिह, 1860 कD Hर 450, 376, 323, 506 (भग-एक) क अपुरH` स स!दोह क लभ दो ह^ए दोषमु तिकया गया ह[ । लि1स आग “प्रश्नाH ना तिनाण9या” स स!लिH तिकया 1 रह ह[ ।
2. अतिभया1ना मुमुल, स!क्षेपु मुW, इस प्रकर ह[ तिक लगभग 35 वेष2या पु तिड़ (अ.स.-3) अपुना पुति एवे! च्च` क सथा ग्रामु पु पुरस मुW तिनावेसर था था मु1दोJर क कया9 कर
था । वेह पुगल 1[स ह गई था और मुर रह था । उसक पुति द्वार अतिभया स :ड़-र्फJ! क करया गया, लि1सस वेह ठः क ह गई । इसक पुश्चf अतिभया क उसक घर आना-1ना प्रर!भ ह गया । पु तिड़ ना पुलिलस थाना लरमुपुर मुW तिदोना!क 10/11/ 2009 क इस आशेया कD तिशेकया दो19 करई तिक लगभग एक वेष9 पुJवे9, मुह नावे!र मुW, अतिभया उसक घर कर 10:00 1 आया था । उस समुया उसक पुति एवे!
च्च घर पुर नाहh था । अतिभया ना उसक सथा 1रना लत्कर तिकया था तिकस क घटेना ना पुर 1ना स मुरना कD HमुकD दोकर चल गया । इसक पुश्चf वेह उस तिदोना स अतिभया क याहj Hना कटेना क लिलए 1ना लग । वेहj ख मुW भ अतिभया ना उसक सथा लत्कर तिकया । सर तिदोना अतिभया पुनाM उसक घर आया और उसक सथा लत्कर तिकया था
3 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018} HमुकD दो तिक यातिदो उसना तिकस क घटेना ई वेह उस पुहल कD रह पुगल कर दोग । इस भया क करण उसना घटेना क स!!H मुW तिकस क 1नाकर नाहh दो । तिदोना!क 03/11/2009 क तिदोना मुW कर 10:00 1 अतिभया पुनाM उसक घर आया । उस समुया वेह घर मुW अक ल था । अतिभया ना उसक सथा शेर रिरक स!!H नाना क प्रयास तिकया, लि1सक उसना तिवेरH तिकया । अतिभया ना उसक ल पुकड़कर था डण्ड स मुरपु टे तिकया । इसस पुरशेना हकर उसना घटेना कD 1नाकर रमुपुति ई था आभपुति क दो और अगल तिदोना अपुना मुj एवे! पुति क भ घटेना क स!!H मुW या । त्पुश्चf थाना मुW तिशेकया दो19 करई गई, लि1स पुर प्रदोशे9 पु -3 क रूपु मुW प्रथामु सJचना पुत्र दो19 कD गई । तिवेवेचना क दो\रना पु तिड़ क तिचतिकत्स या पुर क्षेण करया गया, उसक 1ति प्रमुण-पुत्र 1प्त तिकया गया, घटेनास्थाल क नाक्शे [यार तिकया गया था सतिक्षेया` क कथाना दो19 तिकए गए । पु तिड़ क अ!रवेस्त्र 1प्त कर उन्हW रसयातिनाक पुर क्षेण ह प्रतिष तिकया गया । स!पुJण9 तिवेवेचना उपुर! अतिभया क तिवेरुद्ध अतिभयागपुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. तिवेचरण न्यायालया क समुक्षे अतिभया1ना कD ओर स अपुना पुक्षे समुथा9ना मुW 08 सतिक्षेया` क पुर क्षेण था 18 दोस्वे1 प्रदोशे9 तिचन्ह!तिक करए गए । Hर-313 दोण्ड प्रतिक्रया स!तिह क ह कथाना मुW अतिभया ना अपुना तिवेपुर सतिक्षेया` क कथाना` क इनाकर कर ह^ए स्वेया!
क तिनादोqष हना या हr लि1सकD ओर स चवे मुW र्फगJरमु (.स-1) और तिवेरन्द्र लिस!ह (.स.-2) क पुर क्षेण करया गया । उभयापुक्षे क सना 1कर तिवेचरण न्यायालया द्वार प्रश्नाH ना दोषमुति क तिनाण9या पुरिर तिकया गया ह[ लि1स इस अपु ल मुW चना\ दो गई ह[ ।
4. अपु लथा2/रज्या कD ओर स तिवेद्वाना अलिHवे क क9 ह[ तिक पु तिड़ (अ.स.-3) ना अतिभया1ना मुमुल क समुथा9ना तिकया ह[ था उसक कथाना क समुथा9ना उसकD मु
4 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018} (अ.स.-4) क कथाना स भ ह ह[ । ऐस दोशे मुW तिवेचरण न्यायालया द्वार उनाक सक्ष्या पुर तिवेश्वेस ना कर ह^ए त्रतिटेपुJण9 तिनाष्कष9 तिनाकल गया ह[ 1 तिवेलिH कD दृतिx मुW स्थिस्थार रख 1ना याग्या नाहh ह[ । अतिभया क तिवेरूद्घ अतिभया1ना क मुमुल प्रमुतिण रह ह[ । अM प्रश्नाH ना दोषमुति क तिनाण9या अपुस् कर ह^ए अपु ल स्वे कर कD 1कर अतिभया क दोषलिसद्ध कर दोस्थिण्ड तिकया 1ए ।
5. उत्तीरवेदो /अतिभया क तिवेद्वाना अलिHवे द्वार तिवेचरण न्यायालया क प्रश्नाH ना तिनाण9या क समुथा9ना कर ह^ए याह क9 प्रस् तिकया गया ह[ तिक पु तिड़ (अ.स.-3) तिवेश्वेसना या सक्षे
नाहh ह[ । उसक द्वार दो19 करई गई तिशेकया घटेना क लगभग एक वेष9 पुश्चf कD गई ह[ था तिवेल! क कई स्पुx करण प्रस् नाहh तिकया गया ह[ । पु तिड़ क पुति क भ
पुर क्षेण नाहh करया गया ह[ । लि1ना सतिक्षेया` क घटेना कD 1नाकर पु तिड़ द्वार तिदोए 1ना क उल्लेख तिकया गया ह[, उनामुW स श्री मु आभपुति (अ.स.-2) ना अतिभया1ना क मुमुल क समुथा9ना नाहh तिकया ह[ था रमुपुति ई क पुर क्षेण ह नाहh करया गया ह[ । तिचतिकत्स या सक्ष्या स भ पु तिड़ क कथाना कD पुतिx नाहh ह ह[ । चवे सतिक्षेया` ना या ह[ तिक पु तिड़ अपुना पुति क सथा 1!गल मुW :तिड़याj कटेना गई था । उस समुया 1!गल मुW च\कDदोर कD ह[लिसया स उपुस्थिस्था चवे सक्षे वे रन्द्र लिस!ह (.स.-2) एवे!
अतिभया ना उन्हW 1!गल मुW :तिड़याj कटेना स मुना तिकया था था उनाकD टे!ग छ ना ल था । इस
करण पु तिड़ ना अतिभया क तिवेरुद्ध :Jठः तिशेकया दो19 करई । याह भ क9 तिकया गया ह[ तिक पु तिड़ :Jठः तिशेकया करना कD आदो ह[ । उसना स्वेया! चवे सक्षे र्फगJरमु (.स.- 1) क अतिरिर घरसया, तिपु!टेJ, 1ना, द्ध एवे! कन्ह[या क तिवेरुद्ध भ :Jठः आरपु लगकर उनाक तिवेरुद्ध पुलिलस मुW तिशेकया दो19 करई था उनास पु[स लकर र1 नामु कर लिलया ह[ । इस प्रकर तिवेचरण न्यायालया द्वार पु तिड़ क कथाना` पुर तिवेश्वेस व्या नाहh कर ह^ए 1
5 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018} दोषमुति क तिनाष्कष9 अ!तिक गया ह[, वेह पुJण9M उतिच ह[ । अपु लथा2/रज्या पुक्षे द्वार अपु ल मुW उठःए गए क9 स्वे कर याग्या नाहh हr । अM अपु ल खरिर1 कD 1ए ।
6. उभयापुक्षे क क9 श्रीवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख क सJक्ष्मुपुJवे9क पुरिरशे लना तिकया गया ।
7. न्यायादृx! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुW मुनाना या उच्चमु न्यायालया द्वार दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् अपु ल क तिनारकरण ह क छ न्यातियाक लिसद्घ! प्रतिपुतिदो तिकए गए हr, 1 कस्थिण्डक-42 मुW तिनाम्नानासर ह[M-
“42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as: (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal;
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A. No.-376 of 2018} (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.”
8. न्यायादृx! Santosh Prasad @ Santosh Kumar v. State of Bihar, (2020) 3 SCC 443 मुW उच्चमु न्यायालया द्वार अवेHरिर तिकया गया ह[ तिक लत्कर क अपुरH मुW एकमुत्र पु तिड़ क कथाना पुर भ दोषलिसतिद्ध कD 1 सक ह[ तिकन् याह हना चतिहए 1 पु तिड़ क याना तिवेश्वेस पु[दो करW था पुJर रह स तिवेश्वेसना या, दोग और उत्क} x गणवेत्ती क प्र ह, 1 तिक तिनाम्नानासर अवेHरिर तिकया गया ह[:-
“5.4.3. In Krishan Kumar Malik v. State of Haryana (2011) 7 SCC 130 it is observed and held by this Court that no doubt, it is true that to hold an accused guilty for commission of an offence of rape, the solitary evidence of the prosecutrix is sufficient provided the same inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and should be of sterling quality. 5.5 With the aforesaid decisions in mind, it is required to be considered, whether is it safe to convict the accused solely on the solitary evidence of the prosecutrix? Whether the evidence of the prosecutrix inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and is of sterling quality?”
6. Having gone through and considered the deposition of the prosecutrix, we find that there are material contradictions. Not only there are material contradictions, but even the manner in which the alleged incident has taken place as per
7 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018} the version of the prosecutrix is not believable. In the examination-in-chief, the prosecutrix has stated that after jumping the fallen compound wall accused came inside and thereafter the accused committed rape. She has stated that she identified the accused from the light of the mobile. However, no mobile is recovered. Even nothing is on record that there was a broken compound wall. She has further stated that in the morning at 10 O’clock she went to the police station and gave oral complaint.
However, according to the investigating officer a written complaint was given. It is also required to be noted that even the FIR is registered at 4:00 p.m. In her deposition, the prosecutrix has referred to the name of Shanti Devi, PW1 and others. However, Shanti Devi has not supported the case of the prosecution. Therefore, when we tested the version of PW5- prosecutrix, it is unfortunate that the said witness has failed to pass any of the tests of “sterling witness”. There is a variation in her version about giving the complaint. There is a delay in the FIR. The medical report does not support the case of the prosecution. FSL report also does not support the case of the prosecution. As admitted, there was an enmity/dispute between both the parties with respect to land. The manner in which the occurrence is stated to have occurred is not believable. Therefore, in the facts and circumstances of the case, we find that the solitary version of the prosecutrix-PW5 cannot be taken as a gospel truth at face value and in the absence of any other supporting evidence, there is no scope to sustain the conviction and sentence imposed on the appellant and accused is to be given the benefit of doubt.”
9. न्यायालया मुW तिदोए गए अपुना कथाना मुW अतिभयाक्त्र ना अतिभया1ना मुमुल क समुथा9ना तिकया ह[, तिक! न्यायादृx! Santosh Prasad @ Santosh Kumar (पुJवेq) क अनासर ऐस
अतिभयाक्त्र क कथाना स!दोह स पुर तिवेश्वेसना या हना आवेश्याक ह[ ।
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10. स!पुJण9 अतिभलख क पुरिरशे लना स याह स्थिस्थाति स्पुx ह ह[ तिक पु तिड़ (अ.स.-3) क व्यावेहर गjवे मुW समुन्या नाहh रह ह[ । उस तिवेस्थिच्छप्त अवेस्था मुW हना या गया ह[ । अM न्यायालया ना याना दो19 तिकए 1ना क पुJवे9 वेह कथाना करना मुW सक्षेमु ह[ अथावे नाहh, इस स!!H मुW तिवेचरण न्यायालया द्वार उसकD क्षेमु कD 1!च कD गई ह[ । स्वेया!
उसकD मु (अ.स.-4) ना भ अपुना कथाना मुW कह ह[ तिक पु तिड़ पुगल 1[स रह था था अतिभया उसक उपुचर कर रह था । मु (अ.स.-4) ना प्रतिपुर क्षेण मुW याह भ
स्वे कर तिकया ह[ तिक उसना घटेना क स्वेया! नाहh दोख ह[ था अतिभया एक ल-च्च वेल व्याति ह[ । उसना याह भ कह ह[ तिक लि1स समुया घटेना हना या गया ह[, उस समुया उसक दोमुदो अथा9f पु तिड़ क पुति गjवे मुW ह रह था । उसना याह भ कह ह[ तिक पु तिड़ [रह 1[स ह[, 1 तिकस -तिकस क तिवेरुद्ध पुलिलस मुW तिशेकया कर दो ह[ । उसना इस स!!H मुW 1नाकर हना स इ!कर तिकया ह[ तिक पु तिड़ गjवे मुW लि1ना लग` क तिवेरुद्ध पुलिलस मुW तिशेकया कर ह[, उनास पु[स लकर समु:\ कर ल ह[ । इस प्रकर, मु (अ.स.-4) ना पु तिड़ क इस कथाना क स्पुx रूपु स समुथा9ना नाहh तिकया ह[ तिक अतिभया ना उसकD 1नाकर मुW पु तिड़ क सथा 1रना स!!H स्थातिपु तिकया था ।
11. प्रथामु सJचना पुत्र क अनासर, रमुपुति ई क पुर क्षेण नाहh करया गया ह[ । दोJसर सक्षे
श्री मु आभपुति (अ.स.-2) ना अपुना कथाना मुW स्पुx रूपु स कह ह[ तिक पु तिड़ ना उस घटेना क स!!H मुW कई 1नाकर नाहh दो था । इस प्रकर, उ सक्षे अतिभया1ना क कथाना क समुथा9ना नाहh कर ह[ था वेह पुक्षेद्रह ह गई ह[ ।
12. तिचतिकत्सक स्नाहल तिक~ (अ.स.-1) ना पु तिड़ क तिचतिकत्स या पुर क्षेण तिदोना!क 10/11/2009 क तिकया था उसकD पुर क्षेण प्रतिवेदोना प्रदोशे9 पु -1 क रूपु मुW प्रस् कD
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A. No.-376 of 2018} ह[ । लि1सक अनासर पु तिड़ स!भग कD आदो था । उसक गप्त!ग पुर तिकस प्रकर क चटे क तिनाशेना नाहh पुए गए था तिचतिकत्सक द्वार त्कल ना स!भग क स!!H मुW कई तिनास्थिश्च रया व्या नाहh कD गई ह[ । इस प्रकर, पु तिड़ क सथा घटेना क समुया स!भग तिकए 1ना क स!!H मुW कई तिचतिकत्स या सक्ष्या उपुलब्H नाहh ह[ । तिचतिकत्सक द्वार [यार कD गई स्लइड क रसयातिनाक पुर क्षेण ह भ1 गया था, लि1सकD रज्या तिवेलिH तिवेज्ञाना प्रयागशेल, रयापुर कD 1!च रिरपुटे9 अतिभलख पुर स!लग्न ह[ । उ रिरपुटे9 क अनासर स्लइड मुW मुनावे शेक्रण नाहh पुए गए हr । अM रसयातिनाक पुर क्षेण प्रतिवेदोना स भ अतिभया1ना मुमुल कD पुतिx नाहh ह ह[ ।
13. चवे सक्षे क रूपु मुW र्फगJरमु (.स.-1) एवे! वे रन्द्र लिस!ह (.स.-2) ना इस आशेया क कथाना तिकया ह[ तिक पु तिड़ अपुना पुति क सथा 1!गल मुW टे!ग स :तिड़याj कटे रह था । टे!ग छ ना लिलए 1ना क करण उसना अतिभया क तिवेरुद्ध :Jठः तिशेकया दो19 करई ह[ । उन्ह`ना याह भ कह ह[ तिक पु तिड़ पुJवे9 मुW भ गjवे क अन्या लग` क तिवेरुद्ध :Jठः तिशेकया कर चकD ह[ था उनास पु[स लकर र1 नामु कर चकD ह[ । चवे सतिक्षेया` क इना कथाना` क क छ अ!शे क समुथा9ना पु तिड़ कD मु (अ.स.-4) क कथाना स भ ह ह[ ।
14. उपुर समुस् पुरिरस्थिस्थातिया` मुW अ पु तिड़ (अ.स.-3) क कथाना कD तिवेश्वेसना या क आ!कलना तिकया 1ए स्वेया! पु तिड़ ना अपुना न्यायालया ना कथाना मुW कह ह[ तिक अतिभया लगभग 10 वेष9 पुJवे9 उसक घर मुW घसकर उसक हथा-!ह पुकड़ था था उसक सथा इज्1 कD था । इसक तिवेपुर , पुलिलस मुW दो19 तिशेकया क अनासर घटेना लगभग 01 वेष9 पुJवे9 घतिटे हना था लत्कर तिकया 1ना या गया ह[, 1तिक न्यायालया ना कथाना मुW उसना घटेना लगभग 10 वेष9 पुJवे9 कD ह^ए क वेल छड़छड़ कर इज्1 तिकए 1ना
10 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018} कD कह ह[ । इस प्रकर, उसक न्यायालया ना कथाना एवे!
पुलिलस मुW दो19 तिशेकया मुW घटेना क समुया था घटेना कD प्रक} ति क स!!H मुW स्पुx तिवेरHभस पुरिरलतिक्षे ह ह[ । 1 पु तिड़ क पुक्षेद्रह घतिष कर सJचक प्रश्ना तिकए गए, उसना स्वे कर तिकया तिक अतिभया ना उसक सथा 1रदोस् शेर रिरक स!!H स्थातिपु तिकया था । तिक! प्रतिपुर क्षेण मुW वेह कह ह[ तिक वेह गjवे क मुथार, र्फग, तिपु!टेJ, घरसया, 1ना चरवे, प्रमुदो, Hरमु, कन्ह[या एवे! नारशे क 1ना ह[ और वे अतिभया क सथा दो रह हr, इसलिलए उसना उनाक तिवेरुद्ध थाना मुW पुJवे9 मुW तिशेकया दो19 करई ह[ । इस प्रकर, उसना आग कह ह[ तिक मुथार नागलिसया ना उसक सथा लत्कर नाहh तिकया था, तिक! उसक तिवेरुद्ध इसलिलए तिशेकया दो19 करई था क्या`तिक वेह अतिभया क सथा दो रह था । उसना याह भ कह ह[ तिक 1ना चरवे क लड़क क सथा :गड़ हना क करण उसक तिवेरुद्ध भ तिशेकया दो19 करई था । इस प्रकर, चवे सतिक्षेया` द्वार पु तिड़ (अ.स.-3) क स!!H मुW तिकए गए कथाना` क क छ हदो क समुथा9ना स्वेया! पु तिड़ क न्यायालया ना कथाना स भ ह ह[ तिक वेह पुलिलस मुW तिशेकया करना कD आदो ह[ । ऐस स्थिस्थाति मुW, पु तिड़ क कथाना मुW उत्पुन्न ग!भ र तिवेरHभस था उसक कथाना कD तिकस अन्या स्वे!त्र सक्ष्या स पुतिx ना हना कD दोशे मुW, उसक कथाना पुर स!दोह स पुर तिवेश्वेस तिकया 1ना उतिच नाहh रह ।
15. इस प्रकर, उपुर न्यायादृx!` क प्रकशे मुW सक्ष्या तिवेवेचना क र्फलस्वेरूपु हमु पु हr तिक तिवेचरण न्यायालया द्वार 1 दोषमुति क तिनाष्कष9 अ!तिक तिकया गया ह[ वेह अतिभलख मुW उपुलब्H थ्या और सक्ष्या क तिवेपुर या तिवेरHभस नाहh ह[ था प्रश्नाH ना दोषमुति क तिनाण9या मुW कई अवे[H या अशेद्घ पुरिरलतिक्षे नाहh ह । इसलिलए उसमुW हस्क्षेपु कD आवेश्याक नाहh पुया 1 ।
11 / 11 {Acq. A. No.-376 of 2018}
16. अM दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याह अपु ल स्वे कर याग्या नाहh हना स खरिर1 कD 1
ह[ ।
17. तिनाण9या कD प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलख शे घ्रपुJवे9क वेपुस प्रतिष ह । सह /- (स!1या अग्रावेल) न्यायाH शे सह /- (स!1या क मुर 1यासवेल) न्यायाH शे पुमुना