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High Court of Chhattisgarh · body
2017 DAILYLAW 805 (CHH)
State Of Chhattisgarh v. Shivendra Singh Rathore
ACQA/236/2017 · 2026-04-21
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2017
[ 2017 DAILYLAW 805 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 7 {Acq. A. No.-236 of 2017}
2026:CGHC:18415 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल क्रमु!क
-236
/2017
छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार प्रभार , पुलिलस थाना-भा1रमुगढ़, लि2ल- 2पुर, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा3/रज्या तिवेरूद्घ ति6वेन्द्र लिस!ह रठौ:र तिपु-रमुलिस!ह रठौ:र, उम्र-लगभाग 31 वेष<, तिनावेस -ग्रामु पुसनार, पुलिलस थाना-भा1रमुगढ़, लि2ल- 2पुर, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो /अतिभाया अपु लथा3/रज्या द्वार : श्री रमु नारयाण सहA, उपु 6सकBया अलिCवे । अतिभाया/उत्तीरवेदो द्वार : श्री पुथा< क मुर झा, अलिCवे । न्यायामुFति< श्री स!2या क मुर 2यासवेल
, !! तिनाण<या पु ठौ पुर पुरिर !! 22/04/2026
1. दोण्ड प्रतिक्रया स!तिह, 1973 कB Cर 378(3) क अ!ग< दोषमुति क तिवेरुद्ध प्रस् इस अपु ल मुT, न्यायालया-मुख्या न्यातियाक मुलि2स्ट्रेWट्रे, 2पुर (छत्ती सगढ़) द्वार आपुरलिCक प्रकरण क्रमु!क 80/2016 "छत्ती सगढ़ रज्या नामु ति6वेन्द्र लिस!ह रठौ:र" मुT पुरिर तिनाण<या POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.04.22 17:12:31 +0530
2 / 7 {Acq. A. No.-236 of 2017} तिदोना!क 10/04/2017 कB वे1C क चना: दो गई ह1 । लि2सक ह अतिभाया2ना क मुमुल प्रमुतिण ना पु ह[ए अतिभाया क Cर-304 (क) भार या दोण्ड स!तिह क अपुरC स दोषमु तिकया गया । लि2स आग स!क्षेपु मुT “प्रश्नाC ना तिनाण<या” स स!लिC तिकया 2 रह ह1 ।
2. अतिभाया2ना मुमुल स!क्षेपु मुT इस प्रकर ह1 तिक घट्रेना तिदोना!क 02/12/2015 क दोपुहर लगभाग 02:00 2, प्रथा3 चमुररमु यादोवे (अ.स.-1) अपुना पुत्र Cना रमु (मुeक) क सथा ग्रामु मु!गलनार स पुसनार ससयाट्रे र6ना लना 2 रह था । 2 वे स .स . रड पुलिलया क पुस पुह[fच, तिवेपुर तिदो6 स आ रह ट्रेW1क्ट्रेर क्रमु!क स .2 .-18-2-8634 क चलक/अतिभाया ति6वेन्द्र क मुर रठौ:र ना वेहना क उपुक्षेपुFण< एवे! लपुरवेह पुFवे<क चल ह[ए Cना रमु क ट्रेक्कर मुर दो । ट्रेक्कर क पुश्च ट्रेW1क्ट्रेर सड़क तिकनार पुलट्रे गया, लि2सक ना च दोना स Cना रमु कB घट्रेनास्थाल पुर ह मुeत्या ह गई । प्रथा3 चमुररमु कB सFचना पुर थाना भा1रमुगढ़ मुT अतिभाया क तिवेरुद्ध अपुरC क्रमु!क 57/2015 क ह प्रथामु सFचना पुत्र (प्रदो6< पु -1) एवे! मुग< दो2< तिकया गया । दोपुर!, पुलिलस द्वार 6वे क पु!चनामु कर पुर क्षेण करया गया । तिवेवेचना क दो:रना घट्रेनास्थाल क ना2र नाक्6 (प्रदो6< पु -2) 1यार तिकया गया था सतिक्षेयाj क कथाना लखद्घ तिकए गए । घट्रेना मुT प्रया ट्रेW1क्ट्रेर-ट्रेWlल क प्रदो6< पु -8 क मुध्यामु स एवे!
स!!लिC दोस्वे2j क प्रदो6< पु -9 क मुध्यामु स 2ब् तिकया गया । 2ब् वेहना क या!तित्रक पुर क्षेण करना क पुश्च अतिभाया क तिगरफ्र तिकया गया और तिवेवेचना पुFण< कर अतिभायाग-पुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. तिवेचरण क दो:रना आरपु क प्रमुणना ह अतिभाया2ना कB ओर स अपुना पुक्षे समुथा<ना मुT क ल 10 सतिक्षेयाj क पुर क्षेण करया गया था 15 दोस्वे2 प्रदोति6< करए गए । Cर 313
3 / 7 {Acq. A. No.-236 of 2017} दोण्ड प्रतिक्रया स!तिह क ह अतिभाया ना अपुना तिवेरुद्ध आए सतिक्षेयाj क कथानाj स इ!कर कर ह[ए स्वेया! क तिनादोrष हना या । लि2सना चवे मुT कई सक्ष्या प्रस् नाहt तिकया । त्पुश्च उभायापुक्षे क सनाकर तिवेचरण न्यायालया द्वार “प्रश्नाC ना तिनाण<या” पुरिर कर ह[ए अतिभाया क दोषमु तिकया गया, लि2स दोषमुति क रज्या द्वार इस अपु ल मुT चना:
दो गई ह1 ।
4. अपु लथा3/रज्या क तिवेद्वाना अलिCवे क क< ह1 तिक घट्रेना क प्रत्याक्षेदो63 सक्षे चमुररमु यादोवे (अ.स.-1), 2 मुeक क तिपु हu, ना अतिभाया2ना क कथानाक क पुFण< समुथा<ना तिकया ह1 । सक्षे ना स्पुष्ट तिकया ह1 तिक अतिभाया द्वार ट्रेW1क्ट्रेर-ट्रेWlल क अत्यालिCक गति एवे! लपुरवेह पुFवे<क चलना क करण ह याह दोघ<ट्रेना करिर ह[ई, अw उसक सक्ष्या पुर अतिवेश्वेस करना क कई न्यायातिच आCर नाहt था । तिवेचरण न्यायालया ना क वेल ट्रेW1क्ट्रेर-ट्रेWlल क या!तित्रक पुर क्षेण प्रतिवेदोना क आCर मुनाकर अतिभाया2ना क मुमुल क अस्वे कर करना मुT ग!भा र त्रतिट्रे कB ह1 । ट्रेWक्ट्रेर कB स्ट्रेयारिर!ग दोघ<ट्रेना क पुश्च क्षेतिग्रास् ह[ई था । ऐस दो6 मुT, चमुररमु क सक्ष्या पुर तिवेश्वेस ना कर त्रतिट्रेपुFण< तिनाष्कष< तिनाकल गया ह1, 2 तिवेलिC कB दृतिष्ट मुT स्थिस्थार रख 2ना याग्या नाहt ह1 । अतिभाया क तिवेरुद्ध अतिभाया2ना क मुमुल पुFण<w प्रमुतिण रह ह1 । अw प्रश्नाC ना दोषमुति क तिनाण<या अपुस् कर ह[ए अपु ल स्वे कर कB 2कर अतिभाया क दोषलिसद्ध कर दोस्थिण्ड तिकया 2ए ।
5.
अतिभाया/उत्तीरवेदो क तिवेद्वाना अलिCवे ना तिवेचरण न्यायालया क 'प्रश्नाC ना तिनाण<या' क समुथा<ना कर ह[ए याह क< प्रस् तिकया ह1 तिक या!तित्रक पुर क्षेण करना वेल सक्षे स!2या लिस!ह (अ.स.-10) ना अपुना सक्ष्या मुT याह स्पुष्ट रूपु स स्वे कर तिकया ह1 तिक ट्रेW1क्ट्रेर क पुर क्षेण उपुर! तिदोए गए प्रतिवेदोना (प्रदो6< पु -15) क अनासर ट्रेW1क्ट्रेर क नाट्रे, मुडगड<, छर ,
4 / 7 {Acq. A. No.-236 of 2017} सइलTसर, स्ट्रेयारिर!ग, ब्रेक लइट्रे एवे! हड लइट्रे क्षेतिग्रास् पुए गए था था इ!2ना ऑयाल क रिरसवे ह रह था । सथा ह , ट्रेWlल क ह और तिडस्क भा ट्रेFट्रे ह[आ था । उ सक्षे ना प्रतिपुर क्षेण मुT स्वे कर तिकया ह1 तिक स्ट्रेयारिर!ग ट्रेFट्रे 2ना कB स्थिस्थाति मुT वेहना पुर चलक क कई तिनाया!त्रण नाहt रह और वेहना क पुलट्रेना कB पुFण< स!भावेना ना रह ह1 । अw याह स्पुष्ट ह1 तिक दोघ<ट्रेना वेहना मुT ह[ई आकस्थिस्मुक या!तित्रक खर (स्ट्रेयारिर!ग क ट्रेFट्रेना) क करण ह[ई था । अतिभाया2ना याह प्रमुतिण करना मुT पुFण<w असफल रह ह1 तिक दोघ<ट्रेना अतिभाया क उवेलपुना अथावे उपुक्षेपुFण< स!चलना क पुरिरणमु था । ऐस स्थिस्थाति मुT तिवेचरण न्यायालया द्वार पुरिर दोषमुति क तिनाष्कष< न्यायातिच एवे! तिवेलिC सम्मु ह1 । अपु लथा3/रज्या द्वार अपु ल मुT प्रस् तिकए गए क< स्वे कर याग्या नाहt हu, अw अपु ल तिनारस् कB 2ए ।
6. उभायापुक्षे क क< श्रीवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभालख क सFक्ष्मुपुFवे<क पुरिर6 लना तिकया गया ।
7. न्यायादृष्ट! Mallappa and other v. State of Karnataka, (2024) 3 SCC 544 मुT मुनाना या उच्चमु न्यायालया द्वार दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् अपु ल क तिनारकरण ह क छ न्यातियाक लिसद्घ! प्रतिपुतिदो तिकए गए हu 2 कस्थिण्डक-42 मुT तिनाम्नानासर ह1w-
“42. Our criminal jurisprudence is essentially based on the promise that no innocent shall be condemned as guilty. All the safeguards and the jurisprudential values of criminal law, are intended to prevent any failure of justice. The principles which come into play while deciding an appeal from acquittal could be summarised as:
5 / 7 {Acq.
A. No.-236 of 2017} (i) Appreciation of evidence is the core element of a criminal trial and such appreciation must be comprehensive inclusive of all evidence, oral or documentary; (ii) Partial or selective appreciation of evidence may result in a miscarriage of justice and is in itself a ground of challenge; (iii) If the court, after appreciation of evidence, finds that two views are possible, the one in favour of the accused shall ordinarily be followed; (iv) If the view of the trial court is a legally plausible view, mere possibility of a contrary view shall not justify the reversal of acquittal; (v) If the appellate court is inclined to reverse the acquittal in appeal on a reappreciation of evidence, it must specifically address all the reasons given by the trial court for acquittal and must cover all the facts; (vi) In a case of reversal from acquittal to conviction, the appellate court must demonstrate an illegality, perversity or error of law or fact in the decision of the trial court.”
8. प्रस् मुमुल मुT घट्रेनास्थाल क प्रत्याक्षेदो63 सक्षे क रूपु मुT मुeक क तिपु चमुररमु यादोवे (अ.स.-1) ना अतिभाया2ना क समुथा<ना तिकया ह1 । उसक अतिरिर अन्या लि2ना भा
सतिक्षेयाj क पुर क्षेण करया गया ह1, वे सभा अनाश्री सक्षे हu और उन्हT घट्रेना क प्रत्याक्षे ज्ञाना नाहt ह1 । अन्या मुहत्वेपुFण< सतिक्षेयाj मुT तिचतिकत्सक डl. रत्ना ठौक र (अ.स.-9) क सक्ष्या उल्लेखना या ह1, लि2न्हjना मुeक Cना रमु क 6वे क पुर क्षेण कर प्रतिवेदोना (प्रदो6< पु - 14) प्रस् तिकया और याह अतिभामु तिदोया तिक मुeक कB मुeत्या 'दोघ<ट्रेनात्मुक प्रकe ति' कB था । इसक अतिरिर, मुमुल क तिवेवेचक ड .आर. मुण्डवे (अ.स.-8) ना अपुना प्रतिपुर क्षेण मुT स्पुष्ट रूपु स स्वे कर तिकया ह1 तिक दोघ<ट्रेना क उपुर! ट्रेW1क्ट्रेर घट्रेनास्थाल पुर ह पुलट्रे गया था ।
6 / 7 {Acq. A. No.-236 of 2017}
9.
प्रश्नाC ना तिनाण<या क अनासर, या!तित्रक तिवे6षज्ञा क रूपु मुT मुहत्वेपुFण< सक्षे स!2या लिस!ह (अ.स.-10) ना याह कथाना तिकया ह1 तिक वेह भा1रमुगढ़ स स्ट्रेuड क समु पु '2या भा1रमुदोवे ऑट्रे पुर्ट्सस<' क नामु स ग1र2 स!चलिल कर ह1 । उसना दोघ<ट्रेनाग्रास् वेहना क या!तित्रक पुर क्षेण कर अपुना प्रतिवेदोना (प्रदो6< पु -15) प्रस् तिकया ह1 । इस सक्षे ना स्पुष्ट तिकया ह1 तिक उ ट्रेW1क्ट्रेर क अन्या कलपु2r! क क्षेतिग्रास् हना क सथा-सथा उसकB 'स्ट्रेयारिर!ग' भा
ट्रेFट्रे ह[ई था । प्रतिपुर क्षेण क दो:रना इस सक्षे ना याह स्वे कर तिकया तिक यातिदो तिकस वेहना कB स्ट्रेयारिर!ग ट्रेFट्रे 2ए, उस पुर चलक क तिनाया!त्रण समुप्त ह 2 ह1 । ऐस स्थिस्थाति मुT वेहना क पुलट्रेना कB पुFण< स!भावेना ना रह ह1 ।
10. तिवेवेचक ड .आर. मुण्डवे (अ.स.-8) क कथानानासर, दोघ<ट्रेना क उपुर! वेहना घट्रेनास्थाल पुर ह पुलट्रे था । तिवेलिC क याह सस्थातिपु लिसद्ध! ह1 तिक दोस्थिण्डक मुमुलj मुT अतिभाया2ना क अपुना मुमुल 'स!दोह स पुर' प्रमुतिण करना ह ह1 । 2ह! दो मु स!भावे ह वेह! वेह मु प्रभावे हग 2 अतिभाया क पुक्षे मुT ह । प्रस् मुमुल मुT, या!तित्रक पुर क्षेक स!2या लिस!ह (अ.स.-10) क सक्ष्या क दृतिष्टग याह अलिCक स!भातिवे प्र ह ह1 तिक स्ट्रेयारिर!ग ट्रेFट्रेना क करण चलक, वेहना पुर स तिनाया!त्रण ख तिदोया, लि2सक पुरिरणमुस्वेरूपु दोघ<ट्रेना ह[ई और वेहना पुलट्रे गया । इसक तिवेपुर , अतिभाया2ना ऐस कई सक्ष्या प्रस् करना मुT असफल रह ह1 लि2सस याह प्रमुतिण ह सक तिक स्ट्रेयारिर!ग दोघ<ट्रेना क प्रभावेस्वेरूपु दो मुT ट्रेFट्रे था । ऐस स्थिस्थाति मुT, अतिभाया द्वार उपुक्षे एवे! उवेलपुना स वेहना चलना क थ्या स!दोह स पुर प्रमुतिण नाहt रह ह1 ।
11. न्यायादृष्ट! क प्रक6 मुT सक्ष्या तिवेवेचना क फलस्वेरूपु याह न्यायालया पु ह1 तिक तिवेचरण न्यायालया द्वार 2 दोषमुति क तिनाष्कष< अ!तिक तिकया गया ह1 वेह अतिभालख मुT उपुलब्C
7 / 7 {Acq. A. No.-236 of 2017} थ्या और सक्ष्या क तिवेपुर या तिवेरCभास नाहt ह1 था प्रश्नाC ना दोषमुति क तिनाण<या मुT कई अवे1C या अ6द्घ पुरिरलतिक्षे नाहt ह । इसलिलए उसमुT हस्क्षेपु कB आवेश्याक नाहt पुया 2 ।
12.
अw दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याह अपु ल स्वे कर याग्या ना हना स खरिर2 कB 2 ह1 ।
13. तिनाण<या कB प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभालख 6 घ्रपुFवे<क वेपुस प्रतिष ह । सह /- (स!2या क मुर 2यासवेल) न्यायाC 6 पुमुना