Research › Search › Judgment
High Court of Chhattisgarh · body
2015 DAILYLAW 375 (CHH)
The New India Assurance Company Limited v. Shashi Chandravanshi
MAC/1590/2015 · 2026-07-12
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2015
[ 2015 DAILYLAW 375 (CHH) · dailylaw.ai ]
[ 2015 DAILYLAW 375 (CHH) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
1 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015}
CGHC010237272015
2026:CGHC:29415 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिवेतिवेध अपु ल
( प्रतिकर
) क्रमां!क
-1590
/2015
1. द न्या* इं!ति,या इं!श्या.र/स क! पुनी लिलतिमांटे,, द्वार स!भाग या प्र!धक, स!भाग या कया5लया- च6हानी एस्टेटे, प्रथमां ल, सपुल, जी .ई. र.,, तिभालई, लिजील-दग5 (छत्ती सगढ़) । (द.षी वेहानी टे@क क्रमां!क-स .जी .-09- .-0414 क मां क! पुनी ) -----अपु लथB तिवेरूद्घ
1. शतिश च!द्रवे!श वे-तिगरजीश च!द्रवे!श , आया-लगभाग 29 वेषी5, पुश-गHहाणी ,
2. श्रेया च!द्रवे!श तिपु-तिगरजीश च!द्रवे!श , आया-लगभाग 06 वेषी5,
3. समांर च!द्रवे!श तिपु-तिगरजीश च!द्रवे!श , आया-लगभाग 03 मांहा प्रत्याथB क्रमां!क-2 एवे! 3 नीलिलग पुलक स!रक्षक शतिश च!द्रवे!श वे-तिगरजीश च!द्रवे!श
(प्रत्याथB क्रमां!क-1),
4. ललरमां च!द्रवे!श तिपु-जीगद श च!द्रवे!श , आया-लगभाग 62 वेषी5, उपुर.क्त सभा तिनीवेस -ग्रामां धरमांपुर, पुलिलस थनी-तिपुपुरिरया, हास ल-कवेध5, लिजील-क रधमां, छत्ती सगढ़ । (-----दवेक5गणी)
5. *लल शमां5 तिपु-सखदवे शमां5, आया-लगभाग 35 वेषी5, पुश-वेहानी चलक, तिनीवेस - ग्रामां तिरक.नी, थनी-तिपुपुरिरया, हास ल-कवेध5, लिजील-क रधमां (छत्ती सगढ़) । (द.षी वेहानी टे@क क्रमां!क-स .जी .-09- .-0414 क वेहानी चलक)
6. द्वारक च!द्रवे!श तिपु-एस. च!द्रवे!श , तिनीवेस -गयात्री मां!तिदर क पुस कवेध5, लिजील-क र धमां (छत्ती सगढ़) । (द.षी वेहानी टे@क क्रमां!क-स .जी .-09- .-0414 क पु!जी कH स्वेमां ) -----प्रत्याथBगणी POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.07.14 13:02:42 +0530
2 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015} अपु लथB मां क! पुनी द्वार : श्रे दशरथ गप्ता, अलिधवेक्त । दवेक5/प्रत्याथB क्रमां!क-1 स 4 द्वार : श्रे वेVभावे ए. ग.वेध5नी, अलिधवेक्त । प्रत्याथB क्रमां!क-5 एवे! 6 द्वार : क.ई उपुस्थिस्थ नीहाX । न्यायामां*ति5 श्रे स!जीया क मांर जीयासवेल !! तिनीणी5या पु ठ पुर पुरिर !! 13/07/2026
1. मां.टेर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 क] धर 173 क अ!ग5 प्रस् इंस अपु ल मां/ मां.टेर दर्घ5टेनी दवे अलिधकरणी, क रधमां (कवेध5), छत्ती सगढ़ द्वार मां.टेर दर्घ5टेनी दवे प्रकरणी क्रमां!क-128/2014, “शतिश च!द्रवे!श वेगVरहा तिवेरुद्ध *लल शमां5 वेगVरहा” मां/ पुरिर अलिधतिनीणी5या तिदनी!क 03/09/2015 क. चनी6 द गई हाV । लिजीसक हा अपु लथB मां क! पुनी क तिवेरूद्घ थ दवेक5/प्रत्याथB क्रमां!क-1 स 4 क पुक्ष मां/ 31,62,112/-रूपुया क अलिधतिनीणी5या मांया ब्याजी क पुरिर तिकया गया, लिजीस आग स!क्षपु मां/ “प्रश्नीध नी अलिधतिनीणी5या” स स!.लिध तिकया जी रहा हाV ।
2. प्रकरणी क थ्या, स!क्षपु मां/, इंस प्रकर हाe तिक तिदनी!क 24/04/2014 क.
तिगरजीश च!द्रवे!श
(मांHक) कवेध5 स रतित्री लगभाग 09:30 जी मां.टेरसइंतिकल मां/ अपुनी ग्रामां धरमांपुर जी रहा थ । जी वेहा रष्ट्री@ या रजीमांग5 क्रमां!क-12(क) पुर रनी सगर क आग सड़क तिकनीर अपुनी
मां.टेरसइंतिकल खड़ कर उसक स!क क चल* करक मां.इंल फो.नी पुर कर रहा थ, उस समांया तिवेपुर तिदश स टे@क क्रमां!क स .जी .-09- .-0414 (लिजीस आग स!क्षपु मां/
"द.षी वेहानी" स स!.लिध तिकया जी रहा हाV) क चलक *लल शमां5 उक्त वेहानी क. जी एवे! लपुरवेहा पु*वे5क चल हाjए आया लिजीसक] ठ.कर लगनी स तिगरजीश च!द्रवे!श क. ग!भा र उपुहाति करिर हाjई, लिजीसस वेहा र्घटेनीस्थल पुर हा अच हा.कर तिगर गया । उपुस्थिस्थ
3 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015} व्यातिक्तयाl द्वार त्कल एम्ल/स क] सहाया स उस उपुचर हा लिजील तिचतिकत्सलया, कवेध5 ल जीया गया, जीहाn उपुचर क द6रनी उसक] मांHत्या हा. गई । थनी-कवेध5 मां/ मांग5 क्रमां!क-31/2014 कयामां कर मांग5 जीnच क] गई । मांग5 जीnच उपुर! पुलिलस द्वार अपुरध क्रमां!क-112/2014 पु!जी द्ध कर "द.षी वेहानी" क चलक *लल शमां5 क तिवेरुद्ध अ!तिमां प्रतिवेदनी प्रस् तिकया गया ।
3. दवेक5गणी/प्रत्याथB क्रमां!क-1 स 4 द्वार मां.टेर यानी अलिधतिनीयामां, 1988 क] धर 166 क अ!ग5 प्रस् दवे आवेदनी पुर अलिधकरणी नी उभायापुक्ष क. सनीनी क उपुर! "प्रश्नीध नी अलिधतिनीणी5या" पुरिर तिकया । उक्त अलिधतिनीणी5या मां/ अलिधकरणी नी याहा अतिभालिललिख तिकया तिक
"द.षी वेहानी" क चलक *रमां शमां5 थ उसक पु!जी कH स्वेमां द्वारक च!द्रवे!श हाV । सथ हा , याहा भा पुया तिक दर्घ5टेनी क] तिलिथ क. "द.षी वेहानी" अपु लथB मां क! पुनी स तिवेलिधवेo तिमां थ । फोलस्वेरूपु, अलिधकरणी नी तिनीध5रिर प्रतिकर रतिश क भागनी क दतियात्वे अपु लथB मां क! पुनी पुर अलिधर.तिपु तिकया । उक्त अलिधतिनीणी5या एवे! उसस आर.तिपु दतियात्वे क. इंस अपु ल मां/ अपु लथB मां क! पुनी द्वार चनी6 द गई हाV ।
4. अपु लथB मां क! पुनी क तिवेद्वानी अलिधवेक्त क क5 हाV तिक दर्घ5टेनी तिदनी!क-24/04/ 2014 क. र्घतिटे हाjई थ , तिक!
मांग5 स*चनी मां/ तिकस भा वेहानी क उल्लेख नीहाX तिकया गया हाV । इंसक अतिरिरक्त, र्घटेनी क लगभाग 11 तिदवेस पुश्चo तिदनी!क 05/05/2014 क. दजी5 प्रथमां स*चनी पुत्री मां/ भा दर्घ5टेनी अज्ञा वेहानी द्वार करिर हा.नी अ!तिक हाV । उनीक याहा भा
क5 हाV तिक मांHक तिगरजीश च!द्रवे!श , "द.षी वेहानी" क पु!जी कH स्वेमां द्वारक च!द्रवे!श क रिरश् मां/ भा जी थ, लिजीसक करणी प्रतिकर प्रप्ता करनी क उद्देश्या स "द.षी वेहानी" क. तिमांथ्या रूपु स दर्घ5टेनी मां/ स!लिलप्ता दश5या गया हाV । इंस थ्या क समांथ5नी मां/ याहा भा इं!तिग तिकया गया तिक उक्त वेहानी क. र्घटेनी क लगभाग एक मांहा पुश्चo, अथ5o तिदनी!क-27/
4 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015} 05/2014 क. जीप्ता तिकया गया । अs अतिभालख पुर उपुलब्ध सक्ष्या स दर्घ5टेनी मां/ "द.षी
वेहानी" क] स!लिलप्ता प्रमांतिणी नीहाX हा. हाV । ऐस स्थिस्थति मां/ अपु लथB मां क! पुनी पुर प्रतिकर रतिश क भागनी क दतियात्वे अलिधर.तिपु तिकया जीनी तिवेलिधसम्मां नीहाX हाV । इंसलिलए, अपु ल स्वे कर कर अपु लथB मां क! पुनी क तिवेरुद्ध पुरिर "प्रश्नीध नी अलिधतिनीणी5या" अपुस् तिकया जीए ।
5.
दवेक5गणी/प्रत्याथB क्रमां!क-1 स 4 क तिवेद्वानी अलिधवेक्त नी अपु ल क तिवेर.ध कर हाjए क5 प्रस् तिकया तिक मांमांल मां/ मांHक तिगरजीश च!द्रवे!श क] पुत्नी शतिश च!द्रवे!श क अतिरिरक्त प्रत्याक्षदशB सक्ष ध्रुवे लिस!हा क पुर क्षणी करया गया हाV, लिजीसनी स्पुष्ट्री रूपु स याहा कथनी तिकया हाV तिक दर्घ5टेनी "द.षी वेहानी" स हा करिर हाjई थ । उसक सक्ष्या क खण्,नी नीहाX तिकया जी सक हाV । इंसक अतिरिरक्त, "द.षी वेहानी" क चलक *लल शमां5 थ पु!जी कH स्वेमां द्वारक च!द्रवे!श नी भा दर्घ5टेनी मां/ उक्त वेहानी क] स!लिलप्ता क] पुतिष्ट्री क] हाV । उन्हाlनी पुलिलस द्वार प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदनी थ अन्या स!!लिध दस्वेजी भा अतिभालख पुर प्रस् तिकए हाe, लिजीनीस याहा स्पुष्ट्री हा. हाV तिक दर्घ5टेनी क स!!ध मां/ "द.षी वेहानी" क चलक *लल शमां5 क तिवेरुद्ध अतिभाया.जीनी प्रर!भा तिकया गया थ । याहा भा क5 प्रस् तिकया गया तिक अपु लथB मां क! पुनी क] ओर स प्रधनी आरक्षक पु!चरमां वेमां5 क पुर क्षणी तिवेवेचक क रूपु मां/ करया गया हाV । उसक] सक्ष्या स भा इंस थ्या क] पुतिष्ट्री हा. हाV तिक दर्घ5टेनी मां/ "द.षी
वेहानी" हा स!लिलप्ता थ । अs अतिभालख पुर उपुलब्ध मां6लिखक एवे! दस्वेजी सक्ष्या क आल.क मां/ अपु लथB मां क! पुनी क क5 स्वे कर तिकए जीनी या.ग्या नीहाX हाV । इंसलिलए, अपु ल खरिरजी तिकया जीए । अपुनी क5 क समांथ5नी मां/ तिवेद्वानी अलिधवेक्त नी ICICI
. Lombard General Insurance Company Limited v Rajani Sahu and Others, (2025) 2 SCC 599 मां/ प्रतिपुतिद तिवेलिध क हावेल तिदया हाV ।
5 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015}
6. उपुस्थिस्थ पुक्ष क क5 श्रेवेणी तिकए गए थ अतिभालख क स*क्ष्मांपु*वे5क पुरिरश लनी तिकया गया ।
7. मांमांल मां/ एकमांत्री तिवेचरणी या प्रश्नी याहा हाV तिक क्या दर्घ5टेनी मां/ द.षी वेहानी क] स!लिलप्ता रहा ? 8.
वे5मांनी मांमांल मां/ दवेक5 पुक्ष द्वार दर्घ5टेनी क प्रत्याक्षदशB सक्ष क रूपु मां/ ध्रुवे लिस!हा क पुर क्षणी करया गया हाV । इंसक अतिरिरक्त, "द.षी वेहानी" क चलक *लल शमां5 थ पु!जी कH स्वेमां द्वारक च!द्रवे!श क भा पुर क्षणी तिकया गया हाV । इंनी समांस् सतिक्षयाl क कथनी स इंस थ्या क] पुतिष्ट्री हा. हाV तिक दर्घ5टेनी मां/ "द.षी वेहानी" हा स!लिलप्ता थ ।
9. उल्लेखनी या हाV तिक मांHक क] पुत्नी शतिश च!द्रवे!श नी पुलिलस द्वार न्यायालया क समांक्ष प्रस् अ!तिमां प्रतिवेदनी क] प्रमांतिणी प्रतिलिलतिपुयाn भा अतिभालख पुर प्रस् क] हाe, लिजीनीमां/ अ!तिमां प्रतिवेदनी (प्रदश5-ए/1), प्रथमां स*चनी पुत्री (प्रदश5-ए/2), मांग5 स*चनी (प्रदश5-ए/3), शवे पु!चनीमां क] स*चनी (प्रदश5-ए/4), शवे पु!चनीमां (प्रदश5-ए/5), शवे पुर क्षणी हा आवेदनी एवे! प्रतिवेदनी (प्रदश5-ए/6), र्घटेनीस्थल क नीक्श (प्रदश5-ए/7), जीप्ता पुत्रीक (प्रदश5- ए/8) थ तिगरफ्र पुत्रीक (प्रदश5-ए/9) सस्थिम्मांलिल हाe ।
10. द*सर ओर, अपु लथB मां क! पुनी नी अपुनी पुक्ष क समांथ5नी मां/ मांमांल क तिवेवेचक प्रधनी आरक्षक पु!चरमां वेमां5 क पुर क्षणी करया हाV । थतिपु, उक्त सक्ष सतिहा अतिभालख पुर पुर तिक्ष तिकस भा सक्ष क कथनी स ऐस क.ई थ्या पुरिरलतिक्ष नीहाX हा., जी. पुलिलस तिवेवेचनी क तिनीष्कषी~! क खण्,नी कर हा. अथवे दर्घ5टेनी मां/ "द.षी वेहानी" क] स!लिलप्ता पुर स!दहा उत्पुन्न कर हा. । इंस प्रकर, स!पु*णी5 मां6लिखक एवे! दस्वेजी सक्ष्या दर्घ5टेनी मां/ "द.षी
वेहानी" क] स!लिलप्ता क] हा पुतिष्ट्री कर हाe ।
6 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015}
11. पुलिलस द्वार तिवेवेचनी पुश्च प्रस् अतिभाया.ग-पुत्री क सस्थिक्ष्याक मां*ल्या क ति!द पुर मांनीनी या उच्चमां न्यायालया द्वार Rajani Sahu (पु*वे~क्त) क तिनीणी5या क] कस्थिण्,क-8 स 10 मां/ तिनीम्नीनीसर तिवेलिध प्रतिपुतिद क] गई हाVs-
“8 As regards the reliability of charge-sheet and other documents collected by the police during the investigation in motor accident cases, this Court in Mangla Ram v. Oriental Insurance Co. Ltd. [Mangla Ram v. Oriental Insurance Co.
Ltd., (2018) 5 SCC 656 : (2018) 3 SCC (Civ) 335 : (2018) 2 SCC (Cri) 819 : 2018 INSC 311] , held in para 27, thus : (SCC p. 672)
“27. Another reason which weighed with the High Court to interfere in the first appeal filed by Respondents 2 and 3, was absence of finding by the Tribunal about the factum of negligence of the driver of the subject jeep. Factually, this view is untenable. Our understanding of the analysis done by the Tribunal is to hold that Jeep No. RST 4701 was driven rashly and negligently by Respondent 2 when it collided with the motorcycle of the appellant leading to the accident. This can be discerned from the evidence of witnesses and the contents of the charge-sheet filed by the police, naming Respondent 2. This Court in a recent decision in Dulcina Fernandes [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 :
(2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] , noted that the key of negligence on the part of the driver of the offending vehicle as set up by the claimants was required to be decided by the Tribunal on the touchstone of preponderance of probability and certainly not by standard of proof beyond reasonable doubt. Suffice it to observe that the exposition in the judgments already adverted to by us, filing of charge-sheet against Respondent 2 prima facie points towards his complicity in driving the vehicle negligently and rashly. Further, even when the accused were to be acquitted in the criminal case, this Court opined that the same may be of no effect on the assessment of the liability required in respect of motor accident cases by the tribunal.”
7 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015}
9.
It is true that the Tribunal had looked into the oral and documentary evidence including the FIR, final report and such other documents prepared by the police in connection with the accident in question. The Tribunal had also taken note of the fact that based on the final report, the driver of the offending truck was tried and found guilty for rash and negligent driving. The High Court took note of such aspects and found no illegality in the procedure adopted by the Tribunal and consequently dismissed the appeal. 10. In the contextual situation it is relevant to refer to a decision of this Court in Mathew Alexander v. Mohd. Shafi [Mathew Alexander v. Mohd. Shafi, (2023) 13 SCC 510 : 2023 INSC 621] , this Court held thus : (SCC p. 514, para 12)
“12. …A holistic view of the evidence has to be taken into consideration by the Tribunal and strict proof of an accident caused by a particular vehicle in a particular manner need not be established by the claimants. The claimants have to establish their case on the touchstone of preponderance of probabilities. The standard of proof beyond reasonable doubt cannot be applied while considering the petition seeking compensation on account of death or injury in a road traffic accident. To the same effect is the observation made by this Court in Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz [Dulcina Fernandes v. Joaquim Xavier Cruz, (2013) 10 SCC 646 : (2014) 1 SCC (Civ) 73 : (2014) 1 SCC (Cri) 13] which has referred to the aforesaid judgment in Bimla Devi [Bimla Devi v. Himachal RTC, (2009) 13 SCC 530 :
(2009) 5 SCC (Civ) 189 : (2010) 1 SCC (Cri) 1101] .”
12. उपुया5क्त न्यायादृष्ट्री! मां/ प्रतिपुतिद तिवेलिधक लिसद्ध! क प्रकश मां/ अतिभालख पुर उपुलब्ध स!पु*णी5 मां6लिखक एवे! दस्वेजी सक्ष्या क समांग्रा मां*ल्या!कनी करनी पुर याहा थ्या स्पुष्ट्री रूपु स स्थतिपु हा. हाV तिक दर्घ5टेनी मां/ "द.षी वेहानी" क] स!लिलप्ता रहा हाV ।
13. जीहाn क मां क!
पुनी क इंस क5 क स!!ध हाV तिक मांHक तिगरजीश च!द्रवे!श , "द.षी वेहानी" क स्वेमां द्वारक च!द्रवे!श क रिरश् मां/ भा जी थ, इंसलिलए "द.षी वेहानी" क. तिमांथ्या रूपु स
8 / 8 {MA(C) No. 1590 of 2015} दर्घ5टेनी मां/ स!लिलप्ता दश5या गया हाV, मांत्री याहा क5 अतिभालख पुर उपुलब्ध मां6लिखक एवे! दस्वेजी सक्ष्या क. अतिवेश्वेसनी या ठहारनी क लिलए पुया5प्ता नीहाX हाV । उल्लेखनी या हाV तिक प्रत्याक्षदशB सक्ष ध्रुवे लिस!हा क कथनी अखस्थिण्, रहा हाV थ वेहा पुलिलस क अ!तिमां प्रतिवेदनी (प्रदश5-ए/1) मां/ भा स*च द्ध सक्ष हाV ।
14. ऐस स्थिस्थति मां/ याहा न्यायालया पु हाV तिक
Rajani Sahu (पु*वे~क्त) क प्रकरणी मां/ प्रतिपुतिद तिवेलिधक लिसद्ध! क प्रकश मां/ अपु लथB मां क! पुनी क क5 स्वे कर तिकए जीनी या.ग्या नीहाX हाV । अलिधकरणी द्वार पुरिर "प्रश्नीध नी अलिधतिनीणी5या" अतिभालख पुर उपुलब्ध मां6लिखक एवे! दस्वेजी सक्ष्या क अनीरूपु हा.नी स उसमां/ तिकस हास्क्षपु क] आवेश्याक नीहाX पुया जी । फोलस्वेरूपु, अपु ल स्वे कर या.ग्या नीहाX हा.नी स खरिरजी क] जी हाV ।
15. तिनीणी5या क] प्रति क सथ अलिधकरणी क अतिभालख श घ्रपु*वे5क आवेश्याक कया5वेहा हा स*चनीथ5 वे पुलनीथ5 वेपुस प्रतिषी हा. । सहा /- (स!जीया क मांर जीयासवेल) न्यायाध श पो
मन