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अपराध7 का संQान.- कोई 9 यायालय इस अ धनयम के अधीन दB डनीय Yकसी अपराध का संpान उस दशा के 6सवाय नह0ं करेगा िजसम4 Yक ऐसे अपराध को ग-ठत करने वाले त य\ क+ 6लखत kरपोट@ ऐसे यिcत Nवारा क+ गई हो जो भारतीय दB ड सं-हता, 1860 (1860 का के9 S0य अ धनयम सं. 45) क+ धारा 21 म4 यथा पkरभाषत लोक सेवक या कोई य थत यिcत या कोई मा9 यताा1 त उपभेाc ता संगम है, चाहे ऐसा यिcत उस संगम का सद य हो या नह0ं। 2 प3 ट5करण.- इस धारा के योजन\ के 6लए ''मा9 यताा1 त उपभोc ता संगम'' से त समय वृ त Yकसी व ध के अधीन इस ]प म4 रिज 0कृत कोई वैिछक उपभोc ता संगम अ6भेत है। 67¼18½ jktLFkku jkt&i=] Qjojh 7] 2014 Hkkx 4 ¼d½ 18