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विव िवि्यायय प्राधि ाररयों और नि ायों ायतिाहहयों ा क सी भी रर्तित - ारण अविधिमान्य िहीं होिा.- धाश् ाधाद्द।ाक। कअ कित कसी भी प्राननकारी ।ा यन वका। का कद का।धा, ।ा का।धाााोी ससकअ सयस।ों डें कित कसी ररज्ध क धाद्द।डान वधा कअ कार ।ा ऐसअ कित कसी व्।ज्ध कअ का।धााािो।ों डें भाग कअन वअ कअ कार , जद धतपाश् ्ाध् ऐसा करन वअ का ोकयार न वोील पाा।ा जाधा ोै, िधाननडान्। न वोील ोदगी 57¼34½ jktLFkku jkt&i=] Qjojh 26] 2019 Hkkx 4¼d½ 34