Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 15

नि यमों का अिुपालि क ए ब) िा समाचारपत्र के मुद्रण या प्रकािि के शल ए िाजस् ा ---6 [(1)] जो कोई, इिमें इिके प

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नि यमों का अिुपालि क ए ब) िा समाचारपत्र के मुद्रण या प्रकािि के शल ए िाजस् ा ---6 [(1)] जो कोई, इिमें इिके प.र्व अधि कधा त नि यमों क अिुप लि कक ए बब ि कक िीे िम चन रप् क 7 [िंप दि] मुिण य प्रक िि करेग , य जो कोई यह ज िते हुए कक 8 [उि िम चन रप्] की ब बत उत त नि यमों क अिुप लि िहीं कक य गय है, कक िीे 9 [िम चन रप् ] क 7 [िंप दि] मुिण य प्रक िि करेग य उिक िंप दि ,मुिण य प्रक िि करर् एग , र्ह मष्ज स् ेे. के िमक्ष दोषसि िद्ध पर, जुम विे िे जो, 2 [दो हज र] रूपए िे अधि क क िहीं होग य क र र् ि िे, ष्ज िकी अर्धि 3 [छह म ि] िे अधि क की िहीं होगीे, य दोिों िे , दंड त कक य ज एग । 10 [(2)] जह ं उपि र (1) के अिीेि कक िीे िम चन रप् के िम्बन ि में कोई अपर ि कक य गय है र्ह ं मष्ज स् ेे., उत त उपि र के अिीेि अधि रोिप त दं के अनत रर त त , उि िम चन रप् की ब बत की गई घोषण को भीे रद्द कर िकेग । ] 11 [15क. िारा 8 के अिीि घोषणा ि करिे के शल ए िाजस् ा --- यद्रद कोई व् यष्त त , जो कक िीे िम चन रप् क मुिक य प्रक िक िहीं रह गय है, ि र 8 के अिुप लि में घोषण करिे में अिफल रहेग य घोषण करिे में उपेक्ष करेग तो र्ह मष्ज स् ेे. के िमक्ष दोषसि िद्ध पर, जुम विे िे जो, दो िौ रूपए िे अधि क क िहीं होग , दं िीेय होग । ________________________________________________________________________

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