Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 13

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नििणचि खण् ड-4 [1] इि अधि नि यम में, जब तक कक कोई ब त िर् षय य िंदभव में िर् रूद्ध ि हो,- “पुस् तक’ के अन तगवत कक िीे भीे भ ष में प्रत येक ष्ज ल द, ष्ज ल द क भ ग य ण् और पुष्स् त क और पृाक रूप िे मुद्रि त 5*** म िधचन ्, चन .व, रेण ंकि य स् र्रसल िप प् है : 6* * * * 7[“ िम् प दक ” िे र्ह व् यष्त त असभ प्रेत है, जो उि ि मग्रीे के चनयि पर नि यं्ण रणत है, जो कक िीे िम चन रप् िे प्रक सि त की ज तीे है:] 8* * * * “मष्ज स् ेे.” िे ऐि व् यष्त त असभ प्रेत है, जो 9 मष्ज स् ेे. की प.री िष्त त यों क प्रयोग करत है और इिके अन तगवत 10(पुसल ि मष्ज स् ेे. 11*** भीे है : 7 [ “ िम चन रप्” िे कोई मुद्रि त क सल क कृनत असभ प्रेत है ष्ज िमें ि र्वजनि क िम चन र य ि र्वजनि क िम चन रों की िमीेक्ष अन तिर्वष् . है :] 12* * * * 13[ “ प् ” िे कोई भीे दस् त र्ेज असभ प्रेत है और इिके अन तगवत पुस् तक िे सभ न ि िम चन रप् भीे है:] “ िर् द्रह त” िे केन िीय िरक र द्र् र ि र 20क के अिीेि बि ए गए नि यमों द्र् र िर् द्रह त असभ प्रेत है ; “ प्रेि रष्ज स् े र ” िे ि र 19क के अिीेि केन िीय िरक र द्र् र नि युत त भ रत क िम चन रप् रष्ज स् े र असभ प्रेत है और इिके अन तगवत प्रेि रष्ज स् े र के िभीे कृत यों य उिमें िे कक िीे को करिे के सल ए केन िीय िरक र द्र् र नि युत त कोई अन य व् यष्त त भीे है : “मुिण” के अन तगवत चनिमुिण ता सि ल मुिण द्र् र मुिण भीे है: “रष्ज स् .र” िे ि र 19 ण के अिीेि रण गय िम चन रप्ों क रष्ज स् .र असभ प्रेत है ।

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