Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 1

1960 के अधि नि यम िं

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1960 के अधि नि यम िं. 26 की ि र 6 द्र् र (1-10-1960 िे) कुछ िब् दों के स् ा ि पर प्रनत स् ा िप त । (िाराएं 19ट-20क) प्रेस और पुस् ाक रजि स् ी.करण अधि नि यम, 1867 19ट. िारा 19 घ या िारा 19ड. आदद के उल् लंघि के शल ए िाजस् ा -यद्रद कक िीे िम चन रप् क प्रक िक – (क) ि र 19घ य ि र 19 . के उपबन िों क अिुप लि करिे िे इंक र करेग य उिकी उपेक्ष करेग , य 1* * * * * (ग) िम चन रप् में, उि िम चन रप् िे िम् बष्न ि त कोई ऐिीे िर् सि ष्ष् . य ं ि र 19घ के णं (ण) के अिुिरण में प्रक सि त करेग , ष्ज िके सम थ् य होिे के ब रे में िर् श र् ि करिे क उिके प ि क रण है, तो र्ह जुम विे िे, जो प ंचन िौ रूपए तक क हो िकेग , दं िीेय होग । 19 . िािकार. के अिुधच ा प्रकटि के शल ए िाजस् ा - यद्रद इि अधि नि यम के अिीेि ज िक री के िंग्रहण के िम् बन ि में लग हुआ कोई व् यष्त त इि अधि नि यम के अिीेि दी गई कक िीे ज िक री य प्रस् तुत की गई कक िीे िर् र्रणीे की िर् षयर्स् तु को, इि अधि नि यम के अिीेि अपिे कततवव् यों के नि ष् प दि िे य इि अधि नि यम य भ रतीेय दं िंद्रह त (1860 क 45) के अिीेि कक िीे अपर ि के असभ योजि के प्रयोजिों िे अन या ज िब.झकर प्रक. करेग तो र्ह ऐिीे अर्धि के क र र् ि िे, जो छह म ि तक की हो िकेगीे , य ऐिे जुम विे िे, जो एक हज र रूपए तक क हो िकेग , य दोिों िे, दं िीेय होग ।] भाग 6 प्रकीणण 2 [20. राज्य सरकार की नि यम )िािे की िजता -(1) र ज् य िरक र र जप् में अधि ि.चनि द्र् र , ऐिे नि यम (जो ि र 20क के अिीेि केन िीय िरक र द्र् र बि ए गए नि यमों िे अिंगत िहीं है ) जो इि अधि नि यम के उद्देश यों को कि य ष्न र् त करिे के सल ए आर्श यक य र् ंछिीेय हों , बि िकेगीे । (2) इि ि र के अिीेि र ज् य िरक र द्र् र बि य गय प्रत येक नि यम, बि ए ज िे के पश चन तम या िीे्,र ज् य िर् ि िमं ल के िमक्ष रण ज एग । ] 3 [20क. केन द्र.य सरकार की नि यम )िािे की िजत ा -(1) केन िीय िरक र, र जप् में अधि ि.चनि द्र् र नि म् िसल णण त के सल ए नि यम बि िकेगीे । क ऐिीे िर् सि ष्ष् . य ं िर् द्रह त करि जो ि र 5 के अिीेि की गई ता हस् त क्षरर त घोषण में दी ज िकेगीे 4 [और र्ह प्ररूप, ष्ज िमें ता र्ह रीनत ष्ज ििे िम चन रप् के मुिक,प्रक िक,स् र् मीे ता िंप दक के ि म और उिके मुिण ता प्रक िि क स् ा ि उि िम चन रप्ों की प्रत येक प्रनत पर मुद्रि त कक ए ज िकेंगे ] ; 5[(ण) र्ह रीनत िर् द्रह त करि , ष्ज ििे मष्ज स् ेे. की प्र धि क रर क मुि िे अिुप्रम णण त कक िीे घोषण की प्रनत य ं य कक िीे घोषण को अधि प्रम णण त करिे िे इन क र करिे र् ले कक िीे आदेि की प्रनत य ं घोषण करिे र् ले ता उि पर हस् त क्षर करिे र् ले व् यष्त त को ता प्रेि रष्ज स् े र को भेजीे ज एं ] ; (ग) र्ह रीनत िर् द्रह त करि , ष्ज ििे कक िीे िम चन रप् की प्रनत य ं ि र 11ण के अिीेि प्रेि रष्ज स् े र को भेजीे ज एं ; (घ) र्ह रीनत िर् द्रह त करि , ष्ज ििे ि र 19ण के अिीेि रष्ज स् .र रण ज ए ता उिमें कौि िीे िर् सि ष्ष् . य ं हों ; ( .) उि िर्सि ष् .यों को िर् द्रह त करि , जो प्रेि रष्ज स् े र को कक िीे िम चन रप् के प्रक िक द्र् र भेजे ज िे र् ले र् िषवक िर् र्रण में दी ज एं ; (चन) र्ह प्ररूप ता रीनत िर् द्रह त करि , ष्ज ििे ि र 19घ के णं (क) के अिीेि र् िषवक िर् र्रण य ि र 19 . के अिीेि िर् र्रण, आंकडे य अन य ज िक री प्रेि रष्ज स् े र को भेजीे ज ए ;

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