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मण्डल को हनयम बनाने की शहि – (1) मण्डल समय-समय पर, अपनी पद्धहत और प्रकिया को तथा अन्य राजस्व न्यायालयों द्वारा अनुसररत की जाने वाली प्रकिया को हवहनयहमत करते हुए, इस संहहता के उपबन्धों से संगत हनयम बना सकेगा और ऐसे हनयमों द्वारा अनुसूची 1 में से समस्त हनयमों या उनमें से ककसी भी हनयम को बाहतल कर सकेगा, पररवर्ततत कर सकेगा या उसमें पररवधडन कर सकेगा । (2) हवहशष्टतया तथा उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शहियों की व्यापकता पर प्रहतकूल प्रभाव डाले हबना, ऐसे हनयमों में हनम्नहलहखत समस्त हवषयों या उनमें से ककसी भी हवषय के हलये उपबन्ध हो सकेंगे, अथाांत्: – (क) साधारणत: या ककन्हीं हवहनर्ददष्ट िेत्रों में समन, सूचनाओं तथा अन्य आदेहशकाओं की डाक द्वारा या ककसी अन्य रीहत में तामील और ऐसी तामील का सबूत; (ख) पिकारों तथा साहियों को समन करने की राजस्व अहधकाररयों की शहि का हवहनयमन तथा साहियों के हलये व्ययों की मंजूरी; (ग) मान्यताप्राप्त अहभकताडओं का इस संहहता के अधीन की कायडवाहहयों में उनके द्वारा की जाने वाली उपसंजाहतयों, ककये जाने वाले आवेदनों तथा ककये जाने वाले कायों के बारे में हवहनयमन; 29 (घ) वह प्रकिया हजसका अनुपालन जंगम तथा स्थावर (Movable and immovable) सभपहत्तयों की कुकी करने में ककया जायेगा; (ड़) हवियों को प्रकाहशत करने, संचाहलत करने, अपास्त करने तथा उनकी पुहष्ट करने के हलये प्रकिया तथा ऐसी कायडवाहहयों से संसि (ancillary) समस्त आनुषंहगक हवषय; (च) पशुधन तथा अन्य जंगम सभपहत्त का, जबकक वह कुकी के अधीन हो अनुरिण तथा उसकी अहभरिा, ऐसे अनुरिण तथा ऐसी अहभरिा के हलये देय फीस, ऐसे पशुधन तथा सभपहत्त का हविय, और ऐसे हविय के आगम; (छ) अपीलों तथा अन्य कायडवाहहयों का समेकन (Consolidation); (ज) ऐसे समस्त प्ररूप, रहजस्टर, पुस्तकें, प्रहवहष्टयाँ तथा लेखे जो राजस्व न्यायालयों के कामकाज के सभपादन के हलये आवश्यक या वांछनीय हों; (झ) वह समय हजसके भीतर ककसी अहभव्यहि उपबन्ध् के अभाव में अपीलें फाइल की जा सकेंगी या पुनरीिण के हलये आवेदन फाइल ककये जा सकेंगे; (ज्ञ) ककन्हीं भी कायडवाहहयों के तथा उनके आनुषंहगक (Incidental) खचें; (ट) कमीशन पर साहियों की परीिा और ऐसी परीिा से आनुषंहगक व्ययों का भुगतान; (ठ) अजी लेखकों का अनुज्ञापन और उनके आचरण का हवहनयमन । (3) ऐसे हनयम पूवड प्रकाशन की शतड के तथा राज्य सरकार के अनुमोदन के अध्यधीन होंगे, और उनके इस प्रकार बनाये जाने तथा अनुमोकदत हो जाने के पिात्, वे राजपत्र में प्रकाहशत ककये जायेंगे और प्रकाशन की तारीख से या ऐसी अन्य तारीख से, जो कक हवहनर्ददष्ट की जाये, उनका वही बल और प्रभाव होगा मानों कक वे अनुसूची 1 में अन्तर्तवष्ट थे।