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खातों का हनपटारा – (1) यकद कोई ऐसा भूहमस्वामी, हजसकी भूहम पर धारा 59 के अधीन कृहष के प्रयोजन के हलये ककया गया हो, या जो भूहम को हनवास के प्रयोजनों के हलये धारण करता है, ककन्हीं ज्ञात वाररसों के हबना मर जाय, तो तहसीलदार उसकी भूहम का कब्जा ले लेगा और उसे एक बार में एक वषड की कालावहध के हलये पट्टे पर दे सकेगा । (2) यकद तहसीलदार द्वारा भूहम का कब्जा लेने की तारीख से तीन वषड के भीतर कोई दावेदार उस खाते को उसे वापस कदलाये जाने के हलये आवेदन करता है; तो तहसीलदार ऐसी जांच के पिात् जैसी कक वह उहचत समझे, ऐसे दावेदार को उस भूहम का कब्जा कदलवा सकेगा या उसका दावा नामंजूर कर सकेगा । (3) उपधारा (2) के अधीन पाररत तहसीलदार का आदेश अपील का पुनरीिण के अध्यधीन नहीं होगा ककतु कोई भी ऐसा व्यहि, हजसका कक दावा उपधारा (2) के अधीन नामंजूर कर कदया गया हो तहसीलदार का आदेश संसूहचत ककया जाने की तारीख से एक वषड के भीतर, अपना हक स्थाहपत करने के हलये हसहवल वाद फाइल कर सकेगा, और ऐसा वाद फाइल कर कदया जाने की दशा में तहसीलदार उपधारा (1) में उपबंहधत ककये गये अनुसार भूहम को तब तक पट्टे पर देता रहेगा जब तक कक उस वाद का हवहनिय न हो जाये । (4) यकद तहसीलदार द्वारा उस भूहम का कब्जा हलये जाने की तारीख से तीन वषड के भीतर कोई दावेदार सामने नहीं आता है या यकद वह दावेदार, हजसका कक दावा उपधारा (2) के अधीन नामंजूर कर कदया गया हो, उपधारा (3) में उपबंहधत ककये गये अनुसार एक वषड के भीतर वाद फाइल नहीं करता है, तो तहसीलदार मृत भूहमस्वामी के उस खाते में के अहधकार को नीलामी द्वारा बेच सकेगा । (5) तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध में ककसी बात के होते हुए भी, ऐसा दावेदार, जो उस भूहम में, हजसके कक संबंध में इस धारा के उपबंधों के अनुसार कायडवाही की जा चुकी है, अपना हक स्थाहपत कर देता है, उपधारा (1) के अधीन देय लगान, तथा उपधारा (4) के अधीन उगाहे गये हविय आगमों का ही हकदार होगा और उसमें से उस खाते पर भू-राजस्व के मद्दे शोध्य समस्त राहशयां तथा प्रबंध और हविय के व्यय काट हलये जायेंगे ।