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बकाया की वसूली के हलये आदेहशका.- सरकार को या ग्राम सभा को देय भू- राजस्व का बकाया तहसीलदार द्वारा हनम्नहलहखत आदेहशकाओं में से ककसी एक या अहधक आदेहशकाओं द्वारा वसूल ककया जा सकेगा – (क) जंगम सभपहत्त की कुकी तथा हविय द्वारा; (ख) उस खाते की हजस पर बकाया शोध्य है, कुकी तथा हविय द्वारा और जहां ऐसा खाता एक से अहधक सवेिण-संखयाकों या भू–खंड संखयांकों से हमलकर बना हो, वहां ऐसे सवेिण संखयांकों में से एक या अहधक सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयांकों के, जैसा भी कक उस बकाया को वसूल करने के हलये आवश्यक समझा जाय, हविय द्वारा: परन्तु ककसी सहकारी सोसायटी के ककन्ही शोध्यों की वसूली के हलये ककसी भी खाते का हविय, धारा 154-क में हवहहत प्रककया को पहले हन:शेष ककए हबना नही ककया जायगा; (खख) उस खाते की, हजस पर कक बकाया शोध्य है, कुकी द्वारा तथा उसे धारा 154-क के अधीन पट्टे पर देकर; (खखख) बकायादार के ककसी अन्य खाते की, जो कक कृहष के प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाया जाता हो, कुकी द्वारा तथा उसे धारा 154-क के अधीन पट्टे पर देकर; (ग) बकायादार की ककसी अन्य स्थावर सभपहत्त की कुकी तथा हविय द्वारा: परन्तु खंड (क) तथा (ग) में हवहनर्ददष्ट की गई आदेहशकाओं से हनम्नहलहखत की कुकी तथा हविय नहीं हो सकेगा, अथाडत् -. 64 (एक) बकायादार, उसकी पत्नी और उसके बच्चों के पहहनने के आवश्यक वस्त्र, भोजन बनाने के बतडन, चारपाइयाँ तथा हबछौने और ऐसे हनजी आभूषण हजन्हे कोई स्त्री धार्तमक प्रथा के अनुसार अपने से पृथक् नहीं कर सकती; (दो) हशहल्पयों के औजार और यकद बकायादार कृषक है तो याहन्त्रक शहि द्वारा चाहलत उपकरण के अहतररि उसके खेती के उपकरण और ऐसे मवेशी तथा बीज जो तहसीलदार की राय में, उसे उस हैहसयत में अपनी जीहवका उपार्तजत करने में समथड बनाने मे हलये आवययक हो; (तीन) वे वस्तुएं जो केवल धार्तमक हवन्यासों के उपयोंग के हलये पृथक रख दी गई हो; (चार) ककसी कृषक के तथा उसके अहधभोग में के गृह तथा अन्य भवन (उनकी सामहग्रयों तथा उनके स्थलों सहहत एवं उस भूहम सहहत, जो कक उनसे हबलकुल लगी हुई हों तथा उनके उपयोग के हलये आवश्यक हो: परन्तु यह और भी कक खंड (बी) में हवहनर्ददष्ट की गई आदेहशका खाते की कुकी तथा हविय की अनुज्ञा उस दशा में नहीं देगी जहां कक बकायादार- (एक) अनुसूहचत िेत्रों में छह हेक्टर या छह हेक्टर से कम भूहम; या (दो) अन्य िेत्रों में, चार हेक्टर या चार हेक्टर से कम भूहम धारण करता हो । स्पष्टीकरण.- इस परन्तुक के प्रयोजन के हलये “अनुसूहचत िेत्र” से अहभप्रेत है कोई ऐसा िेत्र जो भारत के संहवधान की पंचम अनुसूची की कंहडका 6 के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के भीतर अनुसूहचत िेत्र घोहषत ककया गया हो।